कविता “ध्वनि” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 3 हिंदी का पहला अध्याय है। यह कविता सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Dhwani Class 8 Hindi Chapter 1 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में आप कविता “ध्वनि” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। आप JKBOSE Class 8th Hindi पुष्प भाग 2 के अन्य पाठों के प्रशनोत्तर पाने के लिए यहाँ क्लिक करें। आइए शुरू करें:

Dhwani Class 8 Hindi Chapter 1 Question Answers
Dhwani Class 8 Chapter 1 Kavita Summary
कविता का सार
‘ध्वनि’ श्री सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कविता है। इस कविता में कवि ने मनुष्य के जीवन में वसंत के समान नए उत्साह, आशा और उमंग के आगमन का वर्णन किया है। कवि का कहना है कि अभी उसकी मृत्यु का समय नहीं आया है, क्योंकि उसके जीवन में लंबे समय के बाद खुशियों और नए उत्साह का संचार हुआ है।
कवि ने जीवन में अनेक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है, लेकिन वह उनसे निराश या हताश नहीं होगा। उसके हृदय में अभी भी जीवन जीने की प्रबल इच्छा है। वह अपने नए उत्साह और खुशियों को दूसरों के साथ बाँटना चाहता है। वह सोई हुई कलियों को अपने स्नेह से जगाकर उनमें नई चेतना और जीवन का संचार करना चाहता है।
कवि निराश और आलसी लोगों के जीवन में भी आशा तथा उत्साह का प्रकाश फैलाना चाहता है। वह उनके जीवन को खुशियों से भरने और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देने का संकल्प करता है। इसलिए वह बार-बार कहता है कि अभी उसका अंतिम समय नहीं आया है और अभी उसकी मृत्यु नहीं हो सकती।
Dhwani Class 8 Chapter 1 Kavita Paragraph Explanation
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या
- अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसंत-
अभी न होगा मेरा अंत।
शब्दार्थ- अंत = मृत्यु, समाप्ति। वन = हृदय में। मृदुल = कोमल, दयामय, सुकुमार। वसंत = खुशियाँ।
प्रसंग— प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित कविता ‘ध्वनि’ से ली गई हैं। इसके कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। इन पंक्तियों में कवि ने अपने जीवन में आए नए उत्साह, आशा और खुशियों के माध्यम से अपनी आशावादी भावना को व्यक्त किया है।
व्याख्या— कवि कहते हैं कि अभी उनके जीवन का अंत होने वाला नहीं है। उनके हृदय रूपी वन में अभी-अभी वसंत का आगमन हुआ है। यहाँ वसंत नए उत्साह, उमंग, आशा और खुशियों का प्रतीक है। लंबे समय तक कठिनाइयों और निराशाओं का सामना करने के बाद अब कवि के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इसलिए वे इतनी जल्दी हार मानने या जीवन का अंत स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। कवि का विश्वास है कि उन्हें अभी समाज और संसार के लिए बहुत से कार्य करने हैं। इसलिए उनका अंत अभी नहीं हो सकता।
- हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।
मैं ही अपना स्वप्न – मृदुल – कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर।
शब्दार्थ– पात = पत्ते । गात = शरीर । स्वप्न = सपना । मृदुल = कोमल, नरम, नाजुक । कर = हाथ। फेरूँगा = सहलाऊँगा । निद्रित = सोई हुई । प्रत्यूष = प्रभात । मनोहर = मन को जीत लेने वाला, सुंदर ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित कविता ‘ध्वनि’ से लिया गया है। इसके रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के सुंदर रूप के माध्यम से अपने मन में जागे नए उत्साह, आशाओं और उमंगों को व्यक्त किया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि उसके जीवन रूपी वन में नए-नए हरे पत्ते, कोमल डालियाँ और सुंदर कलियाँ दिखाई दे रही हैं। ये प्रकृति के दृश्य वास्तव में कवि के मन में उत्पन्न नई आशाओं, भावनाओं और प्रेरणाओं के प्रतीक हैं। कवि अपने कोमल सपनों और भावनाओं के सहारे सोई हुई कलियों को जगाना चाहता है। वह उनमें सुंदर प्रभात अर्थात् नई चेतना, आशा और उत्साह का संचार करना चाहता है। इसका अर्थ है कि कवि निराश और निष्क्रिय लोगों के जीवन में अपनी प्रेरणा और उत्साह के द्वारा नई ऊर्जा भरना चाहता है।
- पुष्प – पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,
द्वार दिखा दूँगा फिर उनको।
हैं मेरे वे जहाँ अनंत-
अभी न होगा मेरा अंत।
शब्दार्थ– पुष्प = फुल । तंद्रालस = तंद्रा या ऊँघ के कारण होने वाला आलस्य । लालसा = चाहत (इच्छा)। अमृत = जीवन प्रदान करने वाली, खुशियाँ। द्वार = दरवाज़ा। अंत = अंतिम समय। अनंत = असीम।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित कविता ‘ध्वनि’ से लिया गया है। इसके कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। इन पंक्तियों में कवि ने निराश और निष्क्रिय लोगों के जीवन में नए उत्साह, आशा और प्रसन्नता का संचार करने की भावना व्यक्त की है।
व्याख्या— कवि कहते हैं कि वे प्रत्येक फूल से तंद्रा के कारण उत्पन्न आलस्य और निष्क्रियता को दूर कर देंगे। वे अपने नए जीवन और उत्साह का अमृत दूसरों पर प्रसन्नतापूर्वक बरसाएँगे तथा उनके जीवन में नई चेतना और खुशियाँ भरेंगे। कवि निराश लोगों को ऐसे मार्ग की ओर ले जाना चाहते हैं जहाँ असीम आनंद और आशा है। वे अपनी ऊर्जा और जीवन को लोक-कल्याण के कार्यों में लगाना चाहते हैं। कवि के मन में अभी नया उत्साह और उमंग जागी है, इसलिए वे हार मानने को तैयार नहीं हैं। इसी कारण वे कहते हैं कि अभी उनका अंत नहीं होगा, क्योंकि उनके जीवन में अभी बहुत कुछ करने और दूसरों के जीवन में आशा जगाने की शक्ति बाकी है।
Dhwani Class 8 Chapter 1 Kavita Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कविता से
प्रश्न 1. कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
उत्तर— कवि को विश्वास है कि उसका अंत अभी नहीं होगा, क्योंकि उसके जीवन में अभी-अभी वसंत का आगमन हुआ है। वसंत यहाँ नए उत्साह, उमंग, आशा और खुशियों का प्रतीक है। लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करने के बाद उसके जीवन में नई ऊर्जा और प्रसन्नता आई है। उसके मन में अभी बहुत कुछ करने की इच्छा है। वह अपने जीवन को समाज और दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहता है। इसलिए उसे विश्वास है कि अभी उसके जीवन का अंत नहीं हो सकता।
प्रश्न 2. फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन सा प्रयास करता है?
उत्तर— फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि सबसे पहले उनके आलस्य और निष्क्रियता को दूर करना चाहता है। वह अपने नए जीवन और उत्साह के अमृत से उन्हें सींचना चाहता है। वह उन्हें नई चेतना और ऊर्जा प्रदान करके विकास का मार्ग दिखाना चाहता है। कवि का उद्देश्य फूलों के माध्यम से संसार में आशा, प्रसन्नता और नई ऊर्जा का संचार करना है।
प्रश्न 3. कवि पुष्पों की तंद्रा और आलस्य को दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है ?
उत्तर— कवि पुष्पों की तंद्रा और आलस्य को दूर करने के लिए उन्हें अपने कोमल सपनों और भावनाओं से जगाना चाहता है। वह सोई हुई कलियों पर अपने कोमल हाथ फेरकर उनमें नई चेतना उत्पन्न करना चाहता है। वह उनके जीवन में सुंदर प्रभात अर्थात् नई आशा, उत्साह और ऊर्जा का संचार करना चाहता है। इस प्रकार कवि उन्हें सक्रिय और प्रसन्न बनाना चाहता है।
कविता से आगे
प्रश्न 1. वसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है ? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर— भारत में छह प्रमुख ऋतुएँ आती हैं—ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर और वसंत। इनमें वसंत ऋतु को सबसे सुहावनी और मनभावन माना जाता है। इसके आगमन से प्रकृति में चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और नई उमंग दिखाई देने लगती है। मौसम न अधिक गर्म होता है और न अधिक ठंडा। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सभी प्रसन्न हो जाते हैं। इसी कारण वसंत को ‘ऋतुराज’ अर्थात् ऋतुओं का राजा कहा जाता है।
प्रश्न 2. वसंत ऋतु में आनेवाले त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए और किसी एक त्योहार पर निबंध लिखिए।
उत्तर— वसंत ऋतु में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें वसंत पंचमी और होली प्रमुख हैं। वसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्त्व होता है और लोग माँ सरस्वती की पूजा करते हैं। होली रंगों और उमंग का प्रसिद्ध त्योहार है। यह लोगों में प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव की भावना को बढ़ाता है।
होली का त्योहार
भूमिका— होली भारत का प्रमुख और आनंदमय त्योहार है। इसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है। यह वसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति में नई उमंग का प्रतीक है। इस अवसर पर लोग अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के साथ खुशी मनाते हैं।
आशा और उमंग का त्योहार— होली लोगों के जीवन में नई आशा, उत्साह और प्रसन्नता लेकर आती है। बच्चे, युवा और बड़े सभी इस त्योहार का आनंद लेते हैं। लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं तथा मिल-जुलकर खुशियाँ बाँटते हैं। इस दिन आपसी भेदभाव को भूलकर प्रेम और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया जाता है।
प्रकृति से संबंध— होली का त्योहार वसंत ऋतु में मनाया जाता है। इस समय पेड़-पौधों पर नए पत्ते और फूल आने लगते हैं तथा चारों ओर हरियाली दिखाई देती है। खेतों में फसलें पकने लगती हैं और किसान अपनी मेहनत का फल देखकर प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार होली प्रकृति के नए रूप और जीवन की नई उमंग से जुड़ी हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि— होली का संबंध भक्त प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका की कथा से भी माना जाता है। प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसके पिता हिरण्यकश्यप ने उसे भगवान की भक्ति से रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को दंड देने के लिए होलिका की सहायता ली। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहा और होलिका जल गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन की परंपरा मानी जाती है।
गुण-दोष— होली का उद्देश्य प्रेम, खुशी और भाईचारा बढ़ाना है, लेकिन कुछ लोग इस अवसर पर गंदे या हानिकारक रंगों का प्रयोग करते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं। इससे त्योहार की सुंदरता खराब होती है। हमें ऐसी बुराइयों से बचना चाहिए और होली को शालीनता तथा प्रेम से मनाना चाहिए।
उपसंहार— होली के अवसर पर हमें अपने मन से ईर्ष्या, द्वेष और भेदभाव को दूर करना चाहिए। हमें सभी के साथ प्रेम और भाईचारे से रहना चाहिए। सच्चे अर्थों में होली तभी सार्थक होगी, जब हम अपने मन की बुराइयों को दूर करके समाज में एकता और सद्भाव का संदेश फैलाएँगे।
प्रश्न 3. ” ऋतु परिवर्तन का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है” इस कथन की पुष्टि आप किन-किन बातों से कर सकते हैं ? लिखिए ।
उत्तर— ऋतु परिवर्तन का मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अलग-अलग ऋतुओं के अनुसार हमारे पहनावे, खान-पान और दैनिक जीवन में परिवर्तन आता है। सर्दियों में हम गर्म कपड़े पहनते हैं और ठंड से बचने के उपाय करते हैं, जबकि गर्मियों में हल्के कपड़े पहनते हैं और गर्मी से बचने का प्रयास करते हैं। वर्षा ऋतु में वातावरण ठंडा और हराभरा हो जाता है। वसंत ऋतु में मौसम सुहावना होने के कारण लोगों में घूमने-फिरने और विभिन्न गतिविधियों के प्रति उत्साह बढ़ जाता है। इस प्रकार प्रत्येक ऋतु अपने विशेष वातावरण और प्रभाव के कारण मानव जीवन को प्रभावित करती है।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है?
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं। होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूटे हैं।
उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़ने से हमें पता चलता है कि यह वसंत ऋतु है जिसमें फाल्गुन और होली का दृश्य दिखाया गया है। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी और आकर्षक है। इस ऋतु में आम के वृक्षों पर बौर आ जाता है।
प्रश्न 2. स्वप्न भरे कोमल-कोमल हाथों को कलियों पर फेरते हुए कवि कलियों को प्रभात के आने का संदेश देता है, उन्हें जगाना चाहता है और खुशी-खुशी अपने जीवन के अमृत से उन्हें सींचकर हरा-भरा करना चाहता है। फूलों-पौधों के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
उत्तर – कलियों और फलों के लिए हम बहुत कुछ करना चाहेंगे। फूल-पौधे हमारे वातावरण में संतुलन बनाने का काम करते हैं। इसलिए हम पेड़-पौधों का रख-रखाव करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएगा। ऐसा करने से प्राकृतिक सुंदरता के साथ प्रकृति और मानव का संबंध भी अटूट बनेगा। फूल-पौधे चारों ओर सुंदरता बढ़ाने का कार्य करते हैं। अतः हम उनकी देख-रेख करके अपना अमूल्य योगदान देंगे। उन्हें समय पर सींचेंगे और खाद देंगे।
प्रश्न 3. कवि अपनी कविता में एक कल्पनाशील कार्य की बात बता रहा है। अनुमान कीजिए और लिखिए कि उसके बताए कार्यों का अन्य किन-किन संदर्भों से संबंध जुड़ सकता है जैसे नन्हे-मुन्ने बालक को माँ जगा रही हो ……..।
उत्तर—कवि ने अपनी कविता में मानव-कल्याण की कल्पना की है। कविता में बताए गए तरह-तरह के कार्यों को वह मानव से जोड़ने की कोशिश करता है। वह अलसाई कलियों के माध्यम से निराश एवं हताश लोगों को अपने जीवन का अमृत प्रसन्नता बाँटना चाहता है। इसी प्रकार सोई हुई कलियों के माध्यम से कवि लोगों में जागृति लाना चाहता है। जैसे वह सोई कलियों पर हाथ सहलाकर उन्हें जगाने का प्रयत्न करता है ठीक उसी प्रकार उसने जीवन में निराश और हताश लोगों में जागृति और क्रांति का भाव पैदा करने का प्रयास किया है। यदि नन्हें-मुन्ने बालक को माँ जगाने के लिए उसे सहलाती है इसी प्रकार माली भी फूलों को अपने हाथ से सहलाता है, उन्हें सींचता और सँवारता है।
भाषा की बात
- “ हरे-हरे”, “पुष्प-पुष्प” में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है । कविता के ‘हरे-हरे ये पात’ वाक्यांश में ‘हरे-हरे’ शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ ‘पात’ शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है, जब कर्ता या विशेष्य एकवचन में हो और कर्म या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे – वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा । कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में भी प्रयोग होता है। ‘“तीन बेर खाती है।” जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द ‘बेर’ का दो अर्थों में प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया। इसे यमक अलंकार कहा जाता है। कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं, जैसे का मन/मनका ।
ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो । ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत्त शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए – बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों-रात, घड़ी घड़ी ।
उत्तर-
- बातों-बातों में — सीमा बातों-बातों में अपनी सारी बातें मुझे बता गई।
- रह-रह कर — मुझे रह-रह कर अपने बचपन की याद आती है।
- लाल-लाल — बगीचे में लाल-लाल फूल खिले हुए हैं।
- सुबह-सुबह — पिताजी सुबह-सुबह अखबार पढ़ते हैं।
- रातों-रात — वह अपनी मेहनत से रातों-रात प्रसिद्ध हो गया।
- घड़ी-घड़ी — माँ घड़ी-घड़ी दरवाज़े की ओर देख रही थी।
2. ‘कोमल गात, मृदुल वसंत, हरे-हरे ये पात’
विशेषण जिस संज्ञा (या सर्वनाम ) की विशेषता बताता है उसे विशेष्य कहते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में गात, वसंत और पात शब्द विशेष्य हैं, क्योंकि इनकी विशेषता (विशेषण) क्रमशः कोमल, मृदुल और हरे-हरे शब्दों से ज्ञात हो रही है।
हिंदी विशेषणों के सामान्यतः चार प्रकार माने गए हैं – गुणवाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण, सार्वनामिक विशेषण।
कुछ करने को
प्रश्न 1. वसंत पर अनेक सुंदर कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन तैयार कीजिए।
उत्तर – विद्यार्थी अपने विवेक तथा अपने अध्यापक एवं अध्यापिकाओं के सहयोग से वसंत पर कुछ अनूठी कविताओं का संकलन तैयार करें।
प्रश्न 2. शब्दकोश में ‘वसंत’ शब्द का अर्थ देखिए। शब्दकोष में शब्दों के अर्थों के अतिरिक्त बहुत-सी अलग तरह की जानकारियाँ भी मिल सकती हैं। उन्हें अपनी कॉपी में लिखिए।
उत्तर – वसंत-
(1) ऋतुओं में वह सर्वप्रधान ऋतु जो चैत और बैसाख के महीने में मानी जाती है।
(2) बहार का मौसम
(3) बसंत
(4) शीतला या चेचक नामक रोग
(5) संगीत के सात सुरों में से दूसरा
(6) अतिसार रोग
(7) संगीत में एक ताल
(8) फूलों का गुच्छा
(9) मसूरिका नामक रोग।
(10) संज्ञा पुल्लिंग शब्द, एक वचन।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- ‘ध्वनि’ कविता के कवि …….. हैं।
- मेरे वन में …………. वसंत।
- जगा एक …………… मनोहर।
- पुष्प – पुष्प से ………… लालसा खींच लूँगा मैं।
- अभी न होगा …………. अंत।
उत्तर –
- ‘ध्वनि’ कविता के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं।
- मेरे वन में मृदुल वसंत।
- जगा एक प्रत्यूष मनोहर।
- पुष्प – पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं।
- अभी न होगा मेरा अंत।
बहु-विकल्पीय प्रश्न
- ‘ ध्वनि’ कविता के कवि हैं-
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) राम नरेश त्रिपाठी।
उत्तर – (क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
- कवि के किस में अभी-अभी वसंत आया है?
(क) मन
(ख) वन
(ग) तन
(घ) धन।
उत्तर – (ख) वन
- कवि का अभी क्या नहीं होगा?
(क) कंत
(ख) संत
(ग) अंत
(घ) पंथ।
उत्तर – (ग) अंत
- हरे-भरे क्या हैं?
(क) वस्त्र
(ख) घास
(ग) उद्यान
(घ) पात।
उत्तर – (घ) पात।
- कलियाँ कैसी हैं?
(क) जागृत
(ख) तंद्रिल
(ग) निद्रित
(घ) मुद्रित।
उत्तर – (ग) निद्रित
- प्रत्यूष दिन का कौन-सा भाग होता है?
(क) रात
(ख) संध्या
(ग) दोपहर
(घ) प्रातः।
उत्तर – (घ) प्रातः।
- ‘द्वार दिखा दूँगा फिर उनको ‘ – में अलंकार है-
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) रूपक
(घ) यमक।
उत्तर – (ख) अनुप्रास
- ‘मृदुल’ का अर्थ है-
(क) कमल
(ख) कोयल
(ग) कोमल
(घ) काजल।
उत्तर – (ग) कोमल
- पुष्प – पुष्प से कवि तंद्रालस क्या खींचना चाहता है?
(क) लालसा
(ख) पराग
(ग) सुगंध
(घ) पंखुड़ियाँ।
उत्तर – (क) लालसा
- कलियों का गीत कैसा है?
(क) खुरदरा
(ख) कठोर
(ग) अनगढ़
(घ) कोमल।
उत्तर – (घ) कोमल।
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