“अकबरी लोटा” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का तेरहवां अध्याय है। यह पाठ अन्नपूर्णानंद वर्मा द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Akbari Lota Class 8 Chapter 13 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”अकबरी लोटा” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने Jahan Pahiya Hai Class 8 Chapter 12 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Akbari Lota Class 8 Chapter 13 Question Answers
Akbari Lota Class 8 Chapter Summary
पाठ का सार
‘अकबरी लोटा’ अन्नपूर्णानंद वर्मा द्वारा रचित एक मनोरंजक और व्यंग्यात्मक कहानी है। इसमें लेखक ने झूठी शान, शेखी और चतुराई पर हास्यपूर्ण ढंग से व्यंग्य किया है। कहानी के मुख्य पात्र लाला झाऊलाल काशी के ठठेरी बाज़ार में रहने वाले एक संपन्न व्यक्ति थे।
एक दिन उनकी पत्नी ने उनसे ढाई सौ रुपये माँगे। लाला जी ने अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए एक सप्ताह में रुपये देने का वादा कर दिया, लेकिन चार दिन बीतने पर भी रुपये का प्रबंध नहीं कर सके। पाँचवें दिन उन्होंने अपने मित्र पंडित बिलवासी मिश्र को अपनी परेशानी बताई। पंडित जी ने सहायता करने का आश्वासन दिया।
इसी बीच लाला जी की पत्नी पानी से भरा एक पुराना लोटा लेकर आई। अचानक लोटा उनके हाथ से छूटकर नीचे खड़े एक अंग्रेज़ के पैरों पर जा गिरा। अंग्रेज़ क्रोधित होकर शिकायत करने की बात करने लगा। तभी पंडित बिलवासी मिश्र वहाँ पहुँचे और अपनी चतुराई से परिस्थिति सँभाल ली। उन्होंने साधारण लोटे को ऐतिहासिक ‘अकबरी लोटा’ बताते हुए उसके बारे में मनगढ़ंत कहानी सुनाई।
पुरानी वस्तुओं के शौकीन अंग्रेज़ ने लोटा खरीदने की इच्छा जताई। पंडित जी ने बोली लगवाई और अंत में अंग्रेज़ ने उसे पाँच सौ रुपये में खरीद लिया। इस प्रकार लाला जी की समस्या हल हो गई और पत्नी को देने के लिए ढाई सौ रुपये मिल गए।
रात में पंडित बिलवासी मिश्र ने अपनी पत्नी के संदूक से ढाई सौ रुपये निकालकर लाला जी को दे दिए और बाद में उन्हें चुपचाप वापस रख दिया। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने हास्य-विनोद के साथ यह दिखाया है कि चतुराई और झूठी शान के कारण एक साधारण वस्तु भी मूल्यवान बन सकती है।
Akbari Lota Class 8 Chapter Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ठठेरी बाज़ार | बर्तनों का बाज़ार। |
| आँखें सेकना | देखना। |
| एकाएक | अचानक। |
| प्रतिष्ठा | इज्जत, सम्मान। |
| वाहवाही | प्रशंसा। |
| विपदा | मुसीबत, कठिनाई। |
| गाथाएँ | कहानियाँ। |
| खुक्ख | खाली, पैसे से हीन। |
| हेंकड़ी | शेखी, बड़प्पन। |
| बेढंगी | खराब, आकार सही न होना। |
| लोटा | पानी या तरल पदार्थ रखने का पात्र। |
| अदब | सम्मान, इज्ज़त। |
| गनीमत | संतोष की बात। |
| मुँडेर | छत के आगे निकला छज्जा। |
| उल्का | आकाश से जलता हुआ गिरता बड़ा भारी पिंड। |
| वेग | स्पीड, तीव्रता, तेजी। |
| खुराफ़ाती | शैतानी या शरारत करने वाला। |
| तिमंजला | तीन मंजिल वाला मकान, घर, दफ्तर आदि। |
| ईजाद | खोज, पैदा करना। |
| काशीवास का संदेश | मृत्यु का संदेश। |
| नखशिख | पैर के नाखून से सिर तक। |
| बूट | जूता। |
| प्रकांड कोष | अत्यधिक खज़ाना। |
| शख्स | व्यक्ति, आदमी। |
| निरोह | विरक्त, चुपचाप पड़ा रहने वाला। |
| डेंजर्स ल्यूनाटिक | खतरनाक पागल। |
| क्रिमिनल | अपराधी। |
| हिरासत | कब्ज़ा / हक में/ पकड़ में। |
| इजाज़त | आज्ञा। |
| वजू | नमाज़ पढ़ने से पूर्व हाथ पाँव धोने का काम। |
| फैंसी दाम | अच्छी कीमत। |
| संग्रह | इकट्ठा करना। |
| ताव | जोश। |
| अफसोस | दुःख। |
| पूर्ववत् | पहले की तरह। |
| होड़ | प्रतिस्पर्धा। |
| कान पकना | सुन-सुन कर परेशान हो जाना। |
| निछावर | सब कुछ अर्पित करना। |
| पुश्त | वंश, पीठ। |
| तन्मयता | एकाग्रता, लीनता, लगन। |
| सिंकड़ी | जंज़ीर, चेन। |
| दबे पाँव | बिना आवाज़ किए चलना। |
Akbari Lota Class 8 Chapter Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कहानी की बात
प्रश्न 1. “लाला ने लोटा ले लिया, बोले कुछ नहीं, अपनी पत्नी का अदब मानते थे।” लाला झाऊलाल को बेढ़ेगा लोटा बिल्कुल पसंद नहीं था। फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया। आपके विचार से वे चुप क्यों रहे? अपने विचार लिखिए।
उत्तर— लाला झाऊलाल को वह बेढंगा लोटा बिल्कुल पसंद नहीं था, फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया क्योंकि वे अपनी पत्नी का सम्मान करते थे। इसके अलावा, उस समय वे पत्नी द्वारा माँगे गए ढाई सौ रुपये का प्रबंध नहीं कर पाए थे। इसलिए वे पत्नी को नाराज़ नहीं करना चाहते थे। उन्हें लगा कि अभी पत्नी बेढंगे लोटे में ही पानी दे रही है, यदि रुपये नहीं दिए तो घर में उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इसलिए उन्होंने चुप रहकर लोटा ले लिया।
प्रश्न 2. “लाला झाऊलाल जी ने फौरन दो और दो जोड़कर स्थिति को समझ लिया।” आपके विचार से लाला झाऊलाल ने कौन-कौन सी बातें समझ ली होंगी?
उत्तर— लाला झाऊलाल ने घर में अचानक आई भीड़ और उस अंग्रेज़ को हाथ में लोटा लिए देखकर समझ लिया कि लोटा उसके ऊपर गिरा है और वह इसी बात से नाराज़ है। अंग्रेज़ के भीगे कपड़ों और चोटिल पैर को देखकर उन्हें अंदाज़ा हो गया कि स्थिति गंभीर है। उन्हें यह भी समझ आ गया कि अंग्रेज़ पुलिस में शिकायत कर सकता है और इस कारण वे बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं।
प्रश्न 3. अंग्रेज के सामने बिलवासी जी ने झाऊलाल को पहचानने तक से क्यों इनकार कर दिया था? आपके विचार से बिलवासी जी ऐसा अजीब व्यवहार क्यों कर रहे थे ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— बिलवासी जी ने अंग्रेज़ के सामने लाला झाऊलाल को पहचानने से इसलिए इनकार किया ताकि अंग्रेज़ का गुस्सा शांत हो सके और वह तुरंत पुलिस में शिकायत न करे। वे परिस्थिति को समझकर चतुराई से अंग्रेज़ का विश्वास जीतना चाहते थे। बाद में इसी बहाने उन्होंने लोटे को ऐतिहासिक बताकर अंग्रेज़ को उसे खरीदने के लिए तैयार कर दिया और लाला जी की समस्या हल कर दी।
प्रश्न 4. बिलवासी जी ने रुपयों का प्रबंध कहाँ से किया था ? लिखिए।
उत्तर— बिलवासी जी ने लाला झाऊलाल की सहायता करने के लिए अपने घर से ढाई सौ रुपये का प्रबंध किया था। रात में उन्होंने अपनी पत्नी के संदूक से चुपचाप रुपये निकाले और लाला जी की सहायता की। बाद में उन्होंने वे रुपये फिर से संदूक में रख दिए। इस प्रकार उन्होंने अपने मित्र की परेशानी दूर करने के लिए रुपयों का प्रबंध किया।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. “इस भेद को मेरे सिवाए मेरा ईश्वर ही जानता है। आप उसी से पूछ लीजिए। मैं नहीं बताऊँगा।” बिलवासी जी ने यह बात किससे और क्यों कही? लिखिए।
उत्तर— बिलवासी जी ने यह बात अपने मित्र लाला झाऊलाल से कही। जब लाला जी ने उनसे पूछा कि उनके पास रुपये न होने के बावजूद उन्होंने ढाई सौ रुपये का प्रबंध कैसे किया, तब बिलवासी जी ने अपने द्वारा किए गए उपाय का रहस्य बताने से इनकार कर दिया। वे नहीं चाहते थे कि लाला जी को पता चले कि उन्होंने रुपये अपनी पत्नी के संदूक से लिए थे।
प्रश्न 2. ” उस दिन रात्रि में बिलवासी जी को देर तक नींद नहीं आई।” समस्या झाऊलाल की थी और नींद बिलवासी की उड़ी तो क्यों? लिखिए।
उत्तर— बिलवासी जी अपने मित्र लाला झाऊलाल की परेशानी को अपनी परेशानी समझते थे। उन्होंने लाला जी की सहायता के लिए अपनी पत्नी के संदूक से चुपचाप रुपये निकाले थे। उन्हें डर था कि यदि उनकी पत्नी जाग गई या उसे इस बात का पता चल गया तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। इसी चिंता के कारण उन्हें देर तक नींद नहीं आई। रुपये वापस रख देने के बाद ही उन्हें चैन मिला।
प्रश्न 3. ” लेकिन मुझे इसी जिंदगी में चाहिए ।”
“अजी इसी सप्ताह में ले लेना।”
“सप्ताह से आपका तात्पर्य सात दिन से है या सात वर्ष से ?” झाऊलाल और उनकी पत्नी के बीच की इस बातचीत से क्या पता चलता है ? लिखिए।
उत्तर— इस बातचीत से पता चलता है कि लाला झाऊलाल धन के मामले में बहुत सावधान और कुछ हद तक कंजूस स्वभाव के थे। पत्नी द्वारा ढाई सौ रुपये माँगे जाने पर वे घबरा गए थे। पत्नी की बात से यह भी पता चलता है कि वह लाला जी की पैसे खर्च करने की आदत से परिचित थी और उनके वादे पर पूरी तरह विश्वास नहीं करती थी। इस बातचीत में पति-पत्नी के बीच का हास्यपूर्ण संबंध भी दिखाई देता है।
क्या होता यदि
1. अंग्रेज़ लोटा न खरीदता?
उत्तर— यदि अंग्रेज़ लोटा न खरीदता तो पंडित बिलवासी मिश्र की योजना सफल नहीं होती और लाला झाऊलाल के लिए ढाई सौ रुपये का प्रबंध करना कठिन हो जाता। अंग्रेज़ पुलिस में शिकायत भी कर सकता था। इससे लाला जी को आर्थिक और सामाजिक दोनों प्रकार की परेशानी उठानी पड़ती।
2. यदि अंग्रेज पुलिस को बुला लेता?
उत्तर— यदि अंग्रेज़ पुलिस को बुला लेता तो मामला गंभीर हो जाता। पुलिस लाला झाऊलाल से पूछताछ करती और उन्हें कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। इससे लाला जी की प्रतिष्ठा प्रभावित होती और उन्हें अनावश्यक खर्च तथा परेशानी उठानी पड़ती।
3. जब बिलवासी अपनी पत्नी के गले से चाबी निकाल रहे थे, तभी उनकी पत्नी जाग जाती?
उत्तर— यदि बिलवासी जी की पत्नी उसी समय जाग जातीं तो उन्हें अपने पति पर रुपये चुराने का संदेह होता। घर में विवाद हो सकता था और बिलवासी जी को अपनी पत्नी को पूरी बात समझानी पड़ती। उनके लिए उस समय स्थिति बहुत कठिन और शर्मनाक हो जाती।
पता कीजिए
प्रश्न 1. ” अपने वेग में उल्का को लजाता हुआ वह आँखों से ओझल हो गया।” उल्का क्या होती है ? उल्का और ग्रहों में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होते हैं?
उत्तर— अंतरिक्ष में पाए जाने वाले छोटे-छोटे पत्थरीले या धातु के पिंड जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण चमकने और जलने लगते हैं। इन्हें सामान्यतः उल्का कहा जाता है। इन्हें ही आम भाषा में ‘टूटता तारा’ भी कहा जाता है।
उल्का और ग्रह में समानताएँ
(1) ये दोनों सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं ।
(2) ये दोनों चट्टानों से बने होते हैं।
उल्का और ग्रह में असमानताएँ
(1) ग्रहों का आकार बड़ा होता है पर उल्काएँ अपेक्षाकृत छोटे आकार की होती हैं।
(2) ग्रह अपने अक्ष के चारों ओर घूमते हैं पर उल्काओं का अपना कोई निश्चित अक्ष नहीं होता। उल्काओं का सूर्य के प्रति गुरुत्वाकर्षण बहुत कम होता है जबकि ग्रहों में गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है।
प्रश्न 2. ” इस कहानी में आपने दो चीज़ों के बारे में मज़ेदार कहानियाँ पढ़ीं– अकबरी लोटे की कहानी और जहाँगीरी अंडे की कहानी ।” आपके विचार से वे कहानियाँ सच्ची हैं या काल्पनिक?
उत्तर— अकबरी लोटे और जहाँगीरी अंडे से जुड़ी कहानियाँ काल्पनिक और हास्यपूर्ण हैं। लेखक ने इन कहानियों के माध्यम से यह दिखाया है कि किस प्रकार चतुराई और बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातों से साधारण वस्तु को भी बहुत मूल्यवान बताया जा सकता है। कहानी का उद्देश्य मनोरंजन के साथ शेखी बघारने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करना है।
प्रश्न 3. अपने घर या कक्षा की किसी पुरानी चीज़ के बारे में ऐसी ही कोई मजेदार कहानी बनाइए।
उत्तर— हमारे घर में एक पुरानी पीतल की घंटी रखी थी। वह देखने में साधारण थी, लेकिन दादाजी ने मज़ाक में बताया कि यह किसी पुराने राजा के महल की घंटी है। उन्होंने कहा कि इसे बजाने पर राजा के सैनिक भोजन लेकर आते थे। यह सुनकर घर के सभी बच्चे बहुत उत्साहित हो गए और उस घंटी को बड़ी अनमोल वस्तु समझने लगे। बाद में दादाजी ने हँसते हुए बताया कि वह घंटी तो उन्हें गाँव के पुराने सामान की दुकान से मिली थी। सब लोग उनकी मज़ेदार कहानी सुनकर खूब हँसे।
प्रश्न 4. बिलवासी जी ने जिस तरीके से रुपयों का प्रबंध किया, वह सही था या गलत?
उत्तर— बिलवासी जी का उद्देश्य अपने मित्र की सहायता करना था, लेकिन रुपये चोरी से लेना सही नहीं था। चोरी करना गलत कार्य है, चाहे उसका उद्देश्य किसी की सहायता करना ही क्यों न हो। उन्हें अपनी पत्नी से सच्चाई बताकर रुपये माँगने चाहिए थे। इसलिए उनकी भावना अच्छी थी, लेकिन रुपयों का प्रबंध करने का तरीका उचित नहीं था।
भाषा की बात
प्रश्न 1. इस कहानी में लेखक ने जगह-जगह पर सीधी-सी बात कहने के बदले रोचक मुहावरों, उदाहरणों आदि के द्वारा कहकर अपनी बात को और अधिक मजेदार / रोचक बना दिया है। कहानी से वे वाक्य चुनकर लिखिए जो आपको सबसे अधिक मजेदार लगे।
उत्तर – ( 1 ) इस रिश्ते से तो आपका लोटा उस अंडे का बाप हुआ।
( 2 ) सप्ताह से तात्पर्य सात दिन से हैं या सात वर्ष से?
उसका बाप डमरू, माँ चिलम रही हो । बाल्टी में भोजन मिलेगा।
(3) साल दो साल का ही बना, पर कुछ ऐसी गढ़न उस लोटे की थी कि
(4) लोटे में पानी दे, तब भी गनीमत है, अभी अगर चूँ कर देता हूँ
(5) “मेरी समझ में ‘ही इज ऐ डेंजर्स ल्यूनाटिक’ (यानी खतरनाक पागल हैं)।”
(6) अपने वेग में उल्का को लजाता हुआ वह आँखों से ओझल – सा सिंध के रेगिस्तान में मारा-मारा फिर रहा था।
(7) गत वर्ष वे हिंदुस्तान आए थे और यहाँ से जहाँगीरी अंडा ले गए थे।
(8) “रुपया अगर अपना हो तो उसे सहेजना एक ऐसा सुखद मनमोहक कार्य है कि मनुष्य उस समय सहज में ही तन्मयता प्राप्त कर लेता है।”
प्रश्न 2. इस कहानी में लेखक ने अनेक मुहावरों का प्रयोग किया है। कहानी में से पाँच मुहावरे चुनकर उनका प्रयोग करते हुए वाक्य लिखिए ।
उत्तर – 1. तिलमिला उठना ( अचानक पीड़ा एवं कष्ट होना) – किसान की व्यंग्यपूर्ण बातें सुनकर लाला जी तिलमिला उठे ।
- दुमदबाकर निकल भागना ( डर के मारे भाग जाना) – बिल्ली को देखकर चूहा दुमदबाकर बिल में जा घुसा।
- हाथ धोना (खो देना, छिन जाना) – पाकिस्तान युद्ध में कई युद्धपोतों तथा पनडुब्बियों से हाथ धो बैठा।
- गुस्सा पीना (क्रोध पर काबू करना ) – वेदों – पुराणों में लिखा है पीने का सबसे अच्छा पदार्थ गुस्सा पीना है।
- आँखों से ओझल होना ( अंतर्ध्यान होना, गायब होना) – देखते ही देखते भगवान् भक्त की आँखों से ओझल हो गए।
- पीठ ठोंकना ( शाबाशी देना) – परीक्षा में प्रथम स्थान पाने पर सभी ने मोहन की पीठ ठोंकी।
- दबे पाँव (बिना आवाज़ किए ) – चोर दबे पाँव घर में घुसे और सारा सामान चुराकर ले गए।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- लाला …………. को …………. की कमी नहीं थी।
- पाँचवें दिन …………. उन्होंने …………. को अपनी …………. सुनाई।
- गिरने से पूर्व …………. एक दुकान के …………. से टकराया।
- मुझे पुरानी और …………. चीज़ों के …………. का शौक है।
- अच्छा पहले …………. रुपये गिनकर …………. लीजिए।
उत्तर—
- लाला झाऊमल को खाने-पीने की कमी नहीं थी।
- पाँचवें दिन घबराकर उन्होंने पं० बिलवासी मिश्र को अपनी विपदा सुनाई।
- गिरने से पूर्व लोटा एक दुकान के सायबान से टकराया।
- मुझे पुरानी और ऐतिहासिक चीज़ों के संग्रह का शौक है।
- अच्छा पहले पाँच सौ रुपये गिनकर सहेज लीजिए।
Akbari Lota Class 8 Chapter 13 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
Leave a Reply