“सूरदास के पद” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का अठारहवां अध्याय है। यह पाठ सूरदास द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Topi Class 8 Chapter 15 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”सूरदास के पद” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने पोस्ट Topi Class 8 Chapter 17 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Surdas ke Padh Class 8 Chapter 18 Question Answers
Surdas ke Padh Class 8 Chapter 18 Summary
पाठ का सार
‘सूरदास के पद’ भक्त सूरदास द्वारा रचित प्रसिद्ध पद हैं। सूरदास को हिंदी साहित्य का ‘सूर्य’ कहा जाता है। इन पदों में उन्होंने बालक श्रीकृष्ण की चंचलता, बाल-सुलभ शिकायतों और माखन चोरी का मनमोहक वर्णन किया है।
पहले पद में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से अपनी चोटी के बारे में शिकायत करते हैं। वे पूछते हैं कि उनकी चोटी कब लंबी और मोटी होगी। वे कहते हैं कि इतने दिनों से दूध पीने के बाद भी उनकी चोटी छोटी ही है, जबकि मैया ने कहा था कि वह बलराम की चोटी जैसी लंबी हो जाएगी। कृष्ण यह भी शिकायत करते हैं कि उन्हें केवल दूध दिया जाता है, मक्खन और रोटी नहीं। अंत में सूरदास दोनों भाइयों कृष्ण और बलराम की सुंदर जोड़ी के बने रहने की कामना करते हैं।
दूसरे पद में कृष्ण के माखन चोर रूप का चित्रण किया गया है। एक ग्वालिन यशोदा से शिकायत करती है कि कृष्ण ने उसके घर से माखन चुरा लिया। दोपहर में घर सुनसान देखकर कृष्ण ने माखन खोज निकाला और स्वयं खाने के साथ अपने मित्रों को भी खिलाया। ऊखल पर चढ़कर उन्होंने कुछ माखन खाया और कुछ नीचे गिरा दिया। ग्वालिन कृष्ण की इन शरारतों से परेशान होकर यशोदा से शिकायत करती है और पूछती है कि वह अपने नटखट पुत्र को घर में बाँधकर क्यों नहीं रखती।
Surdas ke Padh Class 8 Chapter 18 Explanation
पदों की सप्रसंग व्याख्या
- मैया, कबहिं बढ़ेगी चोटी ?
कितनी बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।
तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं, है है लाँबी-मोटी।
काढ़त-गुहत न्हवावत जैहै, नागिनी सी भुइँ लोटी।
काँचो दूध पियावति पचि पचि, देति न माखन – रोटी।
सूरज चिरजीवौ दोउ भैया, हरि – हलधर की जोटी।
शब्दार्थ — पियत = पीना | कबहिं = कब । अजहूँ = अब भी। बल = बलराम। बेनी = चोटी। काढ़त = खोलते हुए । गुहत = चोटी बनाते हुए । भुइँ = धरती। पचि पचि = बार-बार । हरि हलधर = कृष्ण-बलराम ।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित ‘सूरदास के पद’ नामक रचना से लिया गया है। इसके रचयिता भक्त कवि सूरदास हैं। ये पद उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सूरसागर’ से लिए गए हैं। इस पद में कवि ने बालक कृष्ण की बाल-सुलभ चंचलता और माता यशोदा के प्रति उनके प्रेम का सुंदर चित्रण किया है।
व्याख्या— बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए पूछते हैं कि उनकी चोटी कब लंबी और मोटी होगी। वे कहते हैं कि उन्हें दूध पीते हुए बहुत समय हो गया है, फिर भी उनकी चोटी अभी तक छोटी ही है। मैया ने कहा था कि उनकी चोटी बलराम भैया की चोटी जैसी लंबी और मोटी हो जाएगी तथा खोलते, बाँधते और नहाते समय नागिन की तरह धरती पर लोटेगी। कृष्ण आगे शिकायत करते हैं कि मैया उन्हें बार-बार केवल कच्चा दूध पीने के लिए देती हैं, लेकिन माखन और रोटी नहीं देतीं। अंत में सूरदास कामना करते हैं कि कृष्ण और बलराम दोनों भाइयों की सुंदर जोड़ी सदा बनी रहे।
- तेरैं लाल मेरी माखन खायौ।
दुपहर दिवस जानि घर सूनो ढूँढि- ढंढोरि आप ही आयौ।
खोलि किवार पैठि मंदिर में, दूध दही सब सखनि खवायौ।
ऊखल चढ़ि सके को लीन्हों, अनभावत भुइँ मैं ढरकायौ।
दिन प्रति हानि होत गोरस की। यह ढोटा कौनें ढंग लायौ।
सूर स्याम काँ हटकि न राखै, तूं ही पूत अनोखौ जायौं।
शब्दार्थ – लाल = बेटा। दुपहर = दोपहर। दिवस दिन। सूनो = खाली। किवार = दरवाज़ा। सखनि = दोस्त, मित्र। कछु = कुछ। ढरकायौ = गिराना। ढोटा = बालक, पुत्र । हटकि = कमरे के अंदर । पूत = बेटा। जायौ = पैदा करना।
प्रसंग— प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘पुष्प भाग-3’ में संकलित ‘सूरदास के पद’ नामक रचना से लिया गया है। इसके रचयिता भक्त कवि सूरदास हैं। ये पद उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सूरसागर’ से लिए गए हैं। इस पद में कवि ने कृष्ण के माखन चोर रूप और उनकी बाल-सुलभ शरारतों का सुंदर चित्रण किया है।
व्याख्या— एक ग्वालिन माता यशोदा से कृष्ण की शिकायत करती हुई कहती है कि तुम्हारे पुत्र कृष्ण ने उसके घर का माखन खा लिया। वह बताती है कि दोपहर के समय घर को खाली देखकर कृष्ण ने माखन ढूँढ़ लिया। उन्होंने दरवाज़ा खोलकर घर में प्रवेश किया और स्वयं माखन खाने के साथ अपने मित्रों को भी खिलाया। कृष्ण ऊखल पर चढ़ गए और वहाँ से माखन निकालकर कुछ खाया तथा कुछ नीचे गिरा दिया। ग्वालिन कहती है कि कृष्ण की इन शरारतों के कारण प्रतिदिन दूध-दही और माखन की हानि होती है। अंत में वह आश्चर्य और शिकायत के भाव से यशोदा से पूछती है कि वह अपने इस अनोखे और नटखट पुत्र को घर में रोककर क्यों नहीं रखती।
Surdas ke Padh Class 8 Chapter 18 Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
पदों से
प्रश्न 1. बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?
उत्तर— बालक श्रीकृष्ण अपनी चोटी को लंबा और घना करने के लोभ में दूध पीने के लिए तैयार होते थे। माता यशोदा उन्हें समझाती थीं कि अधिक दूध पीने से उनकी चोटी बलराम की चोटी जैसी लंबी और मोटी हो जाएगी। इसी लालच में कृष्ण बार-बार दूध पी लेते थे।
प्रश्न 2. श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या-क्या सोच रहे थे?
उत्तर— श्रीकृष्ण सोचते थे कि उनकी चोटी अब तक छोटी ही क्यों है। वे कई बार दूध पी चुके हैं, फिर भी उनकी चोटी नहीं बढ़ी। उन्हें आश्चर्य होता था कि उनकी चोटी बलराम भैया की तरह लंबी, मोटी और घनी कब होगी। उन्हें अपनी माता की बात भी याद आती थी कि दूध पीने से उनकी चोटी लंबी हो जाएगी।
प्रश्न 3. दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौन-से खाद्य पदार्थ को अधिक पसंद करते हैं?
उत्तर— श्रीकृष्ण को दूध की अपेक्षा माखन अधिक पसंद था। माता यशोदा उन्हें बार-बार दूध पिलाती थीं, लेकिन कृष्ण का मन माखन खाने में लगा रहता था। वे माखन चुराकर स्वयं खाते और अपने मित्रों को भी खिलाते थे।
प्रश्न 4. ‘तैं ही पूत अनोखौ जायौ’– पंक्तियों में ग्वालिन के मन के कौन-से भाव मुखरित हो रहे हैं?
उत्तर— इस पंक्ति में ग्वालिन के शिकायत, व्यंग्य और आश्चर्य के भाव प्रकट होते हैं। वह यशोदा से कहती है कि क्या उन्होंने कोई अनोखा पुत्र जन्म दिया है, जो रोज माखन चुराकर खाता और दूसरों को खिलाता है। उसके कथन में कृष्ण की शरारतों को लेकर नाराज़गी के साथ-साथ उनके प्रति छिपा हुआ स्नेह भी दिखाई देता है।
प्रश्न 5. मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?
उत्तर— श्रीकृष्ण माखन चुराते समय थोड़ा-सा माखन नीचे गिरा देते थे, ताकि चोरी का पता न चले। वे चाहते थे कि लोग समझें कि माखन किसी पशु या पक्षी ने खाया होगा। इस प्रकार वे अपनी शरारत को छिपाने का प्रयास करते थे।
प्रश्न 6. दोनों पदों में से आपको कौन-सा पद अधिक अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर— मुझे दोनों पदों में से पहला पद ‘मैया, कबहिं बढ़ेगी चोटी?’ अधिक अच्छा लगा। इसमें बालक कृष्ण की भोली-भाली बातें और बाल-सुलभ जिज्ञासा बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत हुई है। अपनी चोटी को लेकर कृष्ण का माता यशोदा से शिकायत करना बहुत मनमोहक लगता है। इसलिए मुझे यह पद अधिक पसंद आया।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. दूसरे पद को पढ़कर बताइए कि आपके अनुसार उस समय श्रीकृष्ण की उम्र क्या रही होगी?
उत्तर— दूसरे पद के आधार पर लगता है कि उस समय श्रीकृष्ण की उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष रही होगी। वे घर में चुपके से प्रवेश करके माखन चुराते और अपने मित्रों के साथ मिलकर खाते थे। उनकी शरारतों से लगता है कि वे इतने बड़े हो चुके थे कि ऊखल पर चढ़कर माखन निकाल सकें और मित्रों के साथ मिलकर ऐसी बाल-लीलाएँ कर सकें।
प्रश्न 2. ऐसा हुआ हो कभी कि माँ के मना करने पर भी घर में उपलब्ध किसी स्वादिष्ट वस्तु को आपने चुपके-चुपके थोड़ा-बहुत खा लिया हो और चोरी पकड़े जाने पर कोई बहाना बनाया हो। अपनी बातचीत की तुलना श्रीकृष्ण की बाल लीला से कीजिए।
उत्तर— हाँ, एक बार माँ के मना करने के बाद मैंने घर में रखी स्वादिष्ट मिठाई चुपके से खा ली थी। पकड़े जाने पर मैंने पहले कहा कि मैंने मिठाई नहीं खाई है। बाद में मैंने बहाना बनाया कि मैंने तो केवल थोड़ी-सी चखी थी। मेरी यह शरारत श्रीकृष्ण की माखन चोरी की बाल-लीला जैसी ही थी। दोनों ही घटनाओं में स्वादिष्ट वस्तु खाने की इच्छा और पकड़े जाने पर बहाना बनाने की बात समान है।
प्रश्न 3. किसी ऐसी घटना के विषय में लिखिए जब किसी ने आपकी शिकायत की हो और फिर आपके किसी अभिभावक (माता-पिता, बड़ा भाई-बहन इत्यादि) ने आपसे उत्तर माँगा हो।
उत्तर— जब मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता था, तब एक दिन मैं अपने मित्रों के साथ बिना माता-पिता को बताए सिनेमा देखने चला गया। वहाँ मुझे मेरे पिता के एक परिचित ने देख लिया और उन्होंने घर पर इसकी शिकायत कर दी। जब मैं घर पहुँचा तो माता-पिता ने मुझसे इस बारे में पूछा। मैंने अपनी गलती स्वीकार कर ली। पिताजी ने मुझे समझाया कि बिना बताए घर से बाहर जाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे से कोई भी काम करने से पहले घरवालों को जरूर बताना चाहिए।
भाषा की बात
प्रश्न 1. श्रीकृष्ण गोपियों का माखन चुरा-चुराकर खाते थे। इसलिए उन्हें माखन चुरानेवाला भी कहा गया है। इसके लिए एक शब्द दीजिए।
उत्तर – माखनचोर।
प्रश्न 2. श्रीकृष्ण के लिए पाँच पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर— श्याम, मुरलीधर, गिरधर, कन्हैया, कान्ह, गोपाल, मनोहर, पीतांबर, माधव, नंदलला, गोवर्धनधारी, यशोदापुत्र।
प्रश्न 3. कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थवाले होते हैं उन्हें पर्यायवाची कहते हैं और कुछ विपरीत अर्थ वाले भी। समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम; जैसे-
पर्यायवाची – चंद्रमा – शशि, इंदु, राकेश
मधुकर – भ्रमर, भौंरा, मधुप
सूर्य – रवि, भानु, दिनकर।
विपरीतार्थक – दिन-रात
श्वेत-श्याम
शीत – उष्ण।
पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।
पर्यायवाची – दूध – दुग्ध, पय, गोरस।
नागिन – सर्पणी, सांपिन, अहिनी।
सखनि — मित्र, सहचर, दोस्त।
विपरीतार्थक – पुत – पुत्री। खोलि – बंदि। सुनो – भरो।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- कितनी बार ………… दूध ………… भई।
- तू जो कहति ………… की ………… ज्यौं।
- तेरेँ ………… मेरौ ………… खायौ।
- दुपहर ………… जानि ………… सूनो।
- दिन ………… हानि होति ………… की।
उत्तर-
- कितनी बार मोहिं दूध पियत भई।
- तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं।
- तेरेँ लाल मेरौ माखन खायौ।
- दुपहर दिवस जानि घर सूनो।
- दिन प्रति हानि होति गोरस की।
Surdas ke Padh Class 8 Chapter 18 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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