कविता “भोर और बरखा” JKBOSE के कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का आठवाँ अध्याय है। यह कविता मीरा बाई द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Chapter 9 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप कविता “भोर और बरखा” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Neelkanth Class 7 Hindi Chapter 8 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Poem 9 Question Answers
Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Poem 9 Summary (सार)
कविता का सार
कविता ‘भोर और बरखा’ के अंतर्गत मीराबाई द्वारा रचित दो पद हैं।
पहला पद भोर (सुबह) का और दूसरा पद वर्षा ऋतु का सुंदर चित्रण करता है।
पहले पद में मीराबाई ब्रज की सुबह का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती हैं। वह कहती हैं कि भोर होते ही ब्रज में लोगों के घरों के द्वार खुल जाते हैं। गोपियाँ दही मथती हैं, जिससे उनके कंगनों की मधुर झंकार सुनाई देती है। अनेक देवता और मनुष्य श्री कृष्ण के दर्शन के लिए उनके द्वार पर खड़े रहते हैं। ग्वाल-बाल श्री कृष्ण की जय-जयकार करते हैं। श्री कृष्ण उठकर हाथ में माखन-रोटी लेकर गायों को चराने निकल जाते हैं। मीराबाई कहती हैं कि उनके प्रभु श्री कृष्ण ही हैं, जो अपनी शरण में आने वालों का उद्धार करते हैं।
दूसरे पद में मीराबाई ने वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। वह कहती हैं कि सावन के बादल घिर आते हैं और चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर वर्षा करने लगते हैं। बिजली चमकती है और ठंडी, सुहावनी हवा चलने लगती है। वर्षा की छोटी-छोटी बूँदें वातावरण को आनंदमय बना देती हैं। श्री कृष्ण के आने का समाचार पाकर मीरा का मन उमंग से भर उठता है। वह कहती हैं कि उनके प्रभु श्री कृष्ण ही हैं और वह उन्हीं के लिए मंगलगीत गाती हैं।
Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Poem 9 Explanation (सप्रसंग सरलार्थ)
सप्रसंग सरलार्थ
1. जागो बंसीवारे ललना!
जागो मोरे प्यारे !
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे
गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे
उठो लालजी ! भोर भयो है, सुर-नर ठाढे द्वारे
ग्वाल-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै
माखन-रोटी हाथ में लीनी, गउवन के रखवारे
मीरां के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै ॥
शब्दार्थ – रजनी = रात। भोर = सुबह। भयो = हो गई। किंवारे = किवाड़, द्वार। मथत = मथना। सुर-नर = देवता और मनुष्य। ठाढे = खड़े। कुलाहल = शोर। सबद = शब्द। उचारै = उच्चारण करना। लीनी = ले ली। गउवन = गायें। रखवारे = रखवाली करने वाले। सरण = शरण। तारै = तारना, उद्धार करना।
प्रसंग — प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्पा भाग 2 में संकलित मीराबाई द्वारा रचित पद ‘भोर और बरखा’ से ली गई हैं। प्रस्तुत पद में मीराबाई ने ब्रज की भोर का अत्यंत सुंदर और मनोहारी चित्रण किया है।
व्याख्या — मीराबाई कहती हैं कि हे प्रिय श्री कृष्ण! अब जाग जाइए। देखिए, रात बीत चुकी है और सुबह हो गई है। ब्रज की गोपियाँ दही मथकर मक्खन निकाल रही हैं और उनके कंगनों की मधुर झंकार चारों ओर सुनाई दे रही है। ब्रजवासियों के घरों के द्वार खुल चुके हैं। सभी देवता और मनुष्य आपके दर्शन के लिए द्वार पर खड़े हैं। ग्वाल-बाल इकट्ठे होकर शोर मचा रहे हैं और आपकी जय-जयकार कर रहे हैं।
तब श्री कृष्ण उठते हैं और अपने हाथ में मक्खन और रोटी लेकर गायों की रखवाली के लिए निकल पड़ते हैं। मीराबाई कहती हैं कि वह गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले चतुर श्री कृष्ण की दासी हैं। वे अपने शरण में आने वाले सभी भक्तों का उद्धार करते हैं।
2. बरस बदरिया सावन की
सावन की, मनभावन की
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुणी हरि आवन की
उमड़-घुमड़ चहुँदिस से आया, दामिन दमकै झर लावन की
नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे सीतल पवन सुहावन की
मीरा के प्रभु गिरधर नागर! आनंद मंगल गावन की।
शब्दार्थ – बरसे = बरसना। बदरिया = बादल। भावन = भाना, अच्छा लगना। उमग्यो = प्रसन्न होना। मनवा = मन। भनक = खबर। हरि = भगवान्, श्री कृष्ण। आवन = आना। चहुँ दिसि = चारों दिशाओं से। दामण = दामिनि, बिजली। दमक = चमक। लावन = लाना। मेहा = मेघ, बादल। सीतल = ठंडी। पवन = हवा। सुहावण = सुहावनी। नागर = चतुर। मंगल गावन = मंगल गीत।
प्रसंग — प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक पुष्पा भाग 2 में संकलित मीराबाई द्वारा रचित पद ‘भोर और बरखा’ से ली गई हैं। इस पद में मीराबाई ने वर्षा ऋतु के आगमन पर प्रभु श्री कृष्ण के आने की संभावना को व्यक्त किया है।
व्याख्या — मीरा कहती हैं कि सावन के बादल बरसने लगे हैं। सावन में बरसने वाले ये बादल मन को अत्यंत अच्छे लगते हैं। मीराबाई कहती हैं कि जब से उन्होंने सावन में श्री कृष्ण के आने का समाचार सुना है, तब से उनका मन उमंग और आनंद से भर गया है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर वर्षा करने आ गए हैं। बीच-बीच में बिजली भी चमक रही है। वर्षा की छोटी-छोटी बूँदें धरती पर गिर रही हैं और ठंडी, सुहावनी हवा चल रही है।
मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु चतुर श्री कृष्ण ही हैं। सावन में उनके आगमन का समाचार पाकर उनका हृदय आनंद से भर उठता है और वे उनके स्वागत में मंगलमय गीत गाने लगती हैं।
Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Poem Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कविता से
प्रश्न 1. ‘बंसीवारे ललना‘, ‘मोरे प्यारे‘, ‘लाल जी‘, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती है और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं?
उत्तर – यशोदा माता अपने पुत्र श्री कृष्ण को जगाने का प्रयास करती हैं। वे उन्हें स्नेहभरे शब्दों में ‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’ और ‘लाल जी’ कहकर पुकारती हैं। यशोदा माता उन्हें बताती हैं कि रात बीत चुकी है और सुबह हो गई है। ब्रज में घर-घर दही मथा जा रहा है और ग्वालिनों के कंगनों की झंकार सुनाई दे रही है। ग्वाल-बाल खेलते-कूदते शोर मचा रहे हैं और चारों ओर जय-जयकार हो रही है।
प्रश्न 2. नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए-
‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे। ‘
उत्तर – इस पंक्ति का आशय यह है कि यशोदा माता द्वारा प्रेमपूर्वक जगाए जाने के बाद गऊओं के रखवाले श्री कृष्ण अपने हाथ में खाने के लिए माखन और रोटी ले लेते हैं तथा गायों की देखभाल के लिए निकल पड़ते हैं।
प्रश्न 3. पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।
उत्तर- ब्रज की भोर अत्यंत चहल-पहल और आनंद से भरी होती है। सुबह होते ही घरों के द्वार खुल जाते हैं और लोग अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। गोपियाँ दही मथती हैं, जिससे उनके कंगनों की मधुर झंकार सुनाई देती है। ग्वाल-बाल खेलते-कूदते शोर मचाते हैं और जय-जयकार करते हैं। चारों ओर उल्लास और उत्साह का वातावरण रहता है।
प्रश्न 4. मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा?
उत्तर – सावन का महीना आते ही आकाश घने काले बादलों से भर जाता है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकने लगती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और ठंडी हवा चलने लगती है। इसी ऋतु में मीरा को श्री कृष्ण के आने की संभावना प्रतीत होती है। इसी कारण सावन का महीना उन्हें अत्यंत मनभावन लगने लगता है।
प्रश्न 5. पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर – सावन की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—
- आकाश घने काले बादलों से घिर जाता है।
- बादल उमड़-घुमड़कर वर्षा करते हैं।
- बिजली चमकती है।
- ठंडी और सुहावनी हवा चलती है।
- नन्हीं-नन्हीं वर्षा-बूँदें धरती को भिगो देती हैं।
इस प्रकार सावन का महीना अपनी प्राकृतिक सुंदरता से मन को मुग्ध कर देता है।
कविता से आगे
प्रश्न 1. मीरा भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर—भक्तिकाल के अन्य दो प्रसिद्ध कवि तथा उनकी रचनाएं निम्नलिखित हैं—
(1) सूरदास – सूरसागर
(2) तुलसीदास – रामचरितमानस ।
प्रश्न 2. सावन वर्षा ऋतु का महीना है, वर्षा ऋतु से संबंधित दो अन्य महीनों के नाम लिखिए ।
उत्तर – आषाढ़, भादों।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. सुबह जगने के समय आपको क्या अच्छा लगता है?
उत्तर – सुबह जगने के समय हमें बहुत अच्छा लगता है। पिछले दिन की थकान पूरी तरह मिट चुकी होती है। पूर्व दिशा की लाली, ठंडी-ठंडी हवा और पक्षियों की चहचहाहट हमें बहुत अच्छी लगती है।
प्रश्न 2. यदि आपको अपने छोटे भाई-बहन को जगाना पड़े तो कैसे जगाएंगे?
उत्तर—अपने छोटे भाई-बहन को हम प्यार से जगाएँगे। पहले उसे एक-दो सहलाएँगे, आवाज़ देंगे। यदि वह फिर भी नहीं जगा तो उसे उसकी किसी मनपसंद चीज़ लेकर देने का लालच देंगे।
प्रश्न 3. वर्षा में भीगना और खेलना आपको कैसा लगता है ?
उत्तर – वर्षा में भीगना और खेलना तो बहुत ही अच्छा लगता है।
प्रश्न 4. मीरा बाई ने सुबह का चित्र खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिखिए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह कैसी होती है ?
(क) गाँव गली या मुहल्ले में
(ख) रेलवे प्लेटफार्म पर
(ग) नदी या समुद्र के किनारे
(घ) पहाड़ों पर।
उत्तर- (क) हमारी गली या मुहल्ले में सुबह-सुबह अनेक लोग सैर कर रहे होते हैं। अखबार वाले अखबार घर-घर में डाल रहे होते हैं। दूर-दराज के क्षेत्र में नौकरी करने वाले तैयार होकर घर से निकलते हैं। बच्चे भी स्कूल जाने के लिए गली में से गुज़र रहे होते हैं। गाँवों से दूध लेकर साइकिल और मोटर साइकिल सवार आ जाते हैं।
(ख) रेलवे प्लेटफार्म पर सुबह-सुबह ही हलचल शुरू हो जाती है। चाय वालों की रेहड़ियों पर चाय पीने वालों की भीड़ होती है। कुछ लोग अखबार पढ़ रहे होते हैं। सभी लोग रेलवे प्लेटफार्म पर खड़े अपनी-अपनी गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। सबका ध्यान समय-समय पर होने वाली घोषणाओं की ओर होता है ।
(ग) सुबह-सवेरे नदी किनारे अनेक लोग सैर कर रहे होते हैं। चरवाहे अपनी गाय भैंसें लेकर चराने के लिए नदी के पास दूर तक फैली हरी घास पर दिखाई देने लगते हैं। ठंडी-ठंडी हवा और पक्षियों की चहचहाहट मन को अति सुंदर लगती है। बगुले नदी किनारे छोटे-छोटे जोहड़ों में एक टाँग पर खड़े मछलियों के शिकार में लीन दिखाई देते हैं।
(घ) सुबह के समय पहाड़ों पर सूर्य की फैलती किरणें ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे ऊँचे- ऊँचे काले पत्थरों पर पिघला हुआ सोना बिखर गया हो। छोटी-छोटी चिड़ियां चहकती हुई अति सुंदर लगती हैं। ठंडी-ठंडी हवा ठिठुरन पैदा करती है। कुछ लोग भारी ऊनी कपड़ों में लिपटे सैर करते दिखाई देते हैं। धुंध की अधिकता के कारण सड़कों पर भीड़ कम हो दिखाई देती है ।
भाषा की बात
प्रश्न 1. कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे‘ कहा गया है जिसका अर्थ है गौओं का पालन करनेवाले। इसके लिए एक शब्द दें।
उत्तर— ग्वाला।
प्रश्न 2. नीचे दो पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें से पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द दो बार आए हैं और दूसरी पंक्ति में भी दो बार। इन्हें पुनरुक्ति (पुनः उक्ति ) कहते हैं। पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और दूसरी पंक्ति में संज्ञा।
- ‘नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे‘
- ‘घर-घर खुले किंवारे‘।
- इस प्रकार के दो-दो उदाहरण खोज कर वाक्य में प्रयोग कीजिए और देखिए कि विशेषण तथा संज्ञा की पुनरुक्ति के अर्थ में क्या अंतर है?
जैसे – मीठी-मीठी बातें, फूल-फूल महके।
उत्तर- 1. मधुर-मधुर सुगंध- मंदिर में अगरबत्ती की मधुर-मधुर सुगंध सब तरफ फैली थी।
- मोटे-मोटे आम- रेहड़ी पर मोटे-मोटे आम बिक रहे थे।
- गली-गली में- होली के दिन गली-गली में गुलाल उड़ रहा था।
- पुस्तक – पुस्तक में- एक ही विषय की पुस्तक – पुस्तक में भेद होता है क्योंकि कोई अच्छी होती है तो कोई नहीं।
कुछ करने को
- कृष्ण को ‘गिरधर‘ क्यों कहा जाता है ? इसके पीछे कौन-सी कथा है ? पता कीजिए और कक्षा में बताइए।
उत्तर – श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी अँगुली पर उठा कर व्रजवासियों की रक्षा की थी। इसलिए उन्हें ‘गिरधर’ कहा जाता है।
Bhor Aur Barkha Class 7 Hindi Poem 9 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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