कविता “देश-गान” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का ग्यारहवाँ अध्याय है। यह पोस्ट Desh Gaan Class 6th Hindi Chapter 11 Question Answers के बारे में है। यह कविता हंस कुमार तिवारी उपाध्याय द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “देश-गान” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Lokgeet Class 6th Hindi Chapter 10 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Desh Gaan Class 6th Hindi Chapter 11 Question Answers
Desh Gaan Class 6th Hindi Poem Text
हमको है अभिमान देश का,
जिसका पाँव पखारे सागर,
गंगा भरे, सँवारे सागर,
सोए जिस पर स्वर्ग, वही तो
शीश- मुकुट हिमवान देश का ।
जिसके रज-कण का कर चंदन,
झुक झुक नभ करता पद वंदन,
कली कली का प्राण खोलता,
स्वर्ण – रश्मि का गान देश का ।
जग के जीवन के विकास में
जग में नयनों के प्रकाश में,
लगा हुआ है आदि काल से
ज्ञान- किरण का बाण देश का ।
कोटि बाहु में शक्ति इसी की,
कोटि प्राण में भक्ति इसी की,
कोटि-कोटि कंठों में गुंजित
मधुर-मधुर जयगान देश का ।
Desh Gaan Class 6th Hindi Poem Summary
कविता का सार
श्री हंस कुमार तिवारी जो देश-गान नामक कविता में अपने देश भारत का गुणगान करें हुए कहते हैं कि हमें भारत पर गर्व है। इसके चरणों को समुद्र धोता है और यह हिमालय पर्व है । भारत देश ने संसार को आदि काल से ही ज्ञान का प्रकाश दिया है। यह एक शक्ति. जहाँ देवता वास करते हैं, इसका मुकुट है। यहाँ घर-घर में लक्ष्मी और सरस्वती का निवार सम्पन्न देश है। सभी देशवासी मुक्त कंठ से इस देश का जयगान करते हैं।
पद्यांशों के प्रसंग सहित सरलार्थ
- हमको है अभिमान देश का,
जिसका पाँव पखारे सागर,
गंगा भरे, सँवारे सागर,
सोए जिस पर स्वर्ग, वही तो
शीश- मुकुट हिमवान देश का ।
शब्दार्थ- अभिमान = गर्व । पखारे = धोए। सागर = समुद्र । शीश = सिर। मुकुट = ताज । हिमवान = हिमालय ।
प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती (भाग – 1 ) ‘ में संकलित ‘देश गान’ नामक कविता में से लिया गया है। इस कविता के रचयिता हंस कुमार तिवारी है। इसमें कवि ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता और देश की प्राचीन संस्कृति पर प्रकाश डाला है।
सरलार्थ- कवि भारत के गौरव का गुणगान करते हुए कहता है कि हम सबको अपने देश भारत पर गर्व है । समुद्र इसके पाँव धोता है अर्थात् समुद्र भारत के चरणों में स्थित है। यहां पवित्र नदी गंगा बहती है जो कि इसके अन्न के भंडारों को भरती है भाव है कि गंगा के जल से खेतों में सिंचाई होती है। समुद्र इस देश को सजाता-संवारता है। संसार के सब पर्वतों से ऊँचा हिमालय इस देश के सिर पर मुकुट के समान स्थित है, उस पर स्वर्ग के समान शयन कर रहा है। कवि का भाव यह है कि हिमालय पर स्वर्ग जैसी शोभा विराजमान है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) हमारे देश का मुकुट कौन-सा है और क्यों ?
(ग) भारत माता के चरण कौन धोता है ?
उत्तर-(क) कवि – हंस कुमार तिवारी, कविता – देश – गान ।
(ख) हमारे देश का मुकुट हिमालय पर्वत है जो इस के सिर रूपी उत्तरी दिशा की शोभा बढ़ाता है।
(ग) भारत माता के चरण समुद्र धोता है क्योंकि वह इस के नीचे के दक्षिणी भाग में है।
- जिसके रज-कण का कर चंदन,
झुक झुक नभ करता पद वंदन,
कली कली का प्राण खोलता,
स्वर्ण – रश्मि का गान देश का ।
शब्दार्थ- रज – कण = धूल का कण । नभ = आकाश, आसमान । पद = पैर । वंदन = नमस्कार, वंदना स्वर्ण-रश्मि = सुनहरी किरणें ।
प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक किशोर भारती (भाग – 1 ) में संकलित देश-गान नामक कविता से लिया गया है। इस कविता के रचयिता हंस कुमार तिवारी हैं। इसमें कवि भारत देश की महत्ता का गुणगान करते हुए कहते हैं-
सरलार्थ- कवि कहता है कि इस देश की धूल के कण चंदन के समान पवित्र हैं। इन धूल-कणों को चंदन बना कर और उससे तिलक लगा कर आकाश बादल के रूप में झुक झुक कर इसके चरणों में नमस्कार करता है। भारत में प्रभातकालीन सूर्य की सुनहरी किरणों का गीत कली-कली में नई चेतना भर देता है तथा हर कली में नए प्राणों का संचार कर देता है। सूर्य की धूप खिल कर लोगों में नया जोश भर देती है ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न- (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) भारत माता की वंदना कौन और कैसे करता है ?
(ग) प्रत्येक कली में चेतना भरने का श्रेय किसको है ?
उत्तर- (क) कवि – हंस कुमार तिवारी, कविता – देश – गान ।
(ख) आकाश भारत माता की वंदना बादलों के रूप में झुक-झुक कर करता है।
(ग) सूर्य की सुनहरी किरणें कलियों को जीवन प्रदान करती हैं। उन्हें ही प्रत्येक कली में चेतना भरने का श्रेय प्राप्त है ।
- जग के जीवन के विकास में
जग में नयनों के प्रकाश में,
लगा हुआ है आदि काल से
ज्ञान- किरण का बाण देश का ।
शब्दार्थ- जग = संसार | विकास = तरक्की । नयनों = आँखों । प्रकाश = रोशनी । आदिकाल = प्रारंभ का समय ।
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘किशोर भारती (भाग – 1 ) ‘ में संकलित श्री हंस कुमार तिवारी की ‘देश गान’ नामक कविता में से ली गई हैं। इनमें कवि बताना चाहता है कि प्राचीनकाल से ही भारत ज्ञान का प्रकाश फैलाता आया है।
सरलार्थ- दुनिया भर के लोगों के जीवन को ऊँचा उठाने, संसार के लोगों की आँखों में नई रोशनी भरने के लिए भारत देश का आरंभिक काल से ज्ञान रूपी बाण लगा हुआ है। भाव यह कि दुनिया के लोगों ने भारत से ही सबसे पहले ज्ञान का प्रकाश प्राप्त किया । यह ज्ञान किरण आज भी दुनिया भर के लोगों की आँखों में समाई हुई है।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) विश्व भर को सब से पहले ज्ञान किस ने प्रदान किया था ?
(ग) आज भी विश्व-भर की आँखों में क्या समाया हुआ है ?
उत्तर—(क) कवि–हंस कुमार तिवारी, कविता – देश-गान ।
(ख) विश्व भर को सबसे पहले ज्ञान भारत देश ने ही प्रदान किया था ।
(ग) आज भी भारत रूपी ज्ञान किरण विश्वभर की आँखों में समायी हुई है।
- कोटि बाहु में शक्ति इसी की,
कोटि प्राण में भक्ति इसी की,
कोटि-कोटि कंठों में गुंजित
मधुर-मधुर जयगान देश का ।
शब्दार्थ- कोटि = करोड़। बाह = बाँह, भुजा। शक्ति = ताकत । प्राण = जान। कंठों गलों। गुंजित = गुंजायमान। मधुर = मीठा। जयगान = जीत का गीत ।
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘किशोर भारती (भाग – 1)’ के अंतर्गत श्र हंस कुमार तिवारी द्वारा रचित ‘देश गान’ नामक कविता में से ली गई हैं। इसमें कवि,करोड़ों भारतवासियों को भारत की शक्ति मानता हुआ कहता है—
सरलार्थ- इस भारत देश की करोड़ों भुजाओं में ताकत (अपार जन शक्ति है) है। करोड़ लोगों के दिलों में इसी की भक्ति है । जनता देश के प्रति प्यार करती है । भारत के करोड़ों कंट से जीत का मीठा गीत गुंजायमान है। भाव यह कि सभी मिल कर विजय का गान करते हैं। ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) भारत की ताकत किस में समाई हुई है ?
(ग) भारत का जय गान कौन करता है ?
उत्तर— (क) कवि— हंस कुमार तिवारी, कविता – देश – गान ।
(ख) भारत की अपार ताकत करोड़ों भारत वासियों की भुजाओं में समाई हुई है।
(ग) भारत जय गान करोड़ों देश वासी उन्मुक्त स्वर में करते हैं जिस से सारा आकाश गूंज उठता है।
ध्यान देने योग्य शब्द
अभिमान — गर्व
पखारे — धोना
विकास — उन्नति
आदि-काल — आरंभिक काल / प्राचीन काल
बाहु — बाँहें ।
कंठ — गला ।
Desh Gaan Class 6th Hindi Chapter 11 Poem Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और सराहना
प्रश्न 1. हमें अपने देश पर अभिमान है, क्योंकि-
(क) भारत एक विशाल देश है।
ख) भारत को उपमहाद्वीप कहा जाता है।
(ग) भारत एक धनवान् देश है।
(घ) भारत की प्रकृति और संस्कृति निराली है ।
उत्तर – (घ) भारत की प्रकृति और संस्कृति निराली है।
प्रश्न 2. भारत को महान् बनाने में ‘सागर’, ‘गंगा’ और ‘हिमालय’ का क्या योगदान है ?
उत्तर – सागर — सागर भारत माता के चरण धोता है। भारत भूमि के तीन ओर समुद्र है जो श्रद्धाभाव से उसके पाँव धोता है और उसे सँवारता है।
गंगा – गंगा अपने जल से भारत के विशाल क्षेत्र को सींचती है, जिससे फ़सलें लहलहाती हँ, देश अनाज से भर जाता है।
हिमालय — हिमालय भारत भूमि की रक्षा करता है, क्योंकि कोई भी आक्रमणकारी हिमालय को आसानी से पार कर भारत पर हमला नहीं कर सकता। हिमालय मानसून पवनों को रोक कर भारत में वर्षा बरसाने में भी सहायक सिद्ध होता है।
प्रश्न 3. कविता की किन पंक्तियों का आशय है—
‘भारत भूमि का कण-कण वर्षा और धूप से खिल उठता है।”
उत्तर- जिसके रज- कण का कर चंदन, झुक-झुक नभ करता पद वंदन, कली-कली का प्राण खोलता, स्वर्ण रश्मि का गान देश का ।
प्रश्न 4. ” लगा हुआ है आदि काल से ज्ञान किरण का बाण देश का ।” कोई एक उदाहरण देकर समझाएँ कि हमारे देश के लोग आदि काल से ही ज्ञान के क्षेत्र में आगे रहे हैं।
उत्तर – महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान का जो प्रसार किया, वह संसार के कोने-कोने तक पहुँचा था। सम्राट् अशोक ने धर्म के प्रचार के लिए अनेक बौद्ध भिक्षु दूसरे देशों में भेजे। इससे पूर्व आर्य धर्म के मूल तत्व कई देशों में विकसित हुए। स्वामी विवेकानंद और स्वामी रामतीर्थ ने भी विदेशों में ज्ञान का प्रकाश फैलाया ।
प्रश्न 5. देश को ‘कोटि बाहु’ और ‘कोटि प्राण’ क्यों कहा गया है ?
उत्तर- भारत के निवासी पूरी तरह संगठित हैं । यहाँ के करोड़ों लोग एक होकर करोड़ों भुजाओं से काम करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति श्रम करके देश को समृद्धिशाली बनाता है। जब भी कोई संकट आता है तो करोड़ों प्राण एक होकर उसका मुकाबला करते हैं। अनेकता में एकता का साँस लेते हैं।
प्रश्न 6. भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) ज्ञान किरण का वाण देश का ।
(ख) झुक-झुक नभ करता पद वंदन ।
उत्तर—(क) ज्ञान रूपी प्रकाश की किरण बाण के समान है, यह जहाँ भी लगा, वहाँ प्रकाश हुआ है। भारत ने अपने ज्ञान से दुनिया को प्रकाश दिया। भारत की शक्ति सका ज्ञान है
(ख) जब आकाश पर बादल उमड़-घुमड़ कर नीचे को झुक जाते हैं तो ऐसा लगता है कि आकाश भारत माता के चरणों में झुककर नमस्कार कर रहा हो।
Desh Gaan Class 6th Hindi Chapter 11 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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