“स्वामी अमरनाथ की यात्रा” JKBOSE की कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का सोलहवां अध्याय है। यह पोस्ट Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter 14 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप पाठ “स्वामी अमरनाथ की यात्रा” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Poonch Aur Rajouri Ke Prasidh Tirathsthan Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answers
Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter Summary
पाठ का सार
कश्मीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अनेक प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के लिए भी जाना जाता है। इन तीर्थ स्थलों में स्वामी अमरनाथ जी का विशेष महत्त्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन अमरनाथ की पवित्र गुफा तक सामूहिक यात्रा की जाती है। अमरनाथ की गुफा दक्षिण-पूर्व कश्मीर में स्थित है और यह समुद्र तल से लगभग 4000 मीटर की ऊँचाई पर है।
यात्रा का आरंभ
अमरनाथ यात्रा श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से शुरू होती है। अखाड़े के महंत छड़ी-यात्रा का नेतृत्व करते हैं। यात्रा का मार्ग पहले से निश्चित होता है। सबसे पहले छड़ी-यात्रा श्रीनगर के दुर्गाना मंदिर में रुकती है। वहाँ पूजा-पाठ करने के बाद यात्रा बीजबिहाड़ा की ओर बढ़ती है। बीजबिहाड़ा यात्रा का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। इसके बाद यात्री अनंतनाग की ओर जाते हैं। अनंतनाग के प्रसिद्ध नागबल तीर्थ में छड़ी एक दिन विश्राम करती है। शाम को यात्रा मटन की ओर आगे बढ़ती है।
मार्तंड तीर्थ
मार्तंड तीर्थ अनंतनाग से लगभग आठ किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ एक बड़ा जलाशय है, जिसके बीच में भगवान शिव का एक छोटा-सा मंदिर बना हुआ है। मार्तंड से आगे बढ़कर छड़ी-यात्रा ऐश मुकाम पहुँचती है। लिदर की पहाड़ियों के बीच से नाला तेज गति से बहता है। इसके बाद यात्री भट्ट कूट गाँव के घने जंगलों से होकर गणेश बल तीर्थ के दर्शन करते हैं।
नूनबल में छड़ी-यात्रा का आधार शिविर बनाया जाता है, जहाँ यात्रियों का पंजीकरण होता है। इसके बाद यात्रा पहलगाँव के शिव मंदिर में रुकती है।
चंदनवाड़ी
पहलगाँव से आगे यात्रा का अगला प्रमुख पड़ाव चंदनवाड़ी है। यहाँ कई वर्षों से जमी हुई बर्फ यात्रा के लिए पुल का काम करती है। इसके बाद यात्री शेषनाग पहुँचते हैं। यहाँ का रास्ता बहुत कठिन और दुर्गम है, इसलिए यात्रियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ सकती है।
शेषनाग के एक ओर वावजन का पठार स्थित है। आगे महागुनस पहाड़ी का शिखर आता है, जो इस यात्रा मार्ग का सबसे ऊँचा स्थान है। इसके बाद यात्री पंचतरणी पहुँचते हैं, जो एक विशाल और समतल स्थान है।
कठिन चढ़ाई
पंचतरणी से आगे रास्ता संकरी पगडंडी में बदल जाता है। कुछ दूर चलने के बाद अमर गंगा दिखाई देती है। स्वामी अमरनाथ की पवित्र गुफा अमर गंगा से लगभग पैंतीस मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
गुफा के द्वार पर सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए खड़े रहते हैं और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाते हैं। उनके जयकारों से पूरी घाटी गूँज उठती है। श्रद्धालु स्वामी अमरनाथ जी को फूल और अन्य चढ़ावे अर्पित करते हैं तथा उनके दर्शन करके स्वयं को धन्य मानते हैं। दर्शन के बाद सभी यात्री अपने-अपने घरों की ओर लौट जाते हैं।
Swami Amarnath Ki Yatra Chapter Word Meanings
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अतिरिक्त | अलावा। |
| प्रतीक स्वरूप | चिह्न रूप। |
| आदेश | आज्ञा। |
| पर्वतीय | पहाड़ी। |
| हिमाच्छादित | बर्फ से ढका। |
| सर्वे-सर्वा | मुखिया, अग्रणी। |
| परिवर्तन | बदलाव, तबदीली। |
| नैवेद्य | प्रसाद। |
| भव्य | सुंदर। |
| अभिषेक | राज तिलक। |
| जलाशय | सरोवर। |
| निर्भय | निडर। |
| प्रस्थान | जाना। |
| जल-प्रपात | झरना। |
| आनंदित | प्रसन्न। |
| सुषमा | शोभा। |
| शिला प्रतिमा | पत्थर की मूर्ति। |
| अलौकिक | असाधारण, जो इस लोक में न दिखे। |
| कृतकृत्य | धन्य। |
Swami Amarnath Ki Yatra Chapter Paragraph Explanation
सप्रसंग व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
- कश्मीर प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त अनेक तीर्थस्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन स्थलों में स्वामी अमरनाथ जी का बड़ा महत्त्व है। कहते हैं कि भगवान शंकर ने कश्यप ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें प्रतीक स्वरूप दो छड़ियाँ प्रदान की थीं जिन्हें श्रावण पूर्णिमा के दिन अमरनाथ की गुफा तक सामूहिक का आदेश दिया था। तबसे कश्मीर वासियों के लिए छड़ी- यात्रा के साथ पहुँचाने यात्रा की परंपरा चल पड़ी जो अब एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक रीति के रूप में प्रचलित है।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित पाठ ‘स्वामी अमरनाथ की यात्रा’ से ली गई हैं। इनमें लेखक ने अमरनाथ यात्रा तथा छड़ी-यात्रा की धार्मिक परंपरा के बारे में बताया है।
व्याख्या – इन पंक्तियों में लेखक बताता है कि कश्मीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनेक तीर्थस्थलों के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इनमें स्वामी अमरनाथ जी का विशेष महत्त्व है। लोकमान्यता के अनुसार भगवान शंकर ने कश्यप ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दो छड़ियाँ प्रदान की थीं और श्रावण पूर्णिमा के दिन इन छड़ियों को लेकर अमरनाथ की गुफा तक सामूहिक रूप से पहुँचने का आदेश दिया था। तभी से कश्मीर में छड़ी-यात्रा की परंपरा शुरू हुई, जो आज एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक परंपरा बन गई है।
- तब भट्ट कूट गाँव के घने जंगलों से होते हुए यात्रा आगे बढ़ती है। यहाँ देवदार, चीड़ आदि के वृक्षों से सूर्य की किरणें छनकर आती हैं। इस मनोहर प्राकृतिक सुषमा को देखकर यात्री विशेष आनंद का अनुभव करते हैं। थोड़ी दूर चल कर गणेश बल तीर्थ के दर्शन होते हैं। इस स्थान पर लिदर नदी के बीच गणेश जी की सिंदूरपुती बड़ी शिला- प्रतिमा है। यात्री किनारे से ही गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित पाठ ‘स्वामी अमरनाथ की यात्रा’ से ली गई हैं। इनमें लेखक ने अमरनाथ यात्रा के दौरान आने वाले भट्ट कूट गाँव और गणेश बल तीर्थ का सुंदर वर्णन किया है।
व्याख्या – इन पंक्तियों में लेखक बताता है कि यात्रा भट्ट कूट गाँव के घने जंगलों से होकर आगे बढ़ती है। जंगलों में देवदार और चीड़ के पेड़ हैं, जिनके बीच से सूर्य की किरणें छनकर आती हैं। इस सुंदर प्राकृतिक दृश्य को देखकर यात्री बहुत प्रसन्न होते हैं। कुछ दूर आगे बढ़ने पर गणेश बल तीर्थ दिखाई देता है। यहाँ लिदर नदी के बीच भगवान गणेश की सिंदूर से रंगी हुई एक बड़ी शिला-प्रतिमा स्थित है। यात्री नदी के किनारे से ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं।
- चंदनवाड़ी से अगले पड़ाव शेषनाग तक का रास्ता सर्पिल आकार का है। ‘पिसू‘ नामक खड़ी पहाड़ी पर यह मार्ग बड़ा दुर्गम है और यात्रियों के सामने मानो एक चुनौती के रूप में खड़ा होता है। इस तीखी चढ़ाई पर सांस फूल जाती है और कई यात्रियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। इस पहाड़ी पर अशुद नाम की एक जड़ी-बूटी उगती है जिसकी महक से किसी-किसी यात्री पर मूर्च्छा छा जाती है।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित पाठ ‘स्वामी अमरनाथ की यात्रा’ से ली गई हैं। इनमें लेखक ने चंदनवाड़ी से शेषनाग तक के कठिन और दुर्गम मार्ग का वर्णन किया है।
व्याख्या – इन पंक्तियों में लेखक बताता है कि चंदनवाड़ी से शेषनाग तक का रास्ता बहुत घुमावदार और कठिन है। पिसू नामक खड़ी पहाड़ी पर चढ़ाई करना यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती होती है। इस तीखी चढ़ाई के कारण यात्रियों की साँस फूलने लगती है और कई लोगों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। इस पहाड़ी पर अशुद नामक एक जड़ी-बूटी भी उगती है। उसकी तेज महक के कारण कुछ यात्रियों को चक्कर आने लगते हैं और वे मूर्छित हो जाते हैं।
- पंचतरणी एक विशाल मैदान है जहाँ पाँच नदियाँ बहती हैं। इसलिए इस स्थान का नाम पंचतरणी रखा गया है। यह पौराणिक कथा के अनुसार इन पाँच नदियों का संबंध भगवान शंकर की पाँच अलकों में बहने वाली गंगा की धाराओं से है। ये धाराएँ भगवान शंकर की जटाओं से उस समय बह निकली थीं जब उन्होंने आकाश से उत्तरी गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित पाठ ‘स्वामी अमरनाथ की यात्रा’ से ली गई हैं। इनमें लेखक ने पंचतरणी के प्राकृतिक और पौराणिक महत्त्व का वर्णन किया है।
व्याख्या – इन पंक्तियों में लेखक बताता है कि पंचतरणी एक बहुत बड़ा और समतल मैदान है, जहाँ पाँच नदियाँ बहती हैं। इसी कारण इस स्थान का नाम पंचतरणी पड़ा। पौराणिक मान्यता के अनुसार इन पाँच नदियों का संबंध भगवान शंकर की पाँच जटाओं से निकलने वाली गंगा की धाराओं से है। कहा जाता है कि जब भगवान शंकर ने स्वर्ग से धरती पर आने वाली गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया, तब उनकी जटाओं से पाँच धाराएँ निकलकर बहने लगीं।
Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और विचार
प्रश्न 1. स्वामी अमनराथ की गुफ़ा श्रीनगर से कितनी दूरी पर स्थित है ?
उत्तर – स्वामी अमरनाथ की गुफ़ा श्रीनगर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
प्रश्न 2. अमरनाथ की गुफ़ा में किस चीज़ का शिवलिंग बनता है ?
उत्तर – अमरनाथ की गुफ़ा में बर्फ़ का शिवलिंग बनता है।
प्रश्न 3. अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर में कहाँ से आरंभ होती है ?
उत्तर – अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर के दशनामी अखाड़ा से श्रावण शुक्ला पंचमी को
शुरू होती है।
प्रश्न 4. छड़ीयात्रा की अगुवाई कौन करता है ?
उत्तर – छड़ीयात्रा की अगुवाई दशनामी अखाड़ा के महंत करते हैं। महंत ही यात्रा के सर्वेसर्वा होते हैं।
प्रश्न 5. पहलगाम-घाटी में कौन-सी पर्वतीय नदी बहती है ?
उत्तर – पहलगाम-घाटी में लिदर (लंबोदरी) नदी बहती है। इसके किनारे पर यात्रा के समय तंबुओं का एक नगर-सा बस जाता है।
प्रश्न 6. पहलगाम के सौंदर्य के बारे में पाँच वाक्य लिखें।
उत्तर- (क) पहलगाम में घरघराती लिदर नदी बहती है।
(ख) पहलगाम विश्व प्रसिद्ध स्वास्थ्यवर्द्धक स्थान है।
(ग) यहाँ लिदर नदी का तट अद्भुत शोभा से सज्जित होता है।
(घ) लिदर नदी पर तंबुओं का नगर बस जाता है।
(ङ) पहलगाम का शिव मंदिर दर्शनीय है।
प्रश्न 7. स्वामी अमरनाथ यात्रामार्ग के सबसे ऊँचे स्थल का नाम लिखें।
उत्तर – स्वामी अमरनाथ यात्रा के मार्ग का सबसे ऊँचा स्थल- ‘महा गुनस’ नामक
प्रश्न 8. पौराणिक कथा के अनुसार ‘पंचतरणी‘ की पाँच नदियों का संबंध किन पाँच धाराओं से माना गया है ?
उत्तर – ‘पंचतरणी’ एक विशाल समतल मैदान है। यहाँ पाँच नदियाँ बहती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार पाँच नदियों का संबंध भगवान् शंकर की पाँच अलकों में बहने वाली धाराओं से है। ये धाराएँ भगवान् शंकर की जटाओं से उस समय बह निकली थीं, जब उन्होंने आकाश में उतरी गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था।
प्रश्न 9. अमरनाथ की गुफ़ा में शिवलिंग के अतिरिक्त और कितने हिमखंड दिखते हैं और उन्हें किस रूप में पूजा जाता है ?
उत्तर- अमरनाथ की गुफ़ा में शिवलिंग के अतिरिक्त दो अन्य स्थानों पर हिमखंड दिखाई देते हैं। इन्हें पार्वती और गणेश के रूप में पूजा जाता है।
भाषा अध्ययन
- नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें:
हिमाच्छादित, विश्वप्रसिद्ध, महत्त्वपूर्ण, उद्घोष, तीर्थस्थान।
उत्तर- हिमाच्छादित – हिमालय पर्वत की हिमाच्छादित चोटियों की शोभा अत्यंत आकर्षक होती है।
विश्व प्रसिद्ध- ताजमहल विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
महत्त्वपूर्ण – रमन ने महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज की थी।
उद्घोष – वैष्णव देवी के दर्शनार्थी ‘जय माता की’ का उद्घोष करते हुए यात्रा-मार्ग चलते जाते हैं।
तीर्थस्थान – हरिद्वार हिंदुओं का सर्वमान्य तीर्थस्थान है।
- ‘घरघराना‘ और ‘हरहराना‘ शब्दों में नादसौंदर्य है अर्थात् ध्वनि के अनुसरण पर इनका निर्माण हुआ है। ऐसे ही तीन और शब्द लिखें।
उत्तर – चहचहाना, हिनहिनाना, खड़खड़ाना।
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. कश्मीर विश्व प्रसिद्ध क्यों है ?
(क) प्राकृतिक सौंदर्य
(ख) तीर्थस्थल
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर- (ग) (क) और (ख) दोनों।
प्रश्न 2. स्वामी अमरनाथ की गुफा श्रीनगर से कितनी दूरी पर स्थित है ?
(क) 200 किलोमीटर
(ख) 150 किलोमीटर
(ग) 100 किलोमीटर
(घ) 50 किलोमीटर।
उत्तर- (ग) 100 किलोमीटर ।
प्रश्न 3. अमरनाथ की गुफा में किस चीज़ का शिवलिंग बनता है ?
(क) पत्थर का
(ख) बर्फ का
(ग) मिट्टी का
(घ) रेत का।
उत्तर- (ख) बर्फ का ।
प्रश्न 4. श्रावण पूर्णिमा के दिन किस गुफा तक सामूहिक यात्रा के साथ पहुँचने का आदेश दिया था?
(क) अमरनाथ की गुफा
(ख) कश्यप ऋषि की गुफा
(ग) बाबा की गुफा
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर- (क) अमरनाथ की गुफा।
प्रश्न 5. यात्रा कहाँ से आगे बढ़ती है ?
(ग) भट्ट कूट गाँव से
(ख) भट्ट कूट गाँव के तालाब से
(क) भट्ट कूट गाँव के जंगलों से।
(घ) भट्ट कूट गाँव के मंदिर से।
उत्तर- (क) भट्ट कूट गाँव के जंगलों से
Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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