“शिष्टाचार” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का पंद्रहवां अध्याय है। यह पोस्ट Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह पाठ रामाज्ञा दिवेदी ‘समीर’ द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “शिष्टाचार” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Pehli Boond Kavita Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Question Answers
Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Summary
पाठ का सार
लेखक अपने पड़ोस में रहने वाले दो बच्चों—प्रदीप और भुवन—का उदाहरण देकर शिष्ट और अशिष्ट व्यवहार का अंतर स्पष्ट करता है। प्रदीप का व्यवहार सभ्य और शिष्ट होने के कारण सभी लोग उसकी प्रशंसा करते हैं, जबकि भुवन का अशिष्ट व्यवहार लोगों को हँसने पर मजबूर कर देता है। इससे लेखक यह बताना चाहता है कि समाज में सम्मान पाने के लिए शिष्टाचार का पालन आवश्यक है।
लेखक के अनुसार, समाज में सभ्य बनकर रहने के लिए शिष्टाचार के नियमों को जानना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी आदतों में भी शामिल करना चाहिए। शिष्टाचार का सबसे पहला और प्रमुख गुण विनम्रता है। विनम्रता केवल बड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बराबर वालों और छोटों के प्रति भी स्नेह और नम्रता का भाव होना चाहिए। विनम्रता केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यवहार और कर्मों में भी दिखाई देनी चाहिए। किसी के घर आने पर उसका प्रसन्नता से स्वागत और उचित सत्कार करना चाहिए। बड़ों के सामने ज़ोर से बोलना, ठहाके लगाना या उनसे आगे चलना अशिष्ट माना जाता है।
लेखक यह भी स्पष्ट करता है कि विनम्रता और दीनता में अंतर होता है। विनम्र रहते हुए भी व्यक्ति अपने स्वाभिमान की रक्षा कर सकता है। विनम्रता का अर्थ चापलूसी नहीं है। शिष्टाचार का दूसरा महत्त्वपूर्ण गुण है—दूसरों के निजी जीवन में दखल न देना। हर व्यक्ति का निजी जीवन होता है, इसलिए किसी से उसका वेतन, उम्र या जाति पूछना अनुचित है। किसी का नाम लेते समय श्री, श्रीमती या कुमारी जैसे सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग करना अच्छी आदत है। यदि कोई हमारे लिए कष्ट उठाकर काम करता है, तो हमें उसका हृदय से धन्यवाद करना चाहिए।
भोजन करते समय भी शिष्टाचार का ध्यान रखना आवश्यक है। दूसरों के साथ भोजन करते समय अधीरता नहीं दिखानी चाहिए। यदि घर में अतिथि हों, तो उनकी रुचि के अनुसार भोजन बनाना शिष्ट व्यवहार है।
शिष्टाचार का तीसरा आधार अनुशासन है। अनुशासन धार्मिक, सामाजिक और कानूनी सभी प्रकार का होता है। धार्मिक स्थलों पर जूते उतारना, सड़क पर बाईं ओर चलना, समय का पालन करना—ये सभी अनुशासन के उदाहरण हैं। सभा में शोर मचाना, वक्ता को बोलने न देना और राष्ट्रगान के समय बैठे रहना या चलते रहना अशिष्ट व्यवहार है।
अंत में लेखक निष्कर्ष निकालता है कि शिष्टाचार वह व्यवहार है, जिससे दूसरों और स्वयं के मन को प्रसन्नता मिलती है। इसके विपरीत अशिष्ट व्यवहार से दूसरों का मन दुखता है और समाज में हानि होती है। इसलिए हर व्यक्ति को शिष्टाचार अपनाकर सभ्य जीवन जीना चाहिए।
Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मृदुल | कोमल। |
| शिष्ट | सभ्य। |
| अशिष्ट | असभ्य। |
| कटुता | कड़वाह। |
| यथोचित | जैसा चाहिए वैसा, समुचित। |
| आचरण | चरित्र, चाल-चलन। |
| अनुचित | जो उचित न हो, गलत। |
| विनीत | विनम्र। |
| तिरस्कार | अनादर, अपमान। |
| चेष्टा | प्रयास, कोशिश। |
| अकारण | बिना कारण के। |
| असुविधा | परेशानी। |
| अधीरता | बेचैनी। |
| अतिथि | मेहमान। |
| वक्ता | वोलने वाला। |
| विपरीत | उलट। |
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
- समाज में सभ्य बन कर रहने के लिए शिष्टाचार के नियम अवश्य जानने चाहिए और उन्हें अपनी आदतों में सम्मिलित कर लेना चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग समाजों में शिष्टाचार के नियम भिन्न-भिन्न हैं, यद्यपि उनके आधार प्राय: समान नहीं हैं।
(क) हमें अपनी आदतों में क्या सम्मिलित करना चाहिए और क्यों?
(ख) विभिन्न समाजों में शिष्टाचार भिन्न हो कर भी समान क्यों हैं?
उत्तर- (क) हमें शिष्टाचार को अपनी आदतों में अवश्य सम्मिलित कर लेना चाहिए क्योंकि इससे हमें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना आ जाता है जिस से हमारा ही समाज में सम्मान बढ़ता है ।
(ख) विभिन्न समाजों में शिष्टाचार के तरीके भिन्न हो सकते हैं पर उन सब का भाव और आधार सदा एक ही होता है। इस से एक-दूसरे के प्रति हमारे अच्छे और सम्मान के भाव प्रकट होते हैं।
- विनम्रता केवल भाषा की वस्तु नहीं । हमारे कर्म में भी विनम्रता होनी चाहिए। अपने यहाँ किसी के आने पर हमें उसका प्रसन्नता से स्वागत तथा यथोचित सत्कार करना चाहिए। अपने से बड़े व्यक्तियों के बैठ जाने के बाद ही हमें बैठना चाहिए। महिलाओं के प्रति हमारे व्यवहार में और भी विनम्रता होनी आवश्यक है। बस या रेल में किसी महिला को खड़ी देख कर अपनी सीट उन्हें बैठने के लिए दे देना शिष्ट आचरण है।
(क) विनम्रता किस प्रकार प्रकट होनी चाहिए ?
(ख) बस या रेल में हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर—(क) विनम्रता केवल वाणी से ही नहीं बल्कि कार्यों से प्रकट होनी चाहिए। दूसरों का सम्मान, सत्कार, नम्रता और भद्रता इसी के गुण हैं।
(ख) बस या रेल में हमें बड़े-बुजुर्गों तथा महिलाओं को बैठने के लिए स्थान देना चाहिए। उन के प्रति विनम्र होना चाहिए ।
- हमें हर तरह के अनुशासनों का सामान्य ज्ञान होना चाहिए। जैसे, किसी सभा में शोर मचाना अनुचित है। किसी वक्ता को अपनी बात कहने देने का मौका न देना अशिष्टता है। राष्ट्रगान के अवसर पर बैठे रहना या चलना या झूकना अशिष्ट व्यवहार है। जहाँ सब लोग बैठे हों वहाँ लेट जाना या पैर फैला कर बैठना बहुत अनुचित हैं।
(क) किसी श्रोता के रूप में आप का क्या कर्त्तव्य है?
(ख) राष्ट्रगान के समय हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर—(क) किसी श्रोता के रूप में हमारा कर्त्तव्य है कि हम वक्ता को बोलने दें, शोर न मचाएँ और उसे अपनी पूरी बात कहने दें।
(ख) राष्ट्रगान के समय हिलना-डुलना, चलना, झूमना, बातें करना अशिष्ट व्यवहार नहीं करना चाहिए।
ध्यान देने योग्य शब्द
| प्रशंसा | स्तुति / बड़ाई |
|---|---|
| स्वाभिमान | आत्म-सम्मान |
| विनीत | नम्र |
| तिरस्कार | अनादर |
| उजड्डपन | मूर्खतापूर्ण |
| चेष्टा | कोशिश |
| अधीरता | बेचैनी |
| नैतिक | नीति के अनुसार |
Shishtachar Class 6th Hindi Chapter 15 Question Answers
बोध और विचार
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. दूसरों की प्रशंसा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है-
(क) पढ़ने-लिखने में तेज़ होना
(ख) अच्छा स्वास्थ्य होना
(ग) हाथ जोड़ कर नमस्ते कहना
(घ) बोल – व्यवहार में शिष्ट होना ।
उत्तर—(घ) बोल- व्यवहार में शिष्ट होना ।
प्रश्न 2. निम्नलिखित अवसरों पर हमें कैसा आचरण करना चाहिए ?
(क) जब घर में कोई मेहमान आए।
उत्तर— हमें मेहमान का प्रसन्नता से स्वागत करना चाहिए और उसका यथोचित सत्कार करना चाहिए।
(ख) जब कोई हमारे लिए कुछ काम करे।
उत्तर— हमें उसका धन्यवाद करना चाहिए तथा उसके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए।
(ग) जब हम भोजन कर रहे हों।
उत्तर— हमें भोजन करते समय अधीरता नहीं दिखानी चाहिए और शिष्ट ढंग से खाना चाहिए।
(घ) जब मेहमान को भोजन करा रहे हों।
उत्तर— हमें उसकी पसंद का भोजन बनाना चाहिए और उसे जबरदस्ती नहीं खिलाना चाहिए।
(ङ) जब हम सभा में बैठे हों।
उत्तर— हमें ज़ोर-ज़ोर से बात नहीं करनी चाहिए और अनुशासन बनाए रखना चाहिए।
(च) जब राष्ट्रगान गाया जा रहा हो।
उत्तर— हमें सीधे खड़े होकर राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए।
(छ) जब हम धार्मिक स्थानों में जाएँ।
उत्तर— हमें जूते बाहर उतारकर अंदर जाना चाहिए और शांत व्यवहार करना चाहिए।
प्रश्न 3. शिष्टाचार में किन प्रमुख बातों को महत्त्व दिया जाता है ?
उत्तर— शिष्टाचार में विनम्रता, शालीनता, दूसरों की निजी बातों में दखल न देना तथा अनुशासन का पालन करने को महत्त्व दिया जाता है।
प्रश्न 4. “विनम्रता और दीनता में अंतर है।” इस कथन को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर— विनम्रता का अर्थ नम्र और सम्मानपूर्ण व्यवहार करना है, न कि चापलूसी करना। यदि कोई व्यक्ति हमारी विनम्रता को हमारी कमजोरी समझकर हमारा तिरस्कार करे या हम पर दया दिखाए, तो उसकी कृपा पाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यही विनम्रता और दीनता में अंतर है।
प्रश्न 5. धन्यवाद कब और कैसे देना चाहिए ?
उत्तर— जब कोई व्यक्ति हमारे लिए कष्ट या असुविधा उठाकर कोई काम करता है, तब हमें उसे धन्यवाद देना चाहिए। धन्यवाद देते समय यह भाव होना चाहिए कि हम हृदय से आभार व्यक्त कर रहे हैं, केवल औपचारिक रूप से नहीं।
प्रश्न 6. दूसरों के निजी जीवन में दखल देना अनुचित क्यों माना जाता है ?
उत्तर— प्रत्येक व्यक्ति का अपना निजी जीवन होता है। किसी से उसका वेतन, उम्र या जाति पूछना उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचा सकता है। इसलिए दूसरों के निजी जीवन में दखल देना अनुचित और अशिष्ट माना जाता है।
प्रश्न 7. अन्य लोगों की उपस्थिति में हमें किस प्रकार की इच्छाएँ दबा लेनी चाहिए ?
उत्तर— अन्य लोगों की उपस्थिति में लेट जाना, पैर फैलाकर बैठना या कुर्सी पर पैर रखकर बैठना अनुचित है। इसलिए ऐसी इच्छाओं को हमें दबा लेना चाहिए और सभ्य व्यवहार करना चाहिए।
‘प्रश्न 8. स्तंभ ‘क‘ से स्तंभ ‘ख‘ को इस प्रकार मिलाइए कि उपयुक्त शिष्ट आचरण प्रतीत हो।
उत्तर-
| स्तंभ (क) | स्तंभ (ख) |
|---|---|
| 'छोटों के प्रति | स्नेह |
| बड़ों के प्रति | आदर |
| सहायक के प्रति | कृतज्ञता |
| वाणी में | मिठास |
| व्यवहार में | विनम्रता |
भाषा अध्ययन
प्रश्न 1. विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए ‘ता‘ प्रत्यय जोड़ा जाता है । जैसे – मधुर = मधुरता। सुंदर = सुंदरता आदि। इस पाठ के आधार पर ऐसे विशेषणों और भाववाचक संज्ञाओं के पाँच-पाँच उदाहरण चुनें।
उत्तर –
विशेषण – मृदुल, शिष्ट, अशिष्ट, विनम्र, दीन ।
भाववाचक संज्ञाएँ – विनम्रता, कर्कशता, प्रसन्नता, अशिष्टता, दीनता, अधीरता ।
प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के विलोम ( विपरीतार्थक ) शब्द लिखो –
विनम्र, मधुर, शिष्ट, कृतज्ञता, दीनता, अनुशासन, संयम, कर्कशता ।
उत्तर—विनम्र = कठोर । मधुर = कर्कश, कटु । शिष्ट = अशिष्ट । कृतज्ञता = कृतघ्नता ।
दीनता = सम्पन्नता । अनुशासन = अनुशासनहीनता। संयम = असंयम । कर्कशता = मृदुलता ।
Shishtachar Chapter 15 Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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