कविता “भगवान के डाकिए” JKBOSE के कक्षा 8 (Class 8th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का आठवाँ अध्याय है। यह कविता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter 6 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में कविता”भगवान के डाकिए” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter 5 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter 6 Question Answers
Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter Summary
कविता का सार / प्रतिपाद्य
‘भगवान के डाकिए’ कविता के रचयिता श्री रामधारी सिंह दिनकर हैं। इस कविता में कवि ने बादलों और पक्षियों को भगवान के डाकिए कहा है। जिस प्रकार डाकिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश पहुँचाते हैं, उसी प्रकार बादल और पक्षी भी प्रकृति के संदेशों को एक देश से दूसरे देश तक पहुँचाते हैं।
बादल और पक्षी दोनों ही प्रकृति की अनमोल देन हैं। पक्षी अपनी उड़ान के माध्यम से और बादल हवा के साथ दूर-दूर तक जाते हैं। वे अपने साथ प्रकृति के अनेक संदेश लेकर चलते हैं। यद्यपि मनुष्य उनकी भाषा को समझ नहीं पाता और न ही उनके द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पढ़ सकता है, फिर भी पेड़-पौधे, पहाड़, पानी और हवाएँ उनके संदेशों को अपने-अपने रूप में प्रकट करते हैं।
एक देश की मिट्टी की सुगंध हवा और पक्षियों के माध्यम से दूसरे देश तक पहुँचती है। इसी प्रकार समुद्र या किसी स्थान की जलवाष्प बादल बनकर दूर देशों में जाती है और वहाँ वर्षा के रूप में बरसती है। इस प्रकार प्रकृति की वस्तुएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और आपस में संदेश तथा सहयोग का आदान-प्रदान करती हैं।
कवि इस कविता के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि प्रकृति में कोई भी वस्तु अकेली नहीं है। सभी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और उनके सहयोग से ही जीवन चलता है। बादल और पक्षी मनुष्य को मेल-जोल, सहयोग, सामंजस्य और एकता का संदेश देते हैं।
Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter Paragraph Explanation
- पक्षी और बादल,
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या
ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते हैं
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ
पेड़, पौधे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।
शब्दार्थ – महादेश = कोई बड़ा देश। बाँचना = बोलना, पढ़ना।
प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित ‘भगवान के डाकिए’ नामक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। इस कविता में कवि ने पक्षियों और बादलों को भगवान के डाकिए कहा है। कवि के अनुसार, ये प्रकृति के संदेशों को एक स्थान और देश से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि पक्षी और बादल भगवान के डाकिए के समान हैं। जिस प्रकार डाकिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश पहुँचाते हैं, उसी प्रकार पक्षी और बादल भी प्रकृति के संदेशों को एक देश से दूसरे देश तक पहुँचाते हैं। वे लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते रहते हैं।
मनुष्य इन प्राकृतिक डाकियों की भाषा को समझ नहीं पाता। इसलिए हमें यह पता नहीं चलता कि वे अपने साथ कौन से संदेश लेकर आए हैं। लेकिन पेड़-पौधे, पानी, पहाड़ और प्रकृति के अन्य तत्व इन संदेशों को अपने-अपने ढंग से समझ लेते हैं। इस प्रकार कवि बताना चाहते हैं कि प्रकृति के सभी तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और उनके बीच निरंतर संवाद चलता रहता है।
- हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है
शब्दार्थ – आँकना = समझना। सुगंध = खुशबू। सौरभ = सुगंधित, खुशबू। तैरते = उड़ते। पाँखों = पंखों। तिरता = उड़ता।
प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित ‘भगवान के डाकिए’ नामक कविता से लिया गया है। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। इस कविता के माध्यम से कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों के बीच होने वाले संबंध, आदान-प्रदान और सहयोग को समझाने का प्रयास किया है। इन पंक्तियों में कवि ने धरती की सुगंध, हवा, पक्षियों और जलवाष्प के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने का सुंदर वर्णन किया है।
व्याख्या – इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि हम मनुष्य प्रकृति के रहस्यमय संदेशों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। हम केवल इतना देख और समझ सकते हैं कि एक देश की धरती की सुगंध हवा के माध्यम से दूसरे देश तक पहुँचती है। यह सुगंधित हवा दूर-दूर तक फैलती है और ऐसा लगता है मानो पक्षियों के पंखों पर बैठकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा रही हो।
इसी प्रकार एक देश की जलवाष्प बादलों के रूप में दूसरे देश तक पहुँचती है और वहाँ वर्षा बनकर पानी के रूप में गिरती है। इस प्रकार प्रकृति की वस्तुएँ लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती रहती हैं और आपस में जुड़ी रहती हैं।
Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कविता से
प्रश्न 1. कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए इसलिए कहा है क्योंकि वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रकृति के संदेश पहुँचाते हैं। पक्षी दूर-दूर तक उड़कर जाते हैं और बादल भी हवा के साथ एक देश से दूसरे देश तक पहुँचते हैं। बादल अपने साथ जलवाष्प लेकर जाते हैं और दूसरे स्थान पर वर्षा के रूप में पानी बरसाते हैं। इसी प्रकार पक्षी अपने साथ प्रकृति की सुगंध और संदेश लेकर जाते हैं। इसलिए कवि ने उन्हें भगवान के डाकिए कहा है।
प्रश्न 2. पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को कौन-कौन पढ़ पाते हैं ? सोचकर लिखिए।
उत्तर— पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ पढ़ पाते हैं। वे प्रकृति की भाषा को समझते हैं और उसके संदेशों को अपने-अपने रूप में प्रकट करते हैं। मनुष्य प्रकृति के इन संदेशों को पूरी तरह समझ नहीं पाता।
प्रश्न 3. किन पंक्तियों का भाव है-
(क) पक्षी और बादल प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश एक देश से दूसरे देश को भेजते हैं।
उत्तर – जो एक महादेश से,
दूसरे महादेश को जाते हैं।
(ख) प्रकृति देश – देश में भेदभाव नहीं करती। एक देश से उठा बादल दूसरे देश में बरस जाता है।
उत्तर- और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।
प्रश्न 4. पक्षी और बादल की चिट्ठियों में पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं?
उत्तर— पक्षी और बादल की चिट्ठियों में पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ प्रेम, सद्भाव, सहयोग और एकता का संदेश पढ़ पाते हैं। वे समझते हैं कि प्रकृति किसी देश के साथ भेदभाव नहीं करती। जैसे एक देश से उठी जलवाष्प बादल बनकर दूसरे देश में वर्षा के रूप में गिरती है, उसी प्रकार प्रकृति सभी देशों को आपस में जोड़ती है।
प्रश्न 5. ‘एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है” कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— इस पंक्ति के माध्यम से कवि बताना चाहते हैं कि प्रकृति किसी देश की सीमाओं में बँधी नहीं है। एक देश की धरती की सुगंध हवा के माध्यम से दूसरे देश तक पहुँचती है। यहाँ सुगंध प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। कवि का संदेश है कि जिस प्रकार प्रकृति बिना किसी भेदभाव के अपनी खुशियाँ और सुगंध सभी तक पहुँचाती है, उसी प्रकार मनुष्यों को भी आपस में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना रखनी चाहिए।
पाठ से आगे
प्रश्न 1. पक्षी और बादल की चिट्टियों के आदान-प्रदान को आप किस दृष्टि से देख सकते हैं?
उत्तर— हम पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को एकता, प्रेम और भाईचारे की दृष्टि से देख सकते हैं। ये हमें सिखाते हैं कि संसार के सभी देश और लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पक्षी और बादल बिना किसी भेदभाव के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं और प्रकृति के संदेश पहुँचाते हैं। इनके माध्यम से हमें सहयोग, सद्भाव और आपसी मेल-जोल की प्रेरणा मिलती है।
प्रश्न 2. आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिट्ठियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए दस पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर— (1) पक्षी और बादल एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्राकृतिक संदेश पहुँचाते हैं।
(2) इंटरनेट के माध्यम से मनुष्य कुछ ही क्षणों में संदेश भेज सकता है।
(3) पक्षियों और बादलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने में समय लगता है।
(4) इंटरनेट के द्वारा संदेश बहुत दूर तक तुरंत पहुँचाया जा सकता है।
(5) पक्षी और बादल प्रकृति से जुड़े हुए हैं, जबकि इंटरनेट मनुष्य द्वारा विकसित तकनीक है।
(6) पक्षी और बादल प्रकृति के संदेशवाहक हैं, जबकि इंटरनेट आधुनिक संचार का साधन है।
(7) पक्षी और बादल अपनी भाषा में संदेश देते हैं, जिन्हें समझना मनुष्य के लिए कठिन है।
(8) इंटरनेट पर संदेश लिखकर, बोलकर या चित्रों के माध्यम से आसानी से भेजे जा सकते हैं।
(9) इंटरनेट ने संसार के अलग-अलग देशों के लोगों को बहुत करीब ला दिया है।
(10) इस प्रकार पक्षी और बादल प्राकृतिक डाकिए हैं, जबकि इंटरनेट आधुनिक युग का तेज संचार माध्यम है।
प्रश्न 3. ‘हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका’ क्या है? इस विषय पर दस वाक्य लिखिए।
उत्तर— (1) डाकिया अब डाक विभाग के साथ हमारे जीवन का भी एक अंग बन चुका है।
(2) वह हमारे जीवन में सुख-दुःख के क्षणों की जानकारी को निरंतर बनाए रखता है। (3) वह हमें हमारे मित्रों, सगे-संबंधियों से जोड़ने का काम करता है।
(4) डाकिया हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर परमार्थ करने की प्रेरणा देता है।
(5) उसकी दिनचर्या हमें समय पर काम करना सिखाती है।
(6) वह हमें अपने दुःखों को भुलाकर दूसरों को प्रसन्न करने और प्यार बाँटने को कहता है।
(7) उसके द्वारा लाए गए अच्छे संदेश हमें परिपक्व बनाते हैं।
(8) उसके द्वारा किया जाने वाले अथाह परिश्रम हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
(9) व्यक्तिगत भिन्नताओं को भुलाकर वह हमें सूचनाएँ-संदेश प्रदान करता है।
(10) उसकी यह अच्छाई हमारे जीवन का मार्ग-दर्शन करती है।
अनुमान और कल्पना
डाकिया, इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू डब्ल्यू0 डब्ल्यूo WWW ) तथा पक्षी और बादल । इन तीनों संवादवाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। लेख लिखने के लिये आप ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया‘ पाठ का सहयोग ले सकते हैं।
उत्तर— डाकिया भी हम सबकी तरह एक सामान्य मनुष्य है, लेकिन उसकी भूमिका विशेष है। आज के समय में मनुष्य धीरे-धीरे स्वार्थी और भौतिकवादी होता जा रहा है, जबकि डाकिया अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाता है। वह लोगों के संदेश और चिट्ठियाँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाकर उन्हें खुशी और उत्साह देता है। वह दूर रहने वाले परिवार के सदस्यों, मित्रों और रिश्तेदारों को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस प्रकार डाकिया हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर हमें अपनों से जुड़ने और खुशी के अवसर प्रदान करता है।
कंप्यूटर आधुनिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण देन है। आज इसका उपयोग लगभग हर क्षेत्र में किया जा रहा है। बैंक, रेलवे स्टेशन, विद्यालय, उद्योग, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और सेना जैसे अनेक स्थानों पर कंप्यूटर का महत्वपूर्ण योगदान है। यह लोगों के काम को आसान और तेज बनाता है। आज विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक और अन्य लोग भी कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं। कंप्यूटर के कारण सूचना और संचार के क्षेत्र में बहुत तेजी आई है। आधुनिक युग में देश के विकास के लिए कंप्यूटर और तकनीक का ज्ञान बहुत उपयोगी माना जाता है।
बादल और पक्षी भी संचार के अद्भुत प्राकृतिक साधन हैं। कवि ने इन्हें भगवान के प्राकृतिक डाकिए कहा है, क्योंकि ये एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रकृति के संदेश पहुँचाते हैं। पक्षी और बादल एक देश से दूसरे देश तक जाते हैं और अपने साथ प्रकृति की सुगंध, जलवाष्प तथा अन्य संदेश ले जाते हैं। मनुष्य इनकी भाषा को समझ नहीं पाता और न ही इनकी लाई हुई चिट्ठियों को पढ़ सकता है। लेकिन पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ इन प्राकृतिक संदेशों को अपने-अपने ढंग से समझ लेते हैं। इस प्रकार बादल और पक्षी प्रकृति के विभिन्न भागों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- ‘ भगवान के डाकिए‘ कविता के कवि …………. हैं ।
- पक्षी और बादल, ये …………. में …………. हैँ ।
- हम तो …………. नहीं पाते हैं।
- और वह …………. हवा में …………. हुए ।
- और एक देश का …………. दूसरे देश में …………. बनकर गिरता है।
उत्तर- 1. ‘ भगवान के डाकिए’ कविता के कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ हैं ।
- पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैँ ।
- हम तो समझ नहीं पाते हैं।
- और वह सौरभ हवा में तैरते हुए।
- और एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।
बहु-विकल्पीय प्रश्न
- ‘भगवान के डाकिए‘ कविता के कवि हैं-
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) रामदिवाकर दिनकर
(ग) रामनरेश दिनकर
(घ) राम रत्न दिनकर।
उत्तर- (क) रामधारी सिंह दिनकर
- पक्षी किस के डाकिए हैं?
(क) बादलों के
(ख) भगवान के
(ग) आकाश के
(घ) वर्षा के ।
उत्तर- (ख) भगवान के
- भगवान का डाकिया कौन है?
(क) आकाश
(ख) वायु
(ग) बादल
(घ) बिजली ।
उत्तर- (ग) बादल
- पक्षी एक महादेश से दूसरे किस स्थान पर जाते हैं?
(क) झील पर
(ख) वृक्ष पर
(ग) पर्वत पर
(घ) महादेश में।
उत्तर- (घ) महादेश में।
- एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है?
(क) संदेश
(ख) संदेह
(ग) सुगंध
(घ) सुरंग।
उत्तर- (ग) सुगंध
- एक देश की सुगंध दूसरे देश तक किसके द्वारा जाती है?
(क) बादलों के
(ख) वायु द्वारा
(ग) यान द्वारा
(घ) वृक्षों द्वारा।
उत्तर- (ख) वायु द्वारा
- पक्षियों के पंखों पर क्या तिरता है?
(क) सौरभ
(ख) गौरव
(ग) रंग
(घ) चमकीलापन।
उत्तर- (क) सौरभ
- एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है?
(क) हवा
(ख) भूकंप
(ग) आँधी
(घ) जल।
उत्तर- (घ) जल।
- ‘बाँचना‘ का अर्थ है?
(क) बचना
(ख) सोचना
(ग) पढ़ना
(घ) रोकना।
उत्तर- (ग) पढ़ना
- ‘सौरभ‘ क्या होती है?
(क) एक दवा
(ख) सुगंध
(ग) हिम
(घ) वाष्प।
उत्तर- (ख) सुगंध
Bhagwan Ke Dakiye Class 8 Chapter 6 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply