“टोपी” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का सत्रहवाँ अध्याय है। यह पाठ सृंजय द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Topi Class 8 Chapter 15 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”टोपी” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने पोस्ट Baaj Aur Saanp Class 8 Chapter 16 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Topi Class 8 Chapter 17 Question Answers
Topi Class 8 Chapter 17 Summary
पाठ का सार/प्रतिपाद्य
प्रस्तुत पाठ ‘टोपी’ श्री संजय द्वारा रचित एक रोचक कहानी है। इसमें लेखक ने उच्च वर्ग द्वारा गरीबों के शोषण तथा धन और पद के आधार पर होने वाले भेदभाव पर व्यंग्य किया है।
कहानी में नर गौरैया गवरा और मादा गौरैया गवरइया का वर्णन है। एक दिन दोनों में मनुष्य के कपड़े पहनने को लेकर बहस होती है। गवरइया को टोपी पहनने की इच्छा होती है। गवरा उसे समझाता है कि टोपी और कपड़े मनुष्य में भेदभाव और बनावटीपन पैदा करते हैं, लेकिन गवरइया अपनी इच्छा पूरी करने का निश्चय कर लेती है।
उसे कूड़े में कपास का फाहा मिलता है। वह उसे लेकर धुनिया, कोरी, बुनकर और दर्जी के पास जाती है। प्रत्येक व्यक्ति पहले उसे काम देने से मना करता है, लेकिन गवरइया उन्हें मेहनत की उचित मजदूरी के रूप में आधा-आधा हिस्सा देने का वादा करती है। इस प्रकार कपास से रुई, रुई से सूत, सूत से कपड़ा और कपड़े से सुंदर टोपी तैयार हो जाती है। दर्जी टोपी में पाँच फुंदने भी लगा देता है।
टोपी पहनकर गवरइया बहुत प्रसन्न होती है और राजा के महल के पास जाकर राजा की टोपी का मजाक उड़ाती है। राजा क्रोधित होकर उसकी टोपी छीन लेता है, लेकिन बाद में टोपी की सुंदरता देखकर उसे बनाने वालों को बुलाता है। धुनिया राजा को बताता है कि गवरइया ने सभी को उनके काम का उचित हिस्सा दिया था, इसलिए काम में सुंदरता और नफासत आती गई।
अंत में लोगों के इकट्ठा होने पर राजा डरकर गवरइया की टोपी वापस कर देता है। गवरइया राजा को डरपोक और कंगला कहकर उसका मजाक उड़ाती है और राजा चुपचाप महल में चला जाता है।
इस कहानी के माध्यम से लेखक ने श्रम का सम्मान, उचित मजदूरी, आत्मसम्मान और शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने का संदेश दिया है।
Topi Class 8 Chapter Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फबता | सुंदर लगना, अच्छा लगना। |
| तपाक | झट से। |
| सुघड़ काया | अच्छा शरीर। |
| आँखों में चमक | खुशी/प्रसन्नता। |
| मानुस | मनुष्य। |
| जाड़ा | सर्दी |
| सकत | ताकत। |
| नित | प्रतिदिन। |
| लिबास | कपड़ा। |
| सलामत रहे | बना रहे। |
| चिहाकर | चीखकर। |
| जुगाड़ | तरीका। |
| बावरा | बावला। |
| उम्दा | अच्छा। |
| फोकट | मुफ्त। |
| मजूरी | मजदूरी। |
| अनिच्छा | बिना इच्छा के। |
| बरधा | बैल। |
| तुरंग | घोड़ा। |
| मुआवजा | हर्जाना। |
| वाजिब | उचित। |
| इसरार | निवेदन। |
| कारिदे | आगे-पीछे लगे रहने वाले। |
| मूजी | मज़दूरी करने वाला। |
| हुनरमंद | कौशलयुक्त। |
| खमा | क्षमा। |
| नफासत | अच्छा काम। |
| दंडवत | लेटकर नमस्कार करना। |
| कंगाल | धन से एकदम हीन |
| अकबका | भौचक्का। |
| भिनसार | प्रातःकाल, सवेरा। |
| खोंते | घोंसले। |
| झुटपुटा | सवेरे या शाम का समय जब प्रकाश इतना कम हो कि कोई चीज़ साफ दिखाई न दे, वह समय जब कुछ-कुछ अँधेरा और कुछ-कुछ उजाला हो। |
| लटजीरा | चिचड़ा, एक विशेष प्रकार का पौधा। |
| सरापा | सिर से पाँव तक पहना जाने वाला कपड़ा। |
| सकत | शक्ति, सामर्थ्य। |
| लफड़ा | उलझन, झंझट। |
| फकत | केवल। |
| अपन | अपना। |
| फिकर | चिंता, फिक्र। |
| मत | नहीं। |
| मामूल | वह बात जो रोज़ की जाए, हमेशा की तरह। |
| ढरकी | कपड़ा बुनते हुए जुलाहे जिससे वाने का सूत फेंकते हैं। |
| गफश | गफ्स, घना बुना हुआ। |
| दबीज | मोटा, मज़बूत। |
| बेगार | बिना मज़दूरी का काम। |
| मूजी | दुष्ट। |
| फुंदने | सूत, ऊन आदि का फूल या गुच्छा। |
| हुलस | उल्लास, खुशी। |
| इत्ते-सारे | इतने सारे। |
| टहलुआ | नौकर। |
| फुलेल | खुशबूदार तेल। |
| फुंदनेदार | गुच्छेदार। |
| फदगुद्दी | एक छोटी चिड़िया, गौरैया। |
| घूरा | कूड़े-करकट का ढेर। |
| चिहाकर | चौंककर हैरान होकर। |
| जुगाड़ | उपाय। |
| मनुहार | मनाना। |
| चाम | चमड़ा। |
| फोकट | मुफ्त। |
| उजरत | मज़दूरी, मेहनत का बदला, पारिश्रमिक। |
| मल्लार | मल्हार, संगीत का एक राग। |
| मुलुक | मुल्क, देश। |
| लगुए-भगुए | पीछे चलने वाले, मेल-जोल के व्यक्ति। |
| मशगूल | व्यस्त। |
| सेंत मेंत का काम | वह काम जिसके लिए कुछ देना न पड़ा हो, बिना लाभ। |
| पखने | पंख। |
| खमा | क्षमा। |
| नायाब | बहुमूल्य, बेशकीमती। |
| हुनरमंद | कुशल, गुणी, कारीगर। |
| मानिंद | जैसा, अनुरूप, सरीखा। |
| नफ़ासत | सज्जा, सजा-सँवरा। |
| जुरती | जुटना, एकत्र होना, प्राप्त होना। |
| पाखी | पक्षी, चिड़िया। |
| लशकरी | पलटन, सेना। |
| लवाजिमा | यात्रा आदि में साथ रहने वाला सामान। |
| नगीना | सुंदर। |
| अकबकाना | भौंचक्का होना, घबराना। |
Topi Class 8 Chapter 17 Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
कहानी से
प्रश्न 1. गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?
उत्तर— गवरइया और गवरा के बीच कपड़े पहनने को लेकर बहस हुई। गवरइया का मानना था कि कपड़े मनुष्य को सुंदर बनाते हैं और मौसम से भी बचाते हैं, जबकि गवरा कपड़ों को बनावटीपन और भेदभाव का कारण मानता था। इसी बातचीत में गवरइया ने टोपी पहनने की इच्छा व्यक्त की। एक दिन कूड़े के ढेर पर दाना चुगते समय उसे रुई का एक फाहा मिल गया। यही रुई आगे चलकर उसकी टोपी बनवाने का साधन बनी और उसे अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर मिला।
प्रश्न 2. गवरइया और गवरे की बहस के तर्कों को एकत्र करें और उन्हें संवाद के रूप में लिखें।
उत्तर— गवरइया: आदमी को देखते हो? कैसे रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं। कपड़े उन पर कितने अच्छे लगते हैं।
गवरा: खाक अच्छे लगते हैं। कपड़े पहनने के बाद आदमी और बदसूरत लगने लगता है।
गवरइया: लगता है आज लटजीरा चुग गए हो?
गवरा: कपड़े पहनने से आदमी की प्राकृतिक सुंदरता ढक जाती है और बनावटीपन दिखाई देने लगता है।
गवरइया: कपड़े केवल सुंदर दिखने के लिए नहीं, बल्कि मौसम की मार से बचने के लिए भी पहने जाते हैं।
गवरा: कपड़े पहनने से लोगों की हैसियत का पता चलता है और उनमें भेदभाव पैदा होता है।
गवरइया: आदमी तो नित नए-नए कपड़े सिलवाता रहता है।
गवरा: यह सब पागलपन है।
गवरइया: उनके सिर पर टोपी कितनी अच्छी लगती है। मेरा मन भी टोपी पहनने को करता है।
गवरा: टोपी तू पाएगी कहाँ से?
प्रश्न 3. टोपी बनवाने के लिए गवरइया किस-किस के पास गई ? टोपी बनने तक के एक-एक कार्य को लिखें।
उत्तर— टोपी बनवाने के लिए गवरइया सबसे पहले धुनिया के पास गई और उससे रुई धुनवाई। उसने मेहनत के बदले आधा हिस्सा देने का वादा किया। इसके बाद वह कोरी के पास गई, जिसने रुई से सूत कात दिया। फिर वह बुनकर के पास पहुँची और उससे सूत से कपड़ा बुनवाया। बुनकर ने भी आधा कपड़ा मजदूरी के रूप में लिया।
अंत में गवरइया कपड़ा लेकर दर्जी के पास गई और उससे दो टोपियाँ सिलने को कहा। दर्जी ने सुंदर टोपियाँ तैयार कर दीं और अपनी खुशी से एक टोपी पर पाँच फुंदने भी लगा दिए। इस प्रकार गवरइया की टोपी तैयार हुई।
प्रश्न 4. गवरइया की टोपी पर दर्जी ने पाँच फुंदने क्यों जड़ दिए?
उत्तर— दर्जी राजा के लिए बिना उचित मजदूरी के काम कर रहा था, जबकि गवरइया ने उसे उसके काम का उचित हिस्सा दिया था। इससे दर्जी बहुत खुश हुआ। अपनी खुशी और उत्साह में उसने गवरइया की टोपी को और सुंदर बनाने के लिए उस पर पाँच फुंदने लगा दिए।
कहानी से आगे
प्रश्न 1. किसी कारीगर से बातचीत कीजिए और परिश्रम का उचित मूल्य नहीं मिलने पर उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी ? ज्ञात कीजिए और लिखिए।
उत्तर— मैंने एक मोटर मैकेनिक से पूछा कि जब उसे उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता तो उसे कैसा लगता है। उसने बताया कि उसे बहुत बुरा लगता है और उसका मन दुखी हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह काम तो करता है, लेकिन उसमें पहले जैसा उत्साह और लगन नहीं रहती। उसके अनुसार, हर कारीगर को उसकी मेहनत और समय के अनुसार उचित मजदूरी मिलनी चाहिए।
प्रश्न 2. गवरइया की इच्छापूर्ति का क्रम पूरे पर रुई के मिल जाने से प्रारंभ होता है। उसके बाद वह क्रमश एक-एक कर कई कारीगरों के पास जाती है और उसकी टोपी तैयार होती है। आप भी अपनी कोई इच्छा का लीजिए। उसकी पूर्ति के लिए योजना और कार्य-विवरण तैयार कीजिए।
उत्तर— मेरी इच्छा एक अच्छी कहानी की पुस्तक खरीदने की है। इसके लिए मैं पहले पुस्तक का चयन करूँगा। फिर उसकी कीमत का पता लगाऊँगा और अपनी बचत से पैसे इकट्ठे करूँगा। पर्याप्त पैसे होने पर मैं पुस्तक खरीदूँगा। इसके बाद प्रतिदिन कुछ समय निकालकर उसे पढ़ूँगा और उसमें दी गई अच्छी बातों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करूँगा।
प्रश्न 3. गवरइया के स्वभाव से यह प्रमाणित होता है कि कार्य की सफलता के लिए उत्साह आवश्यक है। सफलता के लिए उत्साह की आवश्यकता क्यों पड़ती है, तर्क सहित लिखिए।
उत्तर— कार्य की सफलता के लिए उत्साह बहुत आवश्यक है। उत्साह से व्यक्ति में ऊर्जा, आत्मविश्वास और लगन पैदा होती है। उत्साहित व्यक्ति कठिनाइयों से घबराता नहीं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करता है। उत्साह से काम करने की क्षमता और गुणवत्ता भी बढ़ती है। इसलिए किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उत्साह आवश्यक है।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. टोपी पहनकर गवरइया राजा को दिखाने क्यों पहुँची जबकि उसकी बहस गवरा से हुई और गवरा के मुँह से अपनी बड़ाई सुन चुकी थी। लेकिन राजा से उसकी कोई बहस हुई ही नहीं थी। फिर भी राजा को चुनौती देने को पहुँची। कारण का अनुमान लगाइए।
उत्तर— गवरइया टोपी पहनकर राजा को इसलिए दिखाने पहुँची क्योंकि राजा के राज्य में कारीगरों से अक्सर बिना उचित मजदूरी के काम करवाया जाता था। इसके विपरीत गवरइया ने सभी कारीगरों को उनके काम का उचित हिस्सा दिया था, इसलिए उन्होंने उसका काम उत्साह और कुशलता से किया। सुंदर टोपी तैयार होने पर गवरइया राजा को यह दिखाना चाहती थी कि उचित मेहनताना मिलने पर काम कितनी अच्छी तरह किया जा सकता है। साथ ही, वह अपने नए आत्मविश्वास के कारण राजा को चुनौती देने भी पहुँच गई।
प्रश्न 2. यदि राजा के राज्य के सभी कारीगर अपने-अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे होते त गवरइया के साथ उन कारीगरों का व्यवहार कैसा होता?
उत्तर— यदि राजा के राज्य के सभी कारीगरों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिलता, तो वे गवरइया के साथ सम्मान और प्रेम से व्यवहार करते। वे बिना झुँझलाए उसका काम स्वीकार करते और अपनी कुशलता से उसे पूरा करते। उन्हें किसी से बेगार करने की मजबूरी नहीं होती और वे अपने काम से संतुष्ट रहते।
प्रश्न 3. चारों कारीगर राजा के लिए काम कर रहे थे। एक रजाई बना रहा था। दूसरा अचकन के लिए मृत कात रहा था। तीसरा बागा बुन रहा था। चौथा राजा की सातवीं रानी की दसवीं संतान के लिए झब्बे सिल रह था। उन चारों ने राजा का काम रोककर गवरइया का काम क्यों किया?
उत्तर— चारों कारीगर राजा का काम छोड़कर गवरइया का काम इसलिए करने लगे क्योंकि राजा उनसे बेगारी करवाता था और उनके श्रम का उचित मूल्य नहीं देता था। इसके विपरीत गवरइया ने उनके काम के बदले आधा हिस्सा देने का वादा किया। उचित मजदूरी मिलने की आशा से कारीगरों ने उसका काम खुशी और उत्साह से किया। इससे स्पष्ट होता है कि मेहनत का उचित मूल्य मिलने पर व्यक्ति अधिक लगन और कुशलता से काम करता है।
भाषा की बात
- गाँव की बोली में कई शब्दों का उच्चारण अलग होता है। उनकी वर्तनी भी बदल जाती है। जैसे गवरइया गौरैया का ग्रामीण उच्चारण है। उच्चारण के अनुसार इस शब्द की वर्तनी लिखी गई है। फुंदना, फुलेंदा का बदला हुआ रूप है। कहानी में अनेक शब्द हैं जो ग्रामीण उच्चारण में लिखे गए हैं, जैसे मुलुक – मुल्क, खमा – क्षमा, मजूरी-मज़दूरी, मल्लार – मल्हार इत्यादि । आप क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होनेवाले कुछ ऐसे शब्दों को खोजिए और उनका मूल रूप लिखिए जैसे-टेम-टाइम, टेसन/टिसन स्टेशन।
उत्तर- झुटपुटा = सवेरा या शाम का समय । खोतें =घोंसले। फबना = अच्छा लगना। मानुस = मनुष्य। जाड़ा = सर्दी। सकत = ताकत/सहने की शक्ति। मामूल = वह बात जो रोज़ की जाए। लोटने = लेटने। चिहाकर = चिल्लाकर। बावरा = बावला। मनुहार = मनाना। मतलार = मल्हार। मुलुक = देश । बरधा = बैल। लगुए-भगुए आगे-पीछे रहने वाले। मशगूल = व्यस्त। मजूरी = मज़दूरी । हुल्स = उल्लास। जुरना = जुड़ना। खमा = क्षमा। पाखी = पक्षी ।
- मुहावरों के प्रयोग से भाषा आकर्षक बनती है। मुहावरे वाक्य के अंग होकर प्रयुक्त होते हैं। इनका अक्षरश: अर्थ नहीं बल्कि लाक्षणिक अर्थ लिया जाता है। पाठ में अनेक मुहावरे आए हैं। टोपी को लेकर तीन मुहावरे हैं, जैसे- कितनों को टोपी पहनानी पड़ती है। शेष मुहावरों को खोजिए और उनका अर्थ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर- 1. टोपी उछालना = अपमानित करना।
वाक्य- आजकल के नेता एक-दूसरे की टोपी उछालने में लगे रहते हैं।
- टोपी सलामत रहना = इज्जत बनी रहना।
वाक्य- मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि मेरे माता-पिता की टोपी सदा सलामत रहे।
पाठ में आए अन्य मुहावरे
- ओझल हो जाना – गायब हो जाना।
वाक्य- पहरेदार को देखते ही आम चुराने वाला लड़का आँखों से ओझल हो गया।
- आँखों में चमक आना- मन की खुशी प्रकट होना।
वाक्य- लाटरी के निकलते ही आस्था की आँखों में चमक आ गई।
- माथे का पसीना पोंछना – घबराहट दिखाई देना ।
वाक्य — अपना परीक्षा परिणाम देखते हुए अपने माथे का पसीना पोंछ रहे हो, समय पर परिश्रम क्यों नहीं करते ?
- ठंडी आह भरना- पछताना।
वाक्य- आवारा पुत्र को घर से निकालने के बाद पिता ठंडी आह भर कर रह गया।
- लगए – भगुए होना- साथ रह कर लाभ उठाने वाले।
वाक्य- आपको इन लगुए-भगुए लोगों से संभल कर रहना चाहिए, कहीं बाद में पछताना न पड़े।
- लफड़ा होना- मुसीबत होना।
वाक्य- दूसरों के लफड़ों से बच कर रहा करो।
- मुँह फट होना- बिना सोचे समझे बोलना।
वाक्य – मुँह फट व्यक्ति किसी को पसंद नहीं आता।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- कपड़े पहन लेने के बाद ……….. की कुदरती ……….. ढँक जो जाती है।
- किसी ……….. के हाथ से ……….. गिर गया होगा।
- थोड़ी देर में उसने काफ़ी ……….. और ……….. कपड़ा बुन दिया।
- जिसके पास ……….. कुछ है, वह ……….. भी नहीं देता।
- मंत्री ने हौले से कहा, यह ……….. तो महाराज को ……….. ही करके दम लेगी।
उत्तर –
- कपड़े पहन लेने के बाद आदमी की कुदरती खूबसूरती ढँक जो जाती है।
- किसी घुड़सवार के हाथ से छूटकर गिर गया होगा।
- थोड़ी देर में उसने काफ़ी गफ़श और दबीज कपड़ा बुन दिया।
- जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता।
- मंत्री ने हौले से कहा, यह मुँहफट तो महाराज को बेपरदा ही करके दम लेगी।
Topi Class 8 Chapter 17 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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