पाठ “अक्षरों का महत्त्व” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का चौथा अध्याय है। यह पोस्ट Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह पाठ गुणाकर मुले द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “अक्षरों का महत्त्व” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Nadan Dost Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Question Answers
Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Summary
पाठ का सार
‘अक्षरों का महत्त्व’ गुणाकर मुले द्वारा लिखा गया एक रोचक और ज्ञानवर्धक निबंध है। इसमें लेखक ने अक्षरों की खोज तथा मानव जीवन में उनके महत्व को स्पष्ट किया है। लेखक का कहना है कि संसार की सभी पुस्तकें अक्षरों से बनी हैं और प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्र भी अक्षरों के माध्यम से ही हमारे सामने आते हैं। यदि मनुष्य को अक्षरों का ज्ञान न होता, तो मानव जीवन अत्यंत कठिन और अव्यवस्थित हो जाता।
लेखक बताता है कि प्राचीन काल में लोग मानते थे कि अक्षरों की खोज ईश्वर ने की है, किंतु वास्तविकता यह है कि अक्षरों की खोज स्वयं मनुष्य ने की। आज यह भी ज्ञात है कि किन अक्षरों की खोज किस देश में और किस समय हुई। अक्षरों की खोज से पहले मनुष्य अपने भाव और संदेश चित्रों तथा संकेतों के माध्यम से व्यक्त करता था। बाद में इन्हीं चित्र-संकेतों का विकास हुआ और अंततः अक्षरों का निर्माण हुआ। अक्षरों की खोज लगभग छह हजार वर्ष पहले हुई थी।
अक्षरों की खोज के साथ ही मानव सभ्यता के एक नए युग का आरंभ हुआ। मनुष्य ने हिसाब-किताब लिखना शुरू किया और सभ्य कहलाया। अक्षरों के माध्यम से ही मनुष्य को अपने इतिहास का ज्ञान हुआ। लेखक का मानना है कि यदि अक्षरों की खोज न हुई होती, तो मनुष्य अपने अतीत से वंचित रह जाता और अपने ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुँचा पाता। अक्षरों की खोज के बाद मानव जाति ने तीव्र गति से विकास किया। आज जो भी उन्नति और प्रगति हम देखते हैं, वह अक्षरों की देन है। अतः मानव जीवन और उसकी उन्नति में अक्षरों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रोज़ | प्रतिदिन। |
| तादाद | संख्या। |
| हाल | स्थिति। |
| स्वयं | अपने आप। |
| वनस्पति | पेड़-पौधे। |
| औज़ारों | अस्त्र-शस्त्र, हथियार। |
| प्रागैतिहासिक | इतिहास के पहले। |
| ज़रिए | माध्यम से। |
| वृत्त | घेरा। |
| चहुँ ओर | चारों तरफ। |
| दयोतक | सूचक। |
| सिलसिला | क्रम। |
| शुरुआत | आरंभ। |
| कौम | जाति। |
| पीढ़ी | किसी जाति, व्यक्ति की वंश परंपरा की कोई कड़ी। |
| इस्तेमाल | प्रयोग। |
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न—नीचे लिखे गद्यावतरणों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
- दुनिया में अब तक करोड़ों पुस्तकें छप चुकी हैं। हज़ारों पुस्तकें रोज़ छपती हैं। तरह-तरह के अक्षरों में हज़ारों की तादाद में रोज़ ही समाचार-पत्र छपते रहते हैं । इन सबके मूल में हैं अक्षर। हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि यदि आदमी अक्षरों को न जानता, तो आज इस दुनिया का क्या हाल होता ।
(क) पुस्तकों और समाचारों का छपना किस कारण संभव हो पाया है ?
(ख) अक्षरों के बिना आज दुनिया का क्या हाल होता ?
उत्तर- (क) पुस्तकों और समाचारों का छपना अक्षरों के ज्ञान के कारण ही संभव हो पाया है। यदि अक्षर न होते तो आज ये न छप पाते।
(ख) यदि अक्षर न होते तो आज दुनिया के पास ज्ञान का अथाह भंडार नहीं होता । अक्षरों के बिना दुनिया की हालत बड़ी विचित्र होती।
- हमारी यह धरती लगभग पाँच अरब साल पुरानी है। दो-तीन अरब साल तक इस धरती पर किसी प्रकार के जीव-जंतु नहीं थे। फिर करोड़ों साल तक केवल जानवरों और वनस्पतियों का ही इस धरती पर राज्य रहा। आदमी ने इस धरती पर कोई पाँच लाख साल पहले जन्म लिया । धीरे-धीरे उसका विकास हुआ।
(क) हमारी धरती कितनी पुरानी है? इस पर जीवों का विकास कब हुआ?
(ख) मानव का जन्म धरती पर कब हुआ था?
उत्तर- (क) हमारी धरती लगभग पाँच अरब वर्ष पुरानी है। दो-तीन अरब साल तक इस पर जीवों का विकास नहीं हुआ था। इसके बाद जीवन का विकास हुआ था।
ख) मानव का जन्म धरती पर लगभग पाँच लाख वर्ष पहले हुआ था।
- प्रागैतिहासिक मानव ने सबसे पहले चित्रों के ज़रिए अपने भाव व्यक्त किए । जैसे, पशुओं, पक्षियों, आदमियों आदि के चित्र । इन चित्र – संकेतों से बाद में भाव- संकेत अस्तित्व में आए। जैसे, एक छोटे वृत्त के चहुँ ओर किरणों की द्योतक रेखाएँ खींचने पर वह ‘सूर्य’ का चित्र बन जाता था। बाद में यही चित्र ‘ताप’ या ‘धूप’ का द्योतक बन गया। इस तरह अनेक भाव-संकेत अस्तित्व में आए।
(क) सबसे पहले मानव ने अपने भाव कैसे व्यक्त किए थे?
(ख) ‘ताप‘ या ‘धूप‘ का द्योतक कैसा चित्र बना?
उत्तर- (क) सबसे पहले मानव ने चित्रों के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए थे।
(ख) ‘ताप’ या ‘धूप’ का द्योतन सूर्य के चित्र से हुआ। एक छोटे वृत्त के चारों ओर किरणों को खींच कर ऐसा किया गया।
- अक्षरों की खोज के साथ एक नए युग की शुरुआत हुई। आदमी अपने विचार और अपने हिसाब-किताब को लिखकर रखने लगा । तबसे मानव को ‘सभ्य’ कहा जाने लगा। आदमी ने जबसे लिखना शुरू किया तबसे ‘इतिहास’ आरंभ हुआ। किसी भी कौम या देश का इतिहास तब से शुरू होता है जबसे आदमी के लिखे हुए लेख मिलने लग जाते हैं। इस प्रकार, इतिहास को शुरू हुए मुश्किल से छह हज़ार साल हुए हैं। उसके पहले के काल को ‘प्रागैतिहासिक काल’ यानी इतिहास के पहले का काल कहते हैं।
(क) अक्षरों की खोज से क्या लाभ हुआ ?
(ख) इतिहास का आरंभ कब से हुआ है ?
उत्तर—(क) अक्षरों की खोज से आदमी अपने विचार और हिसाब-किताव को रखने में समर्थ हुआ है। इसके साथ ही इतिहास का आरंभ हुआ है और तभी से मानव सभ्य कहलाने लगा है।
(ख) इतिहास का आरंभ तब से हुआ है जब से आदमी ने लिखना आरंभ किया है।
- यदि आदमी अक्षरों की खोज नहीं करता तो आज हम इतिहास को न जान पाते। हम यह न जान पाते कि पिछले कुछ हज़ार सालों में आदमी किस प्रकार रहता सबसे बड़ी खोज है। अक्षरों की खोज करने के बाद ही मनुष्य अपने विचारों को था, क्या-क्या सोचता था, कौन-कौन राजा हुए इत्यादि । अक्षरों की खोज मनुष्य की लिखकर रखने लगा। इस प्रकार, एक पीढ़ी के ज्ञान का इस्तेमाल दूसरी पीढ़ी करने लगी। अक्षरों की खोज करने के बाद पिछले छह हज़ार सालों में मानव जाति का तेज़ी से विकास हुआ।
(क) अक्षरों की खोज न होने से क्या होता?
(ख) अक्षरों की खोज मनुष्य के लिए सब से बड़ी खोज कैसे है?
उत्तर—(क) यदि अक्षरों की खोज न होती तो इतिहास के विषय में हमें कुछ पता भी न चलता। युगों पहले आदमी कैसे रहता था, वह क्या सोचता था, इसका कुछ ज्ञान न होता।
(ख) अक्षरों की खोज मानव के लिए सब से बड़ी खोज इस कारण है कि इनकी खोज के बाद ही आदमी अपने विचारों को लिख कर प्रकट करने लगा है। इसी से एक पीढ़ी का ज्ञान दूसरी पीढ़ी तक पहुँच पाता है।
ध्यान देने योग्य शब्द
तादाद — संख्या
अनादिकाल — जो सदा से चला आ रहा हो
प्रागैतिहासिक मानव — इतिहास में वर्णित काल के पूर्व का मानव
द्योतक — सूचक
सिलसिला — क्रम
पीढ़ी — किसी जाति, कुल या व्यक्ति की वंश परंपरा की कोई कड़ी।
Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
निबंध से
प्रश्न 1. पाठ में ऐसा क्यों कहा गया है कि अक्षरों के साथ एक नए युग की शुरुआत हुई।
उत्तर – अक्षरों की खोज होने पर मनुष्य ने अपने विचार और हिसाब-किताब को लिखना शुरू किया। मानव को सभ्य भी तभी से कहा जाने लगा । अक्षरों की खोज होने पर मनुष्य का इतिहास आरंभ हुआ क्योंकि उसने अपनी जाति, देश के बारे में लिखना शुरू कर दिया। इस प्रकार अक्षरों की खोज के साथ ही प्रगति और उन्नति शुरू हुई। इसी कारण कहा जाता है कि अक्षरों के साथ एक नए युग की शुरुआत हुई।
प्रश्न 2. अक्षरों की खोज का सिलसिला कब और कैसे शुरू हुआ ? पाठ पढ़कर उत्तर लिखो।
उत्तर—अक्षरों की खोज का सिलसिला लगभग छह हज़ार वर्ष पहले शुरू हुआ । अक्षरों की खोज से पहले मानव अपने भावों को व्यक्त करने के लिए चित्रों की सहायता लेता था। चित्र सभी भावों को व्यक्त करने में समर्थ नहीं होते थे । तव मानव ने अक्षरों की खोज करना आरंभ कर दिया।
प्रश्न 3. अक्षरों के ज्ञान से पूर्व मनुष्य अपनी बात को दूर-दराज के इलाकों तक पहुँचाने के लिए किन-किन माध्यमों का सहारा लेता था ?
उत्तर – अक्षरों के ज्ञान से पूर्व मनुष्य अपनी बात को दूर-दराज के इलाकों तक पहुँचाने के लिए मुख्य रूप से चित्रों का सहारा लेता था। इन चित्रों में पशुओं और आदमियों के चित्र होते थे । मनुष्य अपनी बात को समझाने के लिए वैसा ही चित्र बना दिया करता था। इस प्रकार चित्र ही अपने भावों को प्रकट करने का एकमात्र माध्यम था ।
प्रश्न 4. ‘भाषा का विकास पहले हुआ, अक्षर और लिपि का बाद में । बोली गई भाषा को अक्षरों की मदद से लिखा जा सकता है। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो अक्षर नहीं पहचानते पर भाषा अच्छी तरह जानते हैं।‘ ऊपर की पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए भाषा और अक्षर के संबंधों के बारे में एक अनुच्छेद लिखो।
उत्तर – भाषा और अक्षर का आपस में गहरा नाता है। ‘ अक्षर’ है तो ‘भाषा’ का कोई महत्त्व है। अक्षरों के मिलने से ही तो भाषा बनती है जिससे हम सब अपने भावो को प्रकट कर पाते हैं । लिपि का संबंध तो अक्षरों को लिखकर अपने भावों को स्थायी रूप प्रदान करने में है । जब कोई छोटा बच्चा बोलना सीखता है तो पहले वह आधे-अधूरे अक्षरों की ध्वनियों को बोलता है। इनसे सार्थक अक्षर बनते हैं और उनके आपस में मिलने से भाषा बनती है । कोई गूंगा व्यक्ति अक्षरों का उच्चारण न कर पाने के कारण भाषा का प्रयोग भी नहीं कर पाता । अलग-अलग वस्तुओं, भावों आदि को प्रकट करने के लिए अलग-अलग शब्दों का उपयोग किया जाता है इसलिए भाषाएँ अनेक प्रकार की होती हैं । उनके लिपि चिह्न अलग-अलग होते हैं इसलिए विभिन्न भाषाओं का लिखित रूप भी भाषाओं की तरह अलग-अलग होता है।
निबंध से आगे
प्रश्न 1. अक्षरों के महत्त्व की तरह ध्वनि के महत्त्व के बारे में जितना जानते हो, लिखो।
उत्तर – अक्षर किसी सार्थकता के प्रतीक है पर ध्वनियाँ निरर्थक भी हो सकती हैं। ध्वनियाँ अलग-अलग समय में मुँह से निकलने वाली अभिव्यक्तियाँ हैं जो प्रसन्नता, पीड़ा, दुःख, आश्चर्य आदि भावों को प्रकट कराती हैं ।
प्रश्न 2. रेडियो की भाषा लिखित नहीं, मौखिक है। मौखिक भाषा का जीवन में क्या महत्त्व होता है? इसे शिक्षक को कक्षा में सुनाओ।
उत्तर – मौखिक भाषा ही मूल भाषा है जिसे हर बच्चा सब से पहले सीखता है और बोल कर भावों को प्रकट करता है । कोई भी अशिक्षित व्यक्ति मौखिक भाषा से ही जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करता है। लिखित भाषा प्रमाणिकता को प्रकट करती है पर मौखिक भाषा ऐसा नहीं कर पाती।
प्रश्न 3. हर वैज्ञानिक खोज के साथ किसी-न-किसी वैज्ञानिक का नाम जुड़ा होता है, लेकिन अक्षरों के साथ ऐसा नहीं है, क्यों ? पता करो और शिक्षक को बताओ।
उत्तर – जब भी कोई खोज होती है तो वह किसी एक व्यक्ति द्वारा की गई मेहनत का परिणाम होती है। एक वैज्ञानिक दिन-रात एक ही विषय पर सोचकर किसी भी चीज़ की खोज करता है। जैसे टेलीविज़न, बल्ब और रेडियो आदि की खोज हुई। इसलिए हर वैज्ञानिक खोज के साथ एक वैज्ञानिक का नाम जुड़ा होता है। दूसरी ओर अक्षरों की खोज में किसी एक व्यक्ति ने परिश्रम नहीं किया। अक्षरों की खोज तो सभी लोगों के आपसी सहयोग और भावों के आदान-प्रदान से हुई है। इसी कारण अक्षरों के साथ किसी एक वैज्ञानिक अथवा व्यक्ति का नाम जुड़ा हुआ नहीं है।
प्रश्न 4. एक भाषा को कई लिपियों में लिखा जा सकता है। उसी तरह कई भाषाओं एक ही लिपि में लिखा जा सकता है। आगे कुछ शब्द दिए गए हैं; जैसे भारत, गांधी, भाषा । इन्हें एक से अधिक लिपियों में लिखो-
उत्तर –
| देव नागरी लिपि | रोमन लिपि | गुरुमुखी लिपि |
|---|---|---|
| 1. भारत | Bharat | ਭਾਰਤ |
| 2. गांधी | Gandhi | ਗਾਂਧੀ |
| 3. भाषा | Bhasha | ਭਾਸ਼ਾ |
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. पुराने जमाने के लोग यह क्यों सोचते थे कि अक्षर और भाषा की खोज ईश्वर ने की थी? अनुमान लगाओ और बताओ।
उत्तर – पुराने ज़माने में लोग कम ज्ञान वाले और बहुत अंधविश्वासी थे । वे प्रत्येक बात को निष्ठावान होने के कारण ईश्वर से जोड़कर देते थे । वे कोई तर्क या सिद्धांत नहीं मानते थे। जब अक्षर और भाषा की खोज हुई जो उन लोगों ने इसे भी ईश्वर द्वारा खोजा – हुआ बताया । आज मनुष्य पढ़ा-लिखा है । वह प्रत्येक बात को तर्क और ज्ञान के अनुसार देखता और सोचता है किंतु पुराने ज़माने के लोग ऐसे नहीं थे। वे प्रत्येक चीज़ का कारण ईश्वर को मानते थे ।
प्रश्न 2. अक्षरों के महत्त्व के साथ ही मनुष्य के जीवन में गीत, नृत्य और खेलों का भी महत्त्व है। अपने मित्रों के साथ बातचीत करके इनके महत्त्व के बारे में जानकारी इकट्ठी करो और शिक्षक को सुनाओ।
उत्तर – विद्यार्थी आपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें ।
प्रश्न 3. कल्पना करो कि यदि हमें अक्षरों का ज्ञान न होता तो क्या होता ? लिखो।
उत्तर – यदि हमारे पास अक्षर न होते तो हम विश्व की सारी जानकारी से वंचित रह जाते। हम अपने मन में उठने वाले विचारों को प्रकट कर पाते और न ही अपने इतिहास को न जान पाते। हम अपने ज्ञान को आने वाली पीढ़ी तक भी न पहुँचा पाते । यदि हमारे पास अक्षर न होते तो हमारा जीवन अंधकारमय और बुरा होता। हम अपने आपको हर क्षेत्र अधूरा पाते।
भाषा की बात
प्रश्न 1. अनादि काल में रेखांकित शब्द का अर्थ है जिसकी कोई शुरुआत या आदि न हो। यह शब्द मूल शब्द के शुरू में कुछ जोड़ने से बने हैं। इसे उपसर्ग कहते हैं। इन उपसर्गों को अलग करके मूल शब्दों को लिखकर उनका अर्थ समझो –
असफल, अदृश्य, अनुचित, अनावश्यक, अपरिचित, अनिच्छा ।
उत्तर-
| शब्द | उपसर्ग | मूल | शब्द अर्थ |
|---|---|---|---|
| असफल | अ | सफल | सफलता प्राप्त करने वाला |
| अदृश्य | अ | दृश्य | नज़ारा |
| अनुचित | अन् | उचित | सही |
| अनावश्यक | अन् | आवश्यक | ज़रूरी |
| अपरिचित | अ | परिचित | जाना-पहचाना |
| अनिच्छा | अन् | इच्छा | चाह |
प्रश्न 2. (क) अब बताओ कि ये उपसर्ग जिन शब्दों के साथ जुड़ रहे हैं क्या उनमें अंतर है?
(ख) वैसे तो संख्याएँ संज्ञा होती हैं पर कभी-कभी ये विशेषण का काम भी करती हैं, जैसे नीचे लिखे वाक्य में-
हमारी धरती लगभग पाँच अरब साल पुरानी है ।
कोई दस हज़ार साल पहले आदमी ने गाँवों को बसाना शुरू किया।
उत्तर- – (क) उपसर्ग जिन शब्दों के साथ जुड़ते हैं, उनके अर्थ बदल जाते हैं जैसे ‘सफल’ के साथ ‘अ’ उपसर्ग जुड़ने से उस का अर्थ एकदम विपरीत हो गया ।
(ख) इन वाक्यों में रेखांकित अंश ‘साल’ संज्ञा के बारे में विशेष जानकारी दे रहे हैं, इसलिए संख्यावाचक विशेषण हैं। संख्यावाचक विशेषण का इस्तेमाल उन्हीं चीज़ों के लिए होता है जिन्हें गिना जा सके। जैसे, चार संतरे, पाँच बच्चे, तीन शहर आदि । पर यदि किसी चीज़ को गिना नहीं जा सकता तो उसके साथ संख्या वाले शब्दों के अलावा माप-तोल आदि के शब्दों का इस्तेमाल भी किया जाता है—
- तीन जग पानी
- एक किलो जीरा
यहाँ रेखांकित हिस्से परिणामस्वरूप विशेषण हैं क्योंकि इनका संबंध माप-तोल से है । अब नीचे लिखे हुए को पढ़ो। खाली स्थानों में बॉक्स में दिए गए माप-तोल के उचित शब्द छाँटकर लिखो ।
| प्याला, कटोरी, एकड़, मीटर लीटर, किलो, ट्रक, चम्मच |
|---|
तीन………………..खीर
छह………………..कपड़ा
दो………………..कॉफ़ी
एक………………..दूध
दो………………..ज़मीन
एक………………..रेत
पाँच………………..बाजरा
तीन………………..तेल
उत्तर- तीन कटोरी खीर
छह मीटर कपड़ा
दो चम्मच कॉफ़ी
एक प्याला दूध
दो एकड़ ज़मीन
एक ट्रक रेत
पाँच किलो बाजरा
तीन लीटर तेल
Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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