पाठ “ऐसे-ऐसे” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का सातवां अध्याय है। यह पोस्ट Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answers के बारे में है। यह पाठ विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “ऐसे-ऐसे” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Sathi Hath Badhana Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answers
Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Summary
पाठ का सार
‘ऐसे-ऐसे’ विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गई एक श्रेष्ठ एकांकी है। इसमें लेखक ने मोहन नामक एक ऐसे बालक का चित्रण किया है, जो स्कूल का काम नहीं करता और मास्टर जी की मार से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाता है।
एकांकी का आरंभ आठ-नौ वर्ष के लड़के मोहन के कराहने से होता है। वह तीसरी कक्षा में पढ़ता है। वह बार-बार अपने पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ होने की बात कहता है। उसकी माँ और पिता उसकी बीमारी को लेकर घबरा जाते हैं। मोहन का पिता उसकी माँ को बताता है कि कुछ समय पहले तक मोहन बिल्कुल ठीक था, पर थोड़ी देर से ही वह पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ होने की शिकायत कर रहा है। उसकी माँ और पिता उसकी हालत देखकर चिंतित हो जाते हैं। मोहन बीच-बीच में कराहते हुए माँ-माँ कहता रहता है।
मोहन के पिता डॉक्टर को फोन करके बुलाते हैं। उनके पड़ोसी दीनानाथ जी वैद्य को बुला लाते हैं। मोहन की माँ, पिता और दीनानाथ जी की बातचीत चलती रहती है और मोहन बीच-बीच में कराहता रहता है। तभी वैद्य जी आ जाते हैं। वे बताते हैं कि मोहन के पेट में वायु का प्रकोप है। कब्ज होने के कारण पेट की वायु उसे पीड़ा दे रही है। वे कहते हैं कि अभी पुड़िया भिजवा देंगे, जिससे दस्त हो जाएगा और पेट का दर्द ठीक हो जाएगा। मोहन के पिता वैद्य जी को पाँच रुपये का नोट दे देते हैं। दीनानाथ जी वैद्य जी के साथ पुड़िया लाने चले जाते हैं।
थोड़ी ही देर में डॉक्टर साहब आ जाते हैं। वे मोहन की जाँच-पड़ताल करते हैं और उसे कब्ज तथा बदहजमी की समस्या बताते हैं। मोहन के पिता उन्हें भी दस रुपये का नोट देते हैं और उनके साथ दवा लाने चले जाते हैं।
मोहन की बीमारी की खबर सुनकर उसके स्कूल के मास्टर जी भी वहाँ पहुँच जाते हैं। वे मोहन को देखते ही समझ जाते हैं कि उसे कोई बीमारी नहीं है, बल्कि वह नाटक कर रहा है। मास्टर जी मोहन की माँ से कहते हैं कि मोहन की बीमारी की दवा उनके पास है। फिर वे मोहन से पूछते हैं कि क्या उसने स्कूल का काम पूरा किया है। मोहन कोई उत्तर नहीं देता। तब मास्टर जी कहते हैं कि यदि उसने काम नहीं किया है तो कोई बात नहीं, उसे दो दिन का और समय दे दिया जाएगा, लेकिन अब उसे उठकर सवाल हल करना शुरू करना होगा।
इतना सुनते ही मोहन तुरंत उठकर खड़ा हो जाता है। यह देखकर उसकी माँ हैरान रह जाती है। तभी दीनानाथ जी और मोहन के पिता वैद्य तथा डॉक्टर साहब की दवाइयाँ लेकर लौट आते हैं। वे भी मोहन को पूरी तरह ठीक देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। स्कूल की मार से बचने के लिए मोहन द्वारा किए गए इस नाटक पर सभी ज़ोर-ज़ोर से हँस पड़ते हैं।
Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Word Meaning
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वैद्य | हकीम । |
| दृश्य | नज़ारा । |
| उम्र | आयु । |
| गलीचा | सूत या ऊन के धागे से बुना हुआ कालीन |
| क्लास | कक्षा |
| बेचैन | व्याकुल । |
| अंट-शंट | फ़ालतू चीजें । |
| यकायक | अचानक । |
| तकलीफ़ | पीड़ा । |
| पिपरमेंट | पुदीने की जाति का एक पौधा । |
| भला-चंगा | स्वस्थ, ठीक-ठाक । |
| गुलज़ार | चहल-पहल । |
| नटखट | शरारती । |
| धमा- चौकड़ी | उछल-कूद, कूद - फाँद, ऊधम । |
| वात | शरीर में रहने वाली वायु । |
| प्रकोप | बीमारी का बढ़ना । |
| हर्ष | खुशी । |
| छकाना | परेशान करना । |
| तबीयत | शरीर या मन की स्थिति । |
| बदहज़मी | अपच, अजीर्ण, भोजन का न पचना । |
| इत्ती | इतनी । |
| रौनक | चहल- पहल । |
| बेशक | चाहे । |
| मौन | चुप । |
| इनकार | मना करना; मनाही । |
| सहसा | अचानक । |
| ठगी-सी | हैरान होकर । |
| चकित | हैरान । |
| अट्टहास | ज़ोर-ज़ोर से हँसना । |
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-नीचे लिखे गद्यावतरणों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
- वैद्य जी : अभी बता देता हूँ। असल में बच्चा है। समझा नहीं पाता है । ( नाड़ी दबाकर ) वात का प्रकोप है…… मैंने कहा, बेटा, जीभ तो दिखाओ । ( मोहन जीभ निकालता है।) कब्ज़ है । पेट साफ़ नहीं हुआ। ( पेट टटोलकर) हूँ, पेट साफ़ नहीं है । मल रुक जाने से वायु बढ़ गई है। क्यों बेटा? (हाथ की उँगलियों को फैलाकर फिर सिकोड़ते हैं ।) ऐसे – ऐसे होता है ?
(क) वैद्य जी ने किसे देखकर किस का प्रकोप बताया ?
(ख) वायु किस कारण बढ़ गई थी ?
उत्तर- -(क) वैद्य जी ने नाड़ी और जीभ देखकर बताया कि उसे वात का प्रकोप है। (ख) मोहन का पेट खराब था। उसका पेट साफ़ नहीं था । मल रुक जाने के कारण वायु बढ़ गई थी।
- वैद्य जी : (हर्ष से उछलकर ) मैंने कहा न, मैं समझ गया। अभी पुड़िया भेजता हूँ । मामूली बात है, पर यही मामूली बात कभी-कभी बड़ों-बड़ों को छका देती है। समझने की बात है । मैंने कहा, आओ जी, दीनानाथ जी, आप ही पुड़िया ले लो। (मोहन की माँ से ) आधे-आधे घंटे बाद गरम पानी से देनी है। दो-तीन दस्त होंगे। बस फिर ‘ऐसे-ऐसे ऐसे भागेगा जैसे गधे के सिर से सींग !
(क) वैद्य जी हर्ष से क्यों उछले थे ?
(ख) मोहन की माँ से वैद्य जी ने क्या कहा था ?
उत्तर- (क) वैद्य जी ने मोहन को देखकर उसकी बीमारी को समझ लिया था और इसी कारण वे प्रसन्नता से उछले थे।
(ख) वैद्य जी ने मोहन की माँ को बताया था कि आधे-आधे घंटे के बाद उसे गरम पानी से दवाई देनी थी। इससे उसे दो-तीन दस्त होंगे और वह बिलकुल ठीक हो जाएगा।
- मास्टर: (हँसकर ) कुछ नहीं, माता जी, मोहन ने महीना भर मौज की। स्कूल का काम रह गया। आज खयाल आया । बस डर के मारे पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ होने लगा – ‘ऐसे-ऐसे’ ! अच्छा, उठिए साहब ! आपके ‘ऐसे-ऐसे’ की दवा मेरे पास है। स्कूल से आपको दो दिन की छुट्टी मिलेगी। आप उसमें काम पूरा करेंगे और आपका ‘ऐसे-ऐसे’ दूर भाग जाएगा । ( मोहन उसी तरह मुँह छिपाए रहता है ।) अब उठकर सवाल शुरू कीजिए। उठिए, खाना मिलेगा। ( मोहन उठता है । माँ ठगी-सी देखती है। दूसरी ओर से पिता और दीनानाथ दवा लेकर प्रवेश करते हैं ।)
(क) मोहन के पेट दर्द का क्या कारण था ?
(ख) मोहन को मास्टर जी ने दो दिन की छुट्टी क्यों दी थी ?
उत्तर—(क) मोहन के पेट दर्द का कारण केवल इतना था कि उसने महीना भर मौज की थी। उसने स्कूल का काम पूरा नहीं किया था। उस डर के कारण वह पेट दर्द का बहाना कर रहा था।
(ख) मोहन को मास्टर जी ने दो दिन की छुट्टी दी थी जिसमें वह अपना गृहकार्य पूरा कर सके।
ध्यान देने योग्य शब्द
गलीचा — सूत या ऊन के धागे से बुना हुआ कालीन ।
अंट- रोट — फालतू चीजें
गड़-गड़ — गरजने की आवाज
कल — चैन
बला — कष्ट
भला-चंगा — स्वस्थ, तंदरुस्त, अच्छा-खासा
गुलजार — चहल-पहल वाला
धमा-चौकड़ी — उछल-कूद कूद-फाँड, ऊधम
वात — शरीर में रहने वाली वायु के बढ़ने से होने वाला रोग
प्रकोप — बीमारी का बढ़ना, बहुत अधिक या बड़ा हुआ कोप
बदहजमी — अपच, अजीर्ण
रौनक — चहल-पहल
Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
एकांकी से
प्रश्न 1. सड़क के किनारे एक सुंदर फ्लैट में बैठक का दृश्य। उसका एक दरवाजा सड़क वाले बरामदे में खुलता है………….उस पर एक फोन रखा है। इस बैठक की पूरी तस्वीर बनाओ।
उत्तर- विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से करें।
प्रश्न 2. माँ मोहन के ऐसे-ऐसे‘ कहने पर क्यों घबरा रही थी ?
उत्तर- जब मोहन ने बताया कि उसके पेट में ऐसे ऐसे हो रहा है तो माँ घबरा गई। माँ को डर था कि कहीं मोहन की कोई बीमारी न की गई हो। माँ ऐसे ऐसे को एक बड़ी बीमारी समझ रही थी। यह मोहन के कराहने और उसकी पीड़ा को देखकर घबरा गई।
प्रश्न 3. ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं ? जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं ? ऐसे कुछ बहानों बारे में लिखो।
उत्तर- जब विद्यार्थी स्कूल का काम नहीं करते हैं तो कई प्रकार के बहाने बनाते हैं। इसमें से कुछ बहाने ऐसे हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं।
(i) विद्यार्थी का बुखार होने या अन्य किसी बीमारी का नाम लेना।
(ii) यदि विद्यार्थी यह कहें कि वह अपनी कापी घर भूल आया है।
(iii) यदि विद्यार्थी यह कहें कि उसके हाथ में चोट लगी है और उसने नकली पट्टी बाँधी हो ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. जब तुम्हारी तबीयत खराब होती है तो तुम्हारे घर वालों का व्यवहार तुम्हारे प्रति कैसा रहता है ? इसे शिक्षक को बताओ।
उत्तर- जब किसी भी कारण मेरी तबीयत खराब होती है तो मेरे घरवालों का व्यवहार मेरे प्रति सहानुभूति और अपनत्व-भाव से भरा होता है। मैं जानता हूँ कि वे मुझे बहुत चाहते हैं पर बीमारी के समय तो उसमें वृद्धि हो जाती है। मेरी माँ तो मेरे सिरहाने से उठती ही नहीं और मेरी बहन मुझसे बार- बार कुछ न कुछ खाने का आग्रह करती रहती है। पिता जी अपने काम पर जाने से पहले मुझसे बातें करते है: हाँसला बढ़ाते हैं और वापिस लौटने पर मुझे दुलारते हैं ।
प्रश्न 2. मान लो कि तुम मोहन की तबीयत पूछने जाते हो। तुम अपने और मोहन के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो ।
उत्तर- मैं — “मोहन, कैसी तबीयत है ?”
मोहन — “मेरी तबीयत ठीक नहीं है।”
मैं — “मोहन, तुम्हें क्या हो रहा है ?”
मोहन — “कुछ नहीं बस पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ हो रहा है।”
मैं — “कल शाम तक तो तुम ठीक थे।”
मोहन (कराहकर) — “बस आज सुबह से ही हो रहा है।”
मैं — ‘अच्छा, मोहन तुम आराम करो और अपना ध्यान रखना।”
मोहन — ” आह – ह – अच्छा।”
प्रश्न 3. ‘नाटक‘ शब्द का आम जिंदगी में कब-कब इस्तेमाल किया जाता है ? सोच कर लिखो।
उत्तर—’ नाटक’ शब्द का अर्थ हो ‘अभिनय’ से जुड़ा हुआ है। आम जिंदगी में जब कभी हमें कभी भी कोई झूठा बहाना बनाना होता है तो ‘नाटक’ का सहारा लेना ही पड़ता है। गृहकार्य न करने पर नाटक करना पड़ता है। मुँह लटका कर कहना पड़ता है कि ‘कॉपी घर पर ही रह गई” या “कॉपी किसी ने चुरा ली” या “कल मेरी तबीयत खराब हो गई थी।” जब किसी की सहयता न करनी हो तो नाटक करना पड़ता है और जब अपनों को बचाने के लिए बहाना करना हो तो नाटक करना पड़ता है। बालसभा में कुछ सुनना पड़े तो गला खराब होने का नाटक करना पड़ता है। कक्षा में ड़ाँट से बचने के लिए तो अक्सर नाटक करना ही पड़ता है।
प्रश्न 4. संकट के समय के लिए कौन कौन से नंबर याद रखने चाहिए। ऐसे वक्त में पुलिस, फ़ायर ब्रिगेड और डाक्टर से तुम कैसे बात करोगे ?
उत्तर- संकट के समय में पुलिस का 100 नंबर, फ़ायर ब्रिगेड का 101 नंबर, और डाक्टर (एम्बुलेंस का 102 नंबर) के नंबर याद रखने चाहिए। इन सभी से अलग-अलग ढंग से बात की जानी चाहिए। जेसै–
पुलिस से बात — हैलो। पुलिस स्टेशन। जी मैं एकता कॉलोनी से बोल रहा हूँ। यहाँ सेक्टर नंबर 20 में शर्मा जी के घर में चोरी हुई है। चोर 3 लाख नकदी और ज़ेवर ले गए हैं। कृपया आप जल्दी पहुँचें।
फायर ब्रिगेड वालों से बात — हैलो। फायर ब्रिगेड ऑफिस। जी मैं वसंत कुंज से बोल रहा हूँ। यहाँ पूजा अपार्टमेंट की दूसरी और तीसरी मंजिल पर आग लगी हुई है। काफ़ी जान-माल के नष्ट होने की आशंका है। आप जल्दी पहुँचे।
डॉक्टर से बात — हैलो। डॉक्टर वर्मा। मैं सुदर्शन चौधरी, सैक्टर-13 से बोल रहा हूँ। मेरे पिता जी का इलाज आपके पास चल रहा है। इस समय उनकी हालत बहुत गंभीर है। वे कुछ खा-पी भी नहीं रहे हैं। आप कृपया जल्दी से जल्दी पहुँचे।
भाषा की बात
(क) मोहन ने केला और संतरा खाया।
(ख) मोहन ने केला और संतरा नहीं खाया।
(ग) मोहन ने क्या खाया ?
(घ) मोहन, केला और संतरा खाओ।
उपर्युक्त वाक्यों में से पहला वाक्य एकांकी से लिया गया है। बाकी तीन वाक्य देखने में पहले वाक्य से मिलते-जुलते हैं, पर उनके अर्थ अलग-अलग हैं। पहला वाक्य किसी कार्य या बात के होने के बारे में बताता है। इसे विधवाचक वाक्य कहते हैं। दूसरे वाक्य का संबंध उस कार्य के न होने से है, इसलिए उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। (निषेध का अर्थ नहीं या मनाही होता है) तीसरे वाक्य में इसी बात को प्रश्न के रूप में पूछा जा रहा है, ऐसे वाक्य प्रश्नवाचक कहलाते हैं। चौथे वाक्य में मोहन से उसी कार्य को करने के लिए कहा जा रहा है। इसलिए उसे आदेशवाचक वाक्य कहते हैं। नीचे एक वाक्य दिया गया है। इसके बाकी तीन रूप तुम सोचकर लिखो।
बताना — रूथ ने कपड़े अलमारी में रखे।
नहीं/मना करना ……………….
पूछना ……………….
आदेश देना ……………….
उत्तर- नहीं / मना करना — रूथ ने कपड़े, अलमारी में नहीं रखे।
पूछना — क्या रूम्प ने कपड़े अलमारी में रखे?
आदेश देना — रूथ, कपड़े अलमारी में रखो।
Aise Aise Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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