कविता “पहली बूँद” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का चौदहवां अध्याय है। यह पोस्ट Pehli Boond Kavita Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह कविता गोपाल कृष्ण कौल द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप कविता “पहली बूँद” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Shri Vaishno Devi Ki Yatra Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Pehli Boond Kavita Class 6th Hindi Question Answers
Pehli Boond Kavita Class 6th Summary
कविता का सार
कवि गोपालकृष्ण कौल ने ‘पहली बूँद’ कविता में वर्षा की पहली बूँद के महत्व को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया है। पहली बूँद के गिरते ही बीज अंकुरित होने लगते हैं और धरती की प्यास बुझ जाती है। सूखी धरती पर हरी-हरी घास उग आती है, जिससे चारों ओर जीवन और हरियाली फैल जाती है। आकाश में बिजली चमकती है और बादल गरजते हैं, जिससे प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है।
कवि ने वर्षा की बूँद की तुलना आसमान की नीली आँखों से बहते करुणा-भरे आँसुओं से की है। यह जल धरती को जीवनदान देता है और उसे फिर से हरा-भरा बना देता है। इस प्रकार ‘पहली बूँद’ धरती के लिए वरदान के समान है, जो जीवन, आशा और नवीनता का प्रतीक है।
Pehli Boond Kavita Class 6th Explanation
पद्यांशों के प्रसंग सहित सरलार्थ
- वह पावस का प्रथम दिवस जब,
पहली बूँद धरा पर आई ।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अंगड़ाई ।
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर ।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी बूँद पुलकी – मुस्काई ।
पहली बूँद धरा पर आई ।
शब्दार्थ — पावस = वर्षा ऋतु । प्रथम = पहला । दिवस = दिन । धरा = पृथ्वी । नव- जीवन = नई जिंदगी। अधरों = होंठों । वसुंधरा = धरती । रोमावलि = रोओं की पंक्ति ।
प्रसंग — प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 में संकलित कवि गोपालकृष्ण कौल द्वारा रचित कविता ‘पहली बूँद’ से लिया गया है। इसमें कवि ने वर्षा की पहली बूँद के आगमन से प्रकृति में आए परिवर्तन का सुंदर चित्रण किया है।
सरलार्थ — वर्षा ऋतु के पहले दिन धरती पर पहली बूँद गिरती है। उस बूँद के गिरते ही धरती से अंकुर फूट पड़ते हैं और नया जीवन जाग उठता है। सूखे के कारण प्यास से तड़प रही धरती के होंठों पर यह बूँद अमृत के समान गिरती है। हरी-हरी घास धरती के शरीर पर रोओं की पंक्ति की तरह उगकर प्रसन्न हो उठती है। इस प्रकार पहली वर्षा-बूँद धरती में जीवन और खुशी भर देती है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) धरती से अंकुर कब और कैसे फूटा?
(ग) पहली बूंद धरती पर गिरते ही क्या हुआ था?
उत्तर- (क) कवि – गोपाल कृष्ण कौल, कविता – पहली बूँद ।
(ख) वर्षा ऋतु के पहले ही दिन जब बादलों से वर्षा की पहली बूँद गिरी तभी धरती की गोद में पड़े हुए बीज का अंकुरण हो गया ।
(ग) पहली बूँद गिरते ही धरती मुस्करा दी । धरती हरी-भरी होने के भावों से प्रसन्नता से भर उठी और धरती के प्यासे होंठ तृप्त हो गए।
- आसमान से उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर ।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई ।
पहली बूँद धरा पर आई ।
शब्दार्थ — सागर = समुद्र । स्वर्णिम = सुनहरी । पर = पंख । नगाड़े = ढोल | तरुणाई – नई जवानी।
प्रसंग — प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 में संकलित श्री गोपाल कृष्ण कौल की ‘पहली बूँद’ नामक कविता में से लिया गया है जिसमें कवि ने वर्षा ऋतु के आगमन का सजीव और कल्पनात्मक चित्र प्रस्तुत किया है।
सरलार्थ — कवि कहता है कि वर्षा के समय ऐसा लगता है मानो समुद्र ही बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आसमान में उड़ रहा हो। बादल गरज-गरज कर नगाड़ों की तरह आवाज़ करते हैं और धरती की सोई हुई जवानी को जगा देते हैं। इस प्रकार वर्षा ऋतु की पहली बूँद धरती पर जीवन और ऊर्जा लेकर आती है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) बादलों के पँख किसे माना गया है ?
(ग) बादल ढोल बजा-बजा कर क्या करने लगे थे ?
उत्तर— (क) कवि-गोपाल कृष्ण कौल, कविता – पहली बूँद ।
(ख) वादलों के पँख सुनहरी बिजलियाँ हैं जिन के सहारे वे उड़ते रहते हैं ।
(ग) बादल ढोल बजा-बजा कर सारी धरती की नई जवानी को जगाते हैं और नवजीवन का पाठ पढ़ाते हैं ।
- नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर ।
करुणा-विगलित अश्रु बहा कर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई ।
बूढ़ी धरती शस्य – श्यामला
बनने को फिर से ललचाई ।
पहली बूँद धरा पर आई ।
शब्दार्थ — नयनों = आँखों। अंबर = आसमान। जलधर = बादल। करुणा = दया। विगलित = ढुलके हुए। अश्रु = आँसू। शस्य – श्यामला = खाद्यान्न से काली।
प्रसंग — प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 में संकलित श्री गोपाल कृष्ण कौल की ‘पहली बूँद’ नामक कविता में से लिया गया है। इसमें कवि ने बादलों और वर्षा को मानवीय रूप देकर धरती की प्यास बुझने का भावपूर्ण वर्णन किया है।
सरलार्थ — कवि कहता है कि आसमान नीली आँखों के समान है और बादल उसकी काली पुतलियों की तरह हैं। बादल करुणा से भरे आँसुओं के रूप में वर्षा करके धरती की बहुत समय से चली आ रही प्यास बुझा देते हैं। गर्मी और सूखे से बूढ़ी लगने वाली धरती फिर से फसलों से हरी-भरी बनने के लिए उत्साहित हो उठती है। इस प्रकार पहली बूँद धरती में नया जीवन भर देती है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ख) आसमान कैसा प्रतीत होता है?
(ग) बादलों ने बरस कर क्या किया?
उत्तर— ( क ) कवि—गोपाल कृष्ण कौल, कविता – पहली बूँद ।
(ख) आसमान नीली आँखों-सा सुंदर प्रतीत होता है जिस की काली पुतलियाँ हैं जो धरती की शुष्कता को देख दया के कारण आँसू टपकाने लगती है।
(ग) बादलों ने बरस कर भयंकर गर्मी से सूखी और वीरान धरती को तृप्त कर दिया। फसलों के लहलहाने की कल्पना से ही बूढ़ी धरती प्रसन्नता से भर गई ।
ध्यान देने योग्य शब्द
| पावस | वर्षा काल |
|---|---|
| प्रथम | पहला |
| अधर | नीचे का होंठ |
| वसुंधरा | धरती |
| स्वर्णिम | सोने-सा |
| विगलित | पिघला हुआ |
| शस्य / श्यामला | हरी-भरी |
Pehli Boond Kavita Class 6th Question Answers
बोध और सराहना
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. पहली वर्षा से धरती की प्रसन्नता किस रूप में प्रकट हो रही है ?
उत्तर- सूखी धरती पर जब पहली वर्षा की बूंदें गिरती हैं तो वह मुस्करा उठती हैं । उसमें नव जीवन का संचार होने लगता है।
प्रश्न 2. अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव जीवन की ले अंगड़ाई ।
अंकुर के रूप में नया जीवन पाकर कौन उठ खड़ा हुआ है ?
(क) वृक्ष
(ख) बीज
(ग) बच्चा
(घ) बादल ।
उत्तर- (ख) बीज ।
प्रश्न 3. बादलों का सौंदर्य वर्णन करने के लिए कवि ने क्या कल्पना की है ?
उत्तर—आसमान पर बादलों का सौंदर्य चित्रण करते हुए कवि कहता है कि मानो समुद्र जल से भरे हुए बादलों के रूप में बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आसमान पर उड़ रहा है।
प्रश्न 4. बादल को धरती की तरुणाई कहने का क्या आशय है ?
उत्तर- जब बादल बरसते हैं तो धरती पर नये पेड़-पौधों के रूप में एक नई जवानी आ जाती है। इसी कारण बादल को धरती की तरुणाई कहा गया है।
प्रश्न 5. स्तंभ ‘क‘ में दिये गये शब्दों के उपयुक्त अर्थ स्तंभ ‘ख‘ से ढूँढकर लिखो-
| (क) | (ख) |
|---|---|
| (i) नीली आँखें | वर्षा |
| (ii) काली पुतली | सूखी वीरान भूमि |
| (iii) आँसू | वर्षा की इच्छा |
| (iv) प्यास | आकाश |
| (v) बूढ़ी धरती | बादल |
उत्तर-
| (क) | (ख) |
|---|---|
| (i) नीली आँखें | आकाश |
| (ii) काली पुतली | बादल |
| (iii) आँसू | वर्षा |
| (iv) प्यास | वर्षा की इच्छा |
| (v) बूढ़ी धरती | सूखी वीरान भूमि |
Pehli Boond Kavita Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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