“सेनापति ताँत्या टोपे” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का बारहवां अध्याय है। यह पोस्ट Senapati Tantiya Tope Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ “सेनापति ताँत्या टोपे” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Desh Gaan Class 6th Hindi Chapter 11 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Senapati Tantiya Tope Class 6th Hindi Question Answers
Senapati Tantiya Tope Class 6th Summary
पाठ का सार
यह पाठ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान् सेनानी ताँत्या टोपे के जीवन, संघर्ष और बलिदान का विस्तार से वर्णन करता है। पाठ का आरंभ 18 अप्रैल 1859 के उस मार्मिक दृश्य से होता है, जब ग्वालियर से लगभग 100 कि०मी० दूर शिवपुरी में ताँत्या टोपे को फाँसी दी जा रही थी। चारों ओर सैनिकों की घेराबंदी थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके अंतिम दर्शन के लिए एकत्र थे। ताँत्या टोपे ने मृत्यु से पूर्व धरती माता को प्रणाम किया और हँसते हुए फाँसी का फंदा अपने गले में डालकर देश के लिए बलिदान दे दिया।
ताँत्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग टोपे था। उनके पिता पांडुरंग भट्ट बाजीराव पेशवा द्वितीय के यहाँ कार्यरत थे। नाना साहब और ताँत्या टोपे बचपन के मित्र थे। उन्होंने नाना साहब और मनुबाई (जो आगे चलकर झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बनीं) के साथ अस्त्र-शस्त्र और घुड़सवारी का प्रशिक्षण लिया। ताँत्या टोपे घुड़सवारी में अत्यंत निपुण थे। एक प्रतियोगिता में अंग्रेज़ घुड़सवार को पराजित करने पर बाजीराव पेशवा ने उन्हें ‘टोपे’ पुरस्कार में दी, जिससे वे ताँत्या टोपे कहलाए।
अंग्रेज़ों की दत्तक नीति के कारण नाना साहब के अधिकार छीने गए और उनकी पेंशन भी बंद कर दी गई। इस अन्याय ने स्वतंत्रता संग्राम की आग को और भड़का दिया। 1857 में जब क्रांति भड़की, तब ताँत्या टोपे ने नाना साहब का साथ देते हुए सेना संगठित की और बिठूर, कानपुर तथा कालपी में अंग्रेज़ों से संघर्ष किया। उन्होंने कई बार अंग्रेज़ी सेनाओं को पराजित किया, किंतु विशाल सैन्य शक्ति के कारण पीछे हटना पड़ा।
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की सहायता के लिए ताँत्या टोपे अपनी सेना लेकर झाँसी पहुँचे। बाद में कालपी और ग्वालियर में अंग्रेज़ों के साथ भयंकर युद्ध हुए। ग्वालियर के युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जिससे ताँत्या टोपे अकेले पड़ गए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जंगलों में छिपकर अंग्रेज़ों से संघर्ष करते रहे।
अंततः उनके मित्र सरदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण वे पकड़े गए। अंग्रेज़ों ने उन पर मुकदमा चलाया और शिवपुरी में फाँसी दे दी। इस प्रकार ताँत्या टोपे ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनका जीवन साहस, देशभक्ति और त्याग की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
Senapati Tantiya Tope Class 6th Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ग्रामीणों | गाँवों के रहने वालों। |
| अधिकारी | अफ़सर । |
| भयत्रस्त | डरे हुए। |
| जघन्य कृत्य | बहुत ही बुरा और निंदा योग्य काम। |
| भीमकाय | भारी-भरकम, भीम जैसे शरीर वाला। |
| सूर्यास्त | (सूर्य + अस्त) अर्थात् सूर्य का छिपना। |
| चेष्टा | कोशिश। |
| प्रसिद्ध | मशहूर। |
| निपुणता | कुशलता । |
| प्रतियोगिता | मुकाबला। |
| विरुद्ध | खिलाफ। |
| दत्तक | गोद लिया। |
| वीरगति पाना | शहीद होना। |
| नाकों चने चबाना | खूब तंग करना। |
| नींद हराम करना | परेशान करना। |
| प्रयत्न | कोशिश। |
| प्रशंसा | तारीफ। |
| घोषणा | ऐलान। |
| उत्तराधिकारी | वारिस। |
| क्रांति | इन्कलाब । |
| आक्रमण | हमला। |
| अवरोधों | रुकावटों। |
| उद्देश्यों | लक्ष्यों। |
| हैवान | जंगली, पशु। |
| कूच करना | आगे बढ़ना, चल पड़ना । |
Senapati Tantiya Tope Class 6th Question Answers
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
- एक कैदी बेड़ी और हथकड़ियों में जकड़ा हुआ फाँसी के पास लाया गया । गोरे सैनिकों के शस्त्रों के घेरे में वह मस्त हाथी की तरह झूमता हुआ फाँसी के तख्ते के निकट आ पहुँचा। भारी-भरकम बेड़ियों की आवाज़ से सारा मैदान दहलने लगा। दो लुहारों ने आ कर उस की बेड़ियाँ काटीं। ठिगने कद के इस गठीले कैदी ने हाथ ऊपर उठा कर उपस्थित जन समुदाय का अभिवादन किया। फाँसी के ताजे पहला कदम रखने से पूर्व वह झुका धरती माँ की पवित्र माटी से अपने माथे तिलक लगाया।
(क) कैदी को फाँसी के फंदे के निकट कैसे लाया गया था ?
(ख) कैदी ने फाँसी के फंदे की ओर बढ़ने से पहले क्या किया था
उत्तर- (क) कैदी को के घंटे के निकट भारी-भरकम बेडियों में जकड़ का लाया गया था क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि उसे निहत्था और खले हाथों लाना
हो सकता था।
(ख) कैदी ने फाँसी के फंदे की ओर बढ़ने से पहले बेड़ियाँ करते हो, झुक कर माता की पवित्र मिट्टी उठाई थी और उसे अपने माथे पर लगाया था।
- बाजीराव पेशवा ने नाना साहब और टोपे की एक-एक अंग्रेज़ घुड़सवार प्रतियोगिता कराई। घुड़सवारी की प्रतियोगिता में टोपे प्रथम रहा। पेशवा बाजीराव टोपे को पुरस्कार के रूप में लोहे का एक टोप प्रदान किया और तांत्या टोपे के नार से संबोधित किया।
(क) प्रतियोगिता किसने और किस के बीच कराई गई थी
(ख) तात्या टोपे के नाम के साथ ‘टोपे’ का शब्द कैसे जुड़ गया था
उत्तर- (क) बाजीराव पेशवा ने अंग्रेज पडसवारों के साथ नाना साहब और को मुडसवारी की प्रतियोगिता आयोजित की थी।
(ख) घुड़सवारी प्रतियोगिता में ताँत्या जीत गए थे और पुरस्कार स्वरूप उन्हें पेशवा ने लोहे का एक टोप पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया था। उस से ताँत्या के नाम के साथ ‘टोपे’ जुड़ गया था।
- इसी समय झांसी की रानी लक्ष्मी बाई और अंग्रेज सेनापति सर हवरोह में प छिड़ गया। रानी ने ताँत्या टोपे से सहायता मांगी। वे चौदह हजार सैनिक लेकर झरि पहुँचे। वहाँ सर ह्यूरोज की सेना से ताँत्या की सेना को काफी नुकसान पहुंचा। तान्दा कालपी लौट आए। इसी बीच रानी भी कालपी पहुँच गई। जहाँ दोनों ने ग्वालियर के सेना को मिलाने का प्रबंध किया और दोनों ग्वालियर की ओर बढ़े। ग्वालियर को मेन को मिलाने और उसके किले पर कब्जा करने में कोई कठिनाई नहीं हुई।
(क) तांत्या टोपे को कहाँ और कैसे नुकसान पहुँचा था ?
(ख) ग्वालियर के किले पर विजय की प्राप्ति किस प्रकार हुई थी ?
उत्तर- (क) तांत्या टोपे से झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई ने दरीत से लड़ने के लिए सेना की सहायता मांगी थी। टोपे चौदह हज़ार सैनिक लेकर वहाँ पहुँच गए थे। उस पुध में काफी नुकसान हुआ था।
(ख) ताँत्या टोपे और लक्ष्मी बाई दोनों ने कालपी में मिलकर ग्वालियर को जोतन चाहा था। दोनों ने एक साथ मिल कर प्रयत्न की और अपनी वीरता से ग्वालियर के किले पर विजय प्राप्ति कर ली थी।
ध्यान देने योग्य शब्द
| गुमसुम | चुप |
|---|---|
| भीमकाय | विशालकाय |
| जनसमूह | भीड़ |
| अभिवादन | नमस्कार/वंदना |
| निपुणता | कुशलता |
| दत्तक | गोद लिया हुआ पुत्र |
| अवरोध | बाधा/रोक। |
Senapati Tantiya Tope Class 6th Textbook Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और सराहना
प्रश्न 1. 18 अप्रैल, 1859 ई० को शिवपुरी के आसपास ग्रामीणों की भीड़ पहाड़ियों घर क्यों चढ़ती जा रही थी? सही उत्तर चुनकर लिखिए।
(क) पहाड़ी पर टिट्टी दल की तरह बिखरे गोरी पल्टन के हजारों सिपाहियों को देखने के लिए।
(ख) न्याय का नाटक खेलने वाले भयत्रस्त अंग्रेज अधिकारियों को देखने के लिए।
(ग) स्वतंत्रता संग्राम के अजेय योद्धा तात्या टोपे के अंतिम दर्शन करने के लिए।
उत्तर- (ग) स्वतंत्रता संग्राम के अजेय योद्धा ताँत्या टोपे के अंतिम दर्शन करने के लिए।
प्रश्न 2. ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सूर्यास्त’ से लेखक का क्या तात्पर्य है?
उत्तर— लेखक का तात्पर्य यह है कि सन् 1857 ई० के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद तात्या टोपे ही ऐसे वीर सेनानी थे जो अंत तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते रहे। उनके बलिदान के साथ ही यह संग्राम समाप्त हो गया, इसलिए इसे ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का सूर्यास्त’ कहा गया है।
प्रश्न 3. फाँसी के तख्ते पर पहला कदम रखते ही वीर तात्या टोपे ने सबसे पहले क्या किया और क्यों?
