पाठ “नादान दोस्त” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का तीसरा अध्याय है। यह पोस्ट Nadan Dost Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह पाठ प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ ” नादान दोस्त” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Bachpan Class 6th Hindi Chapter 2 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Nadan Dost Class 6th Hindi Question Answers
Nadan Dost Class 6th Hindi Chapter Summary
प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी ‘नादान दोस्त’ बच्चों की मासूम भावना और उनकी नादानी को दर्शाती है। कहानी के मुख्य पात्र केशव और उसकी बहन श्यामा हैं। उनके घर की दीवार की कँगनी में एक चिड़िया ने अंडे दिए होते हैं। दोनों बच्चे अंडों और उनसे निकलने वाले बच्चों के बारे में बहुत उत्सुक रहते हैं और चिड़िया की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
माता-पिता के व्यस्त रहने के कारण बच्चे अपनी समझ से चिड़िया की मदद करने की योजना बनाते हैं। वे चिड़िया के लिए चावल और पानी रखते हैं तथा धूप से बचाने के लिए घोंसले को टोकरी से ढक देते हैं। उनकी यह मदद भरी कोशिश नादानी के कारण नुकसानदायक सिद्ध होती है। अंडों को छूने और ढकने से वे टूट जाते हैं और चिड़ियाँ भी वहाँ से चली जाती हैं।
माँ बच्चों को समझाती है कि अंडों को छूने से चिड़िया उन्हें नहीं सेती। इस घटना से केशव को गहरा पछतावा होता है और वह कई दिनों तक दुखी रहता है। कहानी यह संदेश देती है कि अज्ञान और नादानी में किया गया अच्छा काम भी नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए प्रकृति के कार्यों में बिना समझ हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
Nadan Dost Class 6th Hindi Chapter Word Meaning
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कार्निस | दीवार के ऊपर का आगे बढ़ा हुआ हिस्सा। |
| पर | पंख। |
| फ़ुर्सत | खाली समय। |
| तसल्ली | दिलासा। |
| फुर्र | छोटी चिड़ियों के उड़ने पर होने वाली पंखों की आवाज़। |
| बगैर | बिना। |
| पेचीदा | कठिन, उलझा हुआ। |
| अधीर | बेचैन, व्याकुल। |
| अंदाज़ा | अनुमान। |
| तकलीफ़ | दुःख। |
| स्वीकृत | स्वीकार। |
| सूराख | छेद। |
| हिकमत | उपाय। |
| हिफ़ाजत | रक्षा। |
| चिथड़े | फटे-पुराने कपड़े। |
| आहिस्ता | धीरे-धीरे। |
| किवाड़ | दरवाज़ा। |
| कसूर | अपराध, गलती। |
| वजह | कारण। |
| सहमी हुई | डरी हुई। |
| उजला | सफ़ेद। |
| तरस | दया। |
| भीगी बिल्ली बनना | डर जाना। |
| जोग | प्रयत्न, प्रयास । |
Nadan Dost Class 6th Hindi Chapter Question Answers
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – नीचे लिखे गद्यावतरणों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
- केशव के घर कार्निस के ऊपर एक चिड़िया ने अंडे दिए थे। केशव और उसकी बहन श्यामा दोनों बड़े ध्यान से चिड़िया को वहाँ आते-जाते देखा करते। सवेरे दोनों आँखें मलते कॉर्निस के सामने पहुँच जाते और चिड़ा और चिड़िया दोनों को वहाँ बैठा पाते। उनको देखने में दोनों बच्चों को न मालूम क्या मज़ा मिलता, दूध और जलेबी की सुध भी न रहती थी। दोनों के दिल में तरह-तरह के सवाल उठते । अंडे कितने बड़े होंगे ? किस रंग के होंगे ? कितने होंगे ? क्या खाते होंगे ? उनमें से बच्चे किस तरह निकल आएँगे ? बच्चों के पर कैसे निकलेंगे ? घोंसला कैसा है ? लेकिन इन बातों का जवाब देने वाला कोई नहीं । न अम्माँ को घर के काम-धंधों से फ़ुरसत थी, न बाबू जी को पढ़ने-लिखने से। दोनों बच्चे आपस ही में सवाल-जवाब करके अपने दिल को तसल्ली दे लिया करते थे।
(क) एक चिड़िया ने अंडे कहाँ दिए थे और उन्हें सुबह-सवेरे कौन देखा करता था?
