“चिट्ठियों की अनूठी दुनिया” JKBOSE के कक्षा 8 (Class 8th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का पांचवां अध्याय है। यह पाठ अरविंद कुमार सिंह द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter 5 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”चिट्ठियों की अनूठी दुनिया” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Diwano Ki Hasti Class 8 Chapter 4 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter 5 Question Answers
Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Chapter 5 Summary
‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ निबंध के लेखक अरविंद कुमार सिंह हैं। इस निबंध में लेखक ने पत्रों के महत्त्व, उपयोगिता और उनसे मिलने वाले लाभों का सरल एवं प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया है। मनुष्य अपने विचारों और भावनाओं को दूसरों तक पहुँचाना चाहता है। पास रहने वाले लोगों से हम बातचीत के माध्यम से अपने विचार व्यक्त कर लेते हैं, लेकिन दूर रहने वाले लोगों तक अपने विचार पहुँचाने का माध्यम पत्र है।
पत्रों की दुनिया बहुत अनोखी है। समय बदलने के बावजूद पत्रों का महत्त्व समाप्त नहीं हुआ है। फोन और एस.एम.एस. के माध्यम से संदेश तो पहुँचाया जा सकता है, लेकिन पत्र जिस प्रकार भावनाओं और यादों को सहेजकर रखते हैं, वैसा संतोष दूसरे साधन नहीं दे पाते। अलग-अलग भाषाओं में पत्रों के अलग-अलग नाम हैं, जैसे उर्दू में ‘खत’, संस्कृत में ‘पत्र’, कन्नड़ में ‘कागद’ तथा तमिल में ‘कडिद’। पत्रों का स्वरूप अलग हो सकता है, लेकिन उनमें छिपी भावनाएँ लगभग एक जैसी होती हैं।
पत्र केवल संदेश पहुँचाने का साधन ही नहीं, बल्कि इतिहास और साहित्य के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज भी हैं। महान लेखकों, कवियों, नेताओं, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों द्वारा लिखे गए पत्र आज हमारे लिए ज्ञान और प्रेरणा के स्रोत हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्र इसका प्रसिद्ध उदाहरण हैं। इसी प्रकार महात्मा गांधी के पत्र भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। गांधी जी पत्रों का उत्तर देने में बहुत तत्पर रहते थे और अधिकतर पत्रों के उत्तर स्वयं अपने हाथ से लिखते थे। उनके पत्रों के आधार पर अनेक पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं।
पत्रों का संबंध केवल प्रसिद्ध लोगों से ही नहीं है। सामान्य व्यक्ति के जीवन में भी पत्रों का विशेष महत्त्व है। सैनिक अपने परिवार से मिलने वाली चिट्ठियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। अनेक लोग अपने पूर्वजों की चिट्ठियों को आज भी सुरक्षित रखे हुए हैं, क्योंकि उनमें बीते समय की यादें और भावनाएँ जुड़ी होती हैं।
भारत में पत्र-व्यवहार की परंपरा बहुत पुरानी है। डाक विभाग ने पत्रों के माध्यम से देश के अलग-अलग क्षेत्रों और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। शहरों से लेकर गाँवों तक, महलों से लेकर झोंपड़ियों तक और दूर-दराज के पहाड़ी तथा दुर्गम क्षेत्रों तक डाक पहुँचती है। गरीब बस्तियों और गाँवों में चिट्ठी या मनीऑर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया लोगों के लिए किसी देवदूत से कम नहीं माना जाता।
इस प्रकार, पत्र केवल कागज पर लिखे शब्द नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य की भावनाओं, संबंधों, यादों, इतिहास और अनुभवों को सुरक्षित रखने वाले महत्त्वपूर्ण दस्तावेज हैं। आधुनिक संचार साधनों के युग में भी पत्रों की अपनी विशेष पहचान और महत्त्व बना हुआ है।
Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter Word Meaning
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अजीबो-गरीब | अनोखी, विचित्र। |
| संतोष | सब्र। |
| विवाद | झगड़े। |
| जड़ | मूल। |
| सहेज | संभाल। |
| दायरा | घेरा, क्षेत्र। |
| तलाशते | ढूँढ़ते। |
| लेखन कला | लिखने की कला। |
| तमाम | बहुत से। |
| अहमियत | खास, मुख्य। |
| हरकारे | दौड़ने वाले। |
| संवाद | बातें / बोल। |
| सिलसिला | परंपरा, परिपाटी। |
| प्रयास | कोशिश। |
| विकसित | फैला हुआ। |
| खास | मुख्य। |
| आवाजाही | आना-जाना। |
| देहाती | गाँव वाला। |
| बारीकी | नज़दीकी। |
| बेसब्री | बिना सब्र के । |
| इंतज़ार | प्रतीक्षा। |
| उत्सुकता | व्याकुलता। |
| मिसाल | जोड़। |
| दौर | समय। |
| घटा | कम। |
| इकलौता | एकमात्र। |
| पुरखों | पूर्वजों। |
| सँजोकर | संभालकर। |
| विरासत | माता-पिता से मिलने वाली चीजें। |
| उद्यमी | मेहनती। |
| अनुसंधान | खोज। |
| प्रेरणा | काम करने की शक्ति। |
| महान् हस्तियों | महान् व्यक्तियों। |
| धरोहर | बहुमूल्य चीजें। |
| संग्रहालय | पत्र आदि चीज़ों को रखने का स्थान। |
| अनूठा | अनोखा। |
| संकलन | चीज़ों का इकट्ठा होना। |
| काल | समय। |
| लेखा-जोखा | लिखा और पहले से तय हुआ। |
| गुडविल | अच्छा /साख, अच्छी साख। |
| हैसियत | औकात। |
| बरकरार | बनी हुई। |
| आलीशान | बहुत तगड़ी, बहुत सुंदर। |
| संग्राम | युद्ध, लड़ाई। |
| दिग्गज | बहुत बड़े लोग। |
| जवाब | उत्तर। |
| प्रशस्ति पत्र | वीरता के लिए दिया जाने वाला प्रमाण पत्र। |
| दस्तावेज़ | मूल्यवान कागज़ - पत्र। |
| मंगलमूर्ति | गणेश। |
| दिलचस्प | अनोखा। |
| प्रेरक | प्रेरणादायक। |
| मुस्तैद | चौकन्ने। |
| तथ्य | चीजें । |
| मनोदशा | मन की दशा। |
| दुर्गम | जहाँ जाना अत्यंत कठिन हो। |
| खतों | पत्रों। |
| देहात | गाँव। |
| देवदूत | देवताओं का संदेशवाहक। |
Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
पाठ से
प्रश्न 1. पत्र जैसा संतोष फ़ोन या एस० एम० एस० का संदेश क्यों नहीं दे सकता ?
उत्तर— पत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर बार-बार पढ़ा जा सकता है, जबकि फोन पर हुई बातचीत या एस० एम० एस० को सहेजकर रखना कठिन होता है। इसके अलावा कई गाँवों में आज भी दूरभाष की सुविधा नहीं है, जबकि डाकघर लगभग हर गाँव और कस्बे में उपलब्ध है। इसलिए पत्र जैसा संतोष फोन या एस० एम० एस० नहीं दे सकता।
प्रश्न 2. पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, जाबू, लेख, कडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।
उत्तर— उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ में कागद, तेलुगु में उत्तरम्, जाबू और लेख तथा तमिल में कडिद कहा जाता है।
प्रश्न 3. पत्र-लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए ? लिखिए।
उत्तर— पत्र-लेखन को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में पत्र-लेखन को शामिल किया गया। विश्व डाक संघ ने वर्ष 1972 से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताएँ शुरू कीं। डाक व्यवस्था में सुधार करके भी पत्र-लेखन को प्रोत्साहित किया गया।
प्रश्न 4. पत्र धरोहर हो सकते हैं, लेकिन एस० एम० एस० क्यों नहीं ? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।
उत्तर— पत्रों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए वे धरोहर बन जाते हैं। महान व्यक्तियों के पत्रों के अनेक संग्रह और पुस्तकें आज भी सुरक्षित हैं। इसके विपरीत एस० एम० एस० को लंबे समय तक संभालकर रखना कठिन है और गलती से वे मिट भी सकते हैं। इसलिए पत्र एस० एम० एस० की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण धरोहर हैं।
प्रश्न 5. क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफ़ोन तथा मोबाइल ले सकते हैं ?
उत्तर— बड़े शहरों में फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन और मोबाइल के कारण चिट्ठियों का प्रचलन कम हुआ है। फिर भी ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में आज भी पत्रों का महत्त्व बना हुआ है। भविष्य में आधुनिक संचार साधन चिट्ठियों का स्थान ले सकते हैं, लेकिन अभी पत्र पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
पाठ से आगे
प्रश्न 1. किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफाफे पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है ? पता कीजिए।
उत्तर— बिना टिकट पत्र भेजने पर प्राप्तकर्ता को पत्र लेते समय डाक-शुल्क और जुर्माना देना पड़ सकता है। यदि वह यह राशि न दे, तो पत्र उसे नहीं दिया जाएगा। इससे आवश्यक सूचना प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
प्रश्न 2. पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे ?
उत्तर— पिन कोड छह अंकों की संख्या होती है, जो किसी विशेष डाक क्षेत्र की पहचान बताती है। इसकी सहायता से डाक को सही स्थान तक आसानी से पहुँचाया जाता है। इसलिए पिन कोड भी संख्याओं में लिखा हुआ एक प्रकार का पता है।
प्रश्न 3. ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गाँधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गाँधी इंडिया’ पता लिखे आते थे ?
उत्तर— गाँधी जी देश के अलग-अलग स्थानों पर घूमते रहते थे और किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहते थे। उनकी प्रसिद्धि इतनी अधिक थी कि केवल ‘महात्मा गाँधी–इंडिया’ लिखने पर भी पत्र उन तक पहुँच जाते थे।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ की कविता ‘भगवान् के डाकिए‘ आपकी पाठ्य-पुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भांति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।
उत्तर— रामधारी सिंह दिनकर को हिंदी – साहित्य का प्रतिष्ठित साहित्यकार माना जाता है। बादल और पक्षी दो अलग शब्द हैं, लेकिन दोनों में बहुत-सी समानताएँ हैं। पक्षी और बादल दोनों ही भगवान के बनाए हुए डाकिए हैं। ये दोनों ही एक देश से दूसरे देश तक आने-जाने और प्राकृतिक संदेशों को लाने और ले जाने का काम करते हैं। यह अलग बात है कि हम बादलों और पक्षियों की बातों को समझ नहीं पाते हैं और न ही उनकी लाई चिट्टियों को पढ़ ही पाते हैं। लेकिन उनके द्वारा लाई चिट्ठियों को पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ अपने-अपने तरीके से हमें सुनाते हैं जैसे झरना और नदियाँ कल-कल करके अपने मधुर स्वर को चारों ओर गुँजाएमान कर देती हैं। हम लोग केवल इतना ही सोचते हैं कि एक देश की भूमि अन्य देश को अपनी सुगंध ही भेजती है। एक देश के पानी की वाष्प दूसरे देश में पानी बनकर बरस पड़ती है। विश्व के सभी देश और उनमें रहने वाले लोग बिना आपसी सहयोग के जीवन में गति और प्रगति नहीं कर सकते।
प्रश्न 2. संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संदेशवाहक बनाकर ‘मेघदूत‘ नाम का काव्य लिखा है। ‘मेघदूत‘ के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर— ‘मेघदूत’ संस्कृत के महान कवि कालिदास की प्रसिद्ध कृति है। इसमें एक यक्ष अपनी प्रिय से दूर हो जाता है। वह बादल को संदेशवाहक बनाकर अपनी प्रिया तक अपने मन की भावनाएँ पहुँचाता है।
प्रश्न 3. पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत है – ‘ जा-जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा‘ । इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बाँधकर निर्धारित स्थान तक भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेशवाहक बनाकर पत्र भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेंगे और उसमें क्या लिखना चाहेंगे ?
उत्तर— मैं यह पत्र अपने पिताजी को भेजना चाहूँगा, जो देश की सीमा पर तैनात हैं। मैं उन्हें घर-परिवार का हाल बताऊँगा, अपना परीक्षा परिणाम बताऊँगा और उनसे शीघ्र घर लौटने का आग्रह करूँगा।
प्रश्न 4. केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता ‘चिट्ठियाँ‘ को ध्यानपूर्वक पढ़िए और विचार कीजिए क्या यह कविता केवल लेटर बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है ? या रेल के डिब्बे में बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह है जिनके पास उनके गंतव्य तक का टिकट है ? पत्र के पते की तरह और क्या विद्यालय भी एक लेटर – बाक्स की भांति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रों में चले जाते हैं ? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श लिखिए।
उत्तर— रामदरश मिश्र द्वारा रचित कविता ‘चिट्ठियाँ’ आज के भौतिकवादी युग में मानव पर कटाक्ष है। कवि के द्वारा रचित कविता का आकार छोटा अवश्य है, लेकिन यह अपने संग अत्यंत गूढ़ार्थ लिए हुए हैं । कवि ने प्रत्यक्ष रूप से न कहकर परोक्ष रूप से आज के युग में लोगों की मनोवृत्ति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। इसीलिए कवि ने पत्रों की तुलना मानव से की है। लेटर बॉक्स में पत्र सबके साथ पड़े रहते हैं । भिन्न-भिन्न प्रकार के पत्र अपने अंतर में सुख- दुःख के भाव लिए अपनी बारी और लक्ष्य को ताकते रहते हैं, लेकिन कोई भी पत्र किसी अन्य पत्र से किसी प्रकार की कोई बात नहीं करता। ठीक इसी प्रकार आज का मानव भी मात्र अपनी ही सोचता है। उसे अन्य किसी से और कुछ लेना-देना नहीं है। वह नितांत स्वार्थी और लोभी बनता जा रहा है। आज का मानव तो मात्र अपने लक्ष्य को देखता है, चाहे उसे प्राप्त करने का पथ कोई भी क्यों न हो। आज के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में से पढ़कर आगे आने वाले छात्र-छात्राएँ भी पत्रों के समान हैं जो अपने लक्ष्य को पाने हेतु निरंतर आगे बढ़ते जा रहे हैं ।
भाषा की बात
प्रश्न 1. किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ नए शब्द बनते हैं, जैसे- प्रशस्ति पत्र, समाचार-पत्र । आप भी पत्र के योग से बननेवाले दस शब्द लिखिए ।
उत्तर- 1. आवेदन-पत्र
- निमंत्रण – पत्र
- शोक – पत्र
- सूचना पत्र
- प्रमाण-पत्र
- प्रेम – पत्र
- संपादकीय – पत्र
- पारिवारिक पत्र
- प्रार्थना पत्र
- शिकायती -पत्र।
- ‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार के साथ ‘इक’ प्रत्यय के योग से बना है। इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्दों को अपनी पाठ्यपुस्तक से खोजकर लिखिए।
उत्तर: – इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्द –
1. स्वाभाविक
2. साहित्यिक
3. व्यवसायिक
4. दैनिक
5. प्राकृतिक
6. जैविक
7. प्रारंभिक
8. पौराणिक
9. ऐतिहासिक
10.सांस्कृतिक - दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं;जैसे – रवीन्द्र = रवि + इन्द्र। इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं – दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण।
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं;जैसे – संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा।
इस प्रकार के कम से कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।
उत्तर:- 1. गुरूपदेश = गुरू + उपदेश (उ + उ)
2. संग्रहालय = संग्रह + आलय (अ + आ)
3. हिमालय = हिम + आलय (अ + आ)
4. भोजनालय = भोजन + आलय (अ + आ)
5. स्वेच्छा= सु + इच्छा( उ + इ)
6. अनुमति = अनु + मति (उ + अ)
7. रवीन्द्र = रवि + इंद्र (इ + इ)
8. विद्यालय = विद्या + आलय (आ + आ)
9. सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ)
10. सदा + एव = सदैव (आ + ए)
बहु-विकल्पीय प्रश्न
- पत्र किन्हें सहेज कर रखते हैं ?
(क) टिकटों को
(ख) कागज़ों को
(ग) यादों को
(घ) लिफ़ाफों को।
उत्तर- (ग) यादों को
- भारत में प्रतिदिन लगभग कितने करोड़ पत्र डाक में डाले जाते हैं ?
(क) तीन
(ख) साढ़े तीन
(ग) चार
(घ) साढ़े चार।
उत्तर- (घ) साढ़े चार।
- ‘अब टेलीफ़ोन, वायरलेस और आगे रेडार – दुनिया बदल रही है‘ – यह कथन किसका है ?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) जवाहर लाल नेहरू
(ग) इंदिरा गाँधी
(घ) लाल बहादुर शास्त्री।
उत्तर- (ख) जवाहर लाल नेहरू
- जवाहरलाल नेहरू ने यह कब कहा था कि हजारों सालों तक संचार का साधन केवल हरकारें रहे हैं?
(क) 1953 में
(ख) 1954 में
(ग) 1955 में
(घ) 1956 में।
उत्तर- (क) 1953 में
- स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र लेखन का विषय-पत्र का क्या विकसित करने के लिए शामिल किया गया?
(क) बिक्री
(ख) लोकप्रियता
(ग) संस्कृति
(घ) गति।
उत्तर- (ग) संस्कृति
- विश्व डाक संघ ने बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता किस वर्ष प्रारंभ की थी ?
(क) 1969
(ख) 1970
(ग) 1971
(घ) 1972।
उत्तर- (घ) 1972।
Chitthiyon Ki Anuthi Duniya Class 8 Chapter 5 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply