“पापा खो गए” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का चौथा अध्याय है। यह पाठ विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Papa Kho Gye Class 7 Hindi Chapter 4 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ “पापा खो गए” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Mithaiwala Class 7 Hindi Chapter 3 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Papa Kho Gye Class 7 Hindi Chapter 4 Question Answers
Papa Kho Gye Chapter 4 Summary (सार)
पाठ का सार
विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित ‘पापा खो गए’ एक कल्पनात्मक और संवेदनशील एकांकी है, जिसमें निर्जीव वस्तुओं को मानवीय भावनाएँ देकर समाज की एक गंभीर समस्या—बच्चों के अपहरण—को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
कहानी रात के समय एक सुनसान सड़क पर घटित होती है, जहाँ एक बिजली का खंभा, एक पेड़, एक लैटरबॉक्स, दीवार पर नाचती लड़की का पोस्टर और एक कौवा मौजूद हैं। रात के सन्नाटे में ये सभी अपने दिनभर के अनुभवों और जीवन की पीड़ा साझा करते हैं। पेड़ और खंभा दिन को अधिक अच्छा मानते हैं, क्योंकि दिन में सड़क पर जीवन की चहल-पहल दिखाई देती है। खंभा एक ही स्थान पर खड़े रहने के अपने विवश जीवन से दुखी है। पेड़ अपने अतीत की बातें बताते हुए कहता है कि कभी यहाँ केवल वह और समुद्र था, जिससे उसे गहरा अकेलापन महसूस होता था। खंभा उसके जीवन में मित्र बनकर आया और दोनों के बीच सच्ची दोस्ती हो गई।
लैटरबॉक्स भजन गुनगुनाते हुए आता है और लोगों की चिट्ठियाँ पढ़कर अपना मन बहलाता है, लेकिन पेड़ और खंभा उसे रोकते हैं क्योंकि किसी की निजी चिट्ठी पढ़ना गलत है। तभी किसी के आने की आहट से सब चुप हो जाते हैं।
कुछ देर बाद एक आदमी कंधे पर बेहोश लड़की को उठाए आता है। वह बच्चों का अपहरण करने वाला है। लड़की को वहीं छोड़कर वह खाने की व्यवस्था करने चला जाता है। उसके जाने के बाद सभी निर्जीव वस्तुएँ उस आदमी की निंदा करती हैं और बच्ची को बचाने की योजना बनाती हैं। उनकी आवाज़ों से लड़की जाग जाती है और बोलती हुई वस्तुओं को देखकर हैरान रह जाती है। माँ-बाप की याद में वह रोने लगती है। लैटरबॉक्स उससे बात कर उसका डर दूर करता है, लेकिन लड़की को अपने घर का पता भी याद नहीं होता।
धीरे-धीरे लड़की इन वस्तुओं के साथ घुल-मिल जाती है और उनके साथ खेलने लगती है। तभी अपहरणकर्ता वापस आता है। सभी वस्तुएँ फिर निर्जीव बन जाती हैं और लड़की पेड़ के पीछे छिप जाती है। आपसी सहयोग से वे उस आदमी को भ्रमित कर देते हैं और वह खाली हाथ लौट जाता है। इस प्रकार सब मिलकर बच्ची की रक्षा करते हैं।
बाद में बच्ची खेलते-खेलते सो जाती है। अब उसे घर पहुँचाने का उपाय खोजा जाता है। कौवा योजना सुझाता है कि पेड़ और खंभा ऐसे झुक जाएँ जैसे कोई दुर्घटना हुई हो और लैटरबॉक्स संदेश फैलाए। सुबह होने पर पोस्टर पर बड़े अक्षरों में “पापा खो गए हैं” लिखा दिखाई देता है और नाचती लड़की की मुद्रा एक खोई हुई बच्ची जैसी लगती है। अंत में लैटरबॉक्स सबको संदेश देता है कि जिस किसी को भी इस बच्ची के पापा मिलें, उन्हें यहाँ ले आए।
Papa Kho Gye Chapter 4 Word Meanings (शब्दार्थ)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भंगिमा | मुद्रा। |
| आफ़त | मुसीबत। |
| थर-थर काँपना | डर से काँपना। |
| तकलीफ़ | परेशानी। |
| स्वभाव | आदत। |
| झेलना | सहन। |
| गरूर | घमंड। |
| झड़ना | समाप्त। |
| चरण | पद। |
| कर्कश | कानों को खराब लगने वाली आवाज़। |
| फोकट | बेकार, व्यर्थ। |
| जम्हाई | उबासी। |
| प्राइवेट | निजी। |
| गुप्त | किसी ओर को न बताने वाली बात। |
| स्तब्ध | चुपचाप। |
| पेट में चूहे दौड़ना | बहुत भूख लगना। |
| दाल में काला होना | कुछ गड़बड़ होना। |
| दुष्ट | बुरा। |
| भयंकर | भयानक। |
| स्वप्न | सपना। |
| गश्त लगाना | चारों ओर घूमना। |
| गौर से देखना | ध्यान से देखना। |
| चकमा देना | धोखा देना। |
| प्रेक्षक | दर्शक। |
Papa Kho Gye Chapter 4 Question Answers (प्रश्नों के उत्तर)
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
नाटक से
प्रश्न 1. नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों ?
उत्तर – नाटक में सबसे बुद्धिमान पात्र कौवा लगा। यद्यपि लोग उसकी आवाज़ और काले रंग के कारण उसे पसंद नहीं करते, पर उसकी समझदारी सबसे अधिक है। वह पूरे दिन शहर में घूमता रहता है, इसलिए उसे दुनियादारी का अच्छा अनुभव है। उसी ने लड़की को घर पहुँचाने का व्यावहारिक उपाय सुझाया। कौवा दुर्घटना का रूप बनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करता है, काँव-काँव कर सबको बुलाता है और पोस्टर पर ‘पापा खो गए’ लिखवाने का विचार भी देता है। उसकी सूझ-बूझ से ही लड़की के माता-पिता तक संदेश पहुँचने की संभावना बनती है।
प्रश्न 2. पेड़ और खंभे में दोस्ती कैसे हुई ?
उत्तर – शुरू में सड़क पर केवल पेड़ ही खड़ा था और वह बहुत अकेला महसूस करता था। शहर के विकास के साथ उसके पास एक बिजली का खंभा लगाया गया। पेड़ ने उससे मित्रता करने की कोशिश की, लेकिन खंभा अपने घमंड में बात नहीं करता था। एक दिन तेज़ आँधी-तूफान में खंभा गिरने लगा, तब पेड़ ने उसे सहारा दिया। इस दौरान पेड़ स्वयं घायल हो गया। पेड़ की निस्वार्थ मदद देखकर खंभे का घमंड टूट गया और उसी दिन से दोनों में सच्ची दोस्ती हो गई।
प्रश्न 3. लैटरबॉक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे ?
उत्तर – लैटरबॉक्स का रंग लाल था, इसलिए सभी उसे प्यार से ‘लाल ताऊ’ कहकर पुकारते थे। वह पढ़ा-लिखा, समझदार और मिलनसार था। वह भजन गाता था और लोगों की चिट्ठियों के माध्यम से समाज की स्थिति को समझता था। निर्जीव होते हुए भी वह समाज और बच्चों की चिंता करता था, इसलिए सभी उसका सम्मान करते थे।
प्रश्न 4. लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है ?
उत्तर – लाल ताऊ की आवाज़ बहुत मधुर थी और उसके भजन वातावरण को आनंदमय बना देते थे। वह लोगों की बातें और भावनाएँ अपने भीतर सँजोकर रखता था। उसे उन बच्चों पर गुस्सा आता था जो पढ़ाई छोड़कर खेलकूद में समय बर्बाद करते हैं। वह अनुशासन का पक्षधर था। साथ ही उसका हृदय बहुत कोमल था। वह डरी हुई बच्ची को सांत्वना देता है और उसका डर दूर करता है। इन गुणों के कारण लाल ताऊ अन्य पात्रों से अलग दिखाई देता है।
प्रश्न 5. नाटक में बच्ची को बचानेवाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको मज़ेदार लगीं ? लिखिए ।
उत्तर – नाटक में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में एकमात्र सजीव पात्र नाचने वाली लड़की का पोस्टर है। वह दीवार पर नृत्य की मुद्रा में लगी होती है। उसका बार-बार पोस्टर से गिरना और घुंघरुओं की आवाज़ आना बहुत मज़ेदार लगता है। गिरने के बाद उसका फिर से पोस्टर में जाकर खड़े हो जाना रोचक है। वह बच्ची के साथ नाचती है, उसे छिपने में मदद करती है और थक जाने पर पोस्टर में बैठ भी जाती है। सजीव होते हुए भी वह निर्जीव पोस्टर की भूमिका बहुत सुंदर ढंग से निभाती है।
प्रश्न 6. क्या वजह थी कि सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे?
उत्तर – नाटक के सभी पात्र निर्जीव थे। वे बोल सकते थे और सोच सकते थे, लेकिन अपनी जगह छोड़कर कहीं जा नहीं सकते थे। इसके अलावा बच्ची को भी अपने घर का पता याद नहीं था। इस कारण वे किसी से सहायता नहीं ले पाए। अपनी सीमाओं के कारण सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा सके।
नाटक से आगे
प्रश्न 1. अपने-अपने घर का पता लिखिए तथा चित्र बनाकर वहाँ पहुँचने का रास्ता भी बताइए।
उत्तर—विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।
प्रश्न 2. मराठी से अनूदित इस नाटक का शीर्षक ‘पापा खो गए’ क्यों रखा गया होगा ? अगर आपके मन में कोई दूसरा शीर्षक हो तो सुझाइए और साथ में कारण भी बताइए।
उत्तर – इस नाटक का शीर्षक ‘पापा खो गए’ इसलिए रखा गया है क्योंकि नाटक की बच्ची अपने परिवार से बिछड़ जाती है और उसे न तो अपने पिता का नाम याद है और न ही घर का पता। बच्ची को पेड़, खंभे, कौवे और लैटरबॉक्स से स्नेह और सुरक्षा मिलती है, जिससे वह वहाँ अपनापन महसूस करने लगती है। ऐसे में प्रतीत होता है कि बच्ची तो सुरक्षित है, लेकिन उसके पापा खो गए हैं। यही भावना इस शीर्षक को सार्थक बनाती है।
इस नाटक का एक अन्य उपयुक्त शीर्षक ‘एक छोटी-सी लड़की’ हो सकता है। पूरा नाटक उसी बच्ची के इर्द-गिर्द घूमता है। उसके आने के बाद सभी पात्र उसी की रक्षा, सुरक्षा और उसे घर पहुँचाने के उपाय सोचते हैं। सभी की चिंता का केंद्र वही बच्ची होती है, इसलिए यह शीर्षक भी उचित लगता है।
प्रश्न 3. क्या आप बच्ची के पापा को खोजने का नाटक से अलग कोई और तरीका बता सकते हैं ?
उत्तर – नाटक में बताए गए उपायों के अतिरिक्त बच्ची के पापा को खोजने के और भी तरीके हो सकते हैं। जैसे—
• अख़बार में बच्ची का फोटो और विवरण छपवाया जा सकता है।
- रेडियो पर बच्ची से घोषणा करवाई जा सकती है ताकि उसके पापा उसकी आवाज़ पहचान सकें।
- टेलीविज़न पर बच्ची का फोटो और उसके बताए अनुसार पिता का स्केच दिखाया जा सकता है।
- सोशल मीडिया या सार्वजनिक स्थलों पर सूचना लगाई जा सकती है।
इन उपायों से बच्ची के पिता तक संदेश पहुँच सकता है।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. अनुमान लगाइए कि जिस समय बच्ची को चोर ने उठाया होगा वह किस स्थिति में होगी ? क्या वह पार्क / मैदान में खेल रही होगी या घर से रूठकर भाग गई होगी या कोई अन्य कारण होगा ?
उत्तर – संभव है कि बच्ची पार्क या मैदान में खेल रही हो। बच्चे खेल में इतने मग्न हो जाते हैं कि उन्हें समय का ध्यान नहीं रहता। खेलते-खेलते शाम हो गई होगी और अंधेरा होने के कारण बच्ची डर गई होगी। उसी समय चोर वहाँ आया होगा। उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर टॉफी या चॉकलेट दी होगी और घर पहुँचाने का झूठा वादा किया होगा। बच्ची उसकी बातों में आ गई और वह उसे उठाकर ले गया।
प्रश्न 2. नाटक में दिखाई गई घटना को ध्यान में रखते हुए यह भी बताइए कि अपनी सुरक्षा के लिए आजकल बच्चे क्या-क्या कर सकते हैं ? संकेत के रूप में नीचे कुछ उपाय सुझाए जा रहे हैं। आप इससे अलग कुछ और उपाय लिखिए।
- समूह में चलना ।
- एकजुट होकर बच्चा उठानेवालों या ऐसी घटनाओं का विरोध करना ।
- अनजान व्यक्तियों से सावधानीपूर्वक मिलना ।
उत्तर- आजकल बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय आवश्यक हैं—
- बच्चों को अनजान लोगों से दूरी बनाए रखना सिखाना चाहिए।
- किसी अनजान व्यक्ति से कोई चीज़ न लें।
- घर का पता और माता-पिता का मोबाइल नंबर याद रखें।
- अकेले सुनसान जगह पर न जाएँ।
- किसी भी परेशानी में तुरंत बड़ों या पुलिस से सहायता लें।
- घर में बड़ों की निगरानी और मार्गदर्शन मिलना बहुत ज़रूरी है।
भाषा की बात
प्रश्न 1. आपने देखा होगा कि नाटक के बीच-बीच में कुछ निर्देश दिए गए हैं। ऐसे निर्देशों से नाटक के दृश्य स्पष्ट होते हैं, जिन्हें नाटक खेलते हुए मंच पर दिखाया जाता है, जैसे—’सड़क / रात का समय……दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ । ‘ यदि आपको रात का दृश्य मंच पर दिखाना हो तो क्या-क्या करेंगे, सोचकर लिखिए।
उत्तर- मंच पर हल्की नीली रोशनी रखी जाएगी ताकि रात का आभास हो। सड़क सुनसान दिखाई देगी। दूर-दूर से कुत्तों के भौंकने और चौकीदार की आवाज़ सुनाई देगी—“जागते रहो!” पुरानी इमारत से कभी-कभी मंद रोशनी झलकेगी। पूरा वातावरण रहस्यमय और शांत होगा। अचानक कहीं से कदमों की आहट सुनाई देगी, जिससे डर का माहौल बन जाएगा।
प्रश्न 2. पाठ को पढ़ते हुए आपका ध्यान कई तरह के विराम चिह्नों की ओर गया होगा । अगले पृष्ठ पर दिए गए अंश से विराम चिह्नों को हटा दिया गया है। ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उपयुक्त चिह्न लगाइए-
मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी अरे बाप रे वो बिजली थी या आफ़त याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड्डा कितना गहरा पड़ गया था खंभे महाराज अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है अंग थरथर काँपने लगते हैं
उत्तर— मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। अरे, बाप रे! वह बिजली थी या आफ़त! याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी, वहाँ खड्डा कितना गहरा पड़ गया था, खंभे महाराज! अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है। अंग थरथर काँपने लगते हैं।
प्रश्न 3. आसपास की निर्जीव चीज़ों को ध्यान में रखकर कुछ संवाद लिखिए,
जैसे-
- चॉक का ब्लैक बोर्ड से संवाद
- कलम का कॉपी से संवाद
- खिड़की का दरवाज़े से संवाद ।
उत्तर – • चॉक का ब्लैक बोर्ड से संवाद
चॉक— मैं तुम्हारे ऊपर लिखते-लिखते घिस जाती हूँ।
ब्लैक बोर्ड— लेकिन तुम्हारे बिना मैं भी बेकार हूँ।
चॉक— सही कहा, हम दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
- कलम का कॉपी से संवाद-
कलम— मैं तुम्हें शब्दों से भर देती हूँ।
कलम – बहन, तुम्हारे शब्दों से ही मैं ज्ञान का भंडार बनती हूँ।
- खिड़की का दरवाज़े से संवाद-
खिड़की – लोग मुझसे रोशनी और हवा लेते हैं।
दरवाजा – खिड़की बहन, इतना घमंड करना अच्छी बात नहीं है। मेरे बिना कोई अंदर आ ही नहीं सकता।
खिड़की – सच है, हम दोनों की अपनी-अपनी ज़रूरत है।
प्रश्न 4. उपर्युक्त में से दस-पंद्रह संवादों को चुनें, उनके साथ दृश्यों की कल्पना करें और एक छोटा-सा नाटक लिखने का प्रयास करें। इस काम में अपने शिक्षक से सहयोग लें।
उत्तर – विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।
Papa Kho Gye Class 7 Hindi Chapter 4 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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