कविता “जीवन नहीं मरा करता है” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का दसवां अध्याय है। यह कविता गोपाल दास ‘नीरज’ द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Jeevan Nahi Mara Karta Class 8 Chapter 10 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में कविता”जीवन नहीं मरा करता है” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Kaamchor Class 8 Hindi Chapter 9 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Jeevan Nahi Mara Karta Class 8 Chapter 10 Question Answers
Jeevan Nahi Mara Karta Class 8 Chapter Summary
कविता का सार / प्रतिपाद्य
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश की युवा पीढ़ी को निराश न होकर जीवन में निरंतर संघर्ष करते रहने का संदेश दिया है। कवि कहता है कि जीवन की कठिनाइयों से निराश होकर छिप-छिपकर आँसू बहाना व्यर्थ है। यदि आज हमारे सपने पूरे नहीं हो पाए हैं, तो हमें निराश होने के बजाय उन्हें पूरा करने के लिए फिर से प्रयास करना चाहिए। जैसे खिलौने टूट जाने से बचपन समाप्त नहीं होता और घड़े टूट जाने से पनघट सूना नहीं हो जाता, उसी प्रकार जीवन में असफलता आने से आशा समाप्त नहीं होती। इसलिए हमें आत्मविश्वास बनाए रखते हुए कठिनाइयों का सामना करना चाहिए और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या
- छिप छिप अश्रु बहाने वालो !
मोती व्यर्थ लुटाने वालो !
कुछ ‘सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है ? नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी।
गीली उमर बनाने वालो !
डूबे बिना नहाने वालो !
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ- अश्रु = आँसू । व्यर्थ = बेकार में सपनों का मरना = सपनों का नष्ट होना या मन चाहे कार्यों को करने में असफल होना। नयन = सेज आँखों का बिस्तर। गीली उमर = दुःखों भरा जीवन। सावन = बरसात का महीना।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश श्री गोपाल दास ‘नीरज’ द्वारा रचित कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ से लिया गया है। इस कविता में कवि ने निराश लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी को कठिन परिस्थितियों में भी आशावादी बने रहने और संघर्ष करते रहने का संदेश दिया है।
व्याख्या— कवि निराश लोगों को समझाते हुए कहता है कि जीवन की कठिनाइयों से निराश होकर छिप-छिपकर आँसू बहाना व्यर्थ है। यदि जीवन में कुछ सपने पूरे नहीं हो पाए हैं, तो इससे जीवन समाप्त नहीं हो जाता। सपने आँखों में बसे हुए उन भावों के समान हैं, जो समय के साथ टूट भी सकते हैं। सपनों का टूटना ऐसा है जैसे जवानी की कच्ची नींद अचानक खुल जाए। इसलिए अपने दुखों में डूबे रहने के बजाय कठिनाइयों का सामना करना चाहिए। जिस प्रकार थोड़ा-सा पानी बह जाने से सावन समाप्त नहीं हो जाता, उसी प्रकार कुछ सपनों के टूटने से जीवन समाप्त नहीं होता।
- माला बिखर गई तो क्या है ?
खुद ही हल हो गई समस्या ।
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई समस्या ।
रूठे दिवस मनाने वालो !
फटी कमीज़ सिलाने वालो !
कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ- हल = समाधान। गर= यदि। नीलाम होना = बिकना। रूठे = नाराज़। दिवस = दिन।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश श्री गोपाल दास ‘नीरज’ द्वारा रचित कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ से लिया गया है। इसमें कवि ने मनुष्य को असफलताओं से निराश न होकर संघर्ष और परिश्रम के द्वारा जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि यदि इच्छाओं और सपनों की माला बिखर भी गई है, तो इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। कभी-कभी सपनों का टूटना ही हमें अपनी समस्याओं का समाधान खोजने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कवि उन लोगों को भी हिम्मत रखने के लिए कहता है जो अपनी असफलताओं के कारण दुखी हैं। वह समझाता है कि फटी हुई कमीज़ को देखकर निराश होने के बजाय उसे सिलकर फिर से पहनना चाहिए, अर्थात् कठिनाइयों का समाधान खोजकर जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए। जिस प्रकार कुछ दीपक बुझ जाने से पूरा आँगन अंधकारमय नहीं रहता, उसी प्रकार कुछ असफलताओं से जीवन की गति नहीं रुकती।
- खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी,
जैसे रात उतार चाँदनी पहने सुबह धूप की धोती ।
वस्त्र बदलकर आने वालो !
चाल बदलकर जाने वालो !
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ – पोथी = पुस्तक, किताब। चंद = कुछ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश श्री गोपाल दास ‘नीरज’ द्वारा रचित कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ से लिया गया है। कवि ने इन पंक्तियों में बताया है कि जीवन में आने वाली असफलताएँ और परिवर्तन जीवन को समाप्त नहीं करते।
व्याख्या— कवि कहता है कि जीवन में वास्तव में कुछ भी नष्ट नहीं होता, केवल परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। जीवन एक ऐसी पुस्तक के समान है जिसकी केवल जिल्द बदलती रहती है। जैसे रात समाप्त होने पर चाँदनी की जगह सुबह धूप आ जाती है, वैसे ही जीवन में दुख के बाद सुख और निराशा के बाद आशा आती है। इसलिए व्यक्ति को परिस्थितियों के बदलने से निराश नहीं होना चाहिए। कवि समझाता है कि कुछ खिलौने खो जाने या टूट जाने से बचपन समाप्त नहीं हो जाता। उसी प्रकार जीवन में कुछ सपने टूट जाने पर जीवन भी समाप्त नहीं होता।
- लाखों बार गगरियाँ फूटीं
शिकन न आई पनघट पर।
कितनी बार किश्तियाँ डूबीं
चहल-पहल वैसी है तट पर।
तम की उमर बढ़ाने वालो !
लौ की आयु घटाने वालो !
लाख करे पतझड़ कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ – गगरियाँ = घड़े। फूटीं = टूटी। शिकन = सिलवट, बल। चेहरे पर शिकन आना = चेहरे पर चिंता, असंतोष या कष्ट आदि का भाव प्रकट होना। चहल-पहल = रौनक, आबादी, खुशी। तट = किनारा। तम = अंधेरा। उमर = आयु। लौ = दीपक की ज्योति। उपवन = बग़ीचा।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश श्री गोपाल दास ‘नीरज’ की प्रसिद्ध कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ से लिया गया है। इन पंक्तियों में कवि ने असफलताओं और कठिनाइयों के बावजूद आशावादी बने रहने की प्रेरणा दी है।
व्याख्या— कवि कहता है कि पनघट पर लाखों घड़े टूट गए, लेकिन इससे पनघट की रौनक और गतिविधि समाप्त नहीं हुई। इसी प्रकार नदी में कितनी ही नावें डूब गईं, फिर भी नदी के किनारे की चहल-पहल बनी रही। कवि निराश लोगों से कहता है कि वे अंधकार को बढ़ाने और प्रकाश को कम करने का प्रयास न करें। जीवन में कठिनाइयाँ और असफलताएँ आती रहती हैं, लेकिन उनसे जीवन समाप्त नहीं हो जाता। जिस प्रकार पतझड़ कितनी भी कोशिश करे, फिर भी उपवन हमेशा के लिए समाप्त नहीं होता, उसी प्रकार दुख और असफलताएँ भी मानव जीवन को समाप्त नहीं कर सकतीं।
- लूट लिया माली ने उपवन
लूटी न लेकिन गंध फूल की।
तूफानों तक ने छेड़ा पर-
खिड़की बंद न हुई धूप की।
नफ़रत गले लगाने वालो !
सब पर धूल उड़ाने वालो !
कुछ मुखड़ों की नाराजी से दर्पण नहीं मरा करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ – गंध = खुशबू। नफ़रत = घृणा। गले लगाना = स्वीकार करना, मिलना। नाराजी = रुष्ट होना, नाराज़ होना। दर्पण = शीशा।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश श्री गोपाल दास ‘नीरज’ द्वारा रचित कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ से लिया गया है। इसमें कवि ने निराशा और कठिन परिस्थितियों के बीच भी जीवन की सकारात्मकता और आशा को बनाए रखने का संदेश दिया है।
व्याख्या— कवि कहता है कि यदि माली ने पूरे उपवन को उजाड़ दिया, फिर भी वह फूलों की खुशबू को समाप्त नहीं कर सकता। इसी प्रकार अनेक तूफान आने पर भी सूर्य की धूप को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। कवि निराश लोगों से कहता है कि वे घृणा और निराशा को अपने मन में स्थान न दें। कुछ लोगों की नाराज़गी या असहमति से जीवन का अस्तित्व समाप्त नहीं होता। जैसे दर्पण किसी के नाराज़ चेहरे को देखकर नष्ट नहीं होता, वैसे ही मनुष्य को भी दूसरों की नाराज़गी से हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
Jeevan Nahi Mara Karta Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
बोध और सराहना
प्रश्न 1. इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या कहना चाहा है?
उत्तर— ‘जीवन नहीं मरा करता है’ कविता के माध्यम से कवि ने मनुष्य को दुःखों और असफलताओं से निराश न होने का संदेश दिया है। कुछ सपने यदि पूरे न हों तो इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन समाप्त हो गया। जीवन निरंतर चलता रहता है। मनुष्य को निराशा छोड़कर अच्छे कार्य करते हुए आशा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए तथा मन में नफ़रत को स्थान नहीं देना चाहिए।
प्रश्न 2. कवि ने कैसे लोगों को ललकारा है ?
नीचे हम एक के बारे में बता रहे हैं। शेष के बारे में आप बताएं-
उत्तर— कवि ने निम्नलिखित लोगों को ललकारा है—
(क) विपत्ति से घबराकर रोने वालों को।
(ख) अपने जीवन को दुःख और निराशा से भरने वालों को।
(ग) बीती हुई बातों को याद करके दुखी होने वालों को।
(घ) नश्वर शरीर को अमर समझने वालों को।
(ङ) अज्ञान और बुराई को बढ़ावा देने वालों को।
प्रश्न 3. कवि ने क्या-क्या उदाहरण देकर हमारा हौसला बढ़ाया है?
उत्तर— कवि ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा मनुष्य का हौसला बढ़ाया है—
(क) कुछ सपने टूट जाने से जीवन समाप्त नहीं होता।
(ख) रात के बाद सुबह और अंधकार के बाद प्रकाश आता है।
(ग) कुछ दीपक बुझ जाने से पूरा आँगन अंधकारमय नहीं होता।
(घ) पतझड़ आने पर भी उपवन हमेशा के लिए समाप्त नहीं होता।
(ङ) कुछ खिलौने टूट जाने से बचपन समाप्त नहीं हो जाता।
प्रश्न 4. कविता के आधार पर सपने को परिभाषित करें।
उत्तर— कविता के अनुसार सपना आँखों की सेज पर सोया हुआ आँख का पानी है। उसका टूटना वैसा ही है जैसे जवानी की कच्ची नींद का खुल जाना। अर्थात् सपनों का टूटना जीवन का अंत नहीं है।
प्रश्न 5. किन स्थितियों में समस्या के समाधान मिल जाने की बात कही गई है ? आप उससे कहाँ तक सहमत हैं ?
उत्तर— कवि के अनुसार जब जीवन की इच्छाओं और सपनों की माला बिखर जाती है, तब समस्या का समाधान खोजने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार आँसू नीलाम होने का अर्थ है कि किसी को हमारी पीड़ा का पता चलना या हमारी सहायता के लिए आगे आना। मैं इस विचार से काफी हद तक सहमत हूँ, क्योंकि कठिनाइयों का सामना करने और दूसरों की सहायता मिलने से समस्याओं का समाधान संभव होता है।
प्रश्न 6. ‘गीता’ के निम्नांकित श्लोक का भाव इस कविता की किन पंक्तियों से मिलता है ?
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही।
उत्तर— खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर, केवल जिल्द बदलती पोथी ।
जैसे रात उतार चाँदनी पहने सुबह धूप की धोती ।
कविता की उपर्युक्त पंक्तियों से गीता के इस श्लोक का भाव स्पष्ट होता है। आत्मा मरती नहीं, बल्कि चोला बदलती है। भाव – शरीर नाशवान है, आत्मा अमर है।
प्रश्न 7. पनघट पर घड़े फूटने से और जलधारा में नावों के डूबने पर भी तट पर चहल-पहल क्यों बनी रहती है ? कवि ने इन उदाहरणों के आधार पर क्या बताना चाहा है ?
उत्तर— पनघट पर घड़े टूटते रहते हैं और नदी में नावें डूबती रहती हैं, फिर भी पनघट और नदी के किनारे की गतिविधियाँ नहीं रुकतीं। कवि इन उदाहरणों द्वारा बताना चाहता है कि जीवन में हानि, दुःख और असफलताएँ आती-जाती रहती हैं, लेकिन जीवन की गति निरंतर चलती रहती है। इसलिए मनुष्य को कठिनाइयों से निराश नहीं होना चाहिए।
प्रश्न 8. फूल की गंध की विशेषता क्या है ?
उत्तर— फूल की गंध की विशेषता यह है कि उसे नष्ट नहीं किया जा सकता। माली भले ही उपवन को उजाड़ दे, लेकिन फूलों की खुशबू को समाप्त नहीं कर सकता। वह हवा के साथ चारों ओर फैल जाती है। कवि ने इसे जीवन की अमर आशा और सकारात्मकता का प्रतीक माना है।
प्रश्न 9. निम्नांकित पदबंधों का भाव सौंदर्य स्पष्ट करें-
(क) आँसू नीलाम होना
(ख) गीली उमर
(ग) रूठा दिवस
(घ) तम की उम्र बढ़ाना
(ङ) लौ की आयु घटाना।
उत्तर— (क) आँसू नीलाम होना
‘आँसू नीलाम होना’ का अर्थ है अपनी पीड़ा या दुःख का दूसरों के सामने प्रकट हो जाना तथा किसी सहानुभूति रखने वाले व्यक्ति का मिल जाना।
(ख) गीली उमर
उत्तर— ‘गीली उमर’ का अर्थ है दुःखों और कष्टों से भरा जीवन। कवि ने आँसुओं के माध्यम से जीवन के दुःख को व्यक्त किया है।
(ग) रूठा दिवस
उत्तर— ‘रूठा दिवस’ का अर्थ है ऐसा बीता हुआ समय, जो दुखद रहा हो और जिसकी याद मनुष्य को आज भी परेशान करती हो। कवि बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
(घ) तम की उम्र बढ़ाना
उत्तर— ‘तम की उम्र बढ़ाना’ का अर्थ है अज्ञान, निराशा और बुराई को बढ़ावा देना। ऐसे विचार व्यक्ति और समाज दोनों के लिए हानिकारक होते हैं।
(ङ) लौ की आयु घटाना
उत्तर— ‘लौ की आयु घटाना’ का अर्थ है आशा, प्रकाश और उत्साह को कम करना। निराश होकर प्रयास छोड़ देने से मनुष्य स्वयं अपनी सफलता और खुशियों के अवसरों को कम कर देता है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- ‘जीवन नहीं मरा करता है‘ कविता के कवि ……….. हैं।
- छिप-छिप ……….. बहने वालो।
- और ……….. है उसका ज्यों जागे ……….. नींद जवानी।
- चंद ……….. के खोने से ……….. नहीं मरा करता।
- लाख करे ……….. कोशिश पर ……….. नहीं मरा करता।
उत्तर-
- ‘जीवन नहीं मरा करता है’ कविता के कवि गोपाल दास नीरज हैं।
- छिप-छिप अश्रु बहने वालो।
- और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नींद जवानी।
- चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता।
- लाख करे पतझड़ कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता।
बहु – विकल्पीय प्रश्न
- “जीवन नहीं मरा करता है” कविता के कवि कौन हैं ?
(क) शिवानी
(ख) गोपाल दास नीरज
(ग) निर्मल वर्मा
(घ) नागार्जुन।
उत्तर- (ख) गोपाल दास नीरज
- छिप-छिप कर कौन आँसू बहाता है ?
(क) साहसी
(ख) बच्चे
(ग) कायर
(घ) जवान।
उत्तर- (ख) बच्चे
- सपने की प्रकृति कैसी होती है ?
(क) सुंदर
(ख) क्षणभंगुर
(ग) व्यर्थ
(घ) स्थायी।
उत्तर- (ख) क्षणभंगुर
- “जीवन नहीं मरा करता है।” कविता के आधार पर सपने को किसके समान कहा गया है ?
(क) जवानी की कच्ची नींद खुलने के समान
(ख) बारिश की बूंदों के समान
(ग) दिन-रात के समान
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर- (क) जवानी की कच्ची नींद खुलने के समान
- प्रकृति का क्या नियम है?
(क) तूफ़ान आते रहते हैं
(ख) चाँदनी चुभती है
(ग) रात के बाद सुबह होती है
(घ) पतझड़ हमेशा रहता है।
उत्तर- (ग) रात के बाद सुबह होती है
- लौ की आयु घटाने वाले कौन हैं?
(क) लोगों की सहायता करने वाले
(ख) जीवन में आशा और उत्साह का नाश करने वाले
(ग) दीया जलाने वाले
(घ) जीवन में सुख लाने वाले।
उत्तर- (ख) जीवन में आशा और उत्साह का नाश करने वाले
- तूफ़ान किसका प्रतीक है ?
(क) स्थायी मुसीबतों का
(ख) अकस्मात् उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों का
(ग) तेज़ हवाओं का
(घ) तेज़ झोंकों का।
उत्तर- (ख) अकस्मात् उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों का
- कवि ने हौसला बढ़ाने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण दिया?
(क) अंधेरा खत्म होने पर सुबह की धूप निकलेगी
(ख) दुःख में सुख की अनुभूति करनी चाहिए
(ग) पतझड़ आने का यह अर्थ नहीं कि उपवन खत्म हो जाएगा
(घ) उपरोक्त सभी विकल्प।
उत्तर- (घ) उपरोक्त सभी विकल्प।
Jeevan Nahi Mara Karta Class 8 Chapter 10 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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