उत्तर— फाँसी के तख्ते पर चढ़ते ही तात्या टोपे ने धरती माता की पवित्र मिट्टी अपने माथे पर लगाई। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें अपने प्राणों से अधिक मातृभूमि से प्रेम था। इसके बाद उन्होंने निर्भीकता से फाँसी का फंदा अपने गले में डाल दिया।
प्रश्न 4. “इस पर माँ भारती का यह बहादुर सपूत तात्या टोपे शहीद हो गया—अपने पीछे एक अमरगाथा छोड़कर।”
कौन-सी अमरगाथा छोड़कर? उसे भावपूर्ण शब्दों में लिखिए।
उत्तर— सन् 1857 ई० में अंग्रेजों के विरुद्ध पूरे देश में क्रांति की आग फैल चुकी थी। कानपुर पर अंग्रेजों के आक्रमण के बाद तात्या टोपे ने सेना संगठित कर संघर्ष आरंभ किया। उन्होंने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों से युद्ध किया।
रानी के बलिदान के बाद भी तात्या टोपे अकेले ही अंग्रेजी सेना से जूझते रहे। फरवरी 1859 तक वे जंगलों में छिपकर छापामार युद्ध करते रहे। विदेशी इतिहासकार मालसन ने उनकी वीरता और तेज़ रणनीति की प्रशंसा की है। अंततः विश्वासघात के कारण वे पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 ई० को शिवपुरी में फाँसी दे दी गई। इस प्रकार वे अदम्य साहस और देशभक्ति की अमरगाथा छोड़कर शहीद हुए।
प्रश्न 5. किन घटनाओं से सिद्ध होता है कि तात्या टोपे एक कुशल और स्वामिभक्त सेनापति थे?
उत्तर—
- उन्होंने विदुर को अंग्रेजों से मुक्त कराया।
- ग्वालियर के किले पर अधिकार किया।
- अंग्रेज जनरल को पराजित कर कानपुर पर कब्जा किया।
- रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
- नर्मदा नदी पार कर दक्षिण भारत के राजाओं से सहयोग लेने का प्रयास किया।
- संकट की घड़ी में भी सैनिकों का मनोबल बनाए रखा।
इन घटनाओं से सिद्ध होता है कि तात्या टोपे एक कुशल, साहसी और देशभक्त सेनापति थे।
प्रश्न 6. अंग्रेजों की कौन-सी पुरानी चाल के द्वारा तात्या टोपे को बंदी बनाया गया?
उत्तर— अंग्रेजों की यह पुरानी चाल थी कि वे विद्रोही नेताओं के किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को अपनी ओर मिला लेते थे। इसी चाल के अंतर्गत तात्या टोपे के मित्र सरदार मानसिंह को अंग्रेजों ने अपने पक्ष में कर लिया। मानसिंह ने विश्वासघात कर तात्या टोपे को पकड़वा दिया।
प्रश्न 7. विदेशी इतिहासकार मालसन ने तात्या टोपे की वीरता की प्रशंसा किन शब्दों में की है?
उत्तर— मालसन के अनुसार—
“संसार की किसी भी सेना ने कभी इतनी तेज़ी और साहस के साथ कूच नहीं किया, जितनी तेजी से तात्या टोपे की सेना करती थी। जिस बहादुरी और हिम्मत से उन्होंने अपनी योजनाओं को पूरा करने का प्रयास किया, उसकी प्रशंसा करना कठिन है।”
भाषा अध्ययन
प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखो
भीमकाय कृत्य, भारी-भरकम प्रतियोगिता, उत्तराधिकारी
उत्तर- भीमकाय बहुत बड़े शरीर वाला कृत्य काम भारी-भरकम बहुत भारी प्रतियोगिता मुकाबला उत्तराधिकारी वारिस, मरने के बाद संपत्ति का अधिकारी।
प्रश्न 2. निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग उपयुक्त वाक्य बनाकर करो
(1) नाकों चने चबाना
(2) नींद हराम करना
(3) हाथ धोना
(4) वीरगति को प्राप्त करना।
उत्तर- 1. नाकों चने चबाना —- शिवाजी को सेना ने मुगलों को नाकों चने चबा दिये।
- नींद हराम करना —- आजकल महँगाई ने लोगों की नींद हराम कर रखी है।
- हाथ धोना —- देखते ही देखते मोहन अपनी घड़ी से हाथ भी बैठा।
- वीरगति को प्राप्त करना —- अंत में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त कर गई।
प्रश्न 3. निम्नलिखित संज्ञाओं के साथ लगे विशेषणों को बदल कर अन्य उपयुक्त विशेषण लगाएं-
(1) गुमसुम पहाड़ियाँ
(2) काला भीमकाय जल्लाद
(3) घमासान युद्ध।
उत्तर- (1) उदास पहाड़ियाँ
(2) नाटा मोटा जल्लाद
(3) भीषण युद्ध
Senapati Tantiya Tope Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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