कविता “साथी हाथ बढ़ाना” JKBOSE के कक्षा 6 (Class 6th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 1 हिंदी का छठा अध्याय है। यह पोस्ट Sathi Hath Badhana Class 6th Hindi Question Answers के बारे में है। यह कविता साहिर लुधियानवी द्वारा लिखित है। इस पोस्ट में आप पाठ “साथी हाथ बढ़ाना” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Chand Se Thodi Si Gappen Class 6th Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Sathi Hath Badhana Class 6th Hindi Question Answers
Sathi Hath Badhana Class 6th Poem Text
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।
साथी हाथ बढ़ाना ।
हम मेहनत वालों ने जब भी,
मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रास्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना ।
मेहनत अपने लेख की रेखा, मेहनत से क्या डरना
कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना
अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक
अपनी मंज़िल सच की मंज़िल, अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना ।
एक से एक मिले तो कतरा, बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा, बन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना।
Sathi Hath Badhana Class 6th Hindi Summary
कविता का सार
‘साथी हाथ बढ़ाना’ साहिर लुधियानवी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक गीत है। इस गीत में मेहनतकश लोगों को संबोधित करते हुए संगठन और आपसी सहयोग के महत्व पर बल दिया गया है। गीतकार का कहना है कि व्यक्ति को मिल-जुलकर काम करना चाहिए। अकेला व्यक्ति काम करते-करते थक सकता है, किंतु जब कार्य सामूहिक रूप से किया जाता है तो वह शीघ्र और सहज रूप से पूर्ण हो जाता है।
साहिर कहते हैं कि जब मनुष्य दृढ़ निश्चय के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ता है, तो वह कठिन से कठिन कार्य को भी सरलता से कर सकता है। उसके मार्ग की सभी बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं। गीतकार मेहनतकश वर्ग से कहता है कि मेहनत ही उनके भाग्य की रेखा है, इसलिए उन्हें श्रम से डरना नहीं चाहिए। वे वर्षों से पूँजीपति वर्ग के लिए परिश्रम करते आए हैं, पर अब उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए मेहनत करनी चाहिए। उनका सुख-दुःख और उनकी मंज़िल एक ही है, इसलिए उन्हें एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
गीतकार आगे प्रेरणा देते हुए कहता है कि सामूहिक प्रयास से व्यक्ति की शक्ति और साहस दुगुना हो जाता है। जैसे एक-एक बूँद मिलकर नदी बनती है, एक-एक रेत का कण मिलकर मरुस्थल का निर्माण करता है और सरसों के छोटे-छोटे दाने पर्वत का रूप धारण कर सकते हैं, वैसे ही यदि लोग मिल-जुलकर काम करें तो वे अपने भाग्य को भी अपने वश में कर सकते हैं। इसलिए सभी को एकजुट होकर परिश्रम करना चाहिए।
Sathi Hath Badhana Class 6th Poem Explanation
पद्यांशों का सप्रसंग सरलार्थ
साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।
साथी हाथ बढ़ाना ।
हम मेहनत वालों ने जब भी,
मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रास्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना ।
शब्दार्थ- बोझ = भार, वज़न। परबत = पहाड़, पर्वत। सीस = सिर। फ़ौलादी = लोहे के समान मज़बूत। बाहें = भुजाएँ। राहें = रास्ते।
प्रसंग— ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘किशोर भारती’ के ‘साथी हाथ बढ़ाना’ नामक गीत से ली गई हैं। इस गीत के गीतकार श्री साहिर लुधियानवी हैं। इस गीत में उन्होंने मेहनतकश लोगों को संबोधित करते हुए उन्हें मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दी है।
सरलार्थ— गीतकार कहता है कि सभी को एक-दूसरे के सहयोग से काम करना चाहिए। एक अकेला व्यक्ति बड़े काम को करने में कठिनाई का अनुभव करता है। इसलिए हमें मिल-जुलकर काम करना चाहिए। गीतकार प्रेरणा देता हुआ कहता है कि मेहनत करने वाले लोगों ने जब भी मिल-जुलकर काम किया है तो उनके रास्ते की रुकावटें अपने आप दूर हुई हैं। मिल-जुलकर काम करने वाले लोगों के सामने सागर और पर्वत भी टिक नहीं पाते हैं। उनके सीने और बाहें फ़ौलादी होती हैं और वे बड़े से बड़ा काम भी सरलता से कर लेने की हिम्मत रखते हैं। वे तो चट्टानों में भी रास्ते बनाने जैसा कठिन कार्य भी कर लेते हैं। अतः सभी को मिल-जुलकर काम करना चाहिए ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) कवि क्या कहता है ?
(ग) मेहनत वाले जब मिल कर चलते हैं तो क्या होता है ?
(घ) मेहनत वाले कैसे हैं ?
उत्तर- (क) कवि – साहिर लुधियानवी, कविता – साथी हाथ बढ़ाना ।
(ख) कवि कहता है कि हे साथियों, मिलजुल कर काम करो क्योंकि अकेला तो थक जाता है। इसलिए मिलजुल कर बोझ उठाना चाहिए ।
(ग) मेहनत वाले सब मिलकर चलते हैं तो सागर भी उन्हें रास्ता दे देता है तथा पर्वत भी उनके सामने अपना शीश झुका लेता है। मेहनत वालों के सामने कोई कठिनाई टिक नहीं पाती है।
(घ) मेहनत वालों के सीने फ़ौलाद के समान मज़बूत हैं और उनकी बाहें भी फ़ौलादी हैं। वे अपनी मेहनत से चट्टानों में भी रास्ता बना लेते हैं। वे हर मुसीबत का हल निकाल लेते हैं ।
मेहनत अपने लेख की रेखा, मेहनत से क्या डरना
कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना
अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक
अपनी मंज़िल सच की मंज़िल, अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना ।
शब्दार्थ – लेख = भाग्य। गैर पराया, दूसरा, खातिर = के लिए। नेक = ईमानदार, भला ।
प्रसंग – ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘किशोर भारती’ के ‘साथी हाथ बढ़ाना’ नामक गीत से ली गई हैं । इस गीत के गीतकार श्री साहिर लुधियानवी हैं । इस गीत में उन्होंने मेहनतकश लोगों को संबोधित करते हुए उन्हें मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दी है।
सरलार्थ — गीतकार मेहनतकश लोगों से कहता है कि मेहनत करना तो हमारे भाग्य में लिखा है। हमारी मेहनत ही हमारे भाग्य का निर्माण करने वाली है । अतः मेहनत करने से डरना नहीं चाहिए । अव से पहले तुम दूसरों के लिए मेहनत करते आए हो अर्थात् तुम्हारी मेहनत का लाभ दूसरे उठाते आए हैं। अब तुम्हें अपने लाभ के लिए मेहनत करनी है । अव तुम्हारी मेहनत का लाभ दूसरे लोग नहीं उठा पाएंगे। सभी मेहनत करने वाले लोगों का सुख और दुःख एक जैसा है। उनका लक्ष्य सच्चाई के रास्ते पर चलकर सच्चाई को प्राप्त करना है । अतः सभी को मिल-जुलकर काम करना चाहिए ।
अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) मेहनत क्या है ? मेहनत किस के लिए और कैसे करनी चाहिए ?
(ग) अपना दुःख-सुख कैसा है ?
(घ ) अपना लक्ष्य क्या है ?
उत्तर—(क) कवि-साहिर लुधियानवी, कविता – साथी हाथ बढ़ाना।
(ख) मेहनत भाग्य निर्माण करने वाली होती है। अब तक दूसरों के लिए मेहनत करते थे, अब अपने लाभ के लिए मन लगा कर मेहनत करनी चाहिए। कल तक दूसरों के के लिए मेहनत की जाती थी, आज अपनी भलाई के लिए मेहनत करनी चाहिए ।
(ग) अपना दुःख-सुख एक जैसा है। सभी मेहनत करने वालों का दुःख-सुख समान होता है। सभी मिलजुल कर एक-दूसरे के सुख – दुःख में साथ देते हैं ।
(घ) हमारा लक्ष्य सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए अपनी मेहनत द्वारा अपना उद्देश्य प्राप्त करना है।
एक से एक मिले तो कतरा, बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा, बन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना।
शब्दार्थ– कतरा = बूँद । दरिया = नदी । ज़र्रा = रेत का कण । सेहरा = रेगिस्तान । राई = छोटी सरसों का दाना । इंसाँ = इनसान, मनुष्य । किस्मत = भाग्य ।
प्रसंग— ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘किशोर भारती’ के ‘साथी हाथ बढ़ाना’ नामक गीत से ली गई हैं। इस गीत के गीतकार श्री साहिर लुधियानवी हैं । इस गीत में उन्होंने मेहनतकश लोगों को संबोधित करते हुए उन्हें मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दी है।
सरलार्थ— गीतकार कहता है कि एकता में बहुत शक्ति होती है। एक-एक बूँद मिलकर सागर का निर्माण करती है। एक-एक रेत का कण मिल जाए तो वह मरुस्थल बना देता है। यदि सरसों के छोटे-छोटे दाने मिल जाएं तो वे पर्वत बना सकते हैं। इसी प्रकार यदि सभी मनुष्य मिलकर काम करें तो वे भाग्य को अपने वश में कर सकते हैं । अतः हम सभी को मिल-जुलकर काम करना चाहिए ।
प्रश्न – (क) कवि और कविता का नाम लिखिए ।
(ख) एक से एक बूँद मिलकर क्या हो जाता है ?
(ग) रेगिस्तान कैसे बनता है ?
(घ) पर्वत कैसे बन सकता है ?
(ङ) हम अपना भाग्य अपने वश में कैसे कर सकते हैं ?
उत्तर—(क) कवि–साहिर लुधियानवी, कविता – साथी हाथ बढ़ाना।
(ख) एक से एक बूँद मिलकर नदी बना सकती है ।
(ग) जब एक-एक रैत का कण एकत्र हो जाता है तो उससे रेगिस्तान बन जाता है।
(घ) एक – एक राई मिलकर पर्वत बन सकती है।
(ङ) यदि मनुष्य एक साथ मिलकर काम करे तो वह अपनी किस्मत को भी अपने वश में कर सकता है।
ध्यान देने योग्य शब्द
बोझ — भार
फौलादी — बहुत कड़ा या मज़बूत
राह — रास्ता
गैर — पराया, दूसरा
खातिर — के लिए
नेक — ईमानदार, भला
कतरा — बूँद
दरिया — नदी
ज़र्रा — रेत का कण
राई — छोटी सरसों का दाना
इंसाँ — आदमी ।
Sathi Hath Badhana Class 6th Poem Question Answers
गीत के बारे में
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. यह गीत किसको संबोधित है ?
उत्तर – यह गीत मेहनतकश लोगों को संबोधित है जो मिल-जुल कर मेहनत करते हैं ।
प्रश्न 2. इस गीत की किन पंक्तियों को तुम अपने आस-पास की जिंदगी में घटते हुए देख सकते हो?
उत्तर – इस गीत की निम्न पंक्तियों को हम अपने आस-पास की जिंदगी में घटते हुए देख सकते हैं-
(क) हम मेहनत करने वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रास्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने फ़ौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना।
(ख) एक से एक मिले कतरा, बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो जर्रा, वन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो ईसाँ, बस में कर ले किस्मत ।
प्रश्न 3. ‘सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया‘ – साहिर ने ऐसा क्यों कहा है ? लिखो।
उत्तर – साहिर लुधियानवी के कहने का अर्थ यह है कि मेहनत करने वालों के सामने सागर और पर्वत भी झुकते हैं। जब कोई भी व्यक्ति दृढ़ निश्चय करके कदम बढ़ाता है तो उसकी सारी मुश्किलें आसान होती चली जाती हैं। उसके रास्ते की रुकावटें अपने आप दूर हो जाया करती हैं। मेहनत करने वाला व्यक्ति सब कुछ अपने वश में कर सकता है।
प्रश्न 4. गीत में सीने और बाँहों को फ़ौलादी क्यों कहा गया है ?
उत्तर- फ़ौलादी का अर्थ है- फ़ौलाद, लोहे से बना हुआ। मेहनत करने वाले व्यक्ति सारी मुसीबतों को अपने सीने पर झेलते हैं और अपनी बाँहों से वे कठिन से कठिन कार्य भी करते हैं। इसी कारण गीत में सीने और बाँह को फ़ौलादी कहा गया है।
गीत से आगे
प्रश्न 1. अपने आस-पास तुम किसे ‘साथी‘ मानते हो और क्यों ? इससे मिलते-जुलते कुछ और शब्द खोजकर लिखो ।
उत्तर – मैं अपने मित्र अभिषेक को अपना ‘साथी’ मानता हूँ। वह हर सुख-दुःख में मेरा साथ देता है। वह बहुत अच्छा लगता है। वह हमेशा मेरी भलाई की बात भी करता है। ‘साथी’ शब्द से मिलते-जुलते शब्द हैं – मित्र, दोस्त, सखा, संगी, सहचर, सहयोगी।
प्रश्न 2. ‘अपना दुःख भी एक है साथी अपना सुख भी एक‘ कक्षा, मोहल्ले और गाँव/शहर के किस-किस तरह के साथियों के बीच तुम इस वाक्य की सच्चाई महसूस कर पाते हो और कैसे ?
उत्तर- विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें ।
प्रश्न 3. इस गीत को तुम किस माहौल में गुनगुना सकते हो ?
उत्तर- इस गीत को वहाँ गुनगुनाया जा सकता है जहाँ अनेक लोग मिल-जुलकर एक ही कार्य को कर रहे हों। सभी में एक जैसा जोश और काम करने की लगन हो तो गुनगुनाते हुए काम करने में बड़ा आनंद भी आता है ।
प्रश्न 4. ‘एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना ‘
(क) तुम अपने घर में इस बात का ध्यान कैसे रख सकते हो ?
(ख) पापा के काम और माँ के काम क्या-क्या हैं ?
(ग) क्या वे एक-दूसरे का हाथ बँटाते हैं ?
उत्तर—(क) हमें घर के सभी कार्य मिल-जुलकर करने चाहिए। हम घर के सभी कामों में एक-दूसरे का हाथ बँटा सकते है। एक व्यक्ति एक काम कर ले तो दूसरा व्यक्ति दूसरा। ऐसा भी हो सकता है कि एक ही काम को दो व्यक्ति मिलकर भी कर सकते हैं।
(ख) पापा सुबह ऑफिस जाते हैं। माँ घर का सारा काम देखती है। पापा ऑफिस से आकर कुछ ज़रूरी फाइलें देखते हैं। उसके बाद घर की देखभाल करते हैं और परिवार की ज़रूरत का सामान लाते हैं। माँ उन्हें घर की ज़रूरतों और अन्य बातों के बारे में बताती रहती है।
(ग) हाँ ! पापा और माँ एक-दूसरे के काम में हाथ बँटाते हैं। वे दोनों जानते हैं कि दोनों के सहयोग और मिल-जुलकर काम करने से ही परिवार में खुशियाँ आती हैं।
प्रश्न 5. यदि तुमने ‘नया दौर‘ फिल्म देखी है तो बताओ कि यह गीत फ़िल्म में कहानी के किस मोढ़ पर आता है ? फिल्म देखो और बताओ।
उत्तर—जब गाँव वासी मिलकर सड़क बनाने लगते हैं तो उत्साहवर्धन के लिए मिलकर वे गीत गाते हैं ।
भाषा की बात
प्रश्न 1. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता ।
एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं ।
(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की किन पंक्तियों से मिलता-जुलता है ?
(ख) इन दोनों कहावतों का अर्थ कहावतकोश में देखकर समझो और उनका वाक्य में प्रयोग करो ।
उत्तर- (क ) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की निम्नलिखित पंक्तियों से मिलता-जुलता है—
एक से एक मिले तो कतरा, बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा, बन जाता है सेहरा
एक से मिले तो राई, बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ, बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना।
(ख) अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता ( अकेला व्यक्ति कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकता) – तुम अकेले उस संस्था का कार्य नहीं संभाल सकते। क्या तुम नहीं जानते कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं (एकता में बड़ा बल है ) – गाड़ी कीचड़ से क्यों नहीं निकलेगी ? सब मिलकर ज़ोर लगाओ। सुना नहीं एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं।
प्रश्न 2. नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए हैं। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ ।
(क) हाथ को हाथ न सूझना, (ख) हाथ साफ़ करना, (ग) हाथ-पैर फूलना, (घ) हाथों-हाथ लेना, (ङ) हाथ लगना ।
उत्तर- (क) हाथ को हाथ न सूझना (घोर अंधकार होना) – बिजली के जाते ही हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा है।
(ख) हाथ साफ़ करना ( तलवार से काटना) – भारतीय सैनिकों ने शत्रुओं पर खूब हाथ साफ़ किए।
(ग) हाथ-पैर फूलना ( डर से घबरा जाना) – पुलिस को अपने घर आया देखकर मोहन के हाथ पैर फूल गए।
(घ) हाथों-हाथ लेना ( स्वागत करना) – बारात के पहुँचते ही लड़की वालों ने बारातियों को हाथों-हाथ लिया ।
(ङ) हाथ लगना (कार्य शुरू करना) – विवाह के समीप आते ही रमेश के घर वालों ने विवाह के कार्यों को हाथ लगा दिया।
प्रश्न 1. बात करते समय हाथ हमारी बात को प्रभावशाली ढंग से दूसरे तक पहुँचाते हैं।
| 'क्यों' पूछते हाथ | दुआ माँगते हाथ | मना करते हाथ |
|---|---|---|
| समझाते हाथ | बुलाते हाथ | आरोप लगाते हाथ |
| चेतावनी देते हाथ | नारा लगाते हाथ | सलाम करते हाथ |
इनका प्रयोग हम कब-कब करते हैं ? लिखिए |
उत्तर—’क्यों’ पूछते हाथ—जब हम किसी से प्रश्न करते हैं और क्रोध में पूछते हैं।
समझाते हाथ – कई बार अपनी बात को समझाने के लिए भी हम हाथ उठाते हैं।
चेतावनी देते हाथ – जब हम किसी सावधान करते हैं और उंगली के इशारे चेतावनी से देते हैं।
दुआ माँगते हाथ – जब हम परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।
बुलाते हाथ—जब हम किसी को अपनी ओर बुलाते हैं या किसी दूसरी तरफ भेजते हैं।
नारा लगाते हाथ—जब हम अपनी माँग मनवाने के लिए जोश प्रकट करते हैं।
मना करते हाथ—जब हम किसी को किसी बात के लिए मना करते हैं।
आरोप लगाते हाथ—जब हम किसी पर दोष लगाते हैं और हाथ के इशारे से अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश करते हैं ।
सलाम करते हाथ — जब हम किसी का अभिवादन करते हैं।
प्रश्न 2.. नीचे दिए शब्दों में हाथ शब्द छिपा है। इन शब्दों को पढ़कर बताओ कि हाथों का इनमें क्या काम है ?
| हाथ घड़ी | हथगोला | हत्था | हाथापाई |
|---|---|---|---|
| निहत्था | हथकंडा | हथियार | हथकरघा |
उत्तर – हाथघड़ी – हाथों में पहनी जाने वाली घड़ी।
निहत्था – ऐसे हाथ जो अस्त्र-शस्त्र से रहित हों ।
हथगोला – हाथ से फेंका जाने वाला गोला ।
हथकंडा – किसी के हाथों रचा गया षड्यंत्र ।
हत्था – हैंडपंप या किसी उपकरण का हत्था ।
हथियार – किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र ।
हाथापाई – हाथों से लड़ाई होना ।
हथकरघा – हाथों से चलने वाला करघा ।
प्रश्न 3. इस गीत के जिन शब्दों में नुक्ता लगा है, उन्हें छाँट कर लिखो । जो शब्द तुम्हारे लिए कुछ नए हैं, उनका वाक्यों में प्रयोग करो ।
उत्तर- फ़ौलादी — इन्सान के फ़ौलादी इरादे ही उसे सफलता प्रदान करते हैं।
मंज़िल – हमें अपनी मंज़िल की ओर निरंतर बढ़ते ही जाना है।
ज़र्रा – हम देश के लिए अपना ज़र्रा – ज़र्रा अर्पित कर देंगे।
प्रश्न 4. ‘कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना । ‘
इस वाक्य को हम देखें तो साहिर लुधियानवी इसमें चाह रहे हैं – (तुम ने ) कल गैरों की खातिर ( मेहनत ) की, आज (तुम) अपनी खातिर करना।
इस वाक्य में ‘तुम‘ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी‘ का प्रयोग कर्ता ‘तुम‘ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘ अपना‘ होता है। ) निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-
- मैं अपने आप ( या आप ) घर चली जाऊँगी।
- बब्बन अपना काम खुद करता है।
- सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।
अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो-
| अपने को | अपने से | अपना |
|---|---|---|
| अपने पर | अपने लिए | आपस में |
उत्तर- अपने को— वह अपने आप को पता नहीं क्या समझता है ?
अपने पर— मुझे कभी-कभी अपने पर गुस्सा आता है।
अपने से— मुझे अपने से कोई शिकायत नहीं है ।
अपने लिए— हमें अपने लिए नहीं देश के लिए जीना चाहिए ।
अपना— हमें अपना काम स्वयं करना चाहिए ।
आपस में— आपस में लड़ना बुरी बात है ।
Sathi Hath Badhana Class 6th Hindi Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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