“नीलकंठ” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का आठवाँ अध्याय है। यह पाठ महादेवी वर्मा द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ “नीलकंठ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Ek Tinka Class 7 Hindi Chapter 7 Poem Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Question Answers
Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Summary (सार)
पाठ का सार
‘नीलकंठ’ रेखाचित्र की लेखिका महादेवी वर्मा हैं। इस रेखाचित्र में उन्होंने पक्षियों के प्रति अपने गहरे प्रेम और उनकी भावनाओं का सुंदर वर्णन किया है। लेखिका यह बताना चाहती हैं कि पक्षियों में भी मनुष्यों की तरह प्रेम, करुणा, ईर्ष्या और दुःख की भावनाएँ होती हैं।
एक दिन लेखिका एक मेहमान को स्टेशन छोड़कर पक्षियों की दुकान पर जाती हैं। वहाँ दुकानदार बड़े मियाँ उन्हें मोर और मोरनी का एक छोटा जोड़ा दिखाते हैं। दोनों बहुत छोटे होते हैं और तीतर के बच्चों जैसे दिखाई देते हैं। लेखिका उन्हें खरीदकर घर ले आती हैं। लोग कहते हैं कि दुकानदार ने उन्हें धोखा दिया है, लेकिन लेखिका दोनों पक्षियों को अपने पास रखती हैं।
धीरे-धीरे मोर और मोरनी बड़े होने लगते हैं। मोर का नाम उसकी नीली गर्दन के कारण नीलकंठ रखा जाता है और मोरनी का नाम राधा। नीलकंठ सुंदर, साहसी और बुद्धिमान पक्षी बन जाता है। वह लेखिका के चिड़ियाघर का स्वामी बन जाता है और सभी पक्षियों की रक्षा करता है। एक बार वह साँप से खरगोश के बच्चे की जान बचाकर अपनी वीरता सिद्ध करता है।
नीलकंठ वर्षा ऋतु में बादलों को देखकर बहुत सुंदर नृत्य करता है। लेखिका को उसका नृत्य बहुत अच्छा लगता है। कई बार विदेशी मेहमान भी उसके नृत्य और शालीन व्यवहार से प्रभावित होते हैं और उसे “परफेक्ट जेंटलमैन” कहते हैं।
कहानी में एक घायल मोरनी कुब्जा का प्रवेश होता है। कुब्जा ईर्ष्यालु स्वभाव की होती है। वह राधा से जलने लगती है और उसके अंडों को तोड़ देती है। इस घटना से नीलकंठ बहुत दुखी हो जाता है और चुप रहने लगता है। कुछ समय बाद नीलकंठ की मृत्यु हो जाती है, जिससे लेखिका अत्यंत दुःखी हो जाती हैं।
नीलकंठ के मरने के बाद राधा उदास रहती है और बादलों को देखकर अपनी केका ध्वनि से उसे पुकारती रहती है। इस रेखाचित्र के माध्यम से लेखिका ने यह संदेश दिया है कि पक्षियों का जीवन भी भावनाओं से भरा होता है और हमें प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम और संवेदना रखनी चाहिए।
Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Word Meanings (शब्दार्थ)
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अतिथि | मेहमान |
| चिड़ियार | पक्षियों को पकड़ने वाला |
| शावक | बच्चा |
| खासियत | विशेषता |
| अनुसरण | पीछे-पीछे चलना |
| दुर्बलता | कमज़ोरी |
| आविर्भूत | प्रकट |
| नवागुंतक | नया-नया आया हुआ |
| आक्रमण | हमला |
| मार्जारी | मादा बिल्ली |
| सघन | बहुत घनी |
| बंकिम | टेढ़ा |
| नीलाभ | नीली आभा |
| ग्रीवा | गरदन |
| भंगिमा | मुद्रा |
| द्युति | चमक |
| उद्दीप्त होना | चमकना |
| श्याम | काली |
| मंथर | धीमी |
| सहचारिणी | साथ देने वाली |
| चंचु-प्रहार | चोंच से चोट करना |
| आर्तक्रंदन | दर्द भरी आवाज़ में चीखना |
| व्यथा | पीड़ा |
| निश्चेष्ट | वेहोश होना |
| उष्णता | गर्मी |
| अधर | बीच में |
| कार्तिकेय | शिव का पुत्र |
| हिंसक | हिंसा करने वाला |
| मेघ | बादल |
| नृत्य | नाच |
| नित्य | प्रतिदिन |
| विस्मयाभिभूत | आश्चर्यपूर्ण, हैरानी भरा |
| पैनी | तेज़ |
| हौले-हौले | धीरे-धीरे |
| पुष्पित | फूलों से युक्त |
| क्रूर कर्म | कठोर कार्य |
| मंजरियां | नई कोंपलें, बौर |
| स्तब्क | गुलदस्ता |
| सोपान | सीढ़ी |
| करुण-कथा | दुःख भरी कहानी |
| विरल | बहुत कम |
| मूँज | बाण की रस्सी |
| सारांश | निचोड़ |
| बारहा | बार-बार |
| कुब्जा | कुबड़ी, कंस की एक दासी जिसका कुब्बड़ श्रीकृष्ण ने ठीक किया था |
| द्वेष | ईर्ष्या |
| दुकेली | जो अकेली न हो |
| मेघाच्छन्न | बादलों से ढका हुआ |
| केका | मोर की बोली |
| सुरम्य | मनोहर |
Neelkanth Class 7 Hindi Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
निबंध से
प्रश्न 1. मोर – मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए?
उत्तर – मोर और मोरनी के नाम उनके रंग-रूप और स्वभाव को देखकर रखे गए थे। मोर की गर्दन नीले और हरे रंग की चमक लिए हुए थी। उसकी गर्दन लंबी थी और वह उसका प्रयोग बहुत सुंदर और कोमल ढंग से करता था, इसलिए लेखिका ने उसका नाम नीलकंठ रखा। मोरनी हमेशा मोर के साथ उसकी छाया की तरह रहती थी, इसी कारण उसका नाम राधा रखा गया।
प्रश्न 2. जाली के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का किस प्रकार स्वागत हुआ?
उत्तर- जब मोर के बच्चे जाली के बड़े घर में पहुँचे तो वहाँ के सभी जीवों ने उन्हें बड़ी उत्सुकता से देखा। उनका स्वागत ठीक वैसे ही हुआ जैसे किसी घर में नई बहू का होता है। लक्का कबूतर गुटरगूँ करते हुए उनके चारों ओर घूमने लगा। बड़े खरगोश गंभीरता से उन्हें देखने लगे और छोटे खरगोश उछल-कूद करने लगे। तोते एक आँख बंद करके उन्हें ध्यान से परखने लगे। इस तरह मोर के बच्चों के आने से पूरे जालीघर में हलचल मच गई।
प्रश्न 3. लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं?
उत्तर- लेखिका को नीलकंठ की कई आदतें बहुत पसंद थीं। उसके नेतृत्व में सभी पक्षी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते थे, इसलिए उसका पक्षियों का सेनापति बनना लेखिका को अच्छा लगता था। जब नीलकंठ पंख फैलाकर गोल घेरा बनाकर नृत्य करता था, तो वह दृश्य उन्हें बहुत सुंदर लगता था। वह साँप जैसे खतरनाक जीवों को अपनी पैनी चोंच से मार देता था, लेकिन लेखिका की हथेली से भुने चने बहुत ही कोमलता से उठाकर खाता था—यह बात उन्हें विशेष रूप से भाती थी।
प्रश्न 4. ‘इस आनंदोत्सव की रागिनी में बेमेल स्वर कैसे बज उठा‘ – वाक्य किस किस घटना की ओर संकेत कर रहा है?
उत्तर- नीलकंठ और राधा के जीवन में बहुत प्रेम और आनंद था। दोनों खुशी-खुशी रहते थे, लेकिन कुब्जा नाम की मोरनी के आने से यह सुख भंग हो गया। कुब्जा ईर्ष्यालु स्वभाव की थी और उसे राधा का नीलकंठ के साथ रहना अच्छा नहीं लगता था। वह राधा पर हमला करती और उसके अंडे भी तोड़ देती थी। इससे नीलकंठ बहुत दुखी रहने लगा और कुब्जा से बचने के लिए छिपता फिरता था। अंत में नीलकंठ की बिना बीमारी या चोट के मृत्यु हो गई। इस प्रकार कुब्जा के आने से उनके आनंदपूर्ण जीवन में दुख का स्वर जुड़ गया।
प्रश्न 5. वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय क्यों हो जाता था?
उत्तर – नीलकंठ को वसंत ऋतु बहुत प्रिय थी। उसे फलों के पेड़ों से अधिक फूलों से भरे वृक्ष अच्छे लगते थे। वसंत में आम के पेड़ मंजरियों से भर जाते थे और अशोक के वृक्ष लाल पत्तों और फूलों से सज जाते थे। इस सुंदर वातावरण में नीलकंठ का जालीघर में बंद रहना उसे असह्य लगने लगता था, इसलिए उन दिनों उसे खुले में छोड़ दिया जाता था।
प्रश्न 6. जालीघर में रहनेवाले सभी जीव एक-दूसरे के मित्र बन गए थे, पर कुब्जा के साथ ऐसा संभव क्यों नहीं हो पाया?
उत्तर – जालीघर में रहने वाले सभी जीवों के स्वभाव अलग-अलग थे, फिर भी वे आपस में मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन कुब्जा का स्वभाव बहुत ईर्ष्यालु और झगड़ालू था। वह किसी से भी प्रेम से बात नहीं करती थी और विशेष रूप से राधा से शत्रुता रखती थी। इसी कारण कुब्जा की किसी भी जीव से मित्रता नहीं हो पाई।
प्रश्न 7. नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप से किस तरह बचाया? इस घटना के आधार पर नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—एक दिन साँप ने खरगोश के बच्चे को निगलने का प्रयास किया। बच्चे की हल्की चीं-चीं की आवाज़ नीलकंठ ने दूर से सुन ली। वह तुरंत वहाँ पहुँचा और बुद्धिमानी से साँप के फन को अपने पंजों में दबा लिया, फिर चोंच से उस पर प्रहार किया। इससे साँप की पकड़ ढीली पड़ गई और खरगोश का बच्चा बच गया।
इस घटना से नीलकंठ के स्वभाव की ये विशेषताएँ प्रकट होती हैं—
- संरक्षक — वह सभी जीवों की रक्षा करता था।
- चौकन्ना — वह हर समय आसपास की गतिविधियों पर ध्यान रखता था।
- फुर्तीला — संकट की स्थिति में वह तुरंत पहुँच जाता था।
- बुद्धिमान — उसने समझदारी से काम लेकर बच्चे को सुरक्षित बचाया।
- बहादुर — उसने साँप जैसे खतरनाक जीव से डरने के बजाय उसका सामना किया।
निबंध से आगे
प्रश्न 1. यह पाठ एक ‘रेखाचित्र‘ है । रेखाचित्र की क्या – क्या विशेषताएँ होती हैं ? जानकारी प्राप्त कीजिए और लेखिका के लिखे किसी अन्य रेखाचित्र को पढ़िए।
उत्तर – रेखाचित्र में किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना का शब्दों के माध्यम से सजीव और भावपूर्ण चित्रण किया जाता है। यह कल्पना पर नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन पर आधारित होता है। इसमें संवेदनशीलता, भावनात्मकता और प्रभावशीलता होती है। रेखाचित्र की भाषा सरल, चित्रात्मक और भावपूर्ण होती है। इसमें वर्णित विषय का सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण किया जाता है।
प्रश्न 2. वर्षा ऋतु में जब आकाश में बादल घिर आते हैं तब मोर पंख फैलाकर धीरे-धीरे मचलने लगता है- यह मोहक दृश्य देखने का प्रयास कीजिए ।
उत्तर – विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।
प्रश्न 3. पुस्तकालय से ऐसी कहानियों, कविताओं या गीतों को खोजकर पढ़िए जो वर्षा ऋतु और मोर ने नाचने से संबंधित हों ।
उत्तर – विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें ।
अनुमान और कल्पना
- निबंध में आपने ये पंक्तियाँ पढ़ी हैं- ‘मैं अपने शाल में लपेटकर उसे संगम गई। जब गंगा की बीच धार में उसे प्रवाहित किया गया तब उसके पंखों की चंद्रिकाओं से बिंबित- प्रतिबिंबित होकर गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर के समान तरंगित हो उठा।‘ – इन पंक्तियों में एक भावचित्र है । इसके आधार पर कल्पना कीजिए और लिखिए कि मोरपंख की चंद्रिका और गंगा की लहरों में क्या-क्या समानताएँ लेखिका ने देखी होंगी जिसके कारण गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर पंख के समान तरंगित हो उठा।
उत्तर – जब लेखिका नीलकंठ को गंगा में प्रवाहित करती हैं, तो उसके मोरपंख पानी में फैल जाते हैं। गंगा की लहरें उन पंखों के साथ हिलने-डुलने लगती हैं। धूप पड़ने पर गंगा की लहरें चमक उठती हैं और उनमें कई रंग झिलमिलाने लगते हैं। ठीक उसी प्रकार, जब सूर्य की किरणें मोरपंखों की चंद्रिकाओं पर पड़ती हैं, तो वे भी रंग-बिरंगी और चमकीली दिखाई देने लगती हैं। लहरों का उठना-गिरना और पंखों का फैलाव आपस में मिलकर ऐसा दृश्य रचते हैं, मानो गंगा का पूरा चौड़ा पाट एक विशाल मोरपंख बन गया हो। इसी समानता के कारण लेखिका को गंगा का प्रवाह एक बड़े मयूर पंख जैसा प्रतीत होता है।
प्रश्न 2. नीलकंठ की नृत्य – भंगिमा का शब्दचित्र प्रस्तुत करें।
उत्तर – नीलकंठ नृत्य में अत्यंत निपुण था। बादलों की हल्की-सी आहट सुनते ही वह आनंद से भर उठता था। वह अपनी केका ध्वनि के द्वारा मानो वर्षा को आमंत्रित करता था। नृत्य करते समय वह अपने रंग-बिरंगे पंखों को गोल छाते के समान फैला लेता था। उसके पंख इंद्रधनुष की तरह चमकने लगते थे। नृत्य के दौरान उसके कदमों में एक स्वाभाविक लय होती थी। वह कभी आगे-पीछे घूमता, तो कभी दाएँ-बाएँ घूमते हुए थिरकने लगता था। बीच-बीच में वह किसी ताल पर रुक जाता और फिर उसी क्रम में नृत्य आरंभ कर देता। वर्षा समाप्त होने पर वह अपने पंखों को फैलाकर सुखाने लगता था। यह मुद्रा भी उसके नृत्य का ही सुंदर भाग लगती थी।
भाषा की बात
प्रश्न 1. ‘रूप‘ शब्द के कुरूप, स्वरूप, बहुरूप आदि शब्द बनते हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों से अन्य शब्द बनाओ-
गंध, रंग, फल, ज्ञान
उत्तर – गंध – दुर्गंध, सुगंध ।
रंग – सुरंग, नवरंग, बदरंग ।
फल – निष्फल, सुफल ।
ज्ञान-विज्ञान, संज्ञान, परिज्ञान ।
प्रश्न 2. विस्मयाभिभूत शब्द विस्मय और अभिभूत दो शब्दों के योग से बना है। इसमें विस्मय के य के साथ अभिभूत के अ के मिलने से या हो गया है । अ आदि वर्ण हैं। ये सभी वर्ण-ध्वनियों में व्याप्त हैं। व्यंजन वर्णों में इसके योग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जैसे क् + अ = क इत्यादि । आ की मात्रा के चिह्न (T) से आप परिचित हैं। अ की भांति किसी शब्द में आ के भी जुड़ने से आकार की मात्रा ही लगती है, जैसे – मंडल + आकार = मंडलाकार । मंडल और आकार की संधि करने पर (जोड़ने पर ) मंडलाकार शब्द बनता है और मंडलाकार शब्द कर विग्रह करने पर ( तोड़ने पर ) मंडल और आकार दोनों अलग होते हैं। आगे दिए गए शब्दों के संधि विग्रह कीजिए-
संधि
नील + आभ = …….
नव + आगुंतक = …….
विग्रह
सिंहासन = …….
मेघाच्छन्न = …….
उत्तर – संधि = नीलाभ, नवांगुतक।
विग्रह = सिंह + आसन, मेघ + आछन्न।
कुछ करने को
चयनित व्यक्ति / पशु/पक्षी की खास बातों को ध्यान में रखते हुए एक रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर – अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से रेखाचित्र स्वयं बनाइए।
Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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