“रहीम के दोहे” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का छठा अध्याय है। यह पोस्ट Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ “रहीम के दोहे” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Sham Ek Kisan Class 7 Hindi Poem Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Question Answers
Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Summary (सार)
दोहों का सार
रहीम जी ने अपने दोहों में नीति के बारे में बताया है। उन्होंने कहा है कि समाज में अपने सगे-संबंधियों की संपत्ति अनेक प्रकार की रीति से बनती है। जो मुसीबत में साथ देता है वही सच्चा मित्र होता है। जाल मछलियों के मोह को छोड़कर पानी पर बहता हुआ जाता है। लेकिन उसको देखकर मछली पानी को फिर भी नहीं छोड़ती । वृक्ष अपना फल कभी नहीं खाते और न ही तालाब अपना पानी पीते हैं। सज्जन परोपकार के लिए संपत्ति को इकट्ठा करते हैं। क्वार मास के जल से रहित बादल उसी प्रकार गरजते हैं जैसे धनी के निर्धन होने पर पिछली बातें याद करते रहते हैं । यह शरीर भी धरती के समान पुरुष जैसे-तैसे पड़े हुए सर्दी, गर्मी और वर्षा सहन करता रहता है।
Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Explanation (सरलार्थ)
सप्रसंग सरलार्थ एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. कहि रहीम संपत्ति सगे, बनत बहुत बहु रीत ।
बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत ॥
शब्दार्थ – कहि = कहते हैं। संपत्ति – धन-दौलत। सगे = सगे-संबंधी। बनत = बनती है। बहु = अनेक। रीति = प्रकार। विपति = विपत्ति, कष्ट, मुसीबत। जे = जो। कसौटी = कसे कसौटी पर खरा उतरता है। तेई = वह । साँचे = सच्चा। मीत = मित्र, सखा।
प्रसंग – यह दोहा रहीम द्वारा रचित है। इसे हमारी पाठ्य पुस्तक पुष्प भाग 2 से लिया गया है। इसमें कवि ने सच्चे मित्र के बारे में बताया है।
सरलार्थ – रहीम जी कहते हैं कि सगे-संबंधी रूपी संपत्ति अनेक प्रकार की रीतियों से बनती है। जो व्यक्ति दरिद्रता और मुसीबत के समय सहायता रूपी कसौटी पर खरा उतरता है वही सच्चा मित्र होता है।
2. जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह ॥
शब्दार्थ – जाल = मछली पकड़ने में काम आने वाला जाल । जात = जाती है। बहि = बहना, बाहर। तजि = छोड़कर। मीनन = मछली । मोह = प्यार, ममता । मछरी = मछली। नीर = पानी । तऊ फिर भी। छाँडति = छोड़ती । छोह = प्रेम, स्नेह । कृपा = दया।
प्रसंग – यह दोहा पुष्प भाग 2 में से रहीम द्वारा रचित रहीम के दोहों से लिया गया है। इसमें कवि ने मछली के जल के प्रति गहरे प्रेम के बारे में बताया है। मछली जल से प्रेम करती है पर जल मछली से प्रेम नहीं करता ।
सरलार्थ – रहीम जी कहते है कि जब मछली पकड़ने के लिए जाल को जल में डाला। जाता है तो मछलियों के प्रति मोह को छोड़ कर जल शीघ्र ही जाल से निकल जाता है। वह उससे बाहर बह जाता है लेकिन मछलियाँ जल के प्रति प्रेम को नहीं त्याग पातीं। वै जल से अलग होते ही मर जाती हैं। वास्तव में रहीम जी कहना चाहते हैं कि हमें मछली की तरह ईश्वर से प्रेम करना चाहिए।
3. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान ।
कहि रहीम परकाज हित, संपति-संचहि सुजान ॥
शब्दार्थ – तरुवर = वृक्ष । खात है = खाते हैं। सरवर = तालाब । पियत = पीना । पान = पानी। परकाज = परोपकार, दूसरे की भलाई। हित = के लिए। संपत्ति = धन दौलत। संचहि = इकट्ठा करते हैं । सुजान = सज्जन, महान् पुरुष।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा पुष्प भाग 2 में से लिया गया है। यह ‘रहीम’ द्वारा रचित है। इसमें कवि ने परोपकार के भाव को प्रकट किया है।
सरलार्थ – रहीम जी कहते हैं कि वृक्ष अपने फल कभी नहीं खाते और न तालाब कभी अपना जल पीते हैं। सज्जन भी परोपकार के लिए अपना धन इकट्ठा करते हैं। वे दूसरों का भला करने के लिए अपना सब कुछ दे देते हैं।
4. थोथे बादर क्वार के, ज्यों रहीम छहरात ।
धनी पुरुष निर्धन भए, करें पाछिली बात ॥
शब्दार्थ – थोथे = खाली, बिना पानी के। क्वार = क्वार का महीना । छहरात = फहराना, कठोर आवाज़ करना। भए = हो गए। पाछिली = पिछली बीते समय की।
प्रसंग – प्रस्तुत दोहा कवि रहीम द्वारा रचित है। इसे हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 से लिया गया है। इसमें कवि ने क्वार मास के बादलों का वर्णन किया है।
सरलार्थ – रहीम जी कहते हैं कि क्वार मास में आकाश में छाने वाले बिना पानी के खाली बादल उसी प्रकार से गड़गड़ाहट की आवाज़ करते हैं जैसे धनी पुरुष ग़रीब हो जाने पर भी अपनी पिछली बातों को याद करके घमंड भरी बातें बोलता ही रहता है। कुछ भी पास न रहने पर उस का अभिमान नष्ट नहीं होता है।
5. धरती की-सी रीत है, सीत धाम औ मेह ।
जैसी परे सौ सहि रहै, त्यों रहीम यह देह ॥
शब्दार्थ – रीत = रीति, परंपरा । सीत = सर्दी । धाम = गर्मी। मेह = वर्षा। सहि = सहन करना।
प्रसंग – यह दोहा रहीम द्वारा लिखित है। इसे हमारी पाठ्य पुस्तक पुष्प भाग 2 से लिया गया है। इसमें कवि ने धरती के साथ-साथ मानव शरीर की सहनशक्ति का वर्णन किया है।
सरलार्थ – रहीम जी का कहना है कि इस शरीर की झेलने की रीति धरती के समान है। धरती सर्दी, गर्मी और वर्षा की विपरीत स्थितियों को अपने पर झेल लेती है। मनुष्य का शरीर जीवन में आने वाले सुख-दुःख की जैसी भी परिस्थितियाँ हों, उन्हें सहन कर लेता है।
Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Question Answers (प्रश्नों के उत्तर)
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
दोहे से
प्रश्न 1. पाठ में दिए गए दोहों की कोई पंक्ति कथन और कोई कथन को प्रमाणित करनेवाला उदाहरण । इन दोनों प्रकार की पंक्तियों की पहचान कर अलग- अलग लिखिए।
उत्तर- (क) कथन
- विपति कसौटी ते कसे, तेई साँचे मीत।
- रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह।
- कहि रहीम परकाज हित, संपति – संचहि सुजान।
- धनी पुरुष निर्धन भए, करें पाछिली बात।
- जैसी परे सो सहि रहे, त्यों रहीम यह देह।
(ख) प्रमाणित करने वाला उदाहरण
- कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
- जाल परे जल जात वहि, तजि मीनन को मोह।
- तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान।
- थोथे बादर क्वार के, ज्यों रहीम घहरात।
- धरती की – सी रीत है, सीत धाम और मेह।
प्रश्न 2. रहीम ने क्वार के मास में गरजनेवाले बादलों की तुलना ऐसे निर्धन व्यक्तियों से क्यों की है जो पहले कभी धनी थे और बीती बातों को बता कर दूसरों को प्रभावित करना चाहते हैं ? दोहे के आधार पर आप सावन के बरसने और गरजने वाले बादलों के विषय में क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर – धनी व्यक्ति जब निर्धन हो जाते हैं तो वे अपनी पिछली बातों को याद करके ऊँची आवाज़ में बोलते रहते हैं । वे घमंड में इतराते हैं, डींगें हाँकते हैं। वे संपन्न होने का ढोंग करते हैं । इसी तरह आश्विन के महीने में आकाश में छाए बादल पानी बिना खाली होते हैं। पर फिर भी वे भयंकर गरजन करते हैं। सावन के महीने में बादल जल से भरे होते हैं। वे गरजते हैं, चमकते हैं, बरसते हैं। वे गरज – बरस कर धरती को जल से भर देते हैं।
दोहों से आगे
प्रश्न 1. आगे दिए गए दोहों में बताई गई सच्चाइयों को यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो उनके क्या लाभ होंगे? सोचिए और लिखिए-
(क) तरुवर फल ………… सचहिं सुजान ॥
(ख) धरती की – सी ………… यह देह ॥
उत्तर- (क) (i) यदि हम पेड़ों और सरोवरों के समान पर उपकारी बन जाएँ तो
हमारे जीवन में लोभ-मोह का भाव नष्ट हो जाएगा ।
(ii) जीवन में स्वार्थ भाव समाप्त हो जाएगा। (iii) बेईमानी का भाव नष्ट हो जाएगा ।
(iv) गरीब-अमीर का भेद-भाव मिट जाएगा।
(v) मन में पूर्ण रूप संतोष भाव उत्पन्न हो जाएगा।
(ख) (i) जीवन में किसी भी कष्ट को आसानी से सहन कर सकेंगे ।
(ii) सुख – दुःख में एक समान रहेंगे ।
(iii) कोई लालच नहीं रहेगा।
(iv) सहनशक्ति बढ़ जाएगी ।
(v) भय बिल्कुल नहीं रहेगा।
भाषा की बात
प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के चलित हिंदी रूप लिखिए- जैसे— परे पड़े (रे, ड़े )
बिपति
बादर
मछरी
सीत
उत्तर-
| बिपति | विपत्ति | (ब - व) |
|---|---|---|
| मछरी | मछली | (र-ल) |
| बादर | बादल | (र-ल) |
| सीत | शीत | (स-श) |
प्रश्न 2. नीचे दिए उदाहरण पढ़िए-
(क) बनत बहुत बहु रीति।
(ख) जाल परे जल जात बहि।
उपर्युक्त उदाहरणों की पहली पंक्ति में ‘ब’ का प्रयोग बार-बार किया गया है और दूसरी में ‘ज’ का प्रयोग । इस प्रकार बार- बार एक ध्वनि के आने से भाषा की सुंदरता बढ़ जाती है। वाक्य रचना की इस विशेषता के अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर – नीचे ऐसे कुछ और उदाहरण दिए गए हैं।
(i) घन घमंड नभ गरजत घोरा।
पियाहीन तरपत मन मोरा॥
(ii) रघुपति राघव राजा राम।
(iii) कल कानन कुंडल मोर पखा।
Rahim Ke Dohe Class 7 Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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