“अपराजिता” JKBOSE के कक्षा 8 (Class 8th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का तीसरा अध्याय है। यह पाठ शिवानी द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Aprajita Class 8 Hindi Chapter 3 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”अपराजिता” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Laakh Ki Chudiyan Class 8 Chapter 2 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Aprajita Class 8 Hindi Chapter 3 Question Answers
Aprajita Class 8 Hindi Chapter 3 Summary
पाठ का सार/ प्रतिपाद्य
यह पाठ हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य साहस, धैर्य और निरंतर प्रयास के बल पर सफलता प्राप्त कर सकता है। चंद्रा बचपन में पोलियो की बीमारी से ग्रस्त हो गई थी, जिसके कारण उसके शरीर का निचला भाग बेजान हो गया था। उसकी माता श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी बेटी का इलाज करवाया। इलाज से चंद्रा के शरीर के ऊपरी भाग में कुछ हरकत आने लगी। उसकी माता ने उसे बैठने और पढ़ने-लिखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया।
चंद्रा बहुत बुद्धिमान और मेहनती थी। पाँच वर्ष की आयु में उसकी पढ़ाई शुरू हुई। उसकी माता ने स्वयं उसे पढ़ाया और बहुत कठिनाइयों के बावजूद बेंगलूर के माउंट कारमेल स्कूल में उसका दाखिला करवाया। स्कूल में व्हीलचेयर चलाने वाला कोई व्यक्ति न होने के कारण उसकी माता कई वर्षों तक स्वयं उसे कक्षा तक ले जाती और लाती रही। चंद्रा ने अपनी मेहनत और लगन से प्रत्येक परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया तथा कई स्वर्ण पदक जीते।
बाद में चंद्रा ने प्राणि-शास्त्र में एम.एससी. की और प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उसने पाँच वर्षों तक शोध कार्य किया। माता-पिता ने उसके लिए पेंसिलवेनिया से व्हीलचेयर मंगवाई, जिससे वह आसानी से शोधशाला में काम करने लगी। अपने परिश्रम के कारण उसने विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
चंद्रा पढ़ाई और शोध के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती थी तथा कढ़ाई-बुनाई में भी कुशल थी। वह अपने पैरों का काम अपने हाथों से करती थी। गर्ल गाइड में राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली वह पहली अपंग बालिका थी।
चंद्रा की सफलता में उसकी माता का बहुत बड़ा योगदान था। उनकी हिम्मत और त्याग के लिए उन्हें ‘वीर जननी’ का पुरस्कार मिला। उनका विश्वास था कि ईश्वर यदि एक रास्ता बंद करता है, तो दूसरा रास्ता अवश्य खोल देता है। चंद्रा का जीवन हमें सिखाता है कि शारीरिक कठिनाइयाँ सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय, साहस और लगातार प्रयास करता रहे।
Aprajita Class 8 Hindi Chapter 3 Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| विलक्षण | अनोखा। |
| रिक्तता | खालीपन। |
| अंतर्यामी | ईश्वर। |
| अकस्मात् | अचानक। |
| अकारण | बिना किसी कारण के। |
| दंडित | सज़ा दी। |
| विच्छिन्न | अलग। |
| वंचित | रहित। |
| विपत्ति | मुसीबत। |
| विधाता | सृष्टि की रचना करने वाला, ईश्वर। |
| अभिशप्त काया | शापयुक्त शरीर। |
| कठोरतम | बहुत सख्त। |
| नतमस्तक | सिर झुका कर। |
| प्रौढ़ा | ढलती उम्र की महिला। |
| निर्जीव | बेजान। |
| दक्षता | निपुणता। |
| तटस्थता | किसी के लेन-देन में न होना। |
| आवागमन | आना-जाना। |
| परिचय | जानकारी। |
| नियति | भाग्य। |
| आघात | चोट। |
| अमानवीय | जो मानवता के विरुद्ध हो। |
| उदात्त | ऊँचा, खुला। |
| प्रयास | कोशिश। |
| मानसिक | दिमागी। |
| निष्प्राण | वेजान। |
| देवांगना | स्वर्ग की देवी। |
| मांसपिंड | मांस का लोथड़ा। |
| उत्फुल्ल | खिला हुआ। |
| विषाद | दुःख। |
| बुद्धिदीप्त | अक्ल से चमकती हुई। |
| अदम्य | न टूटने वाला। |
| जिजीविषा | जीने की चाह। |
| महत्त्वाकांक्षा | बड़ी बड़ी चाह। |
| कंठगत | गले में आना। |
| नीरस | रसहीन, शुष्क। |
| प्रतिभा | विशेष बुद्धि। |
| निरंतर | लगातार। |
| अस्तित्व | सत्ता, हैसीयत। |
| पटुता | चतुराई। |
| सुदीर्घ | बहुत लंबी। |
| यातनाप्रद | दुःख देने वाली। |
| जननी | माता। |
| सहिष्णु | सहनशील। |
| साधना | तपस्या। |
| सुखद | सुख देने वाला। |
| अपंग | अंगहीन। |
| पक्षाघात | लकवा ; अधरंग (पैरालिसिस)। |
| सर्वांग | सारे अंग। |
| रोगमुक्त | बीमारी से छुटकारा। |
| कंठ अवरुद्ध | गला रुंधना। |
| भयानक | डरावना। |
| कष्टसाध्य | मुश्किल से सिद्ध होने वाला। |
| मेधावी | तेज़ बुद्धि वाला/वाली। |
| सरस्वती | विद्या की देवी। |
| जीह्वाग्र | जीह्वा का अगला भाग। |
| सहानुभूति | हमदर्दी। |
| परिक्रमा | चारों ओर घुमाना। |
| स्वर्ण पदक | सोने का तमगा। |
| प्रख्यात | प्रसिद्ध। |
| अर्जित | इकट्ठा किया। |
| निष्ठा | श्रद्धा। |
| सुगमता | आसानी। |
| क्षत-विक्षत | घायल। |
| आभामंडित | चमक से युक्त, शोभाशाली। |
| भव्यमुद्रा | सुंदर चेहरा। |
| पुरस्कार | इनाम। |
| रंचमात्र | ज़रा सा। |
| विशिष्ट | खास। |
| व्यथा | पीड़ा। |
Aprajita Class 8 Hindi Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और विचार
प्रश्न 1. अपराजिता शब्द का निम्नांकित में से कौन-सा अर्थ है ?
(क) जो विकलांग हो ।
(ख) जिसने हार न मानी हो ।
(ग) जो आपस का न हो।
(घ) जो दूसरों से भिन्न हो।
उत्तर- (ख) जिसने हार न मानी हो ।
प्रश्न 2. डॉ० चंद्रा को पहली बार देखकर लेखिका के मन में क्या-क्या भाव उठे ?
उत्तर— लेखिका ने जब डॉ. चंद्रा को कार से उतरकर बैसाखियों के सहारे व्हीलचेयर पर बैठते और फिर स्वयं व्हीलचेयर चलाकर घर के अंदर जाते देखा, तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। इतनी शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद चंद्रा का आत्मविश्वास और साहस देखकर लेखिका बहुत प्रभावित हुईं। उनके मन में निम्नलिखित भाव उत्पन्न हुए—
- चंद्रा जीवन में आने वाली कठिनाइयों और नियति के आघातों को बहुत धैर्य और साहस के साथ सहन करती है।
- उसका व्यक्तित्व किसी देवांगना से कम नहीं है।
- लखनऊ के निराश युवक को चंद्रा के जीवन से प्रेरणा लेकर निराशा छोड़कर साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
प्रश्न 3. लेखिका ने डॉ० चंद्रा को सामान्य जनों से किन बातों में भिन्न पाया ?
उत्तर— डॉ. चंद्रा शारीरिक रूप से अपंग थी और उसके शरीर का निचला भाग निष्क्रिय था। इसके बावजूद उसका जीवन के प्रति दृष्टिकोण सामान्य लोगों से अलग और प्रेरणादायक था। लेखिका ने उसमें निम्नलिखित विशेषताएँ देखीं—
- वह हमेशा प्रसन्न रहती थी और उसके चेहरे पर निराशा या उदासी दिखाई नहीं देती थी।
- उसमें अदम्य उत्साह और जीवन को पूरी तरह जीने की प्रबल इच्छा थी।
- उसके अंदर जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने की तीव्र इच्छा थी।
- कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रही।
प्रश्न 4. अपंग चंद्रा को डॉ० चंद्रा बनाने में उसकी माता का क्या योगदान है ?
उत्तर— डॉ. चंद्रा को एक सफल और शिक्षित वैज्ञानिक बनाने में उसकी माता श्रीमती टी. सुब्रह्मण्यम् का बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने अपनी बेटी की शारीरिक कठिनाइयों को उसकी प्रगति के मार्ग में बाधा नहीं बनने दिया।
- पाँच वर्ष की आयु में उन्होंने चंद्रा की शिक्षा शुरू करवाई और प्रारंभ में स्वयं उसे पढ़ाया-लिखाया।
- बहुत प्रयास करके उन्होंने चंद्रा का बेंगलूर के माउंट कारमेल स्कूल में दाखिला करवाया।
- स्कूल में चंद्रा को कक्षा तक पहुँचाने वाला कोई व्यक्ति न होने पर उसकी माता कई वर्षों तक स्वयं उसे व्हीलचेयर पर कक्षा में ले जाती रहीं।
- उन्होंने अपनी बेटी की उच्च शिक्षा में आने वाली सभी कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना किया और लगभग पच्चीस वर्षों तक उसके साथ लगातार संघर्ष किया।
- माता के त्याग, परिश्रम और प्रोत्साहन के कारण चंद्रा ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। इसलिए उसकी सफलता में उसकी माता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
प्रश्न 5. लखनऊ के युवक को डॉ० चंद्रा से क्या प्रेरणाएँ लेनी चाहिए ?
उत्तर— लखनऊ का युवक एक रेल दुर्घटना में अपना दायाँ हाथ खो देने के बाद निराश हो गया था। उसे डॉ. चंद्रा के जीवन से बहुत प्रेरणा लेनी चाहिए।
- उसे चंद्रा की तरह कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य बनाए रखना चाहिए।
- उसे समझना चाहिए कि शरीर का कोई अंग खो जाना जीवन की समाप्ति नहीं है।
- उसे निराशा छोड़कर जीवन में आगे बढ़ने की प्रबल इच्छा रखनी चाहिए।
- उसे मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
- उसे नियति के आघात को स्वीकार करके अपनी परिस्थितियों से संघर्ष करना और सफलता का नया मार्ग खोजना चाहिए।
प्रश्न 6. राणा साँगा कौन थे ? लेखिका को बरबस उनका स्मरण क्यों हो आया ?
उत्तर— राणा साँगा राजपूताना के महान और वीर योद्धा थे। युद्ध में उनके शरीर पर अनेक घाव लगे थे, फिर भी उन्होंने साहस और वीरता का साथ नहीं छोड़ा। वे अपनी वीरता और संघर्ष के लिए प्रसिद्ध थे।
डॉ. चंद्रा को देखकर लेखिका को राणा साँगा का स्मरण इसलिए हो आया क्योंकि चंद्रा भी अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन-संघर्ष में हार मानने को तैयार नहीं थी। उसके शरीर का निचला भाग निष्क्रिय था, फिर भी वह साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ रही थी। उसकी संघर्षशीलता और अदम्य साहस ने लेखिका को राणा साँगा की वीरता की याद दिला दी।
प्रश्न 7. चिकित्सा ने जो खोया, वह विज्ञान ने कैसे पाया ?
उत्तर— पोलियो के कारण चंद्रा के शरीर का निचला भाग निष्क्रिय हो गया था। वह डॉक्टर बनकर चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा करना चाहती थी, लेकिन अपनी शारीरिक स्थिति के कारण वह शल्य-चिकित्सक नहीं बन सकती थी। इसलिए उसने विज्ञान के क्षेत्र को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।
चंद्रा ने विज्ञान की पढ़ाई में बहुत मेहनत की और प्रत्येक परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उसने प्राणि-शास्त्र में एम.एससी. की और बाद में शोध कार्य करके विज्ञान में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। इस प्रकार वह डॉक्टर तो नहीं बन सकी, लेकिन एक योग्य वैज्ञानिक बनकर विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने लगी। इसलिए कहा गया है कि चिकित्सा ने जिस प्रतिभा को खो दिया, विज्ञान ने उसी प्रतिभा को प्राप्त कर लिया।
प्रश्न 8. ‘वीर जननी‘ का पुरस्कार किसको मिला और क्यों मिला?
उत्तर— ‘वीर जननी’ का पुरस्कार डॉ० चंद्रा की माता श्रीमती शारदा सुब्रह्मण्यम् को मिला क्योंकि वह पच्चीस साल तक चंद्रा को शिक्षा क्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने के लिए कठिन साधना करती रही। चंद्रा अपंग थी। उसका धड़ बेजान था। उसकी माता ही उसे व्हीलचेयर पर क्लासरूम में घुमाती थी। वही उसे कार पर बिठाकर ले जाती थी। चंद्रा के एक उच्चकोटि का वैज्ञानिक बनने में उसकी माता का ही हाथ है।
प्रश्न 9. पाठ के आधार पर निम्नांकित वाक्य का स्पष्टीकरण करें-
उत्तर— इस कथन का अर्थ है कि जीवन में यदि कोई कठिनाई या विपत्ति आती है, तो उससे निराश होकर हमें प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए। ईश्वर यदि हमारे सामने किसी एक मार्ग को बंद करता है, तो हमारे लिए सफलता का कोई दूसरा मार्ग भी अवश्य खोलता है।
चंद्रा शारीरिक रूप से अपंग थी, लेकिन उसने अपनी कमजोरी को अपनी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उसने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में मेहनत करके अपनी अलग पहचान बनाई। इसलिए हमें भी कठिन परिस्थितियों में निराश होने के बजाय साहस, धैर्य और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
भाषा=अध्ययन
प्रश्न 1. ‘अपराजिता ‘ शब्द को निम्नांकित में से कौन-सी व्युत्पत्ति सही है ?
(क) अपरा + जिता
(ख) अ + पर + अ + जित + आ
(ग) अ + पराजित + आ
(घ ) अपर + अजिता।
उत्तर— (ग) अ + पराजित + आ ।
प्रश्न 2. डॉ० चंद्रा के लिए प्रयुक्त विशेषणों का चयन करें।
उत्तर – डॉ० चंद्रा के लिए प्रयुक्त विशेषण इस प्रकार हैं- अभिशप्त काया, धैर्य, साहस, बित्तेभर, निष्प्राण, मांसपिंड, उत्कट, अद्भुत, मेधावी, हँसमुख, भव्य मुद्रा आदि ।
प्रश्न 3. चुने गए विशेषणों की सहायता से डॉ० चंद्रा का शब्दचित्र अंकित करें।
उत्तर— डॉ. चंद्रा बचपन में पोलियो के कारण अपंग हो गई थी और उसके शरीर का निचला भाग निष्प्राण था। इसके बावजूद वह अत्यंत मेधावी, हँसमुख और उत्साही थी। उसकी अभिशप्त काया उसके दृढ़ निश्चय और प्रतिभा के सामने कभी बाधा नहीं बनी। वह जीवन में आगे बढ़ने की उत्कट इच्छा रखती थी। उसने अपनी मेहनत और अद्भुत प्रतिभा के बल पर पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया तथा विज्ञान में पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। इस प्रकार डॉ. चंद्रा कठिन परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने वाली प्रेरणादायक महिला थीं।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- अपराजिता पाठ ……….. द्वारा रचित है।
- धीरे-धीरे मेरा उनसे ……….. हुआ ।
- आजकल वह ……….. मद्रास में काम कर रही है।
- 1976 में जब ……….. को डॉक्टरेट मिली ……….. में।
- ईश्वर सब ……….. एक साथ ……….. नहीं करता।
उत्तर-
- अपराजिता पाठ शिवानी द्वारा रचित है।
- धीरे-धीरे मेरा उनसे परिचय हुआ ।
- आजकल वह आई० आई० टी० मद्रास में काम कर रही है।
- 1976 में जब चंद्रा को डॉक्टरेट मिली माइक्रोबायोलॉजी में।
- ईश्वर सब द्वार एक साथ बंद नहीं करता।
बहु-विकल्पीय प्रश्न
- कभी-कभी विधाता हमें किससे मिलाता है ?
(क) कठोरतम व्यक्तित्व से
(ख) मेधावी व्यक्तित्व से
(ग) विलक्षण व्यक्तित्व से
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर- (ग) विलक्षण व्यक्तित्व से
- विधाता को दोषी कब ठहराया जाता है ?
(क) खुशी में
(ख) विपत्ति में
(ग) बुढ़ापे में
(घ) (क) और (ग) दोनों ही।
उत्तर- (ख) विपत्ति में
- अपराजिता पाठ के अनुसार, डॉक्टर चंद्रा को माइक्रो बायोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि कब मिली?
(क) 1975
(ख) 1976
(ग) 1977
(घ) 1978.
उत्तर- (ख) 1976
- विधाता ने अभिशप्त काया को कैसा दण्ड दिया ?
(क) कठोरतम
(ख) सहिष्णु
(ग) सुखद
(घ) भयानक।
उत्तर- (क) कठोरतम
- अपराजिता पाठ में डॉक्टर चंद्रा क्या बनना चाहती है ?
(क) अध्यापिका
(ख) डॉक्टर
(ग) गायक
(घ) वकील।
उत्तर- (ख) डॉक्टर
- अपराजिता पाठ के आधार पर वीर जननी का पुरस्कार किसे मिला ?
(क) जे० सी० वेंगलूर
(ख) डॉक्टर चंद्रा
(ग) राणा साँगा
(घ) सुब्रह्मण्यम
उत्तर- (घ) सुब्रह्मण्यम
- अपराजिता शीर्षक पाठ के रचयिता कौन हैं ?
(क) शिवानी
(ख) कामतानाथ
(ग) विभागीय
(घ) अरविंद कुमार।
उत्तर- (क) शिवानी
- लेखिका ने डॉ० चंद्रा को सामान्य जनों से किन बातों में भिन्न पाया ?
(क) हमेशा प्रसन्न रहना
(ग) उदम्य उत्साह
(ख) चेहरे पर विषाद की रेखा न लाना
(घ) उपरोक्त सभी विकल्प।
उत्तर- (घ) उपरोक्त सभी विकल्प।
Aprajita Class 8 Hindi Chapter 3 Question Answersके बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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