“जहाँ पहिया है “ JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का बारहवां अध्याय है। यह पाठ पी० साईनाथ ‘अनु’ द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter 12 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”जहाँ पहिया है” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Jab Cinema Ne Bolna Seekha Class 8 Chapter 11 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter 12 Question Answers
Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter Summary
पाठ का सार / प्रतिपाद्य
‘जहाँ पहिया है’ पाठ के लेखक पी० साईनाथ हैं। इसमें लेखक ने तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में साइकिल के कारण आए परिवर्तन का वर्णन किया है। पुडुकोट्टई एक पिछड़ा और गरीब जिला है, लेकिन वहाँ की महिलाओं ने साइकिल को अपनी आज़ादी, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना दिया।
पुडुकोट्टई की ग्रामीण महिलाओं ने साइकिल चलाना सीखकर अपने जीवन में एक नया बदलाव लाया। इनमें बड़ी संख्या नवसाक्षर महिलाओं की थी। लगभग सत्तर हजार महिलाओं ने साइकिल से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया। साइकिल सीखने के लिए अनेक प्रशिक्षण शिविर भी लगाए गए। मुस्लिम लड़कियाँ भी सड़कों पर स्वतंत्र रूप से साइकिल चलाने लगीं। जमीला बीवी ने बताया कि साइकिल चलाने से उन्हें कहीं आने-जाने के लिए बस का इंतज़ार नहीं करना पड़ता और वे स्वयं अपने काम कर सकती हैं।
फातिमा, जो एक अध्यापिका है, भी साइकिल को अपनी स्वतंत्रता का साधन मानती है। उसके अनुसार साइकिल चलाने से किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। धीरे-धीरे खदानों, स्कूलों, होटलों, आँगनबाड़ी और अन्य व्यवसायों में काम करने वाली महिलाएँ भी साइकिल का उपयोग करने लगीं। साइकिल ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और पुरुषों पर उनकी निर्भरता कम की।
शुरुआत में महिलाओं के साइकिल चलाने का कुछ लोगों ने विरोध किया और उन पर टिप्पणियाँ भी की गईं, लेकिन महिलाओं ने इसकी परवाह नहीं की। बाद में साइकिल चलाना सामाजिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। गाँवों में महिलाएँ समूह बनाकर साइकिल चलाना सीखती थीं और उत्साह बढ़ाने के लिए गीत भी गाती थीं।
1992 के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बाद पुडुकोट्टई में साइकिल आंदोलन ने तेजी पकड़ी। साइकिलों की बिक्री में भी बहुत वृद्धि हुई। मनोरमनी के अनुसार साइकिल से महिलाओं की गतिशीलता बढ़ी, उनका समय बचा और वे अपनी वस्तुएँ अधिक दूर तक बेचने जाने लगीं। इससे उनकी आय में भी वृद्धि हुई।
इस प्रकार साइकिल केवल आने-जाने का साधन नहीं रही, बल्कि पुडुकोट्टई की महिलाओं के लिए स्वतंत्रता, आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक प्रगति का माध्यम बन गई। लेखक ने इस पाठ के माध्यम से बताया है कि एक साधारण-सी साइकिल भी ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन ला सकती है।
Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नवसाक्षर | अभी-अभी पढ़कर निकले लोग। |
| जकड़े हुए | फंसे हुए। |
| अभिव्यक्त | स्पष्ट करना। |
| सार्वजनिक | सभी के लिए। |
| प्रशिक्षण शिविर | कुछ सीखने का स्थान। |
| रूढ़िवादी | पुराने विचार लिए हुए। |
| फब्तियां | बुरी बातें/ ताने। |
| हैसियत | सामर्थ्य। |
| बेश कीमती | बहुमूल्य। |
| अगुवा | नेतृत्व करने वाला वाली। |
| पृष्ठभूमि | अतीत या पहले से जुड़ा हुआ। |
| प्रहार | आक्रमण। |
| आवेग | तेज़ी से आती हुई। |
| रोजमर्रा | प्रतिदिन। |
| हक्का-बक्का | हैरान। |
| विनम्र | सरल स्वभाव। |
| कर विभाग | टैक्स लेने वाला विभाग। |
| चिलचिलाती धूप | अत्यधिक तेज़ धूप। |
| खदानें | खानें। |
| उत्पाद | वस्तुएं/चीजें। |
| उत्पादक | वस्तु बनाने वाले। |
| दिक्कत | परेशानी। |
| आर्थिक | पैसे या धन से संबंधित। |
Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
जंज़ीरें
1. “…उन जंजीरों को तोड़ने का जिनमें वे जकड़े हुए हैं, कोई-न-कोई तरीका लोग निकाल ही लेते हैं”
प्रश्न 1. आपके विचार से लेखक ‘जंज़ीरों’ द्वारा किन समस्याओं की ओर इशारा कर रहा है?
उत्तर- लेखक पी० साईनाथ ‘जंज़ीरों’ के माध्यम से निरक्षरता, अंध-विश्वास, पिछड़ेपन आदि समस्याओं की ओर संकेत कर रहे हैं। पिछड़ेपन का कारण है कि पुरुष प्रधान समाज में नारी को वस्तु समझा जा रहा है। तंग मानसिकता के शिकार लोग इसे पैर की जूती समझते हैं। उन्हें नारी और पशु में कोई भेद दिखाई नहीं देता। नारी को पढ़ाना एक अभिशाप मानते हैं। वे यह नहीं समझ पाते कि एक नारी को साक्षर करने से एक कुल की साक्षर किया जा सकता है।
2. क्या आप लेखक की इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर- लेखक पी० साईनाथ द्वारा कही उक्त पंक्ति से मैं पूर्णतः सहमत हूँ। कोई भी व्यक्ति अधिक समय तक चुपचाप यातनाएँ पीड़ा सहन नहीं कर सकता। कभी-कभी वह उठ खड़ा होता है और फुंकार मात्र से पर्वत हिलाने का सामर्थ्य रखता है। अपने अंतर्मन में विश्वास एवं साहस उत्पन्न होने पर व्यक्ति परंपरागत बेड़ियों को तोड़कर एक नवीन मार्ग की खोज कर लेता है। वह नित्य नए प्रयोग कर उन सभी समस्याओं और यातनाओं की काट निकालने का प्रयास करता रहता है जो उसे दुःख एवं पीड़ा के सागर में डुबो देती हैं।
पहिया
प्रश्न 1. ‘साइकिल आंदोलन’ से पुडुकोट्टई की महिलाओं के जीवन में कौन-कौन से बदलाव आए हैं?
उत्तर— ‘साइकिल आंदोलन’ से पुडुकोट्टई की महिलाओं के जीवन में अनेक महत्त्वपूर्ण बदलाव आए। अब उन्हें बस का इंतज़ार नहीं करना पड़ता और वे स्वतंत्र रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकती हैं। साइकिल ने उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा की तथा पुरुषों पर उनकी निर्भरता कम कर दी। वे साइकिल से अपने रोज़गार से जुड़े काम और सामान को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने लगीं। इससे उनका समय बचा, काम करने की क्षमता बढ़ी और उन्हें आज़ादी का अनुभव होने लगा। इस प्रकार साइकिल महिलाओं के लिए स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और प्रगति का साधन बन गई।
प्रश्न 2. शुरुआत में पुरुषों ने इस आंदोलन का विरोध किया, परंतु आर० साइकिल्स के मालिक ने इसका समर्थन किया, क्यों?
उत्तर— शुरुआत में पुरुषों ने महिलाओं के ‘साइकिल आंदोलन’ का विरोध किया, क्योंकि वे महिलाओं का स्वतंत्र रूप से आना-जाना पसंद नहीं करते थे। इसके विपरीत आर० साइकिल्स के मालिक ने इस आंदोलन का समर्थन किया। इसका मुख्य कारण साइकिलों की बिक्री में हुई भारी वृद्धि थी। महिलाओं में साइकिल चलाने की बढ़ती रुचि के कारण उनके यहाँ लेडीज़ साइकिल की बिक्री में एक वर्ष के भीतर 350 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसलिए उन्होंने साइकिल आंदोलन का पूरा समर्थन किया।
प्रश्न 3. प्रारंभ में इस आंदोलन को चलाने में कौन-कौन सी बाधा आई ?
उत्तर— प्रारंभ में पुडुकोट्टई की महिलाओं को साइकिल आंदोलन चलाने में अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा। पुरुष साइकिल चलाने वाली महिलाओं पर फब्तियाँ कसते और उन्हें बुरी दृष्टि से देखते थे। पुरुष प्रधान समाज के कुछ लोग महिलाओं के साइकिल चलाने को अनुचित मानते थे और उनका विरोध करते थे। इन सामाजिक विरोधों और मानसिक दबाव के बावजूद महिलाओं ने साहस नहीं छोड़ा और साइकिल चलाना जारी रखा। धीरे-धीरे उनके प्रयासों को सामाजिक स्वीकृति मिलने लगी।
शीर्षक की बात
प्रश्न 1. आपके विचार से लेखक ने इस पाठ का नाम ‘जहाँ पहिया है’ क्यों रखा होगा?
उत्तर— लेखक ने इस पाठ का नाम ‘जहाँ पहिया है’ बहुत सोच-समझकर रखा है। यहाँ पहिया उन्नति, स्वतंत्रता और प्रगति का प्रतीक है। पुडुकोट्टई की महिलाओं ने साइकिल को अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का साधन बनाया। सत्तर हजार से अधिक महिलाओं ने साइकिल चलाना सीखा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन किया। साइकिल ने उनके जीवन में गतिशीलता और आत्मविश्वास पैदा किया। इसलिए ‘जहाँ पहिया है’ शीर्षक सार्थक है।
प्रश्न 2. अपने मन से इस पाठ का कोई दूसरा शीर्षक सुझाइए। अपने दिए हुए शीर्षक के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर— इस पाठ का दूसरा शीर्षक ‘जागृत महिलाएँ’ हो सकता है। पुडुकोट्टई की महिलाएँ पहले अनेक कार्यों के लिए पुरुषों पर निर्भर रहती थीं, लेकिन साइकिल चलाना सीखकर वे आत्मनिर्भर और जागरूक बन गईं। अब वे स्वयं अपने काम करती हैं और अपने उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं। साइकिल ने उनमें आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की भावना पैदा की। इसलिए ‘जागृत महिलाएँ’ इस पाठ के लिए उपयुक्त शीर्षक है।
समझने की बात
प्रश्न 1. फातिमा ने कहा, “…………. मैं किराए पर साइकिल लेती हूँ ताकि मैं आज़ादी और खुशहाली काअनुभव कर सकूँ ।“
साइकिल चलाने से फातिमा और पुडुकोट्टई की महिलाओं को ‘आज़ादी‘ का अनुभव क्यों होता होगा?
उत्तर— साइकिल पुडुकोट्टई की महिलाओं के लिए स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई थी। साइकिल चलाकर वे बिना किसी की सहायता के अपने काम के लिए कहीं भी जा सकती थीं। वे अपने उत्पादों को स्वयं लाती-ले जाती और बेचती थीं। इससे उनका समय बचता था और पुरुषों पर उनकी निर्भरता कम होती थी। इसलिए साइकिल चलाते समय उन्हें आज़ादी और आत्मविश्वास का अनुभव होता था।
कल्पना से
प्रश्न 1. पुडुकोट्टई में कोई महिला अगर चुनाव लड़ती तो अपना पार्टी चिह्न किसे बनाती और क्यों?
उत्तर— यदि पुडुकोट्टई में कोई महिला चुनाव लड़ती, तो वह अपना पार्टी चिह्न साइकिल रखती। साइकिल यहाँ महिलाओं की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और प्रगति का प्रतीक बन चुकी थी। साइकिल के पहिए की तरह महिलाओं का जीवन भी आगे बढ़ने लगा था। इसलिए साइकिल चुनाव चिह्न उनके संघर्ष और विकास की भावना को दर्शाता।
प्रश्न 2. अगर दुनिया के सभी पहिये हड़ताल कर दें तो क्या होगा?
उत्तर— यदि दुनिया के सभी पहिये हड़ताल कर दें तो यातायात और अनेक उद्योग-धंधे बंद हो जाएँगे। सामान का आवागमन रुक जाएगा और व्यापार तथा अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। विकास के अनेक कार्य रुक जाएँगे और लोगों का जीवन बहुत कठिन हो जाएगा। इस प्रकार पहियों के रुक जाने से पूरी दुनिया की व्यवस्था प्रभावित हो जाएगी।
प्रश्न 3. ” 1992 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बाद अब यह ज़िला कभी भी पहले जैसा नहीं हो सकता।” इस कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— इस कथन का अभिप्राय है कि 1992 के बाद पुडुकोट्टई की महिलाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की भावना पैदा हो गई थी। साइकिल आंदोलन ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया और उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। अब वे अपने कार्य स्वयं करने लगी थीं और पुरुषों पर उनकी निर्भरता कम हो गई थी। इसलिए लेखक के अनुसार पुडुकोट्टई जिला अब अपने पुराने रूप में वापस नहीं जा सकता।
प्रश्न 4. मान लीजिए आप एक संवाददाता हैं। आपको 8 मार्च, 1992 के दिन पुडुकोट्टई में हुई घटना का समाचार तैयार करना है। पाठ में दी गई सूचनाओं और अपनी कल्पना के आधार पर एक समाचार तैयार कीजिए।
उत्तर— पुडुकोट्टई, 8 मार्च 1992। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पुडुकोट्टई जिले में महिलाओं ने साइकिल चलाकर एक अनोखे सामाजिक आंदोलन की शुरुआत की। बड़ी संख्या में महिलाओं ने साइकिल चलाकर अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया। लगभग 1500 महिलाओं ने साइकिल रैली में भाग लिया।
इस आंदोलन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। वे साइकिल से अपने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने लगी हैं, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बचते हैं। अनेक स्थानों पर साइकिल चलाने के प्रशिक्षण शिविर भी लगाए गए हैं। अब साइकिल सीख चुकी महिलाएँ दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं।
साइकिल की बढ़ती लोकप्रियता से स्थानीय साइकिल दुकानदारों की बिक्री में भी काफी वृद्धि हुई। साइकिल ने खराब परिवहन व्यवस्था वाले क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आवागमन को आसान बना दिया है। इस आंदोलन ने पुडुकोट्टई की महिलाओं को स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता दिखाया है।
भाषा की बात
उपसर्गों और प्रत्ययों के बारे में आप जान चुके हैं। इस पाठ में आए उपसर्गयुक्त शब्दों को छाँटिए। उनके मूल शब्द भी लिखिए | आपकी सहायता के लिए इस पाठ में प्रयुक्त कुछ ‘उपसर्ग‘ और ‘प्रत्यय‘ इस प्रकार हैं- अभि, प्र, अनु, परि, वि ( उपसर्ग ), इक, वाला, ता, ना (प्रत्यय)।
उत्तर-
| उपसर्ग | मूल शब्द | समस्त पद |
|---|---|---|
| अभि | वादन | अभिवादन |
| प्र | शिक्षण | प्रशिक्षण |
| अनु | पालन | अनुपालन |
| परि | त्याग | परित्याग |
| वि | रोध | विरोध |
| वि | नम्र | विनम्र |
| प्र | गति | प्रगति |
| प्र | दान | प्रदान |
| प्र | दर्शन | प्रदर्शन |
| अनु | भव | अनुभव |
| प्र | हार | प्रहार |
| भर | पूर | भरपूर |
| परि | वहन | परिवहन |
| अ | ज्ञान | अज्ञान |
| अभि | व्यक्त | अभिव्यक्त |
| अधि | कार | अधिकार |
| आ | मरण | आमरण |
| बेश | कीमती | बेशकीमती |
| खुश | हाली | खुशहाली |
| बे | शक | बेशक |
| उप | लब्धि | उपलब्धि |
| इक | मास | मासिक |
| वाला | साइकिल | साइकिलवाला |
| ता | प्रतियोगी | प्रतियोगिता |
| ना | जान | जानना |
| आई | कम | कमाई |
| ई | खुशहाल | खुशहाली |
| आ | भूख | भूखा |
| ता | निर्भर | निर्भरता |
| ता | सतर्क | सतर्कता |
| ती | चिलचिला | चिलचिलाती |
| इत | शिक्षा | शिक्षित |
| दार | समझ | समझदार |
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- पुडुकोट्टई ……….. में ……….. चलाना एक ……….. आंदोलन है।
- फातिमा ने बताया कि ……….. चलाने में एक खास तरह की ……….. है।
- इस आंदोलन ने ……….. को बहुत ……….. प्रदान किया है।
- हैंडल पर ……….. लगाए, घंटियाँ बजाते हुए ……….. पर सवार ……….. महिलाओं ने ……….. में तूफान ला दिया।
- उनके लिए यह ……….. उड़ाने जैसी बड़ी ……….. है।
उत्तर-
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- पुडुकोट्टई तमिलनाडु में साइकिल चलाना एक सामाजिक आंदोलन है।
- फातिमा ने बताया कि साइकिल चलाने में एक खास तरह की आज़ादी है।
- इस आंदोलन ने महिलाओं को बहुत आत्मविश्वास प्रदान किया है।
- हैंडल पर झंडियाँ लगाए, घंटियाँ बजाते हुए साइकिल पर सवार 3500 महिलाओं ने पुडुकोट्टई में तूफान ला दिया।
- उनके लिए यह हवाई जहाज़ उड़ाने जैसी बड़ी उपलब्धि है।
Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter 12 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply