“हिमालय और हम“ JKBOSE की कक्षा 7 (Class 7th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का सत्रहवाँ अध्याय है। यह कविता (गोपाल सिंह ‘नेपाली’) द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter 17 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप कविता “हिमालय और हम“ के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter 14 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter 17 Question Answers
Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter Summary
कविता का सार
श्री गोपाल सिंह नेपाली द्वारा रचित ‘हिमालय और हम’ कविता में राष्ट्रीय भावना की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है। कवि ने भारत और हिमालय के गहरे तथा अटूट संबंध को प्रस्तुत किया है। हिमालय भारत के मस्तक का मुकुट है और उसकी छाया में रहने वाले लोग कभी किसी के सामने सिर नहीं झुकाते।
हिमालय पर सूर्योदय और सूर्यास्त की लालिमा अत्यंत सुंदर दिखाई देती है। इसकी विशालता और दृढ़ता भारतवासियों में भी साहस, आत्मविश्वास और अडिग रहने की भावना पैदा करती है। हिमालय का प्रत्येक मौसम अपने साथ कोई न कोई संदेश लेकर आता है और उसके चरणों को स्पर्श करने वाला व्यक्ति वेदों की गौरवपूर्ण परंपरा का अनुभव करता है।
हिमालय इतना मजबूत और अडिग है कि उसके रहते कोई भारत को चुनौती देने का साहस नहीं कर सकता। बादल हिमालय से टकराकर वर्षा करते हैं। इसी प्रकार जब-जब भारत की जनता पर संकट आया, तब-तब महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों ने जन्म लेकर देशवासियों में नई शक्ति और साहस का संचार किया। उनके नेतृत्व में संघर्ष की ऐसी आँधी उठी, जिसने अत्याचार और अन्याय का सामना किया।
कवि का कहना है कि हिमालय की छाया में बड़े से बड़ा तूफ़ान भी अपनी शक्ति खो देता है। इस प्रकार हिमालय केवल भारत की प्राकृतिक शोभा ही नहीं, बल्कि भारतीयों के साहस, स्वाभिमान, दृढ़ता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है।
Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter Paragraph Explanation
सप्रसंग सरलार्थ एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
- गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है
इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताल यही
पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही
अंबर में सिर, पाताल चरन
मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन वरन, मुख निरावरन
इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
शब्दार्थ – गिरिराज = पर्वतों का राजा। सकल = सारी। ताज = मुकुट। धरा = पृथ्वी। अंबर = आकाश। वरन-वरन = अनेक रंगों का। निरावरन = उघड़ा, खुला। मस्तक = माथा। नाता = रिश्ता, संबंध।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित श्री गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इसमें कवि ने हिमालय की विशालता, ऊँचाई और दृढ़ता का वर्णन करते हुए भारत और हिमालय के अटूट संबंध को व्यक्त किया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि भारत और हिमालय का संबंध बहुत गहरा और विशेष है। हिमालय की चोटी इतनी ऊँची है कि वह पूरी धरती के मुकुट के समान दिखाई देती है। धरती पर अनेक पर्वत होने के बावजूद हिमालय को पर्वतों का राजा कहा जाता है। उसका सिर आकाश को छूता है और उसके चरण पाताल तक फैले हुए प्रतीत होते हैं। कवि ने उसके मन को गंगा के बचपन के समान पवित्र बताया है। हिमालय का शरीर विभिन्न रंगों से सजा हुआ है, जबकि उसका मुख खुला और विशाल है। कवि के अनुसार, हिमालय की छाया में रहने वाले भारतीयों में भी उसके जैसा आत्मविश्वास और स्वाभिमान है। वे किसी के सामने अपना सिर नहीं झुकाते। इस प्रकार हिमालय भारत की शक्ति, गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है।
- अरुणोदय की पहली लाली, इसको ही चूम निखर जाती
फिर संध्या की अंतिम लाली, इस पर ही झूम बिखर जाती
इन शिखरों की माया ऐसी
जैसा प्रभात – संध्या वैसी
अमरों को फिर चिंता कैसी
इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
शब्दार्थ – अरुणोदय = सूर्य उगना। निखर = चमक। संध्या = शाम। अंतिम = आखिरी। शिखर = चोटी। प्रभात = सवेरा। गिरिराज = पर्वतों के राजा। उदय-अस्त: = निकलना – छिपना।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित श्री गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इसमें कवि ने हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता तथा उसके भारत से अटूट संबंध का वर्णन किया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि सूर्योदय के समय सूर्य की पहली लालिमा हिमालय की चोटियों को स्पर्श करके और अधिक सुंदर दिखाई देती है। इसी प्रकार सूर्यास्त के समय की अंतिम लालिमा भी हिमालय की चोटियों पर बिखर जाती है। हिमालय की चोटियों का आकर्षण इतना अद्भुत है कि वहाँ का प्रभात और संध्या दोनों ही मन को मोह लेते हैं। हिमालय की महानता और सुंदरता के कारण देवताओं को भी किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती। इस पवित्र धरती का प्रत्येक व्यक्ति जीवन के सुख-दुःख तथा जन्म-मरण को सहज भाव से स्वीकार करता है। कवि बताता है कि भारत और हिमालय का संबंध अत्यंत गहरा और अटूट है।
- हर संध्या को इसकी छाया सागर-सी लंबी होती है।
हर सुबह वही फिर गंगा की चादर-सी लंबी होती है।
इसकी छाया में रंग गहरा
है देश हरा, प्रदेश हरा
हर मौसम है, संदेश-भरा
इसका पद-तल छूने वाला, वेदों की गाथा गाता है
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
शब्दार्थ – संध्या = शाम। सागर = समुद्र। मौसम = ऋतु। गाथा = कहानी। पद = पैर।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित श्री गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इसमें कवि ने हिमालय की प्राकृतिक विशेषताओं तथा भारतीय संस्कृति और परंपरा में उसके महत्त्व को स्पष्ट किया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि शाम के समय हिमालय की छाया समुद्र के समान बहुत दूर तक फैल जाती है। सुबह के समय उसकी बर्फ से निकलने वाली गंगा की धारा सफेद चादर की तरह दूर तक फैली हुई दिखाई देती है। हिमालय की छाया में देश और प्रदेश हरे-भरे दिखाई देते हैं। यहाँ का प्रत्येक मौसम अपने साथ कोई न कोई विशेष संदेश लेकर आता है। हिमालय के चरणों को स्पर्श करने वाला व्यक्ति भारतीय संस्कृति और वेदों की महान परंपरा से परिचित होता है। इस प्रकार हिमालय केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, ज्ञान और गौरव का भी प्रतीक है। भारत और हिमालय का संबंध इसी कारण अटूट है।
- जैसा यह अटल, अडिग अविचल, वैसे ही हैं, भारतवासी
है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी
कोई क्या हमको ललकारे
हम कभी न हिंसा से हारे
दुःख देकर हमको क्या मारे
गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुःख में भी मुसकाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का, कुछ ऐसा ही नाता है।
शब्दार्थ – अटल = स्थिर, न टलने वाला। अविचल = न हिलने-जुलने वाला, सुस्थिर। अमर = न मरने वाला। अविनाशी = जिसका नाश न हो। ललकारे = चुनौती दें। हिंसा = मार-काट। गिरिराज = पर्वतों के राजा । नाता = संबंध।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित श्री गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इसमें कवि ने हिमालय की दृढ़ता और अडिगता की तुलना भारतवासियों के साहस और आत्मविश्वास से की है।
व्याख्या— कवि कहता है कि जिस प्रकार हिमालय अटल, अडिग और स्थिर है, उसी प्रकार भारतवासी भी अपने विचारों और संकल्पों पर दृढ़ रहते हैं। हिमालय को अमर और अविनाशी मानते हुए कवि भारतवासियों की शक्ति और अमर भावना को भी व्यक्त करता है। कोई भी शत्रु भारतवासियों को आसानी से चुनौती नहीं दे सकता। वे हिंसा और अत्याचार के सामने झुकने वाले नहीं हैं। गंगा का पवित्र जल पीने वाले भारतीय कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और प्रसन्नता बनाए रखते हैं। इस प्रकार हिमालय भारतवासियों के साहस, धैर्य, स्वाभिमान और दृढ़ता का प्रतीक बन जाता है।
- टकराते हैं इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं
तूफान चले जाते हैं तो, ठोकर खाकर सो जाते हैं।
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गांधी
तलवारों-सी टूटी आँधी
इसकी परछाई में तूफान, चिरागों से शरमाता है
गिरिराज हिमालय से भारत का, कुछ ऐसा ही नाता है।
शब्दार्थ – स्वयं = खुद। विपदा = मुसीबत। परछाईं = छाया। चिराग = दीपक। शरमाता = लज्जित होना।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘पुष्प भाग 2’ में संकलित श्री गोपाल सिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इसमें कवि ने हिमालय की शक्ति और भारतवासियों के संघर्षशील स्वभाव का वर्णन करते हुए दोनों के अटूट संबंध को प्रकट किया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि जब बादल हिमालय से टकराते हैं तो वे पानी बनकर बरसने लगते हैं। इसी प्रकार तेज़ तूफान भी हिमालय से टकराकर अपनी शक्ति खो देते हैं। कवि आगे कहता है कि जब-जब भारत की जनता पर संकट आया, तब-तब महात्मा गांधी जैसे महान नेता सामने आए और लोगों को सत्य, साहस तथा संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनके नेतृत्व में अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की ऐसी आँधी उठी, जिसने शत्रुओं को कमजोर कर दिया। हिमालय की छाया में बड़े से बड़ा तूफान भी छोटे-से चिराग के सामने स्वयं को कमजोर महसूस करता है। इस प्रकार हिमालय भारत की शक्ति, साहस, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है तथा भारत और हिमालय का संबंध अत्यंत गहरा और अटूट है।
Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और सराहना
प्रश्न 1. प्रभात और संध्या के समय हिमालय की शोभा कैसी हो जाती है ? निम्नांकित में से सही विकल्प पर निशान लगाएं-
(क) धूमिल
(ख) हरा-भरा
(ग) चांदी – सी सफ़ेद
(घ) सोने-सी लाल
(ङ) प्रभात और संध्या का जैसा रूप होता है, वैसा।
उत्तर—(ङ) प्रभात और संध्या का जैसा रूप होता है, वैसा।
प्रश्न 2. कविता के आधार पर हिमालय की विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर – हिमालय की विशेषताएँ-
(क) हिमालय पर्वत इस संपूर्ण धरती का ताज है।
(ख) इसकी छाया में जो भी आ जाता है, वह कभी माथा नहीं झुकाता है।
(ग) हिमालय की चोटियाँ प्रभात और संध्या में समान रूप से लाल रहती हैं।
(घ) हिमालय के रहते हुए कोई विदेशी भारत की ओर बुरी नज़र नहीं कर सकता।
(ङ) हिमालय अडिग है और इसने भारतवासियों को भी अडिग बना दिया है।
प्रश्न 3. हिमालय के मन को गंगा का बचपन क्यों कहा गया है?
उत्तर- गंगा हिमालय के गंगोत्री स्थान से निकलती हैं, जो एक बहुत ही छोटा-सा स्थान है। वह गोमुख प्रदेश हिमालय का मन है और गंगा का बचपन है क्योंकि गंगा वहाँ से निकल कर उत्तरोत्तर जवान होती जाती है।
प्रश्न 4. हिमालय की किस विशेषता से भारतवासी सुख-दुःख तथा हानि-लाभ में एक समान रहने की प्रेरणा पाते हैं ?
उत्तर- हिमालय की प्रभात और संध्या समान हैं। सूर्य का उदय-अस्त भारतवासी खुशी से अपनाता है। इससे उसे सुख-दुःख में समान रहने की प्रेरणा मिलती है।
प्रश्न 5. हिमालय में तूफ़ानों से टकराने की अद्भुत क्षमता है। कविता का यह भाव जिन पंक्तियों से प्रकट होता है, उन्हें लिखें।
उत्तर- टकराते हैं, इससे बादल तो खुद पानी हो जाते हैं,
तूफान चले आते हैं तो ठोकर खाकर सो जाते हैं।
प्रश्न 6. हिमालय के साथ भारतीयों के किन संबंधों का कवि ने वर्णन किया है ?
उत्तर – हिमालय के भारतीयों के साथ अटूट संबंध हैं; जैसे-.
(i) इसमें से भारत की पवित्र नदी गंगा निकलती है जिसका स्वच्छ जल दुःखों का निवारण करता है।
(ii) हिमालय से भारतीयों को अडिगता प्राप्त हुई, जो उसके साथ अटूट संबंध व्यक्त करती है।
(iii) वेदों का ज्ञान यहीं से हुआ। भारतीयों ने विपदाओं से टकराना सीखा है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें-
(क) अंबर में सिर, पाताल चरन
मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन, मुख निरावरण।
(ख) तूफ़ान चले आते हैं तो, ठोकर खाकर सो जाते हैं।
उत्तर – (क) हिमालय का सिर आसमान में है, यह बहुत ऊँचा है। गंगा एक छोटी-सी धारा के रूप में हिमालय से निकलती है, वही स्थान हिमालय का मन है। हिमालय का शरीर विविधताओं से भरा है, परंतु उसका मुख आवरणहीन है।
(ख) बड़े-बड़े तूफ़ान अथवा विदेशी शत्रु जब हिमालय की ओर कदम रखते हैं तो उन्हें मुंह की खानी पड़ती है। तूफ़ान हिमालय से टकरा कर चूर-चूर हो जाते हैं।
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. ‘गिरिराज‘ किसे कहा गया है ?
(क) राजा को
(ख) पर्वत को
(ग) जंगल को
(घ) हिमालय को।
उत्तर- (घ) हिमालय को।
प्रश्न 2. इस कविता के कवि का क्या नाम है ?
(क) हिमाशु जोशी
(ख) सुदर्शन
(ग) गोपाल सिंह
Swami Amarnath Ki Yatra Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
(घ) पूजा।
उत्तर- (ग) गोपाल सिंह।
प्रश्न 3. शब्द अर्थ: निरावरण-
(क) वरण
(ख) खुला हुआ
(ग) लाली
(घ) सूर्य का उगना ।
उत्तर- (ख) खुला हुआ।
प्रश्न 4. जो हिमालय की छाया में है उनमें क्या खास बात होती है ?
(क) वे महान होते हैं
(ख) वे बीमार होते हैं
(ग) वे किसी के सामने झुकते नहीं
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर— (ग) वे किसी के सामने झुकते नहीं।
प्रश्न 5. सकल का क्या अर्थ है ?
(क) संपूर्ण
(ख) धरती
(ग) खुला हुआ
(घ) सूर्य का उगना।
उत्तर- (क) संपूर्ण।
प्रश्न 6. वर्ण का क्या अर्थ है ?
(क) खुला हुआ
(ख) ग्रहण करने योग्य
(ग) रिश्ता
(घ) सूर्य का उगना।
उत्तर-(ख) ग्रहण करने योग्य।
प्रश्न 7. अविनाशी का क्या अर्थ है ?
(क) एक जगह स्थिर रहने वाला
(ख) नीचे का भाग
(ग) जिसका विनाश न हो
(घ) विपत्ति।
उत्तर- (ग) जिसका विनाश न हो।
प्रश्न 8. बादलों से टकराकर पानी बनने का क्या आशय है ?
(क) वर्षा होना
(ख) नदियाँ बहना
(ग) बाढ़ आना
(घ) आँसू बहना।
उत्तर-(क) वर्षा होना।
प्रश्न 9. गिरिराज हिमालय का किस देश से नाता है ?
(क) भारत
(ख) यू० ए० ई०
(ग) चीन
(घ) नेपाल।
उत्तर- (क) भारत।
प्रश्न 10. हिमालय को पर्वतराज कहने का क्या कारण है ?
(क) सबसे ऊँचा पर्वत
(ख) नया पर्वत
(ग) अलग पर्वत
(घ) सुंदर पर्वत।
उत्तर- (क) सबसे ऊँचा पर्वत।
Himalaya Aur Hum Class 7 Hindi Chapter 17 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply