“हिमालय की बेटियाँ” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का दूसरा अध्याय है। यह पाठ नागार्जुन द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter 2 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप कविता “हिमालय की बेटियाँ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter 2 Question Answers
Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter Summary
पाठ का सार
‘हिमालय की बेटियाँ’ सुप्रसिद्ध लेखक नागार्जुन द्वारा रचित एक भावपूर्ण लेख है। इसमें लेखक ने हिमालय से निकलने वाली नदियों—जैसे गंगा, यमुना, सतलुज—को उसकी बेटियों के रूप में मानवीकरण करके प्रस्तुत किया है। दूर से ये नदियाँ शांत, गंभीर और संस्कारवान स्त्रियों जैसी प्रतीत होती हैं, जिनके प्रति लेखक के मन में श्रद्धा है। लेखक इनके जल में डुबकियाँ लगाकर उन्हें माँ, दादी, मौसी और मामी की गोद जैसा स्नेह अनुभव करता है।
हिमालय के निकट पहुँचकर लेखक देखता है कि यही नदियाँ पर्वतीय प्रदेशों में बालिकाओं की तरह उछलती-कूदती, हँसती-खेलती और नटखट लीलाएँ करती हैं; पर मैदानों में आते-आते उनका यह बालसुलभ उल्लास मानो लुप्त हो जाता है। लेखक को इनके निरंतर बहते रहने के लक्ष्य पर भी आश्चर्य होता है। बर्फ़ीली पहाड़ियों, घाटियों और जंगलों (देवदार, चीड़, सरसों, चिनार) में बहते हुए ये नदियाँ अपनी बीती बातें जैसे याद करती हों।
सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी महानदियों को लेखक बूढ़े हिमालय की गोद में खेलने वाली बालिकाएँ मानता है और समुद्र को उनका दामाद कहने में भी संकोच नहीं करता। कालिदास के ‘मेघदूत’ और काका कालेलकर के विचारों का उल्लेख कर लेखक यह स्पष्ट करता है कि नदियों का सचेतन रूप साहित्य में स्वीकृत रहा है। अंत में तिब्बत में सतलुज के पवित्र रूप से प्रभावित होकर लेखक का गीत गाने लगना, नदियों के प्रति उसकी गहन भावनात्मक अनुभूति को दर्शाता है।
Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter Word Meanings
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संभ्रांत | उत्तेजित, डरी हुई। |
| भांति | की तरह। |
| सतलज | सतलुज नदी। |
| समतल | समान क्षेत्र। |
| भाव-भंगी | भाव-भंगिमा। |
| उल्लास | खुशी। |
| ध्यान अटक जाना | ध्यान लग जाना। |
| कौतूहल | जिज्ञासा, जानने की इच्छा। |
| विस्मय | आश्चर्य, हैरानी। |
| बाललीला | बचपन के खेल। |
| लक्ष्य | उद्देश्य, मंज़िल। |
| बेचैन | अशांत। |
| विराट प्रेम | महान् प्यार। |
| अतृप्त | बिना तृप्त हुए। |
| अधित्यकाएँ | पहाड़ के ऊपर की समतल भूमि। |
| उपत्काएँ | चोटियाँ। |
| लीला निकेतन | लीला करने का घर। |
| ज़रा | थोड़ा। |
| नटखट | चंचल। |
| छोकरियों के लिए | लड़कियों के लिए। |
| मौन | चुप। |
| के सिवा | के अलावा। |
| दयालु | दया से युक्त। |
| प्रवाहित होना | बहना। |
| पिरती | बिछुड़े हुए। |
| यक्ष | कालिदास के मेघदूत का मुख्य पात्र। |
| प्रतिदान | वापस, विनिमय बदले में दूसरी वस्तु देना। |
| झिझक | संकोच। |
| सचेतन | चेतना वाला, सजीव। |
| प्रेयसी | प्रेमिका। |
| नतीजे | परिणाम। |
| मन उचट गया | मन परेशान हो गया। |
| प्रगतिशील | प्रगति करने वाला, लगातार आगे बढ़ने वाला। |
| गुनगुनाना | गाना। |
| मुदित | प्रसन्न, खुश। |
| खुमारी | नशा, पुराना प्रभाव, उदासी। |
| बलिहारी | वारी। |
| नटी | कोई भूमिका निभाने वाली स्त्री, नर्तकी। |
| पट | वस्त्र। |
| अनुपम | जिसकी उपमा न हो। |
Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter Question Answers
लेख से
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफ़ी पुरानी है । लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं ?
उत्तर – लेखक नागार्जुन नदियों को केवल माँ के रूप में ही नहीं देखते, बल्कि वे उन्हें दादी, मौसी, मामी, बहन, प्रेमिका, बेटी, लड़की और बच्ची जैसे अनेक मानवीय रूपों में देखते हैं। इन रूपों के माध्यम से लेखक नदियों के प्रति अपने स्नेह, श्रद्धा और आत्मीयता को प्रकट करता है।
प्रश्न 2. सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएं बताई गई हैं ?
उत्तर – सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय की बर्फ़ के पिघलने से उत्पन्न होकर विशाल महानदियों के रूप में बहती हैं। ये उछलती-कूदती, उमंग और उत्साह से भरी हुई समुद्र में मिल जाती हैं। समुद्र में मिलते समय उनकी उफनती तरंगें ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती हैं मानो बेटियाँ अपने पिता की गोद में प्रसन्नतापूर्वक खेल रही हों।
प्रश्न 3. काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है ?
उत्तर – काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता इसलिए कहा है क्योंकि नदियाँ समस्त जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और मानव जीवन का आधार हैं। वे धरती का कूड़ा-करकट अपने में समेटकर भी संसार का कल्याण करती हैं। दुःख सहकर भी सबका भला करने का गुण माता जैसा होता है, इसलिए नदियाँ लोकमाता कहलाती हैं।
प्रश्न 4. हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है ?
उत्तर – हिमालय की यात्रा में लेखक ने माँ, दादी, मौसी, मामी, बहन, पिता, ससुर और बेटियों जैसे पारिवारिक संबंधों की प्रशंसा की है। साथ ही उसने हिमालय, समुद्र और नदियों की महिमा का भी वर्णन किया है। विशेष रूप से सतलुज नदी को लेखक ने बहन के रूप में संबोधित किया है।
लेख से आगे
प्रश्न 1. नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित नदियों के वर्णन से कीजिए ।
उत्तर – अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए ।
प्रश्न 2. गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम‘, रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ की कविता ‘हिमालय‘ तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ‘हिमालय के आँगन में‘ पढ़िए और तुलना कीजिए ।
उत्तर – अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए ।
प्रश्न 3. यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलने वाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं ?
उत्तर – 1947 से लेकर अब तक हिमालय से निकलने वाली नदियों में निम्नलिखित बदलाव आए हैं—
(i) ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों में पानी कम हो गया है।
(ii) नदियों का बहाव धीमा हो गया ।
(iii) नदियों में सारा साल पानी नहीं रहता ।
(iv) वातावरण प्रदूषण के कारण नदियों का पानी भी दूषित हो गया है।
(v) इनके औषधीय गुण कम हो गए हैं या समाप्त हो गए हैं।
प्रश्न 4. अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?
उत्तर- कालिदास का मानना था कि सभी देवताओं का निवास हिमालय पर है । वे हिमालय पर बसते हैं । इसलिए हिमालय को देवात्मा कहा गया है ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. लेखक ने हिमालय से निकलने वाली नदियों को ममता भरी आँखों से देखते उन्हें हिमालय की बेटियाँ कहा है। आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे ? नदियों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कार्य हो रहे हैं ? जानकारी प्राप्त करें और अपना सुझाव दें।
उत्तर – लेखक ने नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहा है, लेकिन मेरे विचार से सभी नदियाँ माँ के समान हैं। जिस प्रकार माँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार नदियाँ हमें जीवन देती हैं। नदियों के जल से खेतों की सिंचाई होती है, अन्न उत्पन्न होता है और हमारी भूख-प्यास मिटती है। नदियों के कारण ही बिजली बनाई जाती है, जिससे घरों में प्रकाश होता है और उद्योग-धंधे चलते हैं। इस प्रकार नदियाँ हमारे जीवन का आधार हैं।
नदियों की सुरक्षा के लिए आजकल अनेक स्थानों पर बाँध बनाए जा रहे हैं, जिससे जल को संग्रहित किया जा सके और सूखे क्षेत्रों तक नहरों द्वारा पानी पहुँचाया जा सके। इससे बाढ़ और जल-संकट दोनों पर नियंत्रण किया जाता है।
मेरे सुझाव —
- नदियों और नहरों में पॉलीथीन तथा प्लास्टिक नहीं फेंकना चाहिए।
- कारखानों का गंदा पानी और कीटनाशक नदियों में नहीं मिलाना चाहिए।
- नदियों के किनारे भारी उद्योग स्थापित नहीं करने चाहिए।
- नदियों से अनावश्यक नहरें नहीं निकालनी चाहिए और तटों के कटाव को रोकना चाहिए।
प्रश्न 2. नदियों से होने वाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए ।
उत्तर – नदियाँ सभी जीवों के लिए जीवन का आधार हैं। वे अपने जल से धरती की प्यास बुझाती हैं और खेतों को उपजाऊ बनाती हैं। नदियाँ पर्वतों से निकलकर मैदानों में बहती हुई असंख्य प्राणियों को जीवन प्रदान करती हैं और अंत में समुद्र में मिल जाती हैं। नदियों से हमें पीने का पानी मिलता है और फसलों की सिंचाई होती है।
नदियाँ परिवहन का सस्ता और सरल साधन हैं। नावों के द्वारा लोग और सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। जंगलों की लकड़ी भी नदियों के माध्यम से दूर-दूर तक भेजी जाती है। नदियों में चट्टानों के टकराने से रेत और बजरी बनती है, जिनका उपयोग भवन और सड़क निर्माण में किया जाता है।
नदियाँ भूमिगत जल को बढ़ाती हैं, जिससे कुएँ और ट्यूबवेल भरे रहते हैं। नदियों पर बाँध बनाकर विद्युत् उत्पन्न की जाती है, जो घरों और उद्योगों के लिए आवश्यक है। नदियाँ पेड़-पौधों, मछलियों और जलजीवों का आश्रय हैं। अनेक नदियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ी हुई हैं और हमें मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
भाषा की बात
प्रश्न 1. अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है । उदाहरण-
(क) संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।
(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।
अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और सुंदर प्रयोगों को कॉपी पर भी लिखिए।
उत्तर – 1. सचमुच मुझे दादी माँ शापभ्रष्ट देवी- सी लगीं ।
- लाल कण बनावट में बालूशाही की तरह ही होते हैं।
- रक्त के तरल भाग प्लाज़्मा में एक विशेष किस्म की प्रोटीन होती है जो रक्त वाहिका की कटी-फटी दीवार में मकड़ी के जाले के समान एक जाला बुन देती है।
- मीठी आवाज़ में नहीं गाए तो क्या इस कौए जैसी कर्कश कांव-कांव करें ?
- मतलब यह बेचारा लगातार खड़ा ही रहता है टीचर से जैसे सजा मिली हो ?
प्रश्न 2. निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएँ भी मानो जीवित हो उठती हैं । लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे-
(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।
(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।
पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूँढ़िए।
उत्तर- (i) कहाँ ये भागी जा रही हैं ?
(ii) अपने महान् पिता का विराट प्रेम पाकर भी अगर इनका हृदय अतृप्त ही है, तो वह कौन होगा जो इनकी प्यास मिटा सकेगा ।
(iii) वह समुद्र जिसे पर्वतराज हिमालय की इन बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला ।
(iv) बुड्ढा हिमालय अब इनकी नटखट बेटियों के लिए कितना सिर धुनता
(v) हिमालय की छोटी-बड़ी सभी बेटियाँ आँखों के सामने नाचने लगती हैं।
प्रश्न 3. पिछली कक्षा में आप विशेषण और उसके भेदों से परिचय प्राप्त कर चुके हैं। नीचे दिए गए विशेषण और विशेष्य (संज्ञा ) का मिलान कीजिए-
| विशेषण | विशेष्य |
|---|---|
| संभ्रांत | जंगल |
| चंचल | महिला |
| समतल | नदियाँ |
| घना | आँगन |
| मूसलाधार | वर्षा |
उत्तर –
| विशेषण | विशेष्य |
|---|---|
| संभ्रांत | महिला |
| चंचल | नदियाँ |
| समतल | आँगन |
| घना | जंगल |
| मूसलाधार | वर्षा |
प्रश्न 4. दवंद्व समास के दोनों पद प्रधान होते हैं । इस समास में ‘ और‘ शब्द का लोप हो जाता है, जैसे- राजा-रानी द्वंद्व समास है जिसका अर्थ है राजा और रानी । पाठ में कई स्थानों पर द्वंद्व समासों का प्रयोग किया गया है। इन्हें खोजकर वर्णमाला क्रम ( शब्दकोश – शैली) में लिखिए।
उत्तर-
| आदर | श्रद्धा | आदर और श्रद्धा |
|---|---|---|
| गंभीर | शांत | गंभीर और शांत |
| गंगा | यमुना | गंगा और यमुना |
| माँ | दादी | माँ और दादी |
| मौसी | मामी | मौसी और मामी |
| सिंधु | ब्रह्मपुत्र | सिंधु और ब्रह्मपुत्र |
प्रश्न 5. नदी को उलटा लिखने से दीन होता है जिसका अर्थ होता है गरीब। आप भी पाँच ऐसे शब्द लिखिए जिसे उलटा लिखने पर सार्थक शब्द बन जाए । प्रत्येक शब्द के आगे संज्ञा का नाम भी लिखिए, जैसे – नदी – दीन ( भाववाचक संज्ञा )।
उत्तर –
| मीन | नमी | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|---|
| शान | नशा | भाववाचक संज्ञा |
| रानी | नीरा | व्यक्तिवाचक संज्ञा |
| ज़रा | राज़ | भाववाचक संज्ञा |
| गन | नग | द्रव्यवाचक संज्ञा |
प्रश्न 6. समय के साथ भाषा बदलती है, शब्द बदलते हैं और उनके रूप बदलते हैं, जैसे-बेतवा नदी का बदला हुआ रूप ‘ वेत्रवती‘ है। नीचे दिए गए शब्दों में से ढूँढ़कर इन नामों रूप लिखिए-
सतलुज, रोपड़, झेलम, विपाशा, वितस्ता, अजयमेरु, चिनाब, अजमेर, बनारस, रूपपुर, शतद्रुम, वाराणसी
उत्तर-
| सतलुज | शतद्रुम |
|---|---|
| झेलम | वितस्ता |
| चिनाब | विपाशा |
| रोपड़ | रूपपुर |
| अजमेर | अजयमेरु |
| बनारस | वाराणसी |
प्रश्न 7. “उनके ख्याल में शायद ही यह बात आ सके कि बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं । “
उपर्युक्त पंक्ति में ‘ही’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। ‘ही’ वाला वाक्य नकारात्मक अर्थ दे रहा है। इसीलिए ‘ही’ वाले वाक्य में कही गई बात को हम ऐसे भी कह सकते हैं। उनके ख्याल में शायद यह बात न आ सके।
इसी प्रकार नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य कई बार ‘नहीं’ के अर्थ में इस्तेमाल नहीं होते हैं, जैसे- महात्मा गांधी को कौन नहीं जानता ? दोनों प्रकार के वाक्यों के समान तीन-तीन उदाहरण सोचिए और इस दृष्टि से उनका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर – (क) ‘ही’ वाले नकारात्मक अर्थ देने वाले वाक्य
- उसके मन में यह विचार ही नहीं आया।
- मुझे इस विषय में कुछ समझ ही नहीं पड़ी।
- उन्हें अपनी गलती का एहसास ही न हुआ।
विश्लेषण
इन वाक्यों में ‘ही’ शब्द ने वाक्य को दृढ़ नकारात्मक बना दिया है। ‘ही’ हटाने पर भी अर्थ लगभग वही रहता है, किंतु प्रभाव कुछ कम हो जाता है।
(ख) नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य जो सकारात्मक अर्थ देते हैं
- महात्मा गांधी को कौन नहीं जानता?
- अपने देश से प्रेम कौन नहीं करता?
- सच्चाई की जीत कौन नहीं चाहता?
विश्लेषण
इन वाक्यों में ‘नहीं’ का प्रयोग वास्तविक नकार के लिए नहीं, बल्कि भाव की तीव्रता और सार्वभौमिक सत्य को प्रकट करने के लिए किया गया है।
Himalaya ki Betiyan Class 7 Chapter 2 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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