कविता “चाँद से थोड़ी-सी गप्पें” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का पांचवां अध्याय है। यह पोस्ट Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Question Answers के बारे में है। यह कविता शमशेर बहादुर सिंह द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “चाँद से थोड़ी-सी गप्पें” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Akshrun Ka Mehtav Class 6th Hindi Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Question Answers
Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Poem Text
गोल है खूब मगर
आप तिरछे नज़र आते हैं ज़रा।
आप पहने हुए हैं कुल आकाश
तारों-जड़ा;
सिर्फ़ मुँह खोले हुए हैं अपना
गोरा चिट्टा
गोल मटोल,
अपनी पोशाक को फैलाए हुए चारों सिम्त।
आप कुछ तिरछे नज़र आते हैं जाने कैसे-
खूब है गोकि !
वाह जी, वाह !
हम को बुद्ध ही निरा समझा है !
हम समझते ही नहीं जैसे कि
आप को बीमारी है
आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं,
और बढ़ते हैं तो बस यानि कि
बढ़ते ही चले जाते हैं-
दम नहीं लेते हैं जब तक बिलकुल ही
गोल न हो जाएँ,
बिलकुल गोल।
यह मरज़ आप का अच्छा ही नहीं होने में…….
आता है।
Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Hindi Summary
कविता का सार
कवि ने दस – ग्यारह साल की एक लड़की की कल्पना को प्रकट करते हुए पूर्णिमा के गोल-मटोल चाँद के बारे में तरह-तरह की सुंदर मोहक बातें कही हैं। वह उससे बातें. करती है। वह कहती है कि चाँद गोल-मटोल है पर ज़रा-सा तिरछा प्रतीत होता है। उसने तारों से जड़ा आकाश रूपी वस्त्र पहन रखा है। उसे यह भी लगा कि चाँद के वस्त्र चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। यह गोल-गोल तो उसका पूरा खुला मुँह ही है जिसका पूरा शरीर तो आकाश रूपी वस्त्र में छिपा हुआ है। चाँद गोरा चिट्टा है। लड़की कहती है कि चाँद बताए न बताए पर वह जानती है कि उसे अवश्य कोई बीमारी है। जब वह घटने लगता है तो घटता ही चला जाता है और जब बढ़ने लगता है तो बस बढ़ता ही चला जाता है । वह तब तक बढ़ता ही जाता है जब तक पूरा गोल-मटोल नहीं हो जाता । घटने-बढ़ने की उसे लगी बीमारी ठीक होने का नाम ही नहीं लेती।
Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Hindi Explanation
पद्यांशों का सप्रसंग सरलार्थ
गोल है खूब मगर
आप तिरछे नज़र आते हैं ज़रा।
आप पहने हुए हैं कुल आकाश
तारों-जड़ा;
सिर्फ़ मुँह खोले हुए हैं अपना
गोरा चिट्टा
गोल मटोल,
अपनी पोशाक को फैलाए हुए चारों सिम्त।
शब्दार्थ – खूब = बहुत। ज़रा = थोड़ा-सा। कुल = सारा। पोशाक = वस्त्र, कपड़े। सिम्त = दिशा।
प्रसंग– प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती’ में संकलित कविता .’ चाँद से थोड़ी-सी गप्पें’ से ली गई हैं। इसे श्री शमशेर बहादुर सिंह ने लिखा है। दस- ग्यारह वर्ष की एक लड़की पूर्णिमा के चाँद को देख कर तरह-तरह की कल्पनाएँ करते हुए उसे संबोधित करती है।
सरलार्थ – लड़की कहती है कि आप बिलकुल गोल-मटोल हैं मगर ज़रा-से तिरछे दिखाई देते हैं। आप ने टिमटिमाते तारों से जड़ा हुआ सारा आकाश ही वस्त्र के रूप में पहन रखा है। वह फिर सोचते हुए कहती है आप का सारा शरीर तो आकाश रूपी वस्त्रों में पूरी तरह छिपा हुआ है। यह गोल-मटोल गोरा चिट्टा तो आप का खुला मुँह है । आप अपनी पोशाक को अपने चारों ओर सभी दिशाओं में फैलाए हुए हैं।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ख) कौन कैसा है और उसने क्या पहना हुआ है?
(ग) उसका मुँह कैसा है और उसके वस्त्रों की कैसी स्थिति है?
उत्तर—(क) कवि- शमशेर बहादुर सिंह, कविता – चाँद से थोड़ी सी गप्पें।
(ख) चाँद खूब गोल ही है परंतु कुछ तिरछा दिखाई देता है और उसने तारों जड़े समस्त आकाश को पहना हुआ है।
(ग) चाँद का मुँह खुला हुआ है। वह गोरा चिट्टा और गोल-मटोल है। उसके वस्त्र चारों दिशाओं में फैले हुए हैं।
आप कुछ तिरछे नज़र आते हैं जाने कैसे-
खूब है गोकि !
वाह जी, वाह !
हम को बुद्ध ही निरा समझा है !
हम समझते ही नहीं जैसे कि
आप को बीमारी है :
शब्दार्थ— गोकि = हालाँकि, यद्यपि। बुद्धू = मूर्ख। निरा = बिलकुल, पूरा।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती’ में संकलित कविता ‘चाँद से थोड़ी-सी गप्पें’ से ली गई हैं । कवि शमशेर बहादुर सिंह ने दस – ग्यारह वर्ष की एक लड़की को चाँद से संबंधित कल्पनाओं को प्रस्तुत किया है।
सरलार्थ–लड़की चाँद को संबोधित करते हुए कहती है कि मुझे पता नहीं, पर आप थोड़े-से तिरछे दिखाई देते हैं। यद्यपि आप का यह रूप और आकार सुंदर है पर हम आपको भली-भांति जानते हैं। ‘क्या आप ने हमें निरा मूर्ख समझ रखा है ? क्या हम आप को समझते नहीं हैं ? हमें पता है कि आपको एक बीमारी है। ‘
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ख) चाँद कैसा है और क्यों?
(ग) लड़की के चाँद के संबंध में क्या विचार हैं?
उत्तर- (क) कवि – शमशेर बहादुर सिंह, कविता – चाँद से थोड़ी सी गप्पें।
(ख) चाँद कुछ तिरछा दिखाई दे रहा है। उस का यह रूप और आकार भी सुंदर है। न मालूम क्यों वह ऐसा दिखाई देता है।
(ग) लड़की समझती है कि चाँद को कोई बीमारी है इसलिए वह तिरछा दिखाई देता है।
आप घटते हैं तो घटते ही चले जाते हैं,
और बढ़ते हैं तो बस यानि कि
बढ़ते ही चले जाते हैं-
दम नहीं लेते हैं जब तक बिलकुल ही
गोल न हो जाएँ,
बिलकुल गोल।
यह मरज़ आप का अच्छा ही नहीं होने में…….
आता है।
शब्दार्थ — दम = साँस। मरज़ = रोग, बीमारी। गोल होना = गायब होना।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती’ में संकलित कविता ‘चाँद से थोड़ी-सी गणें’ से ली गई हैं। इस कविता की रचना श्री शमशेर बहादुर सिंह ने की है। दस – ग्यारह वर्ष की एक लड़की अपनी कल्पना में चाँद से बातें करती है। वह मानती है कि चाँद चाहे बहुत सुंदर है पर उसे कोई बीमारी है ।
सरलार्थ – लड़की चाँद से बातें करते हुए कहती है कि आप बीमारी के कारण ही जब घटने लगते हैं तो घटते ही चले जाते हैं। आप का आकार छोटे-से छोटा होता जाता है और फिर आकाश से गायब ही हो जाते हो लेकिन जब आप बढ़ने लगते हैं तो बढ़ते ही जाते हैं। आप का बढ़ता आधार हटने का नाम ही नहीं लेता। जब तक आप बिलकुल गोल- मटोल नहीं हो जाते, आप बढ़ते ही जाते हैं। पता नहीं, घटने-बढ़ने की यह बीमारी आप को कब से है ? आप की यह बीमारी ऐसी है कि ठीक होने में ही नहीं आती।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ख) लड़कीं अनुसार चाँद को क्या बीमारी है?
(ग) चाँद की बीमारी क्या ठीक हो जाएगी?
उत्तर- (क) कवि – शमशेर बहादुर सिंह, कविता – चाँद से थोड़ी-सी गप्पें।
(ख) लड़की के अनुसार चाँद को घटने और बढ़ने की बीमारी है। वह घटता है तो घटता ही चला जाता है और बढ़ता है तो बढ़ता ही चला जाता है।
(ग) लड़की मानती है कि चाँद की यह बीमारी ठीक होने वाली नहीं है । वह सदा घटता-बढ़ता रहेगा।
ध्यान देने योग्य शब्द
कुल —– सारा
सिम्त —– दिशा
जोकि —– हालाँकि, यद्यपि
दम —– साँस
मरज़ (मर्ज़) —– बीमारी ।
Chand Se Thodi Si Gappen Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कविता से
प्रश्न 1. कविता में ‘आप पहने हुए हैं कुल आकाश’ के माध्यम से लड़की क्या कहना चाहती है?
उत्तर- आप पहने हुए हैं कुल आकाश’ के माध्यम से लड़की कहना चाहती है कि चाँद की पोशाक चारों दिशाओं में फैली हुई है।
प्रश्न 2. ‘हम को बुद्ध ही निरा समझा है!‘ कह कर लड़की क्या कहना चाहती है?
उत्तर—लड़की चाँद से कहना चाहती है कि वह स्वयं को अधिक बुद्धिमान न समझे। उसे भी बहुत समझ है और वह चाँद के मोटा – पतला-तिरछा होने का कारण जानती है।
प्रश्न 3. आशय बताओ-
‘यह मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में आता है। ‘
उत्तर—इनसान ने जब से आसमान में चाँद को देखा है वह घटता, बढ़ता या तिरछा होता हुआ ही दिखाई देता है। युग बीत गए। पता नहीं चांद को कैसी बीमारी है कि वह ठीक ही नहीं होती और उसका रूप एक-सा नहीं रहता ।
प्रश्न 4. कवि ने चाँद से गप्पें किस दिन लगाई होंगी ? इस कविता में आई बातों की मदद से अनुमान लगाओ और उसका कारण भी बताओ ।
दिन कारण
पूर्णिमा …………………….
अष्टमी से पूर्णिमा के बीच …………………….
प्रथमा से अष्टमी के बीच …………………….
उत्तर-
| दिन | कारण |
|---|---|
| पूर्णिमा | चाँद पूरी तरह गोल - मटोल दिखाई देता है। रात के अंधेरे- काले तारों भरे आकाश में वह मुँह खोल कर गोरा चिट्टा रूप दिखाता है। |
| अष्टमी से पूर्णिमा के बीच | चाँद थोड़ा कटा हुआ गोल तो दिखाई देता है पर गोरा चिट्टा सा प्रतीत होता है। |
| प्रथमा से अष्टमी के बीच | चाँद का दुबला-पतला रूप बढ़ता ही जाता है । उसका आकार गोल पर थोड़ा तिरछा दिखाई देता है। |
प्रश्न 5. नई कविता में तुक या छंद के बदले बिंब का प्रयोग अधिक होता है, बिंव वह तसवीर होती है जो शब्दों को पढ़ते समय हमारे मन में उभरती है। कई बार कुछ कवि शब्दों की ध्वनि की मदद से ऐसी तसवीर बनाते हैं और कुछ कवि अक्षरों या शब्दों को इस तरह छापने पर बल देते हैं कि उनसे कई चित्र हमारे मन में बनें। इस कविता के अंतिम हिस्से में चाँद को एकदम गोल बताने के लिए कवि ने विलकुल शब्द के अक्षरों को अलग-अलग करके लिखा है। तुम इस कविता के और किन शब्दों को चित्र की आकृति देना चाहोगे ? ऐसे शब्दों को अपने ढंग से लिखकर दिखाओ।
“उत्तर – I. गोल हैं खूब………..मगर
आप तिरछे नज़र आते हैं ज़रा ।
II. हम समझते ही नहीं जैसे कि
आप को………..
बी मा री है।
III. गो-रा-चि-टू-टा ।
IV. वा-ह-जी-वा- ह ।
V. घ-ट-ते ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. कुछ लोग बड़ी जल्दी चिढ़ जाते हैं, यदि चाँद का स्वभाव भी आसानी से चिढ़ जाने का हो तो वह किन बातों से सबसे ज़्यादा चिढ़ेगा ? चिढ़कर वह उन बातों का क्या जवाब देगा ? अपनी कल्पना से चाँद की ओर से दिए गए जवाब लिखो ।
उत्तर – यदि चाँद का स्वभाव आसानी से चिढ़ जाने का हो तो वह स्वयं को गोल-मटोल सुन कर सबसे ज़्यादा चिढ़ेगा । वह चिढ़ कर कहेगा कि तुम्हें इससे क्या कष्ट है यदि मैं गोल- मटोल हूँ तो मैं तेरे घर का दिया हुआ तो कुछ नहीं खाता। चाँद यह भी पसंद नहीं करेगा कि उसे तिरछा कहा जाए।
चाँद को यह सुनना भी अच्छा न लगता कि उसे अभी ठीक न होने वाली बढ़ने- घटने की बीमारी लगी हुई है । वह यही कहता है कि यह कोई बीमारी नहीं है. बल्कि उसका स्वभाव है। वह यह भी पसंद नहीं करेगा कि उसने आकाश रूपी पोशाक से अपने सारे शरीर को इस तरह ढांप रखा कि उसका केवल मुँह ही दिखाई देता है ।
प्रश्न 2. यदि कोई सूरज से गप्पें लगाए तो वह क्या लिखेगा ? अपनी कल्पना से गद्य या पद्य में लिखो । इसी तरह की कुछ और गप्पें निम्नलिखित में से किसी एक या दो से करके लिखो-
पेड़, बिजली का खंभा, सड़क, पेट्रोल पंप ।
उत्तर – सूरज से गप्पें – अरे सूरज, तू है तो बहुत सुंदर है, पर तेरा रूप बदलता क्यों रहता है ? सुबह-सवेरे आकाश में लटकी गोल-गोल फुटबॉल-सा दिखाई देता है । तेरा रंग लाल दिखाई देता है पर थोड़ी ही देर बाद किस को देख कर जलने लगता है ? कितना जलता-भुनता है हूँ। क्या किसी से इतनी ईर्ष्या करनी अच्छी होती है? शाम होते-होते तू फिर ठंडा हो जाता है। तेरा घर कहाँ है ? क्षितिज से दूर….. किसी गहरी घाटी में छिप कर तू सोता होगा।
पेड़ से गप्पें – अरे ! तू कितना लंबा है पेड़ ! यदि मेरे मोहल्ले के बच्चे एक-दूसरे पर सर्कस वालों की तरह खड़े हो जाएँ तो भी तेरे बराबर ऊँचे नहीं हो सकते। तेरे ऊपर पक्षी अपने घोंसले बनाते हैं। तेरे ऊपर बीठ करते हैं- उसे कभी साफ़ किया कर । उन्हें तू ऐसा करने से रोकता क्यों नहीं ? मुझे पता है तू उन्हें रोक ही नहीं सकता। तेरे हाथ ही नहीं है।
बिजली के खंभे से बातें
अरे ओ बिजली के खंभे! तू इतना लंबा क्यों है ? तेरे ऊपर से कितनी बिजली की तारें गुजर रही हैं। क्या तुझे इन सब से डर नहीं लगता । इन में से तो करंट गुजरता है । क्या तूं तारों के करंट से मरता क्यों नहीं है ? तुझे इन से बच कर रहना चाहिए । अरे हाँ ! मुझे दिखाई दे रहा है कि तुम सारी तारें तो सफेद-सफेद चीनी मिट्टी के गोल-गोल सहारों के ऊपर से गुजर रहे हो। अब समझ में आया कि तुम्हें करंट क्यों नहीं लगता । तुम्हारी ऊँचाई भी बहुत है। छोटे बच्चे तुम्हारे ऊपर चढ़ न जाएँ, इसी लिए तुम बहुत ऊँचे हो। जिसने भी तुम्हें बनाया वह अवश्य ही समझदार होगा ।
सड़क से बातें
अरी ओ सड़क ! तू शुरू कहाँ से होती हो ? तुम्हारा खत्म होने का भी तो पता नहीं लग रहा। पता नहीं तुम कितनी लंबी हो ? यह बताओ कि जब ट्रक और बसें दौड़ती हैं तो क्या तुम्हें दर्द नहीं होता ? वैसे एक बात तो अवश्य है कि तुम मज़बूत बहुत हो तभी तो इन आने-जाने वाली वालों का भार झेल लेती हो और जरा-सी आवाज़ नहीं निकालती । तुम साफ़-सुथरी और चिकनी हो पर तुम्हारा रंग काला है। यदि तुम रंग-बिरंगी होती तो सुंदर लगती। तुम्हारे दोनों तरफ के किनारों पर सफेद-सफेद लकीरें क्यों खिंची हुई हैं। वैसे तुम अच्छी बहुत हो । तुम सब को अपने-अपने घर पहुंचाने में सहायता देती हो ।
पेट्रोल पंप
अरे ओ पेट्रोल पंप ! सड़क के किनारे कुछ-कुछ दूरी पर दिखाई देने वाले तुम्हारे जैसे हम सब के तुम बहुत काम आते हो। यदि तुम न होते तो हमारा कहीं भी दूर जाना कठिन हो जाता। तुम्हीं तो जो हमारे छोटे-बड़े वाहनों को इधर-उधर पहुँचाते हो । एक बात बताओ कि जहाँ तुम खड़े होते हो वहां एक अलग ही तरह की बुदबू क्यों होती है ? मुझे तो वह बदबू बहुत बुरी लगती है। क्या तुम उस बदबू से परेशान नहीं होते ? मैंने कई बार सोचा है; अच्छी तरह से देखा भी है पर पता ही नहीं लगता कि तुम्हारे भीतर डीज़ल या पेट्रोल आता कहां से है। पापा कहते हैं कि पेट्रोल महंगा होता है। तुम बदबू भी फैलाते हो और लोगों से पैसे भी लूटते हो। तुम भी क्या कर सकते हो ? सारे पैसे तो पेट्रोल पंप का मालिक अपनी जेब भर लेता है। 1
भाषा की बात
प्रश्न 1. चाँद संज्ञा है। चाँदनी रात में चाँदनी विशेषण है। नीचे दिए गए विशेषणों को ध्यान से देखो और बताओ कि-
(क) कौन-सा प्रत्यय जुड़ने पर विशेषण बन रहे हैं।
(ख) इन विशेषणों के लिए एक-एक उपयुक्त संज्ञा भी लिखो।
गुलाबी पगड़ी / मखमली घास / कीमती गहने / ठंडी रात / जंगली फूल / कश्मीरी भाषा
उत्तर-
| 1. गुलाबी पगड़ी | ई. प्रत्यय | गुलाबी फ्रॉक |
|---|---|---|
| 2. मखमली घास | ई प्रत्यय | मखमली कपड़ा |
| 3. कीमती गहने | ई प्रत्यय | कीमती पैन |
| 4. ठंडी रात | ई प्रत्यय | ठंडी चाय |
| 5. जंगली फूल | ई प्रत्यय | जंगली बिल्ली |
| 6. कश्मीरी भाषा | ई प्रत्यय | कश्मीरी लोग |
प्रश्न 2. गोल-मटोल, गोरा-चिट्टा
कविता में आए शब्दों के इन जोड़ों में अंतर यह है कि चिट्टा का अर्थ सफ़ेद है और गोरा से मिलता-जुलता है जबकि मटोल अपने-आप में कोई शब्द नहीं है। यह शब्द ‘मोटा’ से बना है। ऐसे चार-चार शब्द युग्म सोच कर लिखो और उनका वाक्यों में प्रयोग करो।
उत्तर-
(क) गोल मटोल
- हरा-भरा – मेरे घर के सामने का पेड़ तो अभी भी हरा-भरा है।
- हट्टे-कट्टे – अखाड़े में तो सभी हट्टे-कट्टे पहलवान थे ।
- भारी-भरकम – तुम्हारे नाम भारी-भरकम पार्सल आया है। 4. ईंट – गारा-3
– अब यहाँ से ईंट – गारा समेट दो और काम बंद करो ।
(ख) गोरा चिट्टा
- ढीला-ढाला – तुम्हारा कुर्ता तो बहुत ढीला-ढाला है।
- गला-सड़ा-गला – सड़ा फल बाहर निकाल दो।
- दुबले – मरियल- सेना में दुबले – मरियल लोगों का कोई काम नहीं है।
- कंकड़-पत्थर— – कंकड़-पत्थर चुन कर मैदान से बाहर निकाल दो ।
प्रश्न 3. ‘बिलकुल गोल’ – कविता में इसके दो अर्थ हैं—
(क) गोल आकार का
(ख) गायब होना ।
ऐसे तीन और शब्द सोच कर उनसे ऐसे वाक्य बनाओ कि शब्दों के दो-दो अर्थ निकलते हों ?
उत्तर-1. घटा = बादल, कम होना।
वाक्य- आकाश में काली घटा छा गई।
बारह से आठ घटा कर शेष चार बचते हैं।
- आम = फल का नाम, साधारण ।
वाक्य- गर्मियों में आम की बहार होती है।
बच्चों का रोना तो आम बात है।
- सोना = बहुमूल्य धातु, नींद लेना ।
वाक्य – सोना तो दिन प्रतिदिन महँगा होता जा रहा है।
रात को गहरी नींद सोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है ।
प्रश्न 4. ताकि, जबकि, चूँकि, हालाँकि – कविता की जिन पंक्तियों में ये शब्द आए हैं, उन्हें ध्यान से पढ़ो। ये शब्द दो वाक्यों को जोड़ने का काम करते हैं । इन शब्दों का प्रयोग करते हुए दो-दो वाक्य बनाओ ।
उत्तर- 1. ताकि
(क) मैं जल्दी जाना चाहता हूँ ताकि बस पकड़ सकूँ ।
(ख) अब तुम्हें जाना चाहिए ताकि तुम स्कूल का काम कर सको ।
- जबकि
(क) आज रमेश ने ही मुझे गाली दी जबकि वह मेरा मित्र है ।
(ख) सुरेश तुम्हारी शिकायत करता रहता है जबकि वह तुम्हारा भाई है ।
- चूँकि
(क) चूंकि वह बीमार था इसलिए स्कूल नहीं आ सका ।
(ख) चूंकि वह बहुत ताकतवर है इसलिए उसे कीचड़ में फँसे छकड़े को बाहर निकालने में देर नहीं लगी।
- हालाँकि
(क) हालाँकि राखी को चेतावनी दे दी गई पर तो भी वह गलत रास्ते पर ही चलती रही।
(ख) हालाँकि वह काफ़ी भारी शरीर का है पर डरपोक बहुत है ।
प्रश्न 5. गप्प, गप-शप, गप्पबाजी – क्या इन शब्दों के अर्थ में अंतर है ? तुम्हें क्या लगता है ? लिखो।
उत्तर- इन शब्दों के मूल अर्थ में कोई बड़ा अंतर नहीं है लेकिन तरह-तरह के भावों को प्रकट करते समय इनमें अंतर दिखाई देता है जैसे-
(1) गप्प मारने में समय खराब न करो।
(2) मित्रों से गप-शप करते समय बहुत जल्दी बीत गया ।
(3) गप्पबाज़ी की आदत छोड़ो। इससे तुम्हें कुछ मिलने वाला नहीं है।
Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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