पाठ “बचपन” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का दूसरा अध्याय है। यह पोस्ट Bachpan Class 6th Hindi Chapter 2 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ ” बचपन” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Veh Chidiya Jo Class 6th Hindi Poem Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Bachpan Class 6th Hindi Chapter 2 Question Answers
Bachpan Class 6th Hindi Chapter Summary
‘बचपन’ एक संस्मरणात्मक रचना है, जिसमें लेखिका ने अपने बचपन की स्मृतियों और अनुभवों को सहज रूप में प्रस्तुत किया है। वह बताती है कि उम्र के साथ उसके पहनावे में बदलाव आया है। बचपन में उसे गहरे रंग के कपड़े पसंद थे, जबकि अब वह हल्के रंगों के वस्त्र पहनती है। घर में बच्चों को आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा दी जाती थी, इसलिए वह रविवार को अपने मोज़े धोती और जूतों पर पॉलिश करती थी, हालाँकि उस समय के जूते आरामदायक नहीं होते थे।
लेखिका याद करती है कि माता-पिता हर शनिवार बच्चों को ऑलिव ऑयल या कैस्टर ऑयल पिलाते थे, जिसे वे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक मानते थे। वह पुराने समय और वर्तमान समय के बीच के अंतर को भी दर्शाती है, जो खान-पान और मनोरंजन के साधनों में साफ दिखाई देता है। लेखिका का घर शिमला के माल रोड के पास था, जहाँ वह घूमना-फिरना, स्वादिष्ट चीज़ें खाना, चॉकलेट, टॉफी, फल, चने ज़ोर गरम खाना और रिज पर घुड़सवारी करना बहुत पसंद करती थी।
शिमला की सुंदरता का वर्णन करते हुए लेखिका शाम के दृश्य, जाखू पहाड़, चर्च की घंटियाँ, सूर्यास्त और रात की रौनक का सजीव चित्र प्रस्तुत करती है। वह अपने जीवन की एक मज़ेदार घटना भी याद करती है, जब उसने पहली बार चश्मा बनवाया और लोगों की प्रतिक्रियाओं से खीझ गई थी। अंत में वह बताती है कि पहले उसे दुपट्टा पसंद था, जबकि अब वह साधारण हिमाचली टोपी पहनना पसंद करती है।
यह पाठ बचपन की सरलता, आत्मनिर्भरता और बीते समय की सुंदर स्मृतियों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता है।
Bachpan Class 6th Hindi Chapter Word Meaning
कठिन शब्दों के अर्थ
सयाना = बुद्धिमान् ।
शताब्दी = सौ साल ।
दशक = दस साल ।
फ्रिल = झालर |
मोज़े = जुराबें ।
मनाही = मना ।
इतवार = रविवार ।
किस्म = प्रकार ।
आरामदेह = आराम देने वाले।
फ़र्क = अंतर ।
शनीचर = शनिवार।
ऑलिव ऑयल = जैतून का तेलं
कैस्टर ऑयल = अरंडी का तेल ।
मितली = जी मचलाना, उल्टी आना ।
निरा = बिलकुल ।
बुरकवाते = छिड़कवाते।
कमतर = कम ।
ननिहाल = नाना का घर ।
हृष्ट-पुष्ट = ताकतवर ।
चर्च = गिरिजाघर ।
स्पीड = गति ।
अटपटा = अजीब ।
तकलीफ़ = दर्द, पीड़ा ।
ऐनक = चश्मा ।
चचेरा भाई = चाचा का लड़का ।
आईना = शीशा
आश्वासन = भरोसा
खीजना = झुंझलाना ।
Bachpan Class 6th Hindi Chapter Question Answers
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – नीचे लिखे गद्यावतरणों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
- हाँ, मैं इन दिनों कुछ बड़ा बड़ा यानी उम्र में सयाना महसूस करने लगी हूँ। शायद इसलिए कि पिछली शताब्दी में पैदा हुई थी । मेरे पहनने-ओढ़ने में भी काफ़ी बदलाव आए हैं। पहले मैं रंग-बिरंगे कपड़े पहनती रही हूँ । नीला – जामुनी – ग्रे- काला- चॉकलेटी । अब मन कुछ ऐसा करता है कि सफ़ेद पहनो । गहरे नहीं, हलके रंग । मैंने पिछले दशकों में तरह-तरह की पोशाकें पहनी हैं। पहले फ्रॉक, फिर निकर-वॉकर, स्कर्ट, लहँगे, गरारे और अब चूड़ीदार और घेरदार कुर्ते ।
(क) लेखिका क्या महसूस करने लगी थी? क्यों ?
(ख) लेखिका के कपड़े पहनने में अब क्या अंतर आया है?
(ग) लेखिका के बचपन से अब तक कपड़ों के चयन में बदलाव लिखिए ।
उत्तर—(क) लेखिका अब महसूस करने लगी है कि वह पहले की अपेक्षा अधिक सयानी हो गई है। वह पिछली शताब्दी में पैदा हुई थी इसलिए स्वयं को वह आयु में बड़ा मानने लगी थी।
(ख) लेखिका पहले नीला – जामुनी – ग्रे- काला – चॉकलेटी आदि रंग-बिरंगे वस्त्र पहनना पसंद करती थी पर अब उसे सफ़ेद कपड़े पहनना पसंद है।
(ग) लेखिका पहले फ्रॉक, फिर निकर-वॉकर, स्कर्ट, लहँगे, गरारे पहनना पसंद करती थी और अब चूड़ीदार और घेरदार कुर्ते पहनना पसंद करती है ।
- चने ज़ोर गरम और अनारदाने का चूर्ण! हाँ, चने जोर गरम की पुड़िया जो तब थी, वह अब भी नज़र आती है। पुराने कागज़ों से बनाई हुई इस पुड़िया में निरा हाथ का कमाल है। नीचे से तिरछी लपेटते हुए ऊपर से इतनी चौड़ी कि चने आसानी से हथेली पर पहुँच जाएँ। एक वक्त था जब फ़िल्म का गाना – चना जोर गरम बाबू मैं लाया मज़ेदार, चना जोर गरम – उन दिनों स्कूल के हर बच्चे को आता था ।
(क) ‘चना जोर गरम’ की पुड़िया किससे और कैसे बनती थी ?
(ख) उन दिनों कौन-सा फ़िल्मी गाना सभी स्कूली बच्चों को याद था?
उत्तर—(क) ‘चना जोर गरम’ की पुड़िया पुराने कागज़ों से बनती थी। कागज़ को नीचे से तिरछा लपेटते हुए ऊपर से इतना चौड़ा रखते थे कि उससे चने सरलता से हथेली पर आ जाते थे।
(ख) उन दिनों सभी स्कूली बच्चों को जो फ़िल्मी गाना याद था, वह है- ‘चना जोर गरम बाबू मैं लाया मज़ेदार, चना जोर गरम’ ।
- पिछली सदी में तेज़ रफ़्तारवाली गाड़ी वही थी। कभी-कभी हवाई जहाज़ भी देखने को मिलते ! दिल्ली में जब भी उनकी आवाज़ आती, बच्चे उन्हें देखने बाहर दौड़ते। दीखता एक भारी-भरकम पक्षी उड़ा जा रहा है पंख फैलाकर। यह देखो और वह गायब ! उसकी स्पीड ही इतनी तेज़ लगती। हाँ, गाड़ी के मॉडलवाली दुकान के साथ एक और ऐसी दुकान थी जो मुझे कभी नहीं भूलती। यह वह दुकान थी जहाँ मेरा पहला चश्मा बना था।
(क) लेखिका का पिछली सदी के बारे में क्या अनुभव रहा था?
ख) लेखिका को कौन-सी दुकान नहीं भूलती और किस कारण ?
उत्तर- (क) लेखिका को पिछली सदी में केवल एक गाड़ी याद थी जिसकी रफ़्तार तेज़ थी। तब कभी-कभी हवाई जहाज़ दिखाई देते थे। जब उनकी आवाज़ सुनाई देती, बच्चे उन्हें देखने के लिए घर से बाहर दौड़े आते थे । जहाज़ को उड़ता देख उन्हें ऐसे लगता था जैसे कोई बड़े शरीर वाला पक्षी पंख फैलाकर आकाश में उड़ रहा हो। वह बहुत तेज़ी से उड़ता था और देखते ही देखते वह नज़रों से ओझल हो जाता था।
(ख) गाड़ी के मॉडलवाली दुकान के साथ वाली दुकान लेखिका को कभी नहीं भूलती। उसका उस दुकान से पहला चश्मा बना था ।
- वैसे डॉक्टर साहिब ने पूरा आश्वासन दिया था, लेकिन चश्मा तो अब तक नहीं उतरा। नंबर बस कम ही होता रहा! मैं अपने-आप इसकी ज़िम्मेवार हूँ । जब आप दिन की रोशनी को छोड़ कर रात में टेबल लैंप के सामने काम करेंगी – तो इसके अलावा और क्या होगा ! हाँ, जब पहली बार मैंने चश्मा लगाया तो मेरे एक चचेरे भाई ने मुझे छेड़ा-देखो, देखो, कैसी लग रही है !
(क) डॉक्टर ने लेखिका को क्या आवश्वासन दिया था?
(ख) लेखिका चश्मा लगने के लिए अपने आपको ज़िम्मेदार क्यों मानती है?
उत्तर—(क) डॉक्टर ने लेखिका को उसके बचपन में यह आश्वासन दिया था कि उसका चश्मा शीघ्र ही हट जाएगा । उसकी नज़र ठीक हो जाएगी और चश्मा लगाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ेगी ।
(ख) लेखिका चश्मा लगने के लिए अपने आपको ज़िम्मेवार मानती है। वह दिन की रोशनी में पढ़ना पसंद नहीं करती थी । वह रात में टेबल लैंप की रोशनी में पढ़ने-लिखने का काम करती थी। इसी कारण उसे चश्मा लगाना पड़ा था।
- सामने आकाश पर सूर्यास्त हो रहा है। गुलाबी सुनहरी धारियाँ नीले आसमान पर फैल रही हैं। दूर-दूर फैले पहाड़ों के मुखड़े गहराने लगे और देखते-देखते बत्तियाँ टिमटिमाने लगीं। रिज पर की रौनक और माल की दुकानों की चमक के भी क्या कहने ! स्कैंडल पॉइंट की भीड़ से उभरता कोलाहल ।
प्रश्न – (क) पाठ और रचनाकार का नाम लिखिए ।
(ख) इन पंक्तियों में दिन के किस समय का वर्णन किया गया है?
(ग) इन पंक्तियों में चित्रित वातावरण का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
(घ) रिज, माल और स्कैंडल पॉइंट की स्थिति स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर—(क) पाठ—बचपन, लेखिका – कृष्णा सोबती ।
(ख) इन पंक्तियों में संध्या के समय का वर्णन किया गया है।
(ग) सूर्यास्त हो रहा है। आसमान पर गुलाबी रंग की सुनहरी धारियाँ दिखाई दे हैं। अंधकार के कारण पहाड़ नहीं दिखाई दे रहे तथा बत्तियाँ जगमगा रही हैं
(घ) रिज पर लोगों की रौनक है। माल की दुकानें बिजली के प्रकाश में जगमगा हैं। स्कैंडल पॉइंट पर लोगों की भीड़ का शोर सुनाई दे रहा है।
- याद आ गया वह टोपा, काली फ्रेम का चश्मा और लंगर की सूरत! हो, दिनों शिमला में मैं सिर पर टोपी लगाना पसंद करती हूँ। मैंने कई रंगों की जमा क ली हैं । कहाँ दुपट्टों का ओढ़ना और कहाँ सहज सहल सुभीते वाली हिमाचल टोपियाँ !
(क) लेखिका को क्या याद आई?
(ख) लेखिका अब क्या पसंद करती है?
(ग) लेखिका ने क्या जमा कर लिया है?
उत्तर—(क) लेखिका को टोपा, काली फ्रेम का चश्मा और लंगूर की सूरत याद अ
(ख) लेखिका अब दुपट्टा ओढ़ना नहीं अपितु, हिमाचली टोपियाँ पहनना पसंद करती है
(ग) लेखिका ने कई रंगों की टोपियाँ जमा कर ली हैं।
ध्यान देने योग्य शब्द
स्टाक —– संग्रह, भंडार
बुरकना —– चूर्ण जैसी वस्तु को छिड़कना
छुटपन —– बचपन
कमतर —– ज्यादा छोटा, लघुतर
हृष्ट-पुष्ट —– तगड़ा, हट्टा-कट्टा
कोलाहल —– शोर, हंगामा, हल्ला
अटपटा —– टेढ़ा, कठिन, ऊटपटांग
आश्वासन —– भरोसा
खीझना —– झुंझलाना, क्रुद्ध होना
सहल —– आसान।
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
संस्मरण से
प्रश्न 1. उम्र बढ़ने के साथ-साथ लेखिका में क्या-क्या बदलाव हुए हैं ? पाठ स मालूम करके लिखो ।
उत्तर – उम्र बढ़ने के साथ-साथ लेखिका अपने आप को उम्र में सयाना महसूस कर लगी है। आँखें कमज़ोर होने के कारण उसे साफ़-साफ़ देखने के लिए चश्मा लग गया है। उस के पहनने-ओढ़ने में बदलाव आया है। अब वह गहरे रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहती। वह फ्रॉक, निकर-वॉकर, स्कर्ट, लहँगे और गरारे की जगह चूड़ीदार और घेरदार कुर्ते पहन पसंद करती है। पहले नए जूतों के मिलने के साथ ही उनमें रुई रखने का प्रचलन था जिस वह पाँवों को कष्ट न दे पर अब लेखिका को ऐसा नहीं करना पड़ता। लेखिका को अब सि पर टोपी लगाना पसंद है और वह दुपट्टों की जगह हिमाचली टोपियां पसंद करती है।
प्रश्न 2. लेखिका बचपन में इतवार की सुबह क्या-क्या काम करती थी ?
उत्तर- लेखिका बचपन में इतवार की सुबह बहुत व्यस्त रहती थी। वह इतवार की सुबह अपने मोज़े धोती थी। उसके बाद अपने जूतों को पॉलिश करती थी। जूतों को पॉलिश करने के बाद वह उन्हें कपड़े या ब्रश से रगड़कर पूरी तरह चमकाती थी।
प्रश्न 3. ‘तुम्हें बताऊँगी कि हमारे समय और तुम्हारे समय में कितनी दूरी हो चुकी है।’ इस बात के लिए लेखिका क्या-क्या बताती है ?
उत्तर- लेखिका ने बताया है कि उसके समय में केवल कुछ ही घरों में ग्रामोफ़ोन होते थे। यही लोगों के मनोरंजन का साधन था। जबकि आज रेडियो, टेलीविज़न के साथ-साथ अनेक मनोरंजन की चीज़ें आ गई हैं। लेखिका के समय में कुलफ़ी होती थी जो आज आइसक्रीम के नाम से जानी जाती है। पहले केवल कचौड़ी-समोसा होता था किंतु आज पैटीज़ खाने का ज़माना आ गया है। पहले के शहतूत, फ़ाल्से तथा खसखस के शरबत का स्थान अब कोक-पेप्सी ने ले लिया है। उस समय का शीतल पेय लैम्नेड, विमटो होता था। जबकि आज कोक पीया जाता है।
प्रश्न 4. पाठ से पता करके लिखो कि लेखिका को चश्मा क्यों लगाना पड़ा ? चश्मा लगाने पर उसके चचेरे भाई उन्हें क्या कहकर चिढ़ाते थे ?
उत्तर-लेखिका को रोशनी में काम न करके रात को लैंप के सामने काम करने के कारण आँखों से कम दिखाई देने लगा था। इस के कारण चश्मा लगाना पड़ा था। चश्मा लगाने पर इसके चचेरे भाई उसे लंगूर कहकर चिढ़ाते थे । लेखिका को यह सब बहुत बुरा लगता था । वास्तव में लेखिका ने जब चश्मा लगाया तो उस समय चश्मा लगाना बुरा समझा जाता है। इसी कारण लेखिका के चचेरे भाई उसके चश्मा लगाने पर उसे यह कह कर चिढ़ाते थे आँख पर चश्मा लगाया ताकि सूझे दूर की यह नहीं लड़की को पता सूरत बनी लंगूर की ।
प्रश्न 5. लेखिका अपने बचपन में कौन-कौन सी चीजें मज़ा ले-लेकर खाती थी ? उनमें से प्रमुख फलों के नाम लिखो ।
उत्तर—लेखिका बचपन में चॉकलेट और टॉफी मज़ा ले-लेकर खाती थी । उसके पास चॉकलेट-टॉफी काफ़ी मात्रा में होते थे। लेखिका को बचपन में फल भी बहुत पसंद थे । वह खट्टे-मीठे फल, सफ़ेद, गुलाबी रसभरी तथा कसमल बड़े चाव से खाती थी। इसके साथ- साथ चैस्टनट को आग पर भूनकर और छीलकर खाना उसे अच्छा लगता था।
संस्मरण से आगे
प्रश्न 1. लेखिका की तरह तुम्हारी उम्र बढ़ने से तुम्हारे पहनने-ओढ़ने में क्या-क्या बदलाव आए हैं ? उन्हें याद कर लिखो ।
उत्तर—पहनने-ओढ़ने में बदलाव तो सदा ही आते रहते हैं। पहले लड़के प्राय: निकर, टी-शर्ट, कमीज़ आदि पहनते थे और लड़कियाँ फ्रॉक, सलवार-सूट, पजामी सूट आदि पहनती थी पर अब तो लड़के-लड़कियाँ सब जीन्ज़ ही पहनते हैं। कैपरी, शॉर्ट जीन्ज़ आदि का प्रचलन बढ़ गया है। जीनज़ के साथ तरह-तरह के टॉप पहनने भी हमें अच्छे लगते हैं। फ्रॉक और टी-शर्ट भी अपने नए रंग-रूप में हमें पसंद आते हैं।
प्रश्न 2. लेखिका के बचपन में ग्रामोफ़ोन, घुड़सवारी, शोरूम में शिमला-कालका ट्रेन का मॉडल और हवाई जहाज़ की आवाज़ें ही आश्चर्यजनक आधुनिक चीजें थीं। आज क्या-क्या आश्चर्यजनक आधुनिक चीजें तुम्हें आकर्षित करती हैं? उनके नाम लिखो।
उत्तर – आज विज्ञान ने बहुत उन्नति कर ली है। विज्ञान ने अनेक आधुनिक चीजों की खोज की है, जो हमें आकर्षित करती हैं। इनमें रेडियो, टेलीविज़न, कंप्यूटर, इंटरनेट, सी० डी० प्लेयर, मोबाइल, फ्रिज सुविधाजनक कारें तथा अन्य बहुत-सी चीजें हैं।
प्रश्न 3. अपने बचपन की कोई मनमोहक घटना याद करके विस्तार से लिखो।
उत्तर- -उस समय मैं पाँचवीं कक्षा में पढ़ती थी। हमारे विद्यालय में वार्षिक उत्सव होना था। मैंने भी कविता-पाठ में अपना नाम लिखवा दिया। वार्षिक उत्सव के दिन जब मुझे मंच पर बुलाया गया तो मेरे पैर ही नहीं उठ रहे थे कि मैं मंच पर जाऊँ। जैसे-तैसे मंच पर पहुँची और वहाँ खड़े होकर जब सामने देखा तो उपस्थित जन-समूह को देखकर मेरे होश उड़ गए। मैं जो कविता याद करके गई थी मुझे भूल गई । मैं रोने ही वाली थी कि मेरी अध्यापिका ने मेरी ओर संकेत कर के मुझे उत्साहित किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने आँखें बंद कर के पूरी कविता सुना दी। मुझे नहीं लग रहा था कि मैंने कविता अच्छी तरह से सुनाई थी परंतु मेरी कविता के समाप्त होते ही तालियों की गड़गड़ाहट ने मुझे बता दिया कि मेरी कविता अच्छी थी और मैंने ठीक से सुनाया था। मुझे ऐसा लगा था कि मैं कवयित्री बन गई हूँ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. कल्पना करो कि तुम अपने माता-पिता के समान बड़े हो गए हो तो अनुमान करके बताओ कि तुम्हारे पहनने-ओढ़ने में क्या-क्या बदलाव हो सकता है और क्यों ? अनुमान के आधार पर बताओ ।
उत्तर—यदि मैं अपने पिता के समान बड़ा हूँ तो मैं उनकी तरह पेंट-कमीज़, सफ़ारी- सूट और कोट पेंट ही पहनूँगा । तब मुझे काम-धंधे के लिए बाहर जाना पड़ेगा इसलिए समय और स्थिति की ज़रूरत के अनुसार ही पहनने-ओढ़ने की कोशिश करूँगा। मेरी बहन भी समय और स्थिति के अनुसार स्कर्ट, कैपरी, जीन, सूट, साड़ी आदि ही पहनेगी।
प्रश्न 2. इस संस्मरण में लेखिका ने अपने बचपन की घटनाओं, यादों और क्रिया- कलापों को बताने की कोशिश की है। तुम बड़े हो कर क्या-क्या कर सकते हो ? अनुमान के आधार पर बताओ ।
उत्तर- बड़ा होकर मैं वही करूँगा जो मेरा मन अब करता है । मेरा मन तो सदा एयर फोर्स के लड़ाकू जहाज़ उड़ाना चाहता है। इसलिए मैं तो वायु सेना में जाना चाहूँगा। यदि किसी कारण ऐसा न कर पाया तो मैं आई० ए० एस० ऑफिसर बनना चाहूँगा। ऐसा कर मैं देश को नई दिशा देने और उसे आगे बढ़ाने में सहायक बन सकूंगा ।
प्रश्न 3. लेखिका ने इस संस्मरण में सरवर के माध्यम से अपनी बात बताने की कोशिश की है, लेकिन सरवर का कोई परिचय नहीं दिया है। अनुमान करके बताओ कि सरवर कौन हो सकता है ?
उत्तर—सरवर लेखिका का छोटा पौत्र हो सकता है क्योंकि लेखिका अब दादी की आयु की है इस लिए वह अपने पौत्र को अपने बचपन के दिनों की कहानी सुनाकर उसका मनोरंजन करने के साथ-साथ उसे बीते हुए दिनों की सभ्यता और संस्कृति के संबंध में भी समझा रही है।
भाषा की बात
प्रश्न 1. क्रियाओं से भी भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं। जैसे मारना से मार, काटना से काट, हारना से हार, सीखना से सीख, पलटना से पलट और हड़पना से हड़प आदि भाववाचक संज्ञाएँ बनी हैं। तुम भी इस संस्मरण से कुछ क्रियाओं को छाँट कर लिखो और उनसे भाववाचक संज्ञा बनाओ।
उत्तर – पुकारना -पुकार। चमकना – चमक। खाना-खान। मिलना-मेल। समझना – समझ। सोचना-सोच। बुरकबाना – बुरकाव। भूलना – भूल। रगड़ना – रगड़। चढ़ना- चढ़ाई। उतरना – उतराई। खरीदना – खरीद । ओढ़ना – ओढ़। बदलना – बदलाव । रखना – रखाव ।
प्रश्न 2. संस्मरण में आए अंग्रेज़ी के शब्दों को छाँट कर लिखो और उसके हिंदी अर्थ जानो ।
उत्तर- ग्रे = भूरा ; धूसर
चॉकलेटी = चॉकलेट के रंग-सा ; गहरा भूरा
फ्रॉक, निकर-वॉकर, स्कर्ट = पहने जाने वाले तरह-तरह के वस्त्र
लैमन कलर = नींबू-सा रंग
स्टॉकिंग = घुटने से ऊपर तक लंबी जुराबें
बूट पॉलिश = जूते पॉलिश करना
ड्यूटी = कर्त्तव्य
ब्राउन ब्रेड = भूरी डबल रोटी
चर्च = गिरजा घर
मॉडल = नमूना।
प्रश्न 3. चार दिन, कुछ व्यक्ति, एक लीटर दूध आदि शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दो तो पता चलेगा कि इसमें चार, कुछ और एक लीटर शब्द से संख्या या परिमाण का आभास होता है, क्योंकि ये संख्यावाचक विशेषण हैं। इसमें भी चार दिन से निश्चित संख्या का बोध होता है, इसलिए इसको निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं और कुछ व्यक्ति से अनिश्चित संख्या का बोध होने से इसे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं । इसी प्रकार एक लीटर दूध से परिमाण का बोध होता है इसलिए इसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।
अब तुम नीचे लिखे वाक्यों को पढ़ो और उनके सामने विशेषण के भेदों को लिखो- (क) मुझे दो दर्जन केले चाहिए।
(ख) दो किलो अनाज दे दो।
(ग) कुछ बच्चे आ रहे हैं ।
(घ) तुम्हारा सारा प्रयत्न बेकार रहा।
(ङ) सभी लोग हँस रहे थे ।
(च) तुम्हारा नाम बहुत सुंदर है ।
उत्तर- (क) निश्चित संख्यावाचक विशेषण ।
(ख) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण ।
(ग) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण ।
(घ) परिणामवाचक विशेषण ।
(ङ) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण ।
(च) गुणवाचक विशेषण ।
प्रश्न 4. कपड़ों में मेरी दिलचस्पियाँ मेरी मौसी जानती थीं।
इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘दिलचस्पियाँ’ और ‘मौसी’ संज्ञाओं की विशेषता बता र हैं, इसलिए ये सार्वनामिक विशेषण हैं। सर्वनाम कभी-कभी विशेषण का काम भी करते हैं।
पाठ में से ऐसे पाँच उदाहरण छाँटकर लिखो।
उत्तर—1. मैं तुम से कुछ इतनी बड़ी हूँ कि तुम्हारी दादी भी हो सकती हूँ, तुम्हारी नानी
- एक हल्के गुलाबी रंग का बारीक चुन्नरों वाला घेरदार फ्रॉक।
- हमारे बचपन की कुल्फी आईसक्रीम हो गई है।
- हमारे-तुम्हारे बचपन में तो बहुत फ़र्क हो चुका है।
- तुम्हें बताऊँगी कि हमारे समय और तुम्हारे समय में कितनी दूरी हो चुकी है।
Bachpan Class 6th Hindi Chapter 2 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply