“प्रेमचंद” JKBOSE की कक्षा 8 (Class 8 of JKBOSE) के छात्रों की पाठ्यपुस्तक पुष्प भाग 2 हिंदी का पंद्रहवां अध्याय है। यह पाठ नागार्जुन द्वारा लिखित है। यह पोस्ट Prem Chand Class 8 Chapter 15 Question Answers के बारे में है। इस पोस्ट में पाठ”प्रेमचंद” ” के शब्दार्थ, सरलार्थ और उससे जुड़े कुछ प्रश्न उत्तर पढ़ेंगे। पढ़ेंगे। पिछली पोस्ट में, आपने पोस्ट O Nabh Mein Mandratey Badal Class 8 Question Answers के बारे में पढ़ा। आइए शुरू करें:

Prem Chand Class 8 Chapter 15 Question Answers
Prem Chand Class 8 Chapter 15 Summary
पाठ का सार / प्रतिपाद्य
‘प्रेमचंद’ नामक पाठ के लेखक श्री नागार्जुन हैं। इसमें उन्होंने महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जीवन, व्यक्तित्व, संघर्ष और साहित्यिक योगदान का वर्णन किया है। प्रेमचंद का जीवन अनेक कठिनाइयों से भरा था, लेकिन उन्होंने संघर्ष करते हुए हिंदी साहित्य में अपना विशेष स्थान बनाया।
प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था। उनके पिता अजायबराय डाकखाने में कर्मचारी थे। सात वर्ष की आयु में उनकी माता का निधन हो गया। सौतेली माँ के कठोर व्यवहार के कारण उनका बचपन सुखमय नहीं रहा। बाद में गोरखपुर आने पर उनकी रुचि पढ़ाई में बढ़ी और उन्होंने उर्दू की अनेक पुस्तकें पढ़ीं।
प्रेमचंद का विवाह मैट्रिक से पहले ही हो गया था। कुछ समय बाद पिता की मृत्यु हो जाने से परिवार की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर आ गई। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। गणित में कठिनाई के कारण उन्हें कई बार असफलता मिली, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में उन्होंने बी.ए. की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।
एक समय उनके पास पैसे तक नहीं थे। इसी दौरान एक स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें ₹10 मासिक वेतन पर सहायक अध्यापक की नौकरी दी। धीरे-धीरे वे आगे बढ़ते हुए स्कूल इंस्पेक्टर के पद तक पहुँचे। देश के प्रति प्रेम के कारण उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के समय सरकारी नौकरी छोड़ दी और स्वयं को पूरी तरह साहित्य-सेवा में समर्पित कर दिया।
प्रेमचंद ने अनेक उपन्यास और कहानियाँ लिखीं। उनकी पुस्तक ‘सोज़े वतन’ को अंग्रेज़ी सरकार ने जब्त कर लिया था। उन्होंने ‘हंस’ और ‘जागरण’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया तथा वाराणसी में सरस्वती प्रेस भी स्थापित किया। कुछ समय तक उन्होंने मुंबई में फिल्मों के लिए कथा-लेखन भी किया, लेकिन वहाँ का वातावरण उन्हें पसंद नहीं आया और वे लौट आए।
प्रेमचंद जीवन के अंतिम समय तक निरंतर लिखते रहे। बीमारी में भी उन्होंने लेखन नहीं छोड़ा। ‘गोदान’ पूरा करने के बाद वे ‘मंगलसूत्र’ लिख रहे थे, लेकिन बीमारी के कारण इसे पूरा नहीं कर सके। 8 अक्तूबर, 1936 को उनका निधन हो गया। उनका पूरा जीवन संघर्ष, परिश्रम, देशप्रेम और साहित्य-सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है।
Prem Chand Class 8 Chapter 15 Word Meanings
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अभाव | कमी। |
| विमाता | सौतेली माँ। |
| निष्ठुर | कठोर। |
| त्राण | छुटकारा। |
| ग़ैर हाजरी | अनुपस्थिति। |
| मद्धिम | धीमी। |
| इम्तहान | परीक्षा। |
| विवशता | मजबूरी। |
| कुशाग्रता | तीव्र बुद्धि। |
| प्रतीक्षा | इंतजार। |
| बदसूरत | रंग-रूप में भद्दे, कुरूप। |
| रूपांतर | अनुवाद। |
| विशिष्ट | विशेष |
| आतुरता | बेचैनी। |
| स्वाधीनता | आज़ादी। |
| अगाह | सचेत। |
| त्याग पत्र | इस्तीफा। |
| मनोरथ | इच्छा, चाह। |
| आजीवन | जीवन भर। |
| देहावसान | देहान्त, मृत्यु। |
Prem Chand Class 8 Chapter 15 Question Answers
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. बचपन में प्रेमचंद घर से भागकर खेतों, बगीचों और मैदानों में क्यों चले जाते थे ? (क) वे घर की चारदीवारी में बंधकर बैठना नहीं चाहते थे।
(ख) वे स्वभाव से चंचल और खिलाड़ी थे।
(ग) वहाँ जाकर अपनी कहानियों और उपन्यासों के लिए कथानक सोचते थे।
(घ) वे घर पर सौतेली माँ से परेशान हो जाते थे।
(ङ) खुली हवा में घूमना उन्हें बेहद पसंद था।
उत्तर- (घ) वे घर पर सौतेली माँ से परेशान हो जाते थे।
प्रश्न 2. प्रेमचंद को महान् लेखक बनाने में निम्नांकित में से सबसे अधिक योगदान किसका था?
(क) तीव्र लगन
(ख) घोर गरीबी
(ग) उनका युग
(घ) हिंदी में अच्छे कथाकारों की कमी।
उत्तर- (क) तीव्र लगन।
प्रश्न 3. ” लगन है, ……………… हैं।” ”लगता है, ……………… लगाएँगे।” इन पंक्तियों से प्रेमचंद के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
उत्तर – हँसमुख एवं चंचल स्वभाव का।
प्रश्न 4. प्रेमचंद के बचपन की कठिनाइयों का वर्णन करो।
उत्तर— प्रेमचंद का बचपन अनेक कठिनाइयों में बीता। सात वर्ष की आयु में उनकी माता का निधन हो गया और पिता ने दूसरा विवाह कर लिया। सौतेली माँ का व्यवहार उनके प्रति अच्छा नहीं था। वे छोटी उम्र में मौलवी साहब के पास पढ़ने जाते थे और साधारण भोजन से ही गुजारा करते थे। कम उम्र में ही उनका विवाह हो गया। कुछ समय बाद पिता की मृत्यु हो गई, जिससे परिवार की जिम्मेदारी भी उन पर आ गई। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कई बार उनके पास पहनने के लिए पूरे कपड़े और जूते तक नहीं होते थे।
प्रश्न 5. “ उनकी दूसरी पत्नी शिवरानी उनके लिए वरदान जैसी साबित हुई।” कैसे?
उत्तर— प्रेमचंद ने शिवरानी नामक बाल-विधवा से दूसरा विवाह किया। शिवरानी ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और उन्हें स्नेह, सहयोग तथा प्रेरणा दी। उनके सहयोग से प्रेमचंद को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिली और वे अपने साहित्यिक लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हो सके। इसलिए शिवरानी उनके लिए वरदान जैसी साबित हुईं।
प्रश्न 6. स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेमचंद की कृत्तियाँ उनके योगदान जैसी साबित हुईं। कैसे?
उत्तर— स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेमचंद जी ने बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें संदेह नहीं कि प्रेमचंद जी को कभी जेल जाने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ पर अपनी लेखनी के माध्यम से उन्होंने लाखों भारतवासियों को स्वतंत्रता- संग्राम में अपनी आहुति देने के लिए प्रेरित किया। सन् 1910-11 में देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कहानियों का एक संग्रह ‘सोज़े वतन’ अंग्रेज़ी सरकार ने जब्त कर लिया। सन् 1930 में प्रेमचंद जी की कहानियों का एक अन्य संग्रह ‘समर यात्रा’ भी जब्त हो गया। उनका संपूर्ण साहित्य देशोद्धार की दीप्ति से आलोकित है। उनकी रचनाओं में दीन- दुःखियों की आहों और विवशताओं का मार्मिक चित्रण मिलता है। प्रेमचंद जी ने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से स्वतंत्रता-संग्राम में अपना अपूर्व योगदान दिया। वे देश को अपने जीवन, अपने अनुभव और अपने विचारों की अंतिम बूंद तक दे जाने के लिए बेचैन रहते थे।
प्रश्न 7. प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कोई तीन विशेषताएँ उनके जीवन की उपयुक्त घटनाएँ उद्धरित करके बताइए।
उत्तर— प्रेमचंद जी का व्यक्तित्व अनेक विशेषताओं का संगम था । वे अत्यधिक ‘परिश्रमी’ थे। उन्होंने अथक परिश्रम करके लगभग 300 कहानियों तथा 12 उपन्यासों की रचना की। वे ‘स्वाभिमानी’ थे। अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने 1920 ई० में सरकारी नौकरी छोड़ दी। वे ‘समाज सुधारक’ थे। उन्होंने शिवरानी नाम की बाल विधवा से विवाह करके समाज की रूढ़ियों पर चोट की।
प्रश्न 8. प्रेमचंद के साहित्य का संक्षिप्त परिचय दो।
उत्तर— प्रेमचंद जी हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कथाकार के रूप में प्रख्यात हैं। उन्हें हिंदी का उपन्यास सम्राट् माना जाता है। उनका साहित्य हिंदी-गद्य का अक्षय भंडार है। उन्होंने अनेक अमूल्य ग्रंथ रत्न हिंदी साहित्य को भेंट किए हैं, जो इस प्रकार हैं-
कहानी संग्रह— ‘सप्त सुमन’, ‘सप्त सरोज’, ‘स्वनिधि’, ‘प्रेम-प्रसून’, ‘प्रेमतीर्थ’, ‘प्रेम पचीसी’, ‘प्रेम पूर्णिमा’, ‘सत्य सुमन’ तथा ‘मान सरोवर’ (आठ भाग)।
उपन्यास— ‘प्रतिज्ञा’, ‘सेवा सदन’, ‘वरदान’, प्रेमश्रम, ‘रंगभूमि’, ‘काया कल्प’, ‘निर्मला’, ‘गबन’, ‘कर्मभूमि’ तथा ‘गोदान’।
नाटक— – संग्राम, कर्बला, प्रेम की वेदी।
निबंध— ‘कुछ विचार’, ‘साहित्य का उद्देश्य’, ‘तलवार और त्याग’।
प्रश्न 9. प्रेमचंद की असामयिक मृत्यु के निम्नांकित कारण हो सकते हैं। तुम्हारी दृष्टि से सबसे प्रमुख कारण क्या था ? तर्कपूर्ण उत्तर दें।
(क) बिना विश्राम किए वे दिन-रात लिखते रहते थे।
(ख) उनका बचपन घोर गरीबी और उपेक्षा में बीता।
(ग) उन्हें कभी पौष्टिक आहार नहीं मिला।
(घ) वे आजीवन आर्थिक संकट से जूझते रहे।
(ङ) उनका इलाज सही ढंग से नहीं हुआ।
उत्तर- (क) बिना विश्राम किए वे दिन-रात लिखते रहते थे।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
- गोदान उपन्यास के लेखक ………… हैं।
- प्रेमचंद का जन्म ……….. में हुआ था।
- धनपत सात वर्ष का ही था कि.……….. चल बसी।
- प्रेमचंद ने बचपन से ही ……….. पर हँसना सीखा था।
- फिर भी ‘जमाना‘ के प्रेमचंद की ……….. उर्दू रचनाएं लगातार मिलती रहीं।
- लेकिन अब तक ……….. बिल्कुल रूठ चुकी थी।
- प्रेमचंद की दूसरी पत्नी का नाम ……….. था।
उत्तर- 1. गोदान उपन्यास के लेखक प्रेमचंद हैं।
- प्रेमचंद का जन्म 1880 में हुआ था।
- धनपत सात वर्ष का ही था कि माँ चल बसी।
- प्रेमचंद ने बचपन से ही मुसीबतों पर हँसना सीखा था।
- फिर भी ‘जमाना’ के प्रेमचंद की मौलिक उर्दू रचनाएं लगातार मिलती रहीं।
- लेकिन अब तक तंदरुस्ती बिल्कुल रूठ चुकी थी।
- प्रेमचंद की दूसरी पत्नी का नाम शिवरानी था।
Prem Chand Class 8 Chapter 15 Question Answers के बारे में बस इतना ही। आशा है कि आपको यह उपयोगी लगा होगा। आप इस पोस्ट के बारे में अपने विचार नीचे टिप्पणी अनुभाग (comment section) में साझा करें।
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