“क्या निराश हुआ जाए” JKBOSE के कक्षा 8 (Class 8th of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्य-पुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का आठवाँ अध्याय है। यह पाठ हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Plastic Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter 8 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”क्या निराश हुआ जाए” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Plastic Janit Pradushan Class 8 Chapter 7 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter 8 Question Answers
Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter Summary
पाठ का सार/ प्रतिपाद्य
‘क्या निराशा हुआ जाए ?’ निबंध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित एक श्रेष्ठ निबंध है। इस निबंध में लेखक ने देश की सामाजिक बुराइयों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया है कि बुराइयों के साथ-साथ अच्छाइयों को भी उजागर किया जाना चाहिए।
आजकल समाचार-पत्रों में डाका, हत्या, चोरी, तस्करी आदि के समाचार ही भरे रहते हैं। लगता है कोई ईमानदार देश में नहीं रहा। प्रत्येक व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। एक मित्र ने लेखक को कहा कि इस समय सुखी वह है जो कुछ नहीं करता। हर आदमी दोषी अधिक दीख रहा है, गुणी कम। सच्चाई को भीरुता समझा जाता है। जीवन में महान् मूल्यों के बारे में लोगों की आस्था हिलने लगी है।
लेखक का मत है कि इस स्थिति में हताश होना ठीक नहीं। लोभ-मोह, काम- -क्रोध आदि विकारों को प्रधान शक्ति मान लेना उचित नहीं । मन एवं बुद्धि को इनके इशारे पर छोड़ देना उचित नहीं है। भारतीय परंपरा ने निकृष्ट आचरण में कभी विश्वास नहीं किया। कुछ लोगों की मन की अपवित्रता के कारण नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
भारत हमेशा से कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है परंतु आज इन दोनों में अंतर कर दिया गया है। धर्म- भीरु कानून की त्रुटियों से लाभ उठाते हैं। धर्म को कानून से बड़ा माना जाता है। भ्रष्टाचार के प्रति जो आक्रोश है वह सिद्ध करता है कि लोगों को पाप और बुराई की राह पर चलना बुरा लगता है ।
आज बुरी बातों को उद्घाटित करके लोग रस लेते हैं। यह बुरी बात है। हमें अच्छाई को भी प्रकट करना चाहिए। लेखक के अनुभव के अनुसार आज भी दुनिया से सच्चाई और ईमानदारी खत्म नहीं हुई। मनुष्यता समाप्त नहीं हुई है। मनुष्य की बनाई विधियाँ गलत नतीजे तक पहुँच रही हैं उन्हें बदलना होगा। आशा की ज्योति अभी बुझी नहीं है।
Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आरोप | दोष। |
| गुण | विशेषता। |
| संस्कृति | संस्कार युक्त। |
| अतीत | पुराना, बीता हुआ। |
| गह्वर | गड्ढे। |
| मनीषियों | चिंतन करने वाले। |
| माहौल | वातावरण। |
| जीविका | गुज़ारा। |
| श्रमजीवी | मेहनत पर जीने वाले। |
| मूर्खता | बेवकूफी। |
| भीरु | डरपोक। |
| निरीह | बेचारे। |
| आस्था | विश्वास। |
| त्रुटि | भूल। |
| विधि | नियम। |
| निषेध | रोक। |
| परीक्षित | जांचे हुए। |
| आलोड़ित | उथल-पुथल से भरे। |
| विद्यमान | मौजूद। |
| प्रधान शक्ति | मुख्य ताकत । |
| निकृष्ट | घटिया। |
| आचरण | बर्ताव। |
| संयम | काबू। |
| प्रयत्न | कोशिश। |
| दरिद्र | ग़रीब। |
| अवस्था | हालत। |
| लक्ष्य | ध्येय। |
| विस्तृत | अधिक फैले हुए। |
| विकार | बुराई |
| उपयोगी | लाभदायक। |
| दकियानूसी | पुराने विचारों वाला। |
| पर्याप्त | काफ़ी। |
| प्रमाण | सबूत। |
| नष्ट | समाप्त। |
| पीड़ा | दुःख। |
| आक्रोश | गुस्सा। |
| पर्दाफाश | भेद खोलना। |
| उजागर | स्पष्ट। |
| चकित | हैरान। |
| लुप्त | गायब। |
| अवांछित | जो चाही न जाएं। |
| निर्जर | जहां कोई आदमी न हो। |
| भयभीत | डरा हुआ। |
| व्याकुल | बेचैन। |
| विश्वासघात | धोखा। |
| कातर मुद्रा | डरा हुआ रूप। |
| अकारण | बिना वजह। |
| ज्योति | रोशनी की लौ। |
| संभावना | उम्मीद । |
Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
आपके विचार से
प्रश्न 1. लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है, फिर भी वह निराश नहीं है। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है ?
उत्तर— लेखक निराश नहीं है क्योंकि आज भी भारत में सेवा, ईमानदारी, सच्चाई और आध्यात्मिकता जैसे मूल्य मौजूद हैं। आज भी सामान्य व्यक्ति भारतीय महिलाओं का सम्मान करता है झूठ बोलना और चोरी करना पाप समझता हैं, सेवा करना अपना धर्म समझता है। रेलवे के टिकट बाबू द्वारा लेखक के पैसे लौटाना और बस कंडक्टर द्वारा बच्चों के लिए दूध-पानी लाना इसका प्रमाण है। इससे पता चलता है कि समाज में अभी भी ईमानदारी और सेवा-भावना जीवित है।
प्रश्न 2. समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविजन पर आपने ऐसी अनेक घटनाएँ देखी-सुनी होंगी जिनमें लोगों ने बिना किसी लालच के दूसरों की सहायता की हो या ईमानदारी से काम किया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकत्रित करें और कम-से-कम दो घटनाओं पर अपनी टिप्पणी लिखें।
उत्तर— एक बार माधव को रास्ते में नोटों से भरा पर्स मिला। पर्स में मिले पते की सहायता से उसने उसे उसके मालिक को लौटा दिया। मालिक ने उसे ₹400 इनाम देना चाहा, लेकिन माधव ने लेने से मना कर दिया। इससे उसकी ईमानदारी और सहायता की भावना प्रकट होती है।
प्रश्न 3. लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे के टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई, ईमानदारी और अच्छाई के कार्य किए हों।
उत्तर— एक बार मेरा मित्र अपनी माँ के इलाज के लिए पाँच हजार रुपये लेकर दिल्ली जा रहा था। बस में उसका पर्स खो गया। एक व्यक्ति को पर्स मिला तो उसमें अस्पताल का पता देखकर वह उसे अस्पताल पहुँचा और पर्स लौटा दिया। मेरे मित्र ने उसकी ईमानदारी और सहायता को हमेशा याद रखा।
पर्दाफाश
प्रश्न 1. दोषों का पर्दाफाश करना कब बुरा रूप ले सकता है ?
उत्तर— दोषों का पर्दाफाश तब बुरा रूप ले सकता है जब उससे समाज और संस्कृति पर गलत प्रभाव पड़े। अश्लीलता और नग्नता जैसी चीजों को उजागर करने से कुछ लोग उनके प्रति आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सावधानी आवश्यक है।इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए।
प्रश्न 2. आजकल के बहुत से समाचार-पत्र या समाचार चैनल ‘दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए ।
उत्तर— समाचार-पत्र और समाचार चैनल दोषों का पर्दाफाश करके लोगों को जागरूक और सचेत करते हैं। वे भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी तथा अन्य गलत कार्यों को सामने लाकर समाज को सही दिशा देने का प्रयास करते हैं। इससे लोगों में अच्छे कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
कारण बताइए
निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं ? आपस में चर्चा कीजिए – जैसे- ‘ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।‘ परिणाम — भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
प्रश्न 1. ” सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है। “
उत्तर— आज छल-कपट के कारण ईमानदार व्यक्ति को मूर्ख समझा जाने लगा है। झूठे और प्रभावशाली लोग सच्चाई को कमजोर लोगों की चीज़ समझते हैं।
परिणाम— झूठ और बेईमानी बढ़ेंगे तथा सच्चे लोग पीछे रह जाएंगे।
प्रश्न 2. “झूठ और फरेब का रोज़गार करने वाले फल-फूल रहे हैं। “
उत्तर— झूठ और धोखे से काम करने वाले लोग सुख-सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं, जबकि ईमानदार मेहनतकश लोग कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इससे लोगों का ईमानदारी पर विश्वास कम होने लगा है।
परिणाम— ईमानदारी का महत्व धीरे-धीरे कम होता जाएगा।
प्रश्न 3. ” हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।“
उत्तर— आज लोग दूसरों के गुणों की अपेक्षा उनके दोषों को अधिक देखते और बताते हैं। इसी कारण व्यक्ति के अच्छे गुण छिप जाते हैं और उसके दोष अधिक दिखाई देते हैं।
परिणाम— हम गुणों की उपेक्षा करके दोषों को अधिक महत्व देने लगेंगे।
दो लेखक और बस यात्रा
प्रश्न- आपने इस लेख में एक बस की यात्रा के बारे में पढ़ा। इससे पहले भी आप एक बस यात्रा के बारे में पढ़ चुके हैं। यदि दोनों बस यात्राओं के लेखक आपस में मिलें, तो एक-दूसरे को कौन-कौन सी बातें बताते ? अपनी कल्पना से उनकी बातचीत लिखिए।
उत्तर— पहला लेखक—कहाँ गए थे?
दूसरा लेखक—बाहर गया था।
पहला लेखक—मैं भी गया था, लेकिन एक खटारा बस ने सारा मज़ा खराब कर दिया।
दूसरा लेखक—मेरी बस भी रास्ते में खराब हो गई थी।
पहला लेखक—मेरी यात्रा भी बहुत लंबी हो गई थी।
दूसरा लेखक—चलो, आखिर दोनों सही-सलामत घर पहुँच गए।
सार्थक शीर्षक
प्रश्न 1. लेखक ने लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए‘ क्यों रखा होगा ? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं ?
उत्तर— लेखक ने यह शीर्षक इसलिए रखा है क्योंकि समाज में भ्रष्टाचार और बेईमानी के बावजूद हमें निराश नहीं होना चाहिए। आज भी टिकट बाबू और बस कंडक्टर जैसे ईमानदार लोग मौजूद हैं। इससे पता चलता है कि समाज में सच्चाई और मनुष्यता अभी समाप्त नहीं हुई है।
अन्य शीर्षक – आशावादी दृष्टिकोण।
प्रश्न 2. यदि ‘क्या निराश हुआ जाए‘ के बाद कोई विराम चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए गए। —, । . ! ? ; – , … , चिह्नों में से कौन-सा चिह्न लगाएँगे? अपने चुनाव का कारण भी बताइए।
उत्तर- यदि ‘क्या निराश हुआ जाए’ के पीछे विराम चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो मैं ‘ ?’ का चिह्न लगाऊंगा। इसका मुख्य कारण यह है कि ‘क्या निराश हुए जाए’ में एक प्रश्न उठता है कि जीवन में सहसा ऐसा क्या हो गया है कि जीवन में निराश होना पड़े। या यह भी कह सकते हैं कि ऐसा वातावरण बन गया हो और कोई पूछ रहा हो कि इस समय हमें निराश होना चाहिए। अत: ‘ ?’ (प्रश्नवाचक) विराम चिह्न यहाँ उपयुक्त जान पड़ता है।
प्रश्न 3. “आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है, पर उन पर चलना बहुत कठिन है।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर— हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। व्यक्ति आदर्शों और सिद्धांतों को मानने की बात तो करता है, लेकिन लोभ और मोह के कारण कई बार उन पर चल नहीं पाता। इसलिए आदर्शों को जीवन में अपनाना वास्तव में कठिन है।
सपनों का भारत
“हमारे महान् मनीषियों के सपनों का भारत है और रहेगा।“
प्रश्न 1. आपके विचार से हमारे महान् विद्वानों ने किस तरह के भारत के सपने देखे थे ? लिखिए।
उत्तर— हमारे महापुरुषों ने ऐसे भारत का सपना देखा था जहाँ छल-कपट, भ्रष्टाचार और लूटपाट न हो। सभी लोग ईमानदारी और सच्चाई से रहें तथा मिल-जुलकर जीवन बिताएँ। वे भारत को एक महान और आदर्श देश के रूप में देखना चाहते थे।
प्रश्न 2. आपके सपनों का भारत कैसा होना चाहिए ? लिखिए।
उत्तर – मेरे देश का नाम भारत है। दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर इसका यह नाम पड़ा। इसका प्राचीन नाम आर्यवर्त भी है। मुस्लिम शासकों ने इसे हिंद, हिंदुस्तान या हिंदोस्तान का नाम दिया। अंग्रेज़ों ने इसे ‘इंडिया’ के नाम से प्रख्यात किया। स्वतंत्रता के बाद संविधान द्वारा यह देश ‘भारत’ के नाम से दुनिया के मानचित्र पर चमकने लगा। यह देश हमारी मातृभूमि हैं। हमारा रोम-रोम इसके प्रति कृतज्ञ है। मैं चाहता हूँ कि मेरा देश संसार का सर्वश्रेष्ठ देश बन जाए। देश का भविष्य देश के बच्चे होते हैं, इसलिए मेरे सपनों के भारत में शिक्षा सबके लिए सुलभ तथा रोजगार प्रदान करने वाली होगी। कृषि प्रधान देश होने के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि मेरा सपना है। मेरे सपनों के भारत में उद्योग और व्यापार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। देश पर्यावरण की दृष्टि से सब प्रकार से सुरक्षित होगा। ‘जिओ और जीने दो’ की भावना का सर्वत्र प्रसार होगा। सभी मिल-जुल कर रहेंगे। मेरे सपनों के भारत में चारों ओर खुशहाली और समृद्धि, आपसी प्रेम, भाईचारे और सहयोग का राज होगा। मानव का धर्म मानव की सेवा करना होगा। भारत फिर से विश्व के आध्यात्मिक गुरु की छवि प्राप्त कर विश्व का कल्याण करेगा।
भाषा की वात
प्रश्न 1. दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है – द्वंद्व समास। इसमें दोनों भाग प्रधान होते हैं। जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़ ) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे नहीं रहना चाहता; जैसे- चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरू – बेबस । दिन और रात = दिन-रात ।
‘और‘ के साथ आए शब्दों के जोड़े को ‘और‘ हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है । द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर-
| समस्त पद | विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| 1. रुपया-पैसा | रुपया और पैसा | द्वंद्व समास |
| 2. अपना-पराया | अपना और पराया | द्वंद्व समास |
| 3. हानि-लाभ | हानि और लाभ | द्वंद्व समास |
| 4. नर-नारी | नर और नारी | द्वंद्व समास |
| 5. माँ-बाप | माँ और बाप | द्वंद्व समास |
| 6. दाल-रोटी | दाल और रोटी | द्वंद्व समास |
| 7. घी-शक्कर | घी और शक्कर | द्वंद्व समास |
| 8. लोटा - डोरी | लोटा और डोरी | द्वंद्व समास |
| 9. लव-कुश | लव और कुश | द्वंद्व समास |
| 10. गंगा-यमुना | गंगा और यमुना | द्वंद्व समास |
| 11. अन्न-जल | अन्न और जल | द्वंद्व समास |
| 12. सुख-दुःख | सुख और दुःख | द्वंद्व समास |
प्रश्न 2. पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाओं के उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर – व्यक्तिवाचक संज्ञा – भारतवर्ष, तिलक, रवींद्रनाथ ठाकुर, धर्मवीर, मदनमोहन मालवीय।
जातिवाचक संज्ञा – समाचार पत्र, बस, मनुष्य, महिला, नौजवान, यात्री।
भाववाचक संज्ञा – सच्चाई, अच्छाई, मूर्खता, ईमानदारी, विनम्रता, यूरोपीय, आध्यात्मिकता, डकैती, प्रेम, मनुष्यता।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- मेरा मन कभी-कभी ……… जाता है।
- ईमानदारी को ……… का पर्याय समझा जाने लगा है।
- भारतवर्ष सदा ……… को ……… के रूप में देखता आ रहा है।
- उसके चेहरे पर ……… संतोष की ……… थी।
- कैसे कहूँ कि ……… एकदम ……… हो गई।
उत्तर-
- मेरा मन कभी-कभी बैठ जाता है।
- ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।
- भारतवर्ष सदा कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है।
- उसके चेहरे पर विभिन्न संतोष की गरिमा थी।
- कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई।
बहु-विकल्पीय प्रश्न
- ‘क्या निराश हुआ जाए‘ पाठ के लेखक हैं-
(क) हजारी लाल द्विवेदी
(ख) हजारी प्रकाश द्विवेदी
(ग) हजारी प्रसाद दद्विवेदी
(घ) हजारी सिंह द्विवेदी।
उत्तर- (ग) हजारी प्रसाद दद्विवेदी
- मेरा मन कभी-कभी क्या करता है ?
(क) प्रसन्न होता है
(ख) बैठ जाता हैं
(ग) दुःखता है
(घ) घबराता है।
उत्तर- (ख) बैठ जाता हैं
- देश में कैसा आदमी नहीं रह गया ?
(क) ईमानदार
(ख) भ्रष्टाचारी
(ग) तस्कर
(घ) ठग
उत्तर- (क) ईमानदार
- हर व्यक्ति को कैसी दृष्टि से देखा जाता है ?
(क) प्रेम की
(ख) घृणा की
(ग) क्रोध की
(घ) संदेह की।
उत्तर- (घ) संदेह की।
- बड़े आदमी के अनुसार जो कुछ नहीं करता वह क्या है ?
(क) दुःखी
(ख) कर्मठ
(ग) सुखी
(घ) कर्मचारी।
उत्तर- (ग) सुखी
- श्रमजीवियों की कैसी दशा हो रही है ?
(क) आनंद मग्न है
(ख) पिस रहे हैं
(ग) खुशहाल है
(घ) शासन कर रहे हैं।
उत्तर- (ख) पिस रहे हैं
- वर्तमान युग में ‘ईमानदारी‘ किस का पर्याय समझी जा रही है ?
(क) मूर्खता
(ख) चतुरता
(ग) संपन्नता
(घ) श्रेष्ठता।
उत्तर- (क) मूर्खता
- भारतवर्ष ने कभी भी किन वस्तुओं के संग्रह पर बल नहीं दिया ?
(क) आत्मिक
(ख) सात्विक
(ग) दैविक
(घ) भौतिक।
उत्तर- (घ) भौतिक।
- भारतवर्ष में कानून को सदा किस रूप में देखा गया ?
(क) अर्थ
(ख) मोक्ष
(ग) धर्म
(घ) काम।
उत्तर- (ग) धर्म
- रेलवे स्टेशन पर लेखक ने दस के बजाय कितने रुपये का नोट दे दिया ?
(क) सौ
(ख) पचास
(ग) बीस
(घ) पाँच।
उत्तर- (क) सौ
Kya Narash Hua Jaye Class 8 Chapter 8 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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