कविता “मैं सबसे छोटी होऊँ” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का नौवां अध्याय है। यह पोस्ट Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Question Answers के बारे में है। यह कविता सुमित्रानंदन पंत द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “मैं सबसे छोटी होऊँ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Ticket Album Class 6th Hindi Poem Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Question Answers
Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Text
मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ ! तेरे साथ,
कभी न छोडूं तेरा हाथ!
बड़ा बनाकर पहले हमको
तू पीछे छलती है मात !
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात !
अपने कर से खिला, धुला मुख,
धूल पोंछ, सज्जित कर गात,
थमा खिलौने, नहीं सुनाती
हमें सुखद परियों की बात !
ऐसी बड़ी न होऊँ मैं
तेरा स्नेह न खोऊँ में,
तेरे अंचल की छाया में
छिपी रहूँ निस्पृह, निर्भय,
कहूँ – दिखा दे चंद्रोदय !
Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Summary
कविता का सार
‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित एक अत्यंत सुंदर कविता है। इस कविता में कवि ने एक छोटी-सी बच्ची के अपनी माँ के प्रति गहरे लगाव और स्नेहपूर्ण भावनाओं का मार्मिक चित्रण किया है। बच्ची अपनी माँ को संबोधित करते हुए कहती है कि वह सदा छोटी बनी रहना चाहती है। उसकी इच्छा है कि वह हमेशा माँ की गोद में सोए और उसका आँचल पकड़कर इधर-उधर घूमती रहे।
वह माँ से शिकायत भी करती है कि माँ बच्चे को बड़ा बनाकर उसे छल लेती है। बड़े होने पर माँ बच्चों का हाथ पकड़कर उनके साथ घूमती-फिरती नहीं है, न ही अपने हाथों से उन्हें खिलाती है। वह उन्हें नहलाकर प्यार से खिलौने भी नहीं देती और न ही परियों की सुख देने वाली कहानियाँ सुनाती है।
छोटी बच्ची अपनी माँ से कहती है कि वह कभी बड़ी नहीं होना चाहती, क्योंकि वह बड़ी होकर माँ का स्नेह खोना नहीं चाहती। उसकी यही अभिलाषा है कि वह सदा माँ के आँचल में छिपकर चाँद का उदय देखती रहे।
Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Explanation
पद्यांशों का सप्रसंग सरलार्थ
1. मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ ! तेरे साथ,
कभी न छोडूं तेरा हाथ!
शब्दार्थ— अंचल = वस्त्र का छोर, साड़ी, ओढ़नी आदि का वह छोर जो छाती ओर पेट पर रहता है। सदा = हमेशा।
प्रसंग— ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती’ की ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ नामक कविता से ली गई हैं । इस कविता के कवि सुमित्रानंदन पंत जी हैं। इस कविता में कवि ने सबसे छोटे होने की कल्पना की है ताकि उन्हें माँ का स्नेह अधिक से अधिक मिलता रहे।
सरलार्थ— एक छोटी बच्ची अपनी माँ को संबोधित करते हुए कहती है कि हे माँ! मँ सदा सबसे छोटी बनी रहना चाहती हूँ। छोटी होने के कारण तुम मुझे खूब लाड़-प्यार दोगी। मैं तुम्हारी गोदी में सोया करूंगी। मैं सदा तुम्हारा आँचल पकड़कर तुम्हारे साथ-साथ घूमती रहूँगी और तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोडूंगी। छोटे होने पर ही मुझे तुम्हारा खूब प्यार मिल पाएगा। भाव—कवि ने छोटी बच्ची के माध्यम से अपनी भावनाओं को सुंदर ढंग से व्यक्त किया है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) बच्ची क्या बनी रहना चाहती है ? क्यों ?
(ग) वह क्या कभी नहीं छोड़ना चाहती ?
उत्तर—(क) कवि – सुमित्रानंदन पंत, कविता- मैं सबसे छोटी होऊँ ।
(ख) एक छोटी बच्ची सदा सब से छोटी बनी रहना चाहती है। वह माँ के लाड़-प्यार को सदा पाना चाहती है।
(ग) वह कभी भी माँ का हाथ नहीं छोड़ना चाहती। सदा माँ का आँचल थाम कर साथ-साथ घूमना चाहती है।
2. बड़ा बनाकर पहले हमको
तू पीछे छलती है मात !
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात !
अपने कर से खिला, धुला मुख,
धूल पोंछ, सज्जित कर गात,
थमा खिलौने, नहीं सुनाती
हमें सुखद परियों की बात !
शब्दार्थ— छलना = धोखा देना । मात = माता, माँ । कर = हाथ । मुख = मुँह । सज्जित = सजाना । गात = शरीर । सुखद = सुख प्रदान करने वाली ।
प्रसंग— ये पंक्तियाँ हुमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती’ की ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के कवि सुमित्रानंदन पंत जी हैं। इस कविता में ने सबसे छोटे होने की कल्पना की है ताकि उन्हें माँ का स्नेह अधिक से अधिक मिलता रहे। ।
सरलार्थ— छोटी बच्ची अपनी माँ को संबोधित करते हुए कहती है कि वह बड़ी नहीं | बनना चाहती। वह माँ से शिकायत करती है कि बड़े होने पर वह उसे पहले जैसा स्नेह नहीं देती। वह फिर हाथ पकड़कर घुमाती-फिराती नहीं है। वह माँ जो पहले हमारे हाथ-मुँह धुला अपने हाथों से खिलाती है तथा हमें नहलाकर सुंदर बनाती है, हमें खेलने के लिए खिलौने देती है वही बाद में हमें उतना स्नेह नहीं देती। बच्चों के बड़े होने पर माँ परियों की सुख देने वाली बातें भी नहीं सुनाती है ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (कं) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) बच्ची माँ से क्या शिकायत करती है?
(ग) बच्चों के बड़ा होने पर माँ क्या नहीं सुनाती?
उत्तर- (क) कवि – सुमित्रानंदन पंत, कविता – मैं सबसे छोटी होऊँ।
(ख) वच्ची अपनी माँ से शिकायत करती है कि बच्चों के बड़ा हो जाने के बाद वह उन्हें हाथ पकड़ कर घुमाती – फिराती नहीं, अपने हाथों से खिलाती नहीं, खेलने के लिए खिलौने नहीं देती और नहला कर उन्हें सुंदर नहीं बनाती।
(ग) बच्चों के बड़ा हो जाने पर माँ उन्हें परियों की सुंदर कहानियाँ नहीं सुनाती ।
3. ऐसी बड़ी न होऊँ मैं
तेरा स्नेह न खोऊँ में,
तेरे अंचल की छाया में
छिपी रहूँ निस्पृह, निर्भय,
कहूँ – दिखा दे चंद्रोदय !
शब्दार्थ— निस्पृह = इच्छा से रहित । निर्भय = डर से रहित । चंद्रोदय = चाँद का निकलना ।
प्रसंग— ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘किशोर भारती’ की कविता ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ से ली गई हैं। इस कविता के कवि सुमित्रानंदन पंत जी हैं। इसमें उन्होंने एक छोटी- सी बच्ची के माध्यम से बाल – भावनाओं का सुंदर वर्णन किया है।
सरलार्थ— छोटी-सी बच्ची अपनी माँ को संबोधित करते हुए कहती है कि हे माँ! मैं बड़ी नहीं होना चाहती। ऐसे बड़े होने का भी क्या लाभ कि माँ का स्नेह ही छूट जाए। मैं बड़ी होकर माँ के स्नेह को खोना नहीं चाहती हूँ । हे माँ! मैं तो तुम्हारे आँचल की छाया में छिपकर इच्छाओं से रहित तथा निडर होकर चंद्रोदय देखना चाहती हूँ। मैं किसी भी स्थिति में तुमसे दूर नहीं होना चाहती हूँ ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) बच्ची क्या खो जाने के भय से बड़ी नहीं होना चाहती ?
(ग) बच्ची सदा कहाँ छिपना चाहती है ?
(घ) वह क्या देखना चाहती है ?
उत्तर- (क) कवि – सुमित्रानंदन पंत, कविता – मैं सबसे छोटी होऊँ ।
(ख) बच्ची अपने प्रति माँ का स्नेह खो जाने के भय से बड़ी नहीं होना चाहती ।
(ग) बच्ची सदा माँ के स्नेह भरे आँचल में छिप कर रहना चाहती है ।
(घ) वह माँ के दिखाने पर आसमान में चंद्रमा को देखना चाहती है।
ध्यान देने योग्य शब्द
अंचल — वस्त्र का छोर, साड़ी, ओढ़नी आदि का वह छोर जो छाती और पेट पर रहता है ।
गात — शरीर
निस्पृह — इच्छा रहित
निर्भय — निडर ।
Main Sabse Chhoti Hun Poem Question Answers
कविता से
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. कविता में सबसे छोटे होने की कल्पना क्यों की गई है ?
उत्तर – कवि माँ का प्यार पाना चाहता है। वह चाहता है कि उसकी माँ का स्नेह सदा उसे मिलता रहे। वह जानता है कि छोटे बच्चों को माँ बहुत प्यार से पालती पोसती है। माँ का अधिक-से-अधिक प्यार पाने के लिए ही कवि ने छोटे होने की कल्पना की है।
प्रश्न 2. कविता में ‘ऐसी बड़ी न होऊँ मैं’ क्यों कहा गया है ?
उत्तर – कविता में कवि ने कहा है कि माँ छोटे बच्चों को अधिक प्यार करती है। जब वही छोटे बच्चे बड़े हो जाते हैं तो माँ उन्हें डाँटती- फटकारती भी है। बच्चे के बड़े होने पर | माँ उस पर पहले से कम ध्यान देती है। उसे अपने हाथों से खिलाती नहीं है और फिर माँ नहलाकर सुलाती और बच्चों को परियों को कहानियाँ भी नहीं सुनाती है। इसी कारण कविता में ‘ऐसी बड़ी न होऊँ मैं’ कहा गया है।
प्रश्न 3. कविता में किसके आँचल की छाया में छिपे रहने की बात कही गई है। और क्यों ?
उत्तर – कविता में माँ के आंचल में रहने की बात कही गई है। बच्चों को अपनी माँ के साथ रहना बहुत अच्छा लगता है। इस कविता में बच्चे की माँ के साथ नज़दीकी की कई स्थितियाँ बताई हैं। छुटपन में बच्चे अपनी माँ की गोद में ही सोते हैं। अपनी माँ का | आँचल पकड़कर उसके साथ-साथ फिरते रहते हैं। इसके साथ-साथ बच्चे अपनी माँ का हाथ पकड़कर इधर-उधर घूमते हैं । इस प्रकार बच्चे बचपन में अपनी माँ के अधिक करीब
रहते हैं।
प्रश्न 4. आशय स्पष्ट करो—
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात
उत्तर—छोटी बच्ची बड़ी नहीं बनना चाहती। वह सदा माँ के प्यार को पाना चाहती है। वह नहीं चाहती कि वह माँ के साथ को छोड़े। बड़ा हो जाने पर तो माँ हाथ पकड कर अपने साथ सदा घुमाती – फिराती नहीं है।
कविता से आगे
प्रश्न 1. कविता में पता करके लिखो कि माँ बच्चों के लिए क्या-क्या काम करती है ? तुम स्वयं सोच कर लिखो कि बच्चों को माँ के लिए क्या-क्या करना चाहिए ?
उत्तर—कविता में बताया गया है कि माँ बच्चों को बहुत प्यार करती है । वह छोटे बच्चों को गोदी में उठाकर खिलाती रहती है और गोदी में सुलाती है । माँ अपने हाथों से खिलाती है, मुँह धुलाती है। वह बच्चों को नहलाकर खिलौने खेलने के लिए देती है। इसके साथ-साथ माँ परियों की बातें सुनाती है जो बहुत अच्छी लगती हैं। हाँ, माँ को ऐसा ही करना चाहिए और बच्चों को भी माँ का कहना मानना चाहिए। उन्हें जी-जान से उस का सम्मान करना चाहिए ।
प्रश्न 2. बच्चों को प्रायः सभी क्षेत्रों में बड़ा होने के लिए कहा जाता है। इस कविता में बालिका सबमें छोटी बनी रहना क्यों चाहती है ?
उत्तर—बच्चों को प्रायः सभी क्षेत्रों में बड़ा होने के लिए कहा जाता है क्योंकि बड़े होकर ही वे स्वावलंबी बन सकेंगे। वे अपना काम स्वयं कर सकेंगे। वे बड़े होकर उन सब ज़िम्मेदारियों को निभा सकेंगे जिन्हें अब बड़े निभा रहे हैं।
बालिका चाहती है कि उसकी माँ का स्नेह उसे सदा मिलता रहे । वह जानती है कि जब वह बड़ी हो जाएगी तो उसकी माँ उसे उतना स्नेह नहीं दे पाएगी। जब बच्चा बड़ा हो जाता है तो उसे यह कह दिया जाता है कि अब वह बड़ा हो गया है। यही कारण है कि बालिका ने इस कविता में सदा छोटी बनी रहने की इच्छा व्यक्त की है।
अनुमान और कल्पना
- इस कविता के अंत के कवि माँ से चंद्रोदय दिखा देने की बात क्यों कर रहा है ? अनुमान लगाओ और अपने शिक्षक को सुनाओ।
- इस कविता को पढ़कर इसमें आए तथ्यों और अपनी कल्पना से एक कहानी लिख कर दोस्तों को दिखाओ ।
उत्तर – विद्यार्थी स्वयं करें ।
भाषा की बात
प्रश्न 1. ‘पकड़-पकड़ कर’ की तरह नीचे लिखे शब्दों को पूरा करो और उनसे वाक्य भी बनाओ।
छोड़—, फिर—, पौंछ— सुना—, दिखा—, बना—, खिला—, थमा —, कह—, छिपा— ।
उत्तर -1. छोड़-छोड़ – तुम पंक्ति छोड़-छोड़ कर पौधा लगाते जाओ।
- फिर-फिर – आप फिर-फिर ग़लती क्यों कर रहे हो ?
- पोंछ-पोंछ- बर्तन पोंछ-पोंछ कर रसोई में रखते रहो ।
- सुना-सुना – माँ सब बातें सुना-सुना कर पड़ोसन को ताने दे रही थी।
- दिखा-दिखा – तस्वीरें दिखा-दिखा कर मेज़ पर रखते जाओ ।
- बना-बना- माँ ने पूरियाँ बना-बना कर ढेर लगा दिया था।
- खिला-खिला – अब बस भी करो। क्यों खिला-खिला कर उस का पेट फाड़ोगे ?
- थमा-थमा – तुम्हें लकड़ियां थमा-थमा कर मैं तो थक गया हूँ।
- कह-कह—’ कह-कह । तू भी अपनी बात जल्दी कह ।’
- छिपा – छिपा – तू छिपा – छिपा क्यों रहता है ? कभी घर से बाहर निकला कर ।
प्रश्न 2. इन शब्दों के समान अर्थ वाले दो-दो शब्द लिखो – हाथ, सदा, मुख, माता, स्नेह ।
उत्तर- 1. हाथ- -हस्त, कर
- सदा — हरदम, सदैव
- मुख – चेहरा, आनन
- माता – जननी, मातृ
- स्नेह – प्रेम, प्यार ।
प्रश्न 3. कविता में ‘दिन-रात’ शब्द आया है। दिन रात का विलोम है। तुम ऐसे पाँच शब्दों के जोड़े सोचकर लिखो। विलोम शब्दों से मिलकर बने हों। जोड़ों के अर्थ को समझने के लिए वाक्य भी बनाओ ।
उत्तर- 1. पाप-पुण्य – मनुष्य के पाप-पुण्य ही उसके भाग्य का निर्माण करते हैं।
- धर्म-अधर्म—हमें धर्म-अधर्म को सोचकर ही सही मार्ग को चुनना चाहिए।
- आकाश-पाताल – राम ने मोहन को ढूँढने के लिए आकाश-पाताल एक का दिया, किंतु वह नहीं मिला ।
- उचित-अनुचित—हमें जीवन में उचित – अनुचित का ध्यान रखना चाहिए।
- अच्छा-बुरा – हर व्यक्ति के जीवन में अच्छा-बुरा तो लगा ही रहता है।
प्रश्न 4. ‘निर्भय’ शब्द में ‘नि’ उपसर्ग लगाकर शब्द बनाया गया है। तुम भी ‘नि’ उपसर्ग से पाँच शब्द बनाओ ।
उत्तर — निर्जल, निर्जन, निर्भर, निकुंज, निर्बल ।
प्रश्न 5. कविता की किन्हीं चार पंक्तियों को गद्य में लिखो ।
उत्तर – हे माँ, मैं तेरी सबसे छोटी बेटी बनी रहूँ। मैं तेरी गोद में सोऊँ। मैं तेरा आँच पकड़-पकड़ कर तेरे पीछे घूमती रहूँ। मैं तेरे साथ ही रहूँ ।
Main Sabse Chhoti Hun Class 6th Poem Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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