(ख) बच्चों के मन में अंडे देखकर क्या-क्या प्रश्न उत्पन्न होते थे?
(ग) बच्चों के प्रश्नों के उत्तर माता-पिता क्यों नहीं देते थे?
उत्तर—(क) एक चिड़िया ने केशव के घर कॉर्निस के ऊपर अंडे दिए थे जिन्हें सुबह-सवेरे केशव और उसकी बहन देखा करते थे।
(ख) बच्चों के मन में प्रश्न आते थे कि अंडे कितने बड़े होंगे; वे किस रंग के होंगे कितने होंगे; क्या खाते होंगे; उन से बच्चे किस तरह बाहर निकलेंगे; घोंसला कैसा है?
(ग) माता के पास घर के काम-काज से फुरसत नहीं थी और पिता हर समय पढ़ने- लिखने में लगे रहते थे ।
- इस तरह तीन-चार दिन गुज़र गए। दोनों बच्चों की जिज्ञासा दिन-दिन बढ़ती जाती थी। अंडों को देखने के लिए वे अधीर हो उठते थे। उन्होंने अनुमान लगाया कि अब ज़रूर बच्चे निकल आए होंगे। बच्चों के चारे का सवाल अब उनके सामने आ खड़ा हुआ। चिड़िया बेचारी इतना दाना कहाँ पाएगी कि सारे बच्चों का पेट भरे। ग़रीब बच्चे भूख के मारे चूँ-चूँ करके मर जाएँगे।
(क) केशव और उसकी बहन के लिए कौन-सा कठिन प्रश्न उत्पन्न हो गया था और क्यों?
ख) बच्चों ने क्या अनुमान लगाया था?
उत्तर- (क) केशव और उसकी बहन श्यामा के लिए कठिन प्रश्न था कि वे चिड़िया के बच्चों को क्या खिलाएँगे। बच्चों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं होगा।
(ख) बच्चों ने अनुमान लगाया कि अंडों से अब बच्चे निकल आए होंगे और चिड़िया अपने बच्चों के लिए चारे का प्रबंध नहीं कर पाएगी। वे बेचारे बच्चे भूख के कारण मर जाएँगे।
- गर्मी के दिन थे। बाबू जी दफ़्तर गए हुए थे। अम्माँ दोनों बच्चों को कमरे में सुला कर खुद सो गई थीं। लेकिन बच्चों की आँखों में आज नींद कहाँ? अम्माँ जी बहलाने के लिए दोनों दम रोके आँखें बंद किए मौके का इंतज़ार कर रहे थे। ज्योंही मालूम हुआ कि अम्माँ जी अच्छी तरह से सो गईं, दोनों चुपके से उठे और बहुत धीरे से दरवाज़े की सिटकनी खोलकर बाहर निकल आए। अंडों की हिफ़ाज़त की तैयारियाँ होने लगीं।
(क) बच्चों को नींद क्यों नहीं आई थी?
(ख) अम्माँ जी के सो जाने के बाद बच्चों ने क्या किया?
उत्तर—(क) बच्चे चिड़िया के अंडों की देखभाल करना चाहते थे और इस कारण उन्हें नींद नहीं आई थी।
(ख) अम्माँ जी के सो जाने के बाद बच्चे दरवाज़े की सिटकनी खोल कर बाहर निकल आए थे और अंडों की हिफ़ाज़त के लिए तैयारियाँ करने लगे थे।
- किवाड़ केशव ने खोला था, लेकिन श्यामा ने माँ से यह बात नहीं कही। उसे डर लगा कि भइया पिट जाएँगे । केशव दिल में काँप रहा था कि कहीं श्यामा कह न दे। अंडे न दिखाए थे, इससे अब उसको श्यामा पर विश्वास न था । श्यामा सिर्फ़ मुहब्बत के मारे चुप थी या इस कसूर में हिस्सेदार होने की वजह से, नहीं किया जा सकता। शायद दोनों ही बातें थीं ।
(क) श्यामा ने माँ से क्या बात नहीं बताई थी? क्यों?
ख) केशव को श्यामा पर विश्वास क्यों नहीं हो रहा था?
उत्तर—(क) श्यामा ने माँ से यह बात नहीं बताई थी कि किवाड़ केशव ने खोला था। उसे भय था कि ऐसा बताने से भइया की पिटाई हो जाएगी।
(ख) केशव ने श्यामा को अंडे नहीं दिखाए थे इसलिए उसे श्यामा पर विश्वास नहीं हो रहा था।
- केशव रोनी सूरत बनाकर बोला- मैंने तो सिर्फ़ अंडों को गद्दी पर रख दिया था अम्माँ जी!
माँ को हँसी आ गई। मगर केशव को कई दिनों तक अपनी ग़लती पर अफ़सोस होता रहा। अंडों की हिफ़ाज़त करने के जोग में उसने उनका सत्यानाश कर डाला। इसे याद कर वह कभी-कभी रो पड़ता था ।
(क) माँ को हँसी क्यों आ गई थी?
(ख) केशव कभी-कभी किस कारण रो पड़ता था?
उत्तर — (क) केशव की बातें सुनकर माँ को हँसी आ गई थी । केशव की सूरत रोने जैसी हो गई थी। माँ ने सोचा कि हो सकता है कि वह डर के कारण रोने लगे। इसलिए बात को टालने के लिए वह हँस दी थी।
(ख) केशव को अपनी ग़लती का पता चल गया। उसे बहुत दुःख था कि उसकी ग़लती के कारण सारे अंडे टूट गए थे। अंडों की रक्षा करते-करते उसने उन्हें नष्ट ही करवा दिया था। इसी दुःख के कारण उसे कभी-कभी रोना आ जाता था।
ध्यान देने योग्य शब्द
कार्निस —- दीवार की कँगनी
तसल्ली —- सांत्वना, दिलासा, ढाँढ़स
फुर्र —- छोटी चिड़ियों के उड़ने में होने वाली परों की आवाज़
पेचीदा —- उलझन वाला, कठिन, टेढ़ा
अधीर —- उतावला, आकुल
सुराख —- छेद
हिकमत —- युक्ति, उपाय
हिफाज़त —- रक्षा
चिथड़े —- फटा-पुराना, कपड़ा, गूदड़
आहिस्ता —- धीरे से, धीरे-धीरे, धीमी आवाज़ से
यकायक —- अचानक।
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कहानी से
प्रश्न 1. केशव और श्यामा के मन में अंडों को देखकर तरह-तरह के सवाल क्यों. उठते थे?
उत्तर – केशव और श्यामा दोनो छोटे थे। उनके अबोध मन में अंडों को देख कर तरह- तरह के प्रश्न उठते थे- जैसे कि उनसे बच्चे कैसे निकल आएंगे ? बच्चे खाते क्या होंगे ? उनके पँख कैसे निकलेंगे ? चिड़िया उस के लिए दाना कैसे ला पाएगी ?
प्रश्न 2 अंडों के बारे में दोनों आपस ही में सवाल-जवाब करके अपने दिल को तसल्ली क्यों दे दिया करते थे?
उत्तर—केशव और श्यामा छोटे बच्चे थे । वे चिड़िया के अंडों को देखकर हैरान थे। वे चिड़िया और उसके अंडों की रक्षा करना चाहते थे । केशव और श्यामा को हैरानी थी कि अंडों में से बच्चे कैसे निकल आएँगे ? वे चिड़िया और उसके बच्चों के बारे में ही सोचते रहते थे। यही कारण था कि उनके मन में तरह-तरह के सवाल उठते थे । केशव और श्यामा के मन में अंडों के बारे में जानने की इच्छा थी । वे अपने मन में उठने वाले कई सवालों का जवाब चाहते थे । इसका जवाब उन्हें अपने माता-पिता से मिल सकता था किंतु उनकी माँ घर के काम में बहुत अधिक व्यस्त रहती थी और पिता जी पढ़ने-लिखने में लगे रहते थे। जब उन्हें अपने सवालों का जवाब कहीं से भी न मिला तो केशव और श्यामा आपस में ही सवाल-जवाब करके अपने मन को तसल्ली दे दिया करते थे।
प्रश्न 3. अंडों के टूट जाने के बाद माँ के यह पूछने पर कि–’तुम लोगों ने अंडों को छुआ होगा ।’ के जवाब में श्यामा ने क्या कहा और उसने ऐसा क्यों किया?
उत्तर – श्यामा को ऐसा लगा था कि केशव ने शायद अंडों को इस गलत ढंग तरह से रख दिया था कि वे नीचे गिर गए। सारा दोष उसी का था इसलिए श्यामा ने बिना उस पर तरस खाए कहा था कि अंडों को उसी ने छेड़ा था ।
प्रश्न 4 पाठ के आधार पर बताओ कि अंडे गंदे क्यों हुए और उन अंडों का क्या हुआ?
उत्तर – केशव ने अपनी समझ के अनुसार तीनों अंडों की सुरक्षा का प्रबंध करते हुए उन्हें अपने हाथ से उठाया था और उन्हें कपड़ों की तह पर रख दिया था जिसमें अंडे गंदे हो गए थे। चिड़िया ने उन अंडों को नीचे गिरा दिया था जिस कारण वे टूट गए थे।
प्रश्न 5 सही उत्तर क्या है-
अंडों की देखभाल के लिए केशव और श्यामा धीरे से बाहर निकले क्योंकि-
(क) वे माँ की नींद नहीं तोड़ना चाहते थे
(ख) माँ नहीं चाहती थी कि वे चिड़ियों की देखभाल करें।
(ग) माँ नहीं चाहती थी कि वे बाहर धूप में घूमें।
उत्तर—(क) वे माँ की नींद नही तोड़ना चाहते थे ।
प्रश्न 6. केशव और श्यामा ने चिड़िया और अंडों की देखभाल के लिए किन तीन बातों का ध्यान रखा?
उत्तर – केशव चिड़िया के अंडों की रक्षा करना चाहता था । उसने चिथड़ों की एक गद्दी बनाकर अंडों के नीचे रखी ताकि वे न टूटें। टोकरी से उसने चिड़िया और उसके अंडों को – धूप से बचाने के लिए छोटी-सी छत बनाई तथा चिड़िया और उसके अंडों से निकलने वाले बच्चों के लिए उसने दाना-पानी भी अंडों के पास रख दिया था। इसी कारण उसे चिथड़े, टोकरी और दाना-पानी की ज़रूरत पड़ी।
प्रश्न 7. कार्निस पर अंडों को देखकर केशव और श्यामा के मन में जो कल्पनाएँ आईं और उन्होंने चोरी-चुपके जो कुछ कार्य किए, क्या वे उचित थे? तर्क सहित उत्तर लिखो।
उत्तर – केशव और श्यामा ने चिड़िया के अंडों की रक्षा नहीं की। उनसे तो नादानी ही हुई। वे रक्षा करना चाहते थे किंतु पूरा ज्ञान न होने के कारण उनसे भूल हो गई थी। उन्हें अपनी माँ की सहायता लेनी चाहिए थी । उन्हें अपनी माँ को बताना चाहिए था कि वे अंडों की रक्षा करना चाहते थे । यदि वे ऐसा करते तो माँ उनकी सहायता अवश्य करती और चिड़िया के अंडे टूटने से बच जाते।
कहानी से आगे
प्रश्न 1. पाठ में चिड़ियों की चर्चा है। तुम पेड़-पौधों और अन्य जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी इकट्ठी करो। तुम्हारे आसपास जो मौजूद हों उसके साथ तुम्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसे लिखो।
उत्तर—हमें अपने पास जीव-जन्तुओं के रहने-बढ़ने, कार्य करने आदि में बदलाव लाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वे प्राकृतिक रूप से स्वयं बढ़ते हैं। इन्हें उन कार्यों में हमारी सहायता की ज़रूरत नहीं होती । हमें स्वयं उगाए पेड़-पौधों की रक्षा करनी चाहिए। उन्हें पानी, खाद, उर्वरक आदि देने चाहिए जिससे उनकी अच्छी वृद्धि हो सके।
प्रश्न 2. केशव और श्यामा ने अंडों के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए ? यदि उस जगह तुम होते तो क्या अनुमान लगाते और क्या करते?
उत्तर—केशव और श्यामा ने अंडों के बारे मैं अनुमान लगाया कि अंडों में से बच्चे निकलकर फुर्र से उड़ जाएंगे। वे प्रतिदिन अनुमान लगाते कि अब अंडों से बच्चे ज़रूर निकल आए होंगे। वे कभी चिड़िया की दाना-पानी की समस्या को लेकर चिंतित हो जाते तो कभी वे । सोचते कि अंडों को धूप से भी बचाना चाहिए। यदि हम उनकी जगह होते तो हम भी यही अनुमान लगाते कि अंडे छोटे-छोटे होंगे। अंडों से बच्चे जल्दी ही निकलकर आकाश में उड़ने लगेंगे। हम भी केशव और श्यामा की भाँति अंडों को एक बार देखने की कोशिश ज़रूर करते ।
प्रश्न 3. माँ के सोते ही केशव और श्यामा दोपहर में बाहर क्यों निकल आए? माँ के पूछने पर भी दोनों में से किसी ने किवाड़ खोलकर दोपहर में बाहर निकलने का कारण क्यों नहीं बताया?
उत्तर—माँ के सोते ही केशव और श्यामा दोपहर में चिड़िया और उसके अंडों की रक्षा करने के लिए बाहर निकल पड़े। वे जानते थे कि यदि माँ ने देख लिया तो वह उन्हें डाँटेगी। माँ नहीं चाहती थीं कि वे बाहर धूप में घूमें। बाद में जब माँ ने किवाड़ खोलकर दोपहर में बाहर निकलने का कारण पूछा तो दोनों ने कोई उत्तर नहीं दिया। वे जानते थे कि यदि माँ को कारण बताया गया तो दोनों की पिटाई होगी। दोनों ही चिड़िया के अंडों को छेड़ने के कसूर में हिस्सेदार थे। इसी कारण केशव और श्यामा ने माँ को कोई कारण नहीं बताया।
प्रश्न 4. प्रेमचंद ने इस कहानी का नाम ‘नादान दोस्त’ रखा। तुम इसे क्या शीर्षक देना चाहोगे?
उत्तर- इस कहानी का एक अन्य शीर्षक ‘नादान बचपन’ हो सकता है ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. इस पाठ में गर्मी के दिनों की चर्चा है। अगर सर्दी या बरसात के दिन होते तो क्या – क्या होता? अनुमान करो और अपने साथियों को सुनाओ।
उत्तर – यदि सर्दी या बरसात के दिन होते तो भी केशव और श्यामा को बाहर न निकलने दिया जाता। सर्दी और बरसात में भी बच्चों को ठंड लगने और उनके बीमार होने की संभावना रहती है। यदि सर्दी या बरसात के दिन होते और केशव तथा श्यामा घर से बाहर निकलते तो भी उनकी माँ उन्हें अवश्य डाँटती।
प्रश्न 2. पाठ पढ़कर मालूम करो कि दोनों चिड़ियाँ वहाँ फिर क्यों नहीं दिखाई दीं ? वे कहाँ गई होंगी? इस पर अपने दोस्तों के साथ मिलकर बातचीत करो।
उत्तर—दोनों चिड़ियाँ यह देख रही थीं कि बच्चे उनके अंडों को छेड़ते हैं। उन्होंने जान लिया था कि उस घर में उनके अंडे सुरक्षित नहीं रहेंगे। इसी कारण वे वह स्थान छोड़कर चली गईं। उन चिड़ियों ने वह स्थान छोड़कर निश्चित रूप से कहीं दूसरी जगह अपना घोंसला बनाया होगा जिससे उनके अंडे सुरक्षित रहें ।
प्रश्न 3. अनजाने में हुई ग़लती पर केशव को कई दिनों तक अफ़सोस होता रहा। दोबारा उससे ऐसी गलती न हो इसके लिए तुम उसे क्या सुझाव दे सकते हो, इसे लिखो।
उत्तर – उसे मेरा सुझाव होगा कि उसे ऐसे अन्य विषयों में अपने माता-पिता या बड़े- बुजुर्गों से सलाह ले लेनी चाहिए क्योंकि उनके पास अनुभव की अधिकता है। वे अपने आस-पास के जीवन को अधिक अच्छी तरह से समझते हैं और इसलिए वे अच्छे-बुरे परिणामों को बेहतर समझा सकेंगे।
प्रश्न 4. केशव और श्यामा चिड़िया के अंडों को लेकर बहुत उत्सुक थे। क्या तुम्हें भी किसी नई चीज़ या बात को लेकर कौतूहल महसूस हुआ है ? ऐसे किसी अनुभव का वर्णन करो और बताओ कि ऐसे में तुम्हारे मन में क्या-क्या सवाल उठे?
उत्तर- बात उस समय की है जब मैंने पहली बार कंप्यूटर देखा । मेरे मन में उससे संबंधित अनेक सवाल उठे। मेरे मन में प्रश्न उठा कि क्या कंप्यूटर में कोई व्यक्ति बैठा होता है जो सब कुछ लिखता है ? क्या उसमें कोई ऐसी मशीन है जो सारा हिसाब करती है ? उससे ई-मेल कैसे होता होगा ? कंप्यूटर में कैसी-कैसी जानकारियाँ होंगी ? क्या कंप्यूटर में मज़ेदार कहानियाँ भी होंगी ? इस प्रकार के अनेक सवाल मेरे मन में आए थे।
भाषा की बात
प्रश्न 1. श्यामा माँ से बोली, “मैंने आपकी बातचीत सुन ली है। “
ऊपर दिए उदाहरण में मैंने का प्रयोग ‘श्यामा’ के लिए और आपकी का प्रयोग ‘माँ’ के लिए हो रहा है। जब सर्वनाम का प्रयोग कहने वाले, सुनने वाले या किसी तीसरे के लिए हो, तो उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं । नीचे दिए गए वाक्यों में तीनों प्रकार के पुरुषवाचक सर्वनामों के नीचे रेखा खींचो—
एक दिन दीपू और नीलू यमुना तट पर बैठे शाम की ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि एक लंबा आदमी लड़खड़ाता हुआ उनकी ओर चला आ रहा है। पास आकर उसने बड़े दयनीय स्वर में कहा, “मैं भूख से मरा जा रहा हूँ। क्या आप मुझे कुछ खाने को दे सकते हैं ?”
उत्तर – एक दिन दीपू और नीलू यमुना तट पर बैठे शाम की ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि लंबा आदमी लड़खड़ाता हुआ उनकी ओर चला आ रहा है। पास आकर उसने बड़े दयनीय स्वर में कहा, “मैं भूख से मरा जा रहा हूँ। क्या आप मुझे कुछ खाने को दे सकते हैं ?”
प्रश्न 2. तगड़े बच्चे, मसालेदार सब्ज़ी, बड़ा अंडा।
यहाँ रेखांकित शब्द क्रमशः बच्चे, सब्ज़ी और अंडा की विशेषता यानी गुण बता रहे हैं। इसलिए ऐसे विशेषणों को गुणवाचक विशेषण कहते हैं। इसमें व्यक्ति या वस्तु के अच्छे- बुरे हर तरह के गुण आते हैं। तुम चार गुणवाचक विशेषण लिखो और उनसे वाक्य बनाओ
उत्तर – गुणवाचक विशेषण वाक्य
सुंदर लड़का एक सुंदर लड़का मेरी कक्षा में पढ़ता है।
काली गाय काली गाय घास चर रही है।
घनी मूँछों वाला आदमी वह घनी मूँछों वाला आदमी मेरा पड़ोसी है।
सफ़ेद कमीज़ मुझे मेरी सफ़ेद कमीज़ बहुत पसंद है ।
प्रश्न 3 नीचे कुछ प्रश्नवाचक वाक्य दिए गए हैं, उन्हें बिना प्रश्नवाचक के रूप में बदलो-
अंडे कितने बड़े होंगे? किस रंग के होंगे? कितने होंगे? उनमें से बच्चे किस तरह निकल आएँगे? बच्चों के पर कैसे निकलेंगे? घोंसला कैसा है?
उत्तर—उन्हें पता नहीं था कि अंडे कितने बड़े होंगे, वे किस रंग के होंगे, वे कितने होंगे. वे क्या खाते होंगे, उनसे बच्चे कैसे निकल आएँगे, बच्चों के पर कैसे निकलेंगे और घोंसला कैसा था।
प्रश्न 4. (क) केशव ने झुंझलाकर कहा……
(ख) केशव रोनी सूरत बनाकर बोला……
(ग) केशव घबराकर उठा…..
(घ) केशव ने टोकरी को एक टहनी से टिकाकर कहा……
(ङ) श्यामा ने गिड़गिड़ाकर कहा…….
ऊपर लिखे वाक्यों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखो । ये शब्द रीतिवाचक क्रियाविशेषण का काम कर रहे हैं क्योंकि ये बताते हैं कि कहने, बोलने और उठने की क्रिया कैसे हुई ? ‘कर’ वाले शब्दों के क्रियाविशेषण होने की एक पहचान यह भी है कि ये अकसर क्रिया से ठीक पहले आते हैं। अब तुम भी इन पाँच क्रियाविशेषणों का वाक्यों में प्रयोग करो ।
उत्तर — झुंझलाकर – राम ने झुंझलाकर कहा कि वह कल दिल्ली नहीं जाएगा।
बनाकर – सुरेश रमेश को मूर्ख बनाकर भाग गया।
घबराकर – मोहन घबराकर दरवाज़े की ओर दौड़ा।
टिकाकर – सीता दरवाज़े के साथ सिर टिकाकर बैठ गयी।
गिड़गिड़ाकर — चोर सिपाही के सामने गिड़गिड़ाकर रोने लगा ।
प्रश्न 5. नीचे प्रेमचंद की कहानी ‘सत्याग्रह’ का एक अंश दिया गया है। तुम इसे पढ़ोगे तो पाओगे कि विराम चिह्नों के बिना यह अंश अधूरा सा है । तुम आवश्यकता के अनुसार उचित जगहों पर विराम चिह्न लगाओ-
उसी समय एक खोमचेवाला जाता दिखाई दिया 11 बज चुके थे चारों तरफ सन्नाटा छा गया था पंडित जी ने बुलाया खोमचेवाले खोमचेवाला कहिए क्या दूँ भूख लग आयी न अन्न जल छोड़ना साधुओं का काम है हमारा आपका नहीं मोटेराम अबे क्या कहता है यहाँ क्या किसी साधु से कम हैं चाहें तो महीनों पड़े रहें और भूख न लगे तुझे तो केवल इसलिए बुलाया है कि ज़रा अपनी कुप्पी मुझे दे देखूं तो वहाँ क्या रेंग रहा है मुझे भय होता है
उत्तर उसी समय एक खोमचेवाला जाता दिखाई दिया। 11 बज चुके थे। चारों तरफ सन्नाटा छा गया था। पंडित जी ने बुलाया – “खोमचेवाले !”
खोमचेवाला—‘“कहिए क्या दूँ ? भूख लग आयी न ? अन्न-जल छोड़ना साधुओं का काम है, हमारा-आपका नहीं।”
मोटेराम – ” अबे, क्या कहता है ? यहाँ क्या किसी साधु से कम हैं ? चाहें तो महीनों पड़े रहें और भूख न लगे। तुझे तो केवल इसलिए बुलाया है कि ज़रा अपनी कुप्पी मुझे दे। देखूं तो वहाँ क्या रेंग रहा है ? मुझे भय होता है।”
कुछ करने को
प्रश्न 1. गर्मियों या सर्दियों में जब तुम्हारी लंबी छुट्टियाँ होती हैं, तो तुम्हारा दिन कैसे बीतता है ? अपनी बुआ या किसी और को एक पोस्टकार्ड या अंतरदेशीय पत्र लिखकर बताओ।
उत्तर-
150 – राजा पार्क,
जम्मू।
दिनांक 20 मई, 20…….
पूजनीय बुआ जी,
सादर प्रणाम !
मैं यहाँ पर बिलकुल ठीक-ठाक हूँ । आशा करता हूँ कि आप भी ठीक होंगी। आजकल हमारे स्कूल में छुट्टियाँ चल रही हैं। मेरी ये छुट्टियाँ लगभग 42 दिन की हैं। मैं सुबह छः बजे उठता हूँ। हाथ-मुँह धोकर सैर करने जाता हूँ । सैर से आकर थोड़ी देर आराम करके नहाता हूँ। उसके बाद नाश्ता करता हूँ। बुआ जी, स्कूल से छुट्टियों का काम मिला हुआ है। मैं अपने प्रत्येक विषय को 30-30 मिनट का समय प्रतिदिन देता हूँ। दोपहर का भोजन करने के बाद एक घंटा सो जाता हूँ। शाम को पिता जी के साथ पार्क में घूमने जाता हूँ। कई बार दोस्तों के साथ खेलने भी चला जाता हूँ। रात को कुछ देर टी० वी० देखता हूँ और फिर खाना खाकर सो जाता हूँ। बुआ जी, मेरा दिन तो आजकल इस प्रकार बीतता है। आप अपनी कुशलता का समाचार भेजते रहना । मेरी ओर से परिवार के सभी बड़ों को
नमस्कार कहना ।
आपका अपना, दुष्यंत।
Veh Chidiya Jo Class 6th Hindi Poem Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply