कविता “बाल-वर्णन” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का पंद्रहवां अध्याय है। यह पोस्ट Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह कविता सूरदास द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “बाल-वर्णन” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Hindi Question Answers
Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Summary
कविता का सार
सूरदास द्वारा रचित ‘बाल-वर्णन’ कविता में श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की भोली, चंचल और मनमोहक झलक प्रस्तुत की गई है। कविता के तीनों पदों में उनके शैशव से बाल अवस्था तक का क्रमिक चित्रण मिलता है। पहले पद में नन्हे कृष्ण का बोलना सीखना और माता यशोदा का स्नेहपूर्ण संरक्षण दिखाया गया है। दूसरे पद में उनका माखन-प्रेम और तोतली वाणी बाल-सुलभ चेष्टाओं को उजागर करती है। तीसरे पद में कुछ बड़े हो चुके कृष्ण गाएँ चराने वन जाने की इच्छा प्रकट करते हैं। पूरी कविता में बालकृष्ण की निश्छलता, चंचलता और मातृ-वात्सल्य का सुंदर चित्र उभरता है।
Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Explanation
पद्यांशों के प्रसंग सहित सरलार्थ
- कहन लागे मोहन मैया – मैया ।
नंद महर सौं बाबा-बाबा, अरु हलधर सौं भैया ।
ऊँचे चढ़ि – चढ़ि कहति जसोदा, लै लै नाम कन्हैया ।
दूरि खेलन जनि जाहु लला रे, मारेगी काहु की गैया
गोपी ग्वाल करता कौतूहल, घर-घर बजति बधैया
सूरदास प्रभु तुम्हारे दरस कौं, चरननि की बलि जैया ॥
शब्दार्थ- मैया = माँ। अस = और। हलधर = बलदेव, श्रीकृष्ण के बड़े भाई । चढ़ि-चढ़ि = चढ़कर । जनि = मत । लला = प्यारे, लाल । काहू की = किसी की । गैया = गाय । कौतूहल = खेल ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग–1’ में संकलित ‘बाल-वर्णन’ कविता से लिया गया है। इसके रचयिता भक्त कवि सूरदास हैं। इस पद में श्रीकृष्ण के शैशवकाल का मनोहारी चित्रण किया गया है।
सरलार्थ— श्रीकृष्ण अब कुछ बड़े हो गए हैं और बोलना सीखने लगे हैं। वे अपनी माता को “मैया”, पिता नंद को “बाबा-बाबा” और बलराम को “भैया-भैया” कहकर पुकारते हैं। माता यशोदा घर की ऊँचाई पर चढ़कर कन्हैया को नाम लेकर बुलाती हैं और कहती हैं—हे मेरे लाल! दूर खेलने मत जाना, कहीं किसी की गाय तुम्हें मार न दे। ग्वाल-बाल और गोपियाँ खेल-कूद व हँसी-मज़ाक कर रहे हैं और घर-घर में खुशियाँ मनाई जा रही हैं। अंत में कवि कहते हैं कि हे प्रभु कृष्ण! मैं आपके दर्शन के लिए आपके चरणों की बलिहारी जाता हूँ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
(क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) यशोदा माता श्री कृष्ण से क्या कहती थी ?
(ग) कृष्ण किस-किस को पुकारने लगे थे ?
उत्तर — (क) कवि सूरदास, कविता -बाल वर्णन ।
(ख) यशोदा माता श्री कृष्ण को ऊँची छत पर चढ़ कर पुकारती थीं और अधिक दूर जाने से रोकती थीं क्योंकि उसे भय है कि कहीं किसी की गाय उसे मार न दे।
(ग) श्रीकृष्ण नंद बाबा को ‘बाबा-वावा’ और बलराम को ‘भैया’ कह कर पुकारने लगे थे।
- खीझत जात माखन खात ।
अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात ।
कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात ।
कबहुँ झुकि के अलक खचत, नैन जल भरि जात ।
कबहुँ तोतर बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात ।
सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात ।
शब्दार्थ— खीझत = गुस्सा करना। अरुन = लाल । लोचन = आँख । जँभात = जम्हाई लेना । घुटुरुनि = घुटनों । धूरि-धूसर = धूल से लथ-पथ । गात = शरीर । अलक = बालों की लट । कबहुँ = कभी। नैन = आँखें । निरखि = देख । सोभा = शोभा । निमिष = पल भर के लिए।
प्रसंग— यह पद्यांश भी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग–1’ में संकलित ‘बाल-वर्णन’ कविता से लिया गया है। इसमें बालकृष्ण की चंचल और मोहक बाल-लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया है।
सरलार्थ— श्रीकृष्ण माखन खाते समय कभी खीझ जाते हैं। उनकी आँखें लाल हैं, भौंहें टेढ़ी हैं और वे बार-बार जम्हाई लेते हैं। कभी वे घुटनों के बल चलते हैं, जिससे उनके पैरों की पायलें रुनझुन करती हैं। उनका शरीर धूल से सना हुआ है। कभी वे झुककर अपने बालों की लट खींच लेते हैं, जिससे उनकी आँखों में आँसू भर आते हैं। कभी वे तोतली बोली में बोलते हैं और कभी पिता को पुकारते हैं। कवि कहते हैं कि बालकृष्ण की इस सुंदर शोभा को देखकर माता यशोदा उन्हें एक पल के लिए भी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने देतीं।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
(क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) श्री कृष्ण क्या कर रहे थे ?
(ग) यशोदा माता क्या चाहती थी ?
उत्तर-
(क) कवि – सूरदास, कविता – वाल वर्णन।
(ख) श्री कृष्ण मक्खन खा रहे थे। उन्हें नींद आ रही थी इसलिए वे खाने के साथ- साथ खीझ भी रहे थे। उनकी आँखें नींद के कारण लाल हो गई थीं। घुटनों के बल चलने के कारण उनका सारा शरीर धूल से सना हुआ था । खीझ के कारण वे अपने ही हाथों से अपने वाल खींच लेते हैं और फिर दर्द से उन की आँखों में आँसू भर आते हैं।
(ग) यशोदा माता चाहती थीं कि श्रीकृष्ण से वह पल भर भी दूर न हो। वह स उनके साथ बनी रहे ।
- मैया हाँ गाइ चरावन जैहों ।
तू कहि महर नन्द बाबा सौं, बड़ो भयो न डरै हों ।
“रैता, पैता, मना, मनसुखा, हलधर संगहि रैहों ।
बंसीबट तर ग्वालिन कैं संग, खेलत अति सुख पैहों ।
ओदन भोदन दै दधि कावरि, भूख लगे तै खैहों।
सूरदास है साख जमुन – जल सौंह देहु जु नहैहों ॥
शब्दार्थ— गाइ = गाय । चरावन = चराने। जैहौं = जाऊँगा। भयो = हो गया। डरैहों – डरेगा। संगहि = साथ। तर = पेड़। पैहों = पाऊँगा। ओदन = चावल । दधि = दही । कांवरी. मटका । खैहों = खाऊँगा। नहैहों = नहाऊँगा ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग–1’ में संकलित ‘बाल-वर्णन’ कविता से लिया गया है। इसमें श्रीकृष्ण की कुछ बड़ी अवस्था का चित्रण किया गया है।
सरलार्थ— श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा से कहते हैं—माँ! मैं गाय चराने के लिए जाऊँगा। तुम नंद बाबा से कह देना कि अब मैं बड़ा हो गया हूँ, इसलिए डरता नहीं हूँ। मैं रेता, पैता, मना, मनसुखा और बलराम भैया के साथ रहूँगा। बंसीवट के नीचे ग्वाल-बालों के साथ खेलकर बहुत आनंद पाऊँगा। तुम मुझे चावल का भोजन और दही की मटकी दे देना, भूख लगने पर मैं खा लूँगा। कवि कहते हैं कि कृष्ण अपनी माता को यमुना जल की सौगंध देते हैं कि वे उसमें स्नान भी नहीं करेंगे।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
(क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) श्रीकृष्ण अपनी माँ से क्या कह रहे थे ?
(ग) यमुना नदी में न नहाने के विषय में कृष्ण क्या कहते हैं ?
उत्तर- (क) कवि – सूरदास, कविता – वाल वर्णन ।
(ख) श्री कृष्ण अपनी माँ से कहते थे कि वे बड़े हो गए हैं और अब वे गाय चराने के लिए बलराम भैय्या तथा संगी-साथियों के साथ जाएँगे ।
(ग) यमुना नदी में न नहाने के विषय में कृष्ण कहते हैं कि उसे कसम दिलवा दो या यमुना का जल ग्वाह है कि वे यमुना नदी में बिल्कुल नहीं नहायेंगे।
ध्यान देने योग्य शब्द
| काहू | किसी का |
|---|---|
| कौतूहल | जिज्ञासा |
| चरननि | चरण |
| अरुन | लाल/ सूर्य |
| अलक | बाल/लट |
| तोतर | तोतला |
| निरखि | देखकर |
| निमिष | पलक |
| चरावन | चराने |
| हंलधर | बलराम |
| ओदन | चावल |
| दधि | दही |
Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Hindi Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और सराहना
प्रश्न 1. ब्रज के घर-घर में खुशियाँ क्यों मनाई जा रही हैं ?
उत्तर- ब्रज के घर-घर में खुशियाँ इसलिए मनाई जा रही हैं, क्योंकि बाल श्रीकृष्ण बोलने लगे हैं। अब वे मैया मैया, बाबा बाबा एवं भैया- भैया कहने लगे हैं।
प्रश्न 2. यशोदा बालक कृष्ण को घर से दूर खेलने क्यों नहीं जाने देतीं ?
उत्तर – यशोदा बालक श्रीकृष्ण को घर के दूर खेलने इसलिए नहीं जाने देतीं, क्योंकि वह डरती है कि कहीं किसी की गाय बाल कृष्ण को सींग आदि न मार दे।
प्रश्न 3. आपके विचार से कृष्ण क्यों खीझ रहे हैं ?
(क) इच्छा पूरी न होने के कारण
(ख) मनचाही वस्तु खाने को न मिलने के कारण
(ग) मक्खन खाने के लिए बाध्य किए जाने के कारण
(घ) अधूरी नींद से जगा दिए जाने के कारण
(च) अन्य कारण जो तुम उचित समझते हो ।
उत्तर- (घ) अधूरी नींद से जगा दिए जाने के कारण।
प्रश्न 4. ‘बड़ो भयो‘ कहकर कृष्ण क्या जताना चाहते हैं ?
उत्तर—’बड़ो भयो’ कहकर बाल कृष्ण यह जताना चाहते हैं कि अब वे बड़े हो गए हैं। अतः उन्हें गाएँ चराने वन में जाने देना चाहिए।
प्रश्न 5. कृष्ण यमुना में न नहाने की कसम खा रहे हैं, क्योंकि-
(क) वे बड़े भाई बलराम के साथ ही रहना चाहते हैं
(ख) वे पानी से डरते हैं
(ग) वे माँ की आशंका को दूर करना चाहते हैं
(घ) वे यमुना में नहीं नहाना चाहते।
उत्तर – (ग) वे माँ की आशंका को दूर करना चाहते हैं।
प्रश्न 6. बाल-वर्णन के इन पदों के आधार पर बालक के स्वभाव की कुछ विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर- सूरदास द्वारा वर्णित बालक कृष्ण के स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—
- बालक थोड़ा बड़ा होने पर तुतली (तोतली) वाणी में बोलता है। उसकी तोतली बातें अत्यंत मधुर और मन को आकर्षित करने वाली होती हैं।
- बालक चंचल और हठी स्वभाव का होता है। वह बात-बात पर खीझ जाता है और अपनी इच्छा पूरी न होने पर जिद करने लगता है।
- बालक भावुक होता है। वह पल-भर में रोने लगता है और अगले ही क्षण प्रसन्न होकर हँसने लगता है।
प्रश्न 7. दूसरे पद में बालक कृष्ण का जो चित्रात्मक वर्णन है, उसे अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर- दूसरे पद में बालक श्रीकृष्ण का अत्यंत सजीव और मनोहारी चित्र प्रस्तुत किया गया है। वे खीझते हुए माखन खा रहे हैं। उनकी आँखें लाल हैं और भौंहें टेढ़ी हो गई हैं। वे बार-बार जम्हाई लेते हैं। कभी वे घुटनों के बल चलते हैं, जिससे उनके पायलों की रुनझुन सुनाई देती है। उनका पूरा शरीर धूल से लथपथ है। कभी वे झुककर अपने बालों की लट खींच लेते हैं, जिससे उनकी आँखों में आँसू भर आते हैं। वे तोतली बोली में ‘तात-तात’ कहते हुए अत्यंत सुंदर लगते हैं। उनकी बाल-छवि अत्यंत मोहक और आकर्षक है।
Bal Varnan Chapter 16 Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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