कविता “हम पंछी उन्मुक्त गगन के” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का पहला अध्याय है। यह कविता शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप कविता “हम पंछी उन्मुक्त गगन के” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। आप JKBOSE Class 7th Hindi पुष्प भाग 2 के अन्य पाठों के प्रशनोत्तर पाने के लिए यहाँ क्लिक करें। आइए शुरू करें:

Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Question Answers
Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Summary
कविता का सार
‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ कविता सुप्रसिद्ध कवि शिव मंगल सिंह सुमन द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने स्वतंत्रता के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। कवि पक्षियों की वाणी के माध्यम से यह संदेश देता है कि आज़ादी जीवन का मूल अधिकार है और गुलामी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
कवि कहता है कि खुले आकाश में उड़ने वाले पक्षी ही प्रसन्न होकर चहचहाते हैं। जब उन्हें पिंजरे में बंद कर दिया जाता है और दाना-पानी की व्यवस्था कर दी जाती है, तब भी वे अपने स्वाभाविक आनंद और स्वतंत्रता को खो देते हैं। वे बंदी जीवन में गाना भूल जाते हैं। चाहे पिंजरा सोने का ही क्यों न हो, पक्षी उसमें भी नहीं रहना चाहते और मुक्त होने के प्रयास में अपने पंख तक तोड़ लेते हैं।
पक्षियों को बहता हुआ पानी, नीम का कड़वा फल और खुले आसमान में उड़ना अधिक प्रिय है। पिंजरे में रहते हुए उनके लिए आकाश, पेड़ की डाल और स्वतंत्र जीवन केवल सपना बनकर रह जाता है। कवि अंत में यह संदेश देता है कि जब ईश्वर ने प्राणियों को उड़ने के लिए पंख दिए हैं, तो उन्हें बाँधकर नहीं रखना चाहिए। स्वतंत्रता ही जीवन का सच्चा सौंदर्य है।
Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Explanation
सप्रसंग सरलार्थ एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,
कनक – तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाएँगे ।
शब्दार्थ — पंछी = पक्षी । उन्मुक्त = खुला, बंधन रहित। गगन = आसमान । पुलकित = प्रसन्नता से भरे । कनक = सोना ।
प्रसंग— प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। कवि पक्षियों के माध्यम से स्वतंत्रता के महत्व को स्पष्ट कर रहा है।
सरलार्थ— कवि कहता है कि पक्षियों का वास्तविक निवास खुला आकाश है। वे वहीं रहकर प्रसन्नता से गा सकते हैं। यदि उन्हें पिंजरे में बंद कर दिया जाए तो वे गाना भूल जाते हैं। स्वतंत्र होने की तीव्र चाह में वे सोने की सलाखों से टकराकर अपने कोमल पंख तक तोड़ लेते हैं।
2. हम बहता जल पीने वाले
मर जाएँगे भूखे-प्यासे,
कहीं भली है कटुक निबौरी
कनक – कटोरी की मैदा से ।
शब्दार्थ — कटुक = कड़वी । निबौरी = नीम का फल । कनक-कटोरी = सोने से बना बर्तन।
प्रसंग— प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि पक्षियों के स्वाभाविक जीवन और स्वतंत्र प्रवृत्ति का वर्णन करता है।
सरलार्थ— इन पंक्तियों में कवि पक्षियों की ओर से कह रहा है कि पक्षी बहता हुआ जल पीना पसंद करते हैं। पिंजरे में बंद होकर वे भूखे-प्यासे मर सकते हैं। उन्हें सोने की कटोरी में मिला भोजन भी अच्छा नहीं लगता, बल्कि कड़वी नीम की निबौरी अधिक प्रिय है।
3. स्वर्ण – श्रृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं
तरु की फुनगी पर के झूले ।
शब्दार्थ — स्वर्ण = सोना । शृंखला = जंज़ीरें । तरु = पेड़। फुनगी = वृक्ष का सबसे ऊपरी भाग ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से अवतरित की गई हैं। इस कविता में कवि बताता है कि बंधन चाहे कितना भी कीमती क्यों न हो, वह स्वतंत्रता का विकल्प नहीं हो सकता। पिंजरे में बंद रहकर पक्षी अपने स्वाभाविक रूप, गुणों और प्रसन्नता को खो देते हैं ।
सरलार्थ— इन पंक्तियों में कवि कह रहा है कि पक्षी सोने की जंजीरों में बँधकर पक्षी अपनी चाल और उड़ान भूल जाते हैं। वे केवल सपनों में ही पेड़ों की ऊँची डालियों पर झूलने की कल्पना करते रहते हैं। वे पिंजरे में पड़े-पड़े पेड़ों की सब से ऊँची शाखाओं की चोटियों पर झूले झूलने का बस सपना ही देखते रहते हैं।
4. ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नीले नभ की सीमा पाने,
लाल किरण-सी चोंच खोल
चुगते तारक – अनार के दाने ।
शब्दार्थ — अरमान = इच्छाएँ । नभ = आकाश । तारक = तारे ।
प्रसंग— प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तक पुष्प भाग 2 में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि पक्षियों की आकांक्षाओं और उड़ान-स्वप्नों को दर्शाता है। कवि मानता है कि पक्षी खुले गगन में रहकर ही अपने अस्तित्व को बनाए रख सकते हैं। पिंजरे में बंद होकर वे अपना स्वाभाविक रूप खो देंगे ।
सरलार्थ— इन पंक्तियों में कवि कह रहा है कि पक्षियों की इच्छा खुले नीले आसमान में उड़ने की है। पक्षियों की चाह है कि वे नीले आकाश की सीमा तक उड़ें। वे अपनी लाल किरण-सी चोंच से तारे रूपी अनार के दानों को चुगने का स्वप्न देखते हैं।
5. होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी ।
शब्दार्थ — सीमाहीन = असीमित, जिसकी सीमा निश्चित न हो । क्षितिज = वह दूरी जहाँ धरती और आसमान आपस में मिलते प्रतीत होते हैं । होड़ा – होड़ी = जिद्द, प्रयत्न ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तक पुष्प भाग 2 में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि पक्षियों की अनंत उड़ान-लालसा और संघर्ष को प्रकट करता है। कवि कह रहा है कि पक्षी अपना अस्तित्व खुले गगन में उड़कर ही बनाए रख सकते हैं। पिंजरे में बंद होकर वह अपना स्वाभाविक रूप खो देंगे।
सरलार्थ— इन पंक्तियों में कवि कह रहा है कि आसमान में उड़ते हुए पक्षियों के पंखों में एक होड़-सी लग जाती है। वे आसमान की उस सीमा को छू लेना चाहते हैं जिसका कोई अंत नहीं है। पक्षी असीम क्षितिज को छूने की होड़ में उड़ते रहते हैं। कभी उन्हें लगता है कि वे क्षितिज से मिल गए, तो कभी लक्ष्य न पाने पर उनकी साँसें थक जाती हैं। वे आसमान में उड़ते हैं, मंज़िल पाने की चाह में उनकी साँसें उखड़ जाती हैं, कई बार तो अधूरी मिलन की इच्छा लिए हुए ही मर जाते हैं ।
6. नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं तो
आकुल उड़ान में विघ्न न डालो ।
शब्दार्थ — नीड़ = घोंसला । आश्रय = सहारा । छिन्न-भिन्न करना = तोड़ डालना । आकुल = परेशान । विघ्न = बाधा ।
प्रसंग— प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक किशोर भारती में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि पक्षियों की स्वतंत्रता की बात कर रहा है। पक्षी स्वतंत्र रहकर ही अपने अस्तित्व को बनाए रख सकते हैं। वे इस संसार में अपनी उपस्थिति को दर्शाने की शक्ति रखते हैं। पिंजरे में बंद होकर वे अपना स्वाभाविक रूप खो देंगे।
सरलार्थ— कवि इन पंक्तियों में कहता है कि चाहे पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए पेड़ की डाली मत दो । यदि चाहो तो उनके रहने का स्थान भी तोड़ डालो। परंतु भगवान ने उनको उड़ने के लिए पंख दिए हैं इसलिए उनकी बेचैनी से भरी उड़ान में किसी तरह की बाधा मत खड़ी करो ।
Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Word Meanings
शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| 1. उन्मुक्त | खुला / स्वतंत्र |
| 2. पुलकित | खुश होना |
| 3. कटुक | कड़वा |
| 4. कनक | सोना |
| 5. तारक | तारे |
| 6. क्षितिज | आकाश |
| 7. नीड़ | घोंसला / आश्रय |
| 8. आश्रय | सहारा |
| 9. आकुल | बेचैन / परेशान |
Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Poem Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कविता से
प्रश्न 1. हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते ?
उत्तर- प्रत्येक प्राणी के लिए स्वतंत्रता सबसे बड़ा सुख है। जो आनंद आज़ादी में है, वह किसी भी सुविधा में नहीं मिल सकता। पिंजरे में पक्षियों को चाहे सभी सुख-सुविधाएँ मिल जाएँ, फिर भी वे बंद रहना नहीं चाहते। उन्हें खुला आकाश, स्वतंत्र उड़ान और स्वच्छ वातावरण प्रिय है। वे खुले आसमान में उड़कर आज़ादी की साँस लेना चाहते हैं। उन्हें बहता हुआ पानी, कड़वी निंबौली और आकाश की सीमा को छूने का आनंद अधिक प्रिय है।
प्रश्न 2. पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं ?
उत्तर- पक्षी उन्मुक्त रहकर बहता हुआ जल पीना चाहते हैं। उन्हें स्वादिष्ट भोजन का लोभ नहीं, बल्कि नीम की निंबौली और प्राकृतिक दाना चुगना प्रिय है। वे पेड़ों की डालियों पर झूलना चाहते हैं। खुले आकाश में झुंड के साथ उड़ते हुए एक-दूसरे से आगे निकलना और आकाश की सीमा को छूना उनकी इच्छा है। उनकी सबसे बड़ी चाह यह है कि उनके पंखों को खुला छोड़ दिया जाए ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार उड़ सकें।
प्रश्न 3. भाव स्पष्ट कीजिए-
या तो क्षितिज मिलन बन जाता / या तनती साँसों की डोरी ।
उत्तर- इन पंक्तियों का भाव यह है कि पक्षियों में भी अपनी मंज़िल को पाने की तीव्र चाह होती है। उनकी मंज़िल आकाश की सीमा को छूना है। कभी-कभी वे उस सीमा को छू लेते हैं और उन्हें लगता है कि उनका आकाश से मिलन हो गया है। परंतु कई बार वे उस सीमा तक नहीं पहुँच पाते और उनकी इच्छा अधूरी रह जाती है। ऐसी स्थिति में निराशा और थकान से उनकी साँसें टूटने लगती हैं और वे अधूरी आकांक्षा के साथ ही जीवन समाप्त कर देते हैं।
कविता से आगे
प्रश्न 1. बहुत से लोग पक्षी पालते हैं—
(क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं ? अपने विचार लिखिए ।
उत्तर- (क) पक्षियों को पालना उचित नहीं है। जैसे मनुष्य बंद कमरे में सभी सुविधाएँ पाकर भी सुखी नहीं रह सकता, वैसे ही पक्षी भी पिंजरे में बंद होकर सुखी नहीं रह सकते। पक्षी अपने साथियों के साथ खुले वातावरण में उड़ते हुए, दाना चुगते हुए और चहचहाते हुए ही आनंद का अनुभव करते हैं। इसलिए पक्षियों को पिंजरे में कैद करना उनके स्वभाव के विरुद्ध है। यदि कोई पक्षी पालता भी है तो उसे उनके जीवन और आवश्यकताओं के अनुसार खुला व प्राकृतिक वातावरण देना चाहिए तथा एक पक्षी के साथ अन्य पक्षियों का भी साथ होना चाहिए।
(ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है ? उसकी देख-रेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए ।
(ख) हमारे पड़ोसी ने एक सफ़ेद कबूतर पाला था। घर के बच्चे और बुज़ुर्ग सुबह उसके पिंजरे के पास इकट्ठा होकर उससे स्नेहपूर्वक बातें करते थे और वह गुटर-गूँ कर उत्तर देता था। घर के मुखिया प्रतिदिन पिंजरा साफ करते और उसमें पानी तथा ज्वार का दाना रखते थे। वे कबूतर को अधिक देर तक खुला नहीं छोड़ते थे क्योंकि उन्हें डर रहता था कि कहीं कोई बिल्ली या कुत्ता उसे नुकसान न पहुँचा दे। बच्चे स्कूल से आकर उसके साथ खेलते थे। पूरे घर में वह कबूतर सबको प्रिय था।
प्रश्न 2. पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आजादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर- पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से उनकी स्वतंत्रता का हनन होता है और पर्यावरण भी प्रभावित होता है। पक्षी पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई पक्षी गले-सड़े पदार्थों और मृत जीवों को खाकर वातावरण को साफ करते हैं। वे फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीट-पतंगों को खाकर कृषि की रक्षा करते हैं। पक्षी बीजों और पराग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं। उनकी चहचहाहट वातावरण को मधुर बनाती है। पक्षी प्राकृतिक आपदाओं की सूचना भी देते हैं। वे मनुष्य को परिश्रम, समयबद्धता और जिम्मेदारी की प्रेरणा देते हैं। इसलिए पक्षियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. क्या आपको लगता है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं? पक्षियों से रहित वातावरण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए ? उक्त विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए ।
उत्तर – हाँ, मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण की योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं। ऊँची इमारतें, वृक्षों की कटाई, नदियों पर बाँध और प्रदूषण ने पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट कर दिया है। यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में पक्षी केवल संग्रहालयों में ही दिखाई देंगे। इससे बचाव के लिए शहरी योजनाओं में हरियाली को स्थान देना चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए, जल-स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए और रासायनिक उर्वरकों का कम प्रयोग करना चाहिए। उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करना चाहिए। सरकार और समाज को मिलकर पक्षियों की रक्षा करनी चाहिए।
प्रश्न 2. यदि आपके घर के किसी स्थान पर किसी पक्षी ने अपना आवास बनाया है और किसी कारणवश आपको अपना घर बदलना पड़ रहा है तो आप उस पक्षी के लिए किस तरह के प्रबंध करना आवश्यक समझेंगे ? लिखिए ।
उत्तर – पक्षी अपने घोंसले को मनुष्य के हस्तक्षेप से बचाते हैं। इसलिए घर बदलते समय हम उनके घोंसले को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे। उनके लिए दाना और पानी की व्यवस्था कर देंगे तथा नए निवासियों से घोंसले की देखभाल करने का अनुरोध करेंगे, ताकि उस पक्षी को नया स्थान खोजने की परेशानी न हो।
भाषा की बात
प्रश्न 1. स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण-सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए ।
उत्तर- 1. तारक – अनार
- कनक – कटोरी
- कटुक – निबौरी ।
प्रश्न 2. ‘ भूखे-प्यासे’ में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न ( – ) कहते हैं । इस चिह्न से ‘और’ का संकेत मिलता है, जैसे- भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।
इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए ।
उत्तर- (1) सुख-दुःख = सुख और दुःख
(2) हानि-लाभ = हानि और लाभ
(3) रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
(4) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(5) माता-पिता = माता और पिता
(6) दाल-रोटी = दाल और रोटी
(7) गंगा-यमुना = गंगा और यमुना
(8) राधा-कृष्ण = राधा और कृष्ण
(9) वेद-पुराण = वेद और पुराण
(10) नाक-नक्श = नाक और नक्श ।
Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke Class 7 Poem Